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पीलीभीत जाते समय लखीमपुर-खीरी बाईपास पर अनुपम मिश्रा का स्वागत

September 8, 2026

पीलीभीत जाते समय लखीमपुर-खीरी बाईपास पर अनुपम मिश्रा का स्वागत

रालोद कार्यकर्ताओं ने किया फूल-मालाओं से अभिनंदन

उ प्र समाचार सेवा
लखीमपुर-खीरी में मंगलवार को राष्ट्रीय लोक दल के कार्यकारी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा क्षेत्रीय अध्यक्ष तराई क्षेत्र पीके पाठक का लखीमपुर-खीरी जिले में स्थित एल आर पी बाईपास पर रालोद जिलाध्यक्ष पंडित शिव प्रसाद द्विवेदी के नेतृत्व में दर्जनों पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया।
गौरतलब हो कि अनुपम मिश्रा व पी के पाठक पीलीभीत जिले में आयोजित रालोद कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान उनका काफिला खीरी जिले के एल आर पी बाईपास के पास पहुंचा, जहां पहले से बड़ी संख्या में रालोद कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे।

रालोद जिलाध्यक्ष फूल-माला पहनाकर किया स्वागत!

राष्ट्रीय लोक दल के कार्यकारी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा के काफिले के पहुंचते ही रालोद कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। कार्यकर्ताओं ने फूल-माला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया और नारे लगाकर अपनी खुशी जताई। अनुपम मिश्रा ने भी वाहन से हाथ हिलाकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया।

काफी देर से इंतजार कर रहे थे कार्यकर्ता!

जिलाध्यक्ष पंडित शिव प्रसाद द्विवेदी की अगुवाई में रालोद कार्यकर्ता व पदाधिकारी अनुपम मिश्रा के स्वागत के लिए एल आर पी बाईपास के पास काफी देर से जुटे हुए थे। काफिले के पहुंचने पर सड़क पर कुछ समय के लिए भीड़ जमा हो गई। हालांकि, पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखा और काफिले को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया स्वागत के बाद अनुपम मिश्रा का काफिला सुरक्षा व्यवस्था के बीच पीलीभीत जिले के लिए रवाना हो गया।

लखीमपुर खीरी की बैंक शाखाओं में कर्मचारियों ने काला बैज धारण कर किया प्रदर्शन

समान पीएलआई और पाँच दिवसीय बैंकिंग के आश्वासन पर टालमटोल से बैंक कर्मचारियों में रोष

उ प्र समाचार सेवा

लखीमपुर खीरी।यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को लखीमपुर खीरी जनपद की विभिन्न बैंक शाखाओं में बैंक कर्मचारियों ने काला बैज धारण कर अपना विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने सरकार एवं संबंधित पक्षों द्वारा पूर्व में दिए गए आश्वासनों के बावजूद समान प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन तथा पाँच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था के मुद्दों पर अपेक्षित निर्णय न लिए जाने और लगातार टालमटोल किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मचारियों ने काला बैज लगाकर अपने कार्यस्थल पर विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों का कहना था कि बैंकिंग क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और बैंक कर्मचारी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आम जनता, व्यापारियों, किसानों, छोटे उद्यमियों तथा अन्य ग्राहकों को निरंतर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है।बैंक कर्मचारियों ने कहा कि पाँच दिवसीय बैंकिंग की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। बैंकिंग क्षेत्र में शनिवार को अवकाश सहित पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किए जाने को लेकर पूर्व में आश्वासन भी दिए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद इस दिशा में ठोस एवं अंतिम निर्णय में देरी की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन बैंकिंग के व्यापक विस्तार के बावजूद बैंक कर्मचारियों को सप्ताह में छह दिन कार्य करना पड़ रहा है।इसी प्रकार समान पीएलआई के मुद्दे पर भी कर्मचारियों में असंतोष है। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश के आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों के योगदान को उचित प्रोत्साहन एवं समान पीएलआई के माध्यम से मान्यता मिलनी चाहिए।प्रदर्शन में कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगें केवल कर्मचारियों के हित तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बेहतर कार्य परिस्थितियों और संतुलित कार्य-जीवन से जुड़ी हुई हैं। पाँच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था से कर्मचारियों को पर्याप्त विश्राम एवं पारिवारिक समय मिल सकेगा, जिससे कार्यक्षमता और बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।बैंक कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि काला बैज धारण कार्यक्रम सरकार एवं संबंधित अधिकारियों तक अपनी नाराजगी और अपेक्षाओं को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचाने का माध्यम है। कर्मचारियों ने आशा व्यक्त की कि सरकार बैंक कर्मचारियों की जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए पूर्व में दिए गए आश्वासनों को मूर्त रूप देगी।कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो बैंक कर्मचारी संगठन आगामी दिनों में अपने आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होंगे। कर्मचारियों ने सभी बैंककर्मियों से एकजुट रहकर संगठनात्मक कार्यक्रमों को सफल बनाने का आह्वान किया।लखीमपुर खीरी में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम के दौरान विभिन्न बैंक शाखाओं के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए एकजुटता, अनुशासन और शांतिपूर्ण विरोध का संदेश दिया। काला बैज धारण कर कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जायज मांगों के समाधान के लिए संगठित रूप से संघर्ष जारी रखेंगे।

जिलाधिकारी ने गर्रा व खन्नौत नदी से प्रभावित क्षेत्रों का किया स्थलीय निरीक्षण

संबंधित अधिकारियों के साथ बाढ़ से बचाव कार्यों एवं तैयारियों की समीक्षा कर दिए आवश्यक दिशा निर्देश

शाहजहॉपुर, 07 सितम्बर( संजीव गुप्त) जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने जनपद में गर्रा व खन्नौत नदी के बढ़ते जलस्तर एवं उससे प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्रों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया । निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त नगर निगम, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), उपजिलाधिकारी सदर, तहसीलदार सदर, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग के समस्त संबंधित अधिकारी, राजस्व विभाग की टीम सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

जिलाधिकारी द्वारा सर्वप्रथम गर्रा नदी के जलस्तर एवं नदी के बहाव की स्थिति का जायजा लिया गया। इसके उपरान्त ककरा पुल, डैम रोड, एनिमल बर्थ सेंटर, हनुमत धाम सहित अन्य संवेदनशील एवं संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर सिंचाई विभाग एवं लोक निर्माण विभाग द्वारा कराये गये बाढ़ बचाव एवं सुरक्षा संबंधी कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। जिलाधिकारी द्वारा संबंधित अधिकारियों से बाढ़ बचाव कार्यों की वर्तमान स्थिति, नदी के जलस्तर तथा संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों के संबंध में जानकारी ली।

जिलाधिकारी ने बताया कि दिनांक 07 सितम्बर 2026 को दियूनी बैराज से गर्रा नदी में लगभग 22 हजार क्यूसेक पानी पास हुआ है। उक्त पानी के आगामी 72 घंटों में जनपद के संबंधित क्षेत्रों में पहुंचने की सम्भावना है। वर्तमान में गर्रा नदी 1.05 मीटर खतरे के निशान से नीचे तथा खन्नौत नदी 40 सेमी0 नीचे है। कल सुबह से खन्नौत नदी के जलस्तर में कमी आएगी। रामगंगा नदी खतरे के निशान से 19 सेमी0 ऊपर है और गंगा नदी 25 सेमी0 खतरे के निशान से नीचे है।

इसके दृष्टिगत प्रशासन द्वारा स्थिति पर निरन्तर निगरानी रखी जा रही है तथा संबंधित विभागों एवं तहसीलों को आवश्यक तैयारियां पूर्ण रखने के निर्देश दिये हैं।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि नगरीय, तटीय एवं डूब क्षेत्र में निवास करने वाले नागरिकों को नदी के बढ़ते जलस्तर के संबंध में समय से जागरूक एवं सतर्क किया जाए। संबंधित तहसीलों में राजस्व, पुलिस, सिंचाई, नगर निकाय एवं अन्य संबंधित विभागों की टीमें पूर्ण रूप से तत्पर रहें तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

उन्होंने निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्तर की लगातार निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की कार्यवाही के लिए पूर्व तैयारी रखी जाए। साथ ही बाढ़ बचाव कार्यों एवं पूर्व में कराये गये सुरक्षात्मक कार्यों की भी लगातार निगरानी सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि गर्रा व खन्नौत तथा अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए पूर्ण सावधानी बरतें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

नदी के बहाव क्षेत्र, नदी के किनारों, घाटों, पुल के निचले हिस्सों में स्नान, पशुओं को नहलाने अथवा घूमने के उद्देश्य से बिल्कुल न जाएं।
बच्चों को नदी, नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखें।
मवेशियों को सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर बांधने की व्यवस्था करें तथा उन्हें नदी के किनारे न जाने दें।
डूब क्षेत्र अथवा नदी के निकट स्थित घरों के निवासी अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज, राशन, दवाइयां एवं कीमती सामान सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर रख लें।
नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में अनावश्यक रूप से नदी अथवा जलभराव वाले क्षेत्रों की ओर न जाएं।

किसी भी प्रकार की भ्रामक खबर, अफवाह अथवा अपुष्ट सूचना पर ध्यान न दें और न ही उसे सोशल मीडिया अथवा अन्य माध्यमों से प्रसारित करें। केवल जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
यदि जलस्तर में अपेक्षा से अधिक वृद्धि होती है और प्रशासन द्वारा सुरक्षित स्थान पर जाने अथवा स्थानांतरण के निर्देश दिए जाते हैं, तो नागरिक तत्परता से प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जलस्तर एवं संभावित बाढ़ की स्थिति पर निरन्तर निगरानी रखी जा रही है। संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधनों एवं मानवबल के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए गये हैं। प्रशासन का उद्देश्य संभावित जलभराव अथवा बाढ़ की स्थिति में जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा प्रभावित लोगों को तत्काल आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।

किसी भी प्रकार की आपात स्थिति, जलभराव, बाढ़ संबंधी सूचना अथवा सहायता के लिए नागरिक तत्काल जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क कर सकते हैं—

*जिला आपदा नियंत्रण कक्ष :*
☎️ 05842-462754
☎️ 05842-351037
☎️ 05842-35108

जिला प्रशासन शाहजहॉपुर ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, सुरक्षित रहें तथा प्रशासन का सहयोग करें।

बरेली में 4 करोड़ की निर्माणाधीन पानी की टंकी नदी में समाई, 4 सेकेंड में ढहा पूरा ढांचा

बरेली। जिले में मंगलवार सुबह बड़ा हादसा टल गया। किच्छा नदी के तेज बहाव और कटान के चलते करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बन रही पानी की टंकी अचानक नदी में समा गई। बताया जा रहा है कि टंकी का निर्माण कार्य चल रहा था। सुबह नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ने के बाद टंकी का ढांचा हिलने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही पलों में टंकी तेजी से झुकी और देखते ही देखते महज चार सेकेंड में पूरा निर्माणाधीन ढांचा नदी में ढह गया। हादसे के दौरान मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि घटना के समय टंकी पर कोई मजदूर मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि नहीं हुई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, चार दिन पहले भी नदी के तेज बहाव में निर्माण स्थल की बाउंड्रीवॉल बह गई थी। इसके बावजूद कटान को रोकने के लिए किए गए इंतजाम पर्याप्त साबित नहीं हुए। घटना की जानकारी मिलते ही SDM मौके पर पहुंचीं और अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। निर्माण की गुणवत्ता और हादसे के कारणों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ा, अब ₹12 हजार मिलेंगे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने दोनों के मानदेय में बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से बढ़ाकर ₹12,000 और सहायिकाओं का मानदेय ₹6,000 से बढ़ाकर ₹8,000 प्रति माह किया गया है।
सरकार के इस फैसले से प्रदेश की करीब 3.28 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए प्रदेश में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। मानदेय बढ़ोतरी से कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है। विधानसभा चुनाव से पहले लिए गए इस फैसले को सरकार की ओर से महिला कर्मियों को साधने की बड़ी पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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