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राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ने की जनसुनवाई

September 10, 2026

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा ने की जनसुनवाई

Posted on 10.09.2026,Time 4.15pm

बिजनौर 10 सितंबर। (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा) राष्ट्रीय महिला आयोग की माननीय अध्यक्षा श्रीमती विजय रहाटकर ने गुरुवार को विकास भवन सभागार में महिला जनसुनवाई की। उन्होंने महिलाओं से कहा कि महिलाओं की समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता पर कराया जाएगा और राष्ट्रीय महिला आयोग हर कदम पर उनके साथ है। जनसुनवाई के दौरान पूर्व की चिन्हित 30 व नई 90 सहित कुल 120 शिकायते प्राप्त हुई जिनके गुणवत्तापरक निस्तारण के निर्देश संबंधित पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए।

राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि वह महिलाओं की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुने तथा नियम अनुसार गुणवत्तापरक व समयबद्ध निस्तारण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वह सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपना आर्थिक व सामाजिक उत्थान करें।

महिला जनसुनवाई के दौरान पोक्सो एक्ट, दहेज उत्पीड़न, पेंशन की मांग आवास की मांग, ससुराल में उत्पीड़न आदि से संबंधित कुल 120 शिकायतें प्राप्त हुई जिनके 15 दिन में जांच कर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। जनसुनवाई के दौरान तीन दंपतियों ने आपसी मन मुटाव को सुलझाते हुए साथ-साथ रहने पर सहमति दी।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षता ने जिलाधिकारी जसजीत कौर के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने ऊपर हो रहे हैं उत्पीड़न को बर्दाश्त ना करें इसकी शिकायतें आयोग में करें। आयोग उनकी शिकायतों का त्वरित व गुणवत्तापरक निस्तारण सुनिश्चित कराएगा।

इस अवसर पर जिलाधिकारी जसजीत कौर सहित अन्य पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

September 7, 2026

दलित बुजुर्ग महिला की मौत पर हंगामा,पुलिस की हीलाहवाली पड़ी भारी

मारपीट में घायल दलित बुजुर्ग महिला की इलाज के दौरान मौत,परिजनों का फूटा गुस्सा

उ प्र समाचार सेवा
ओयल खीरी:लखीमपुर खीरी के थाना खीरी की ओयल पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सरैया से एक बेहद संवेदनशील और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा बेरहमी से पीटी गई एक दलित बुजुर्ग महिला की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला पिछले 20 दिनों से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी। महिला की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है और गांव में भारी तनाव का माहौल है।

20 दिनों तक कानों में तेल डालकर बैठी रही पुलिस

मृतक महिला के पुत्र ने पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित बेटे का कहना है कि वारदात के बाद से वह लगातार न्याय के लिए ओयल पुलिस चौकी और थाने के चक्कर काट रहा था, लेकिन पुलिस लगातार हीलाहवाली करती रही। मामले को रफा-दफा करने और टालने के लिए पुलिस ने 20 दिनों तक रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की।
IGRS शिकायत का भी नहीं हुआ असर
परिजनों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने के कारण उन्होंने आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल और एप्लीकेशन के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन खीरी पुलिस ने इस डिजिटल शिकायत पर भी 1% कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। पुलिस की इसी लापरवाही और शिथिलता के कारण आरोपियों के हौसले बुलंद रहे और आखिरकार समय पर इलाज व कानूनी संरक्षण न मिलने से बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया।

महिला की मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, हड़कंप मच गया। आनन-फानन में भारी पुलिस बल मृतक महिला के दरवाजे पर पहुंच गया। परिजनों का कहना है कि जो पुलिस 20 दिनों तक सोती रही, वह आज बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उनके दरवाजे पर मूकदर्शक बनकर खड़ी है।एक तरफ जहां खीरी एसएसपी अपराधियों पर नकेल कसने और कानून व्यवस्था को सशक्त करने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं जमीनी स्तर पर ओयल पुलिस की इस घोर लापरवाही ने पुलिसिंग पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
अब मामला बढ़ता देख पुलिस के आला अधिकारी और स्थानीय पुलिस कर्मी परिजनों को समझाने-बुझाने और शांत कराने में जुटे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर यही सक्रियता पुलिस ने 20 दिन पहले दिखाई होती और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया होता, तो आज एक बुजुर्ग महिला की जान बच सकती थी। परिजनों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।बुजुर्ग महिला की जानकारी पर पहुंचे पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है।

स्वयंसेवक मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय हैं: डॉ. मोहन भागवत

लंदन, 7 सितम्बर 2026, न्यूयॉर्क, अमेरिका में 29 अगस्त तथा टोरंटो, कनाडा में 31 अगस्त को संबोधन के पश्चात्, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 6 सितम्बर को यूनाइटेड किंगडम के लंदन में आयोजित ‘Celebration of Oneness’ (एकात्मता का उत्सव) कार्यक्रम के दौरान संघ की 100 वर्षों की यात्रा से संबंधित विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देते हुए संघ की दृष्टि को रेखांकित किया। “संघ का ऐसा कौन-सा एक तत्व है, जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है’ इस प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, “यदि मुझे एक ही सिद्धांत का उल्लेख करना हो, तो मैं ‘अपनापन’ कहूंगा, जिसका अर्थ है सभी के प्रति शुद्ध, सात्त्विक प्रेम। व्यक्ति, समुदाय, समाज और समूची मानवता के प्रति प्रेम- यही हिन्दू का पारंपरिक स्वभाव है। हिन्दू विश्व को संतुलित दृष्टि प्रदान कर सकते हैं।”

संघ की सेवा गतिविधियों के संबंध में डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा,“स्वयंसेवक मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय हैं, इसलिए उनके कार्य के पूरे विस्तार का सार प्रस्तुत करना कठिन है। राजनीतिक कारणों से हमारा विरोध करने वाले लोग भी हमारे कार्य तथा स्वयंसेवकों के गुणों और योगदान को स्वीकार करते हैं। समय-समय पर वे महत्वपूर्ण विषयों पर हम से सहयोग की अपेक्षा करते हैं और हमसे संवाद भी करते हैं। यह समाज के विभिन्न वर्गों में हमारे कार्य की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। जहां कोई कुछ नहीं कर रहा होता, वहां संघ सेवा कर रहा होता है – लद्दाख से लेकर कन्याकुमारी तक।”
अगले 100 वर्षों के लिए संघ के लिए एक प्रमुख संदेश के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि संघ को अगले सौ वर्षों तक भी वही कार्य निरंतर आगे बढ़ाना होगा, जो उसने अब तक किया है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले मेरे मन में यह बात आती है कि सारे कार्यों को पूरा करने में इतना समय नहीं लगना चाहिए। अभी मेरी तीसरी पीढ़ी कार्य कर रही है। संघ में अब दो पीढ़ियां और भी साथ काम कर रही हैं। इस प्रकार पांच पीढ़ियां साथ काम कर रही हैं। सातवीं पीढ़ी आने से पहले हिन्दू समाज के संगठन का कार्य पूरा हो जाना चाहिए।”

‘विश्व के लिए हिन्दू सभ्यता का ऐसा क्या योगदान है, जिसकी विशेष आवश्यकता है” – इस प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, “सभी हिन्दू विचार इसी एक सूत्र पर आधारित रहे हैं कि प्रत्येक कर्म के पीछे कोई कारण है। अस्तित्व वास्तव में एक है, यद्यपि वह विविध दिखाई देता है। विविधता हमारा स्वभाव है। इसलिए हमें उसे स्वीकार करना है और उसका सम्मान करना है। लेकिन विविधताओं के साथ इस बात को ध्यान में रखते हुए व्यवहार करना होगा कि ये अस्तित्व की एकता के विभिन्न शृंगार हैं। एक ही अनेक हुआ है, इसलिए अनेक का सम्मान किया जाता है। सब एक हैं। इसी आधार पर हम हर विषय को देखते और उससे व्यवहार करते हैं।”

उन्होंने कहा, “हिन्दू’ शब्द को हम किसी धार्मिक आचरण या जीवन-शैली के आधार पर नहीं समझ सकते। हिन्दू एक प्रकृति है। समाज को ऐसी प्रकृति की आवश्यकता है, जो सभी विविधताओं को स्वीकार करे और उनका सम्मान करे, क्योंकि उसका विश्वास है कि सभी मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं। सभी विविधताएं एकता की ही विविध अभिव्यक्तियां हैं। इसलिए जब हम उस एकता को देखते हैं, तब सभी विविधताओं का सम्मान और स्वीकार करना संभव होता है। यही हिन्दू विचार है, यही हिन्दू प्रकृति है। हिन्दू समाज और भारत के इतिहास में यही दिखाई देता है। इसलिए जब हम हिन्दू कहते हैं, तो यह कोई धर्म नहीं है। यह केवल एक शब्द भी नहीं है। हिन्दू धर्म की विभिन्न परंपराएं अपनी विशिष्ट दर्शन-पद्धतियों और आचरण के साथ इस व्यापक हिन्दू सभ्यतागत परिवेश के भीतर अस्तित्व में रह सकती हैं।” उन्होंने यह बात ‘हिन्दू राष्ट्र’ और ‘हिंदुत्व’ की अवधारणा से संबंधित प्रश्न के उत्तर में कही।
भविष्य की पीढ़ी की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें नई पीढ़ी पर अधिक विश्वास है। उनमें दुनिया को बेहतर बनाने की तीव्र आकांक्षा है और इस उद्देश्य के लिए वे विभिन्न प्रकार के छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठने को तैयार हैं। “वे अधिक ईमानदार होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ स्वाभाविक रूप से ऐसा होता है कि हम अनेक अनुभवों से गुजरते हैं और इसलिए अधिक सतर्क हो जाते हैं। हम हर समय खुलकर नहीं बोलते। हम यह सोचते रहते हैं कि आगे क्या होगा, क्योंकि हमें पता होता है कि क्या-क्या हो सकता है। युवा पीढ़ी के पास ऐसे अनुभव नहीं होते। यदि उन्हें कुछ सही लगता है, तो वे उसे सहज रूप से स्वीकार कर लेते हैं और उसी के अनुसार कार्य करते हैं। वे परिणामों को लेकर चिंतित नहीं होते, क्योंकि वे युवा हैं। इसलिए यदि हम उन्हें यह उद्देश्य दें और अपने अनुभव से प्राप्त आवश्यक ज्ञान तथा दृष्टि प्रदान करें, बिना उसे उन पर थोपे, तो हमें उन्हें अपना मार्ग स्वयं खोजने देना चाहिए।”
भारत के सामने भविष्य की चुनौतियों से निपटने में युवा हिन्दुओं की भूमिका के संबंध में सरसंघचालक जी ने कहा कि युवा पीढ़ी का दायित्व अपने मूल्यों के अनुसार जीवन जीना है। इसलिए सेवा के क्षेत्र में भी उन्हें यही भाव रखना होगा। “सेवा निःस्वार्थ भाव से होनी चाहिए। सेवा ऐसा कोई कार्य नहीं है, जिससे आप महान बनते हैं। यह उपकार नहीं है और न ही यह ऐसा कुछ है जो आप मानवता पर किसी करुणा के रूप में कर रहे हैं। हम कहते हैं कि सेवा ईश्वर के निकट जाने का आपका अवसर है। आप जिनकी सेवा कर रहे हैं, उन पर कोई उपकार नहीं कर रहे। वे आपको सेवा का अवसर देकर आपके ऊपर बहुत बड़ा उपकार कर रहे हैं। इसलिए सेवा इसी भाव के साथ की जानी चाहिए।”

ब्रिटिश हिन्दुओं की निष्ठा को लेकर यूनाइटेड किंगडम में उठाए जाने वाले प्रश्न तथा एक ब्रिटिश स्वयंसेवक से संघ की अपेक्षाओं के संबंध में अंतिम प्रश्न पूछा गया। इसका उत्तर देते हुए सरसंघचालक जी ने कहा, “कोई संघर्ष नहीं है। यदि ब्रिटिश हिन्दू अच्छे, पक्के और सच्चे हिन्दू हैं, तो ब्रिटेन और भारत के हितों के बीच कभी कोई संघर्ष नहीं होगा। यदि कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो स्वाभाविक रूप से ब्रिटिश हिन्दू ब्रिटेन के साथ जाएंगे। अपवाद हो सकते हैं, लेकिन हिन्दुत्व इस विषय पर स्पष्ट है। आपकी कर्मभूमि ही वह स्थान है, जहां आपकी निष्ठा होती है। आपकी जन्मभूमि – अर्थात आपकी उत्पत्ति या जन्म का स्थान – और आपकी पुण्यभूमि वह स्थान है, जहां से आपको अपने मूल्य प्राप्त होते हैं। आपको उन्हीं मूल्यों को अपनी कर्मभूमि में जीना है और जिस भूमि पर आप रहते हैं, उसकी सेवा करनी है।”
हिन्दुओं के एकजुट न होने की धारणा तथा एकता के सार के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरसंघचालक जी ने कहा, “यदि आप श्रोताओं को देखें या सामान्य रूप से समाज को देखें, तो मानव समाज में विविधता है और यह स्वाभाविक है। हमें इसके साथ चलना है। लेकिन अपना जोर इस बात पर होना चाहिए कि हमें क्या जोड़ता है, न कि इस बात पर कि हमें क्या विभाजित करता है। यदि हम ऐसा करेंगे, तो हमारे समुदाय, हमारा समाज समृद्ध होगा और दुनिया एक बेहतर स्थान बनेगी। हमें यही करना होगा।”
इस संवाद का संचालन यूनाइटेड किंगडम निवासी वेलनेस विशेषज्ञ ममता सुब्रह्मण्यम ने किया। हिन्दू स्वयंसेवक संघ, यूनाइटेड किंगडम (HSS UK) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 600 लोग उपस्थित रहे, उन्होंने 326 संगठनों का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य, सांसद (हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य), मेयर, काउंसिलर्स तथा यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त पेरियासामी कुमारन, उप उच्चायुक्त कार्तिक पांडे सहित समुदाय के अन्य प्रमुख नेता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत नेपाल में आई बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले लोगों तथा विस्थापित परिवारों की स्मृति में मौन रखकर हुई। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि Sewa UK ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए अंश दान के माध्यम से 1,00,000 पाउंड जुटाए हैं।

सरसंघचालक जी की यह यात्रा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के तहत सेवा, सामाजिक समरसता और साझा मूल्यों पर केंद्रित सभ्यतागत संवाद कार्यक्रम का हिस्सा है। लंदन प्रवास के दौरान सरसंघचालक जी ने विभिन्न धर्मों के प्रमुख नेताओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा अन्य सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों से मुलाकात की। अंतरधार्मिक संवाद के अंतर्गत उन्होंने श्री स्वामीनारायण मंदिर, विल्सडन, खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा तथा लंदन के अन्य धार्मिक स्थलों का भी दौरा किया। यूके में हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों और भाषायी विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले 11 भाषा-समुदायों ने भी इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

August 20, 2026

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर जम्मू कश्मीर के दौरे पर

नई दिल्ली 19 अगस्त 2026, भारत में अमरीकी राजदूत सर्जियो गोर ने आज केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि केंद्र और क्षेत्रीय सरकारों ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
श्री गोर जम्मू-कश्मीर की अपनी पहली यात्रा पर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के श्रीनगर स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि दोनों पक्षों ने भविष्य में आगे बढ़ने के लिए कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान की है।
जम्मू-कश्मीर के लिए अमरीकी यात्रा निर्देशिका के संबंध में, श्री गोर ने कहा कि हालांकि आज कोई औपचारिक घोषणा नहीं की जा सकती, लेकिन नई दिल्ली और स्थानीय सरकार के प्रयासों से सुरक्षा में सुधार हुआ है, इसलिए यात्रा सलाह में जोखिम को कम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई अमरीकी नागरिक कश्मीर की यात्रा करना चाहेंगे क्योंकि यह एक बहुत ही सुंदर स्थान है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बैठक सकारात्मक रही और भारत-अमरीका संबंधों और उन क्षेत्रों पर केंद्रित थी जहां अमरीकी सरोकार जम्मू-कश्मीर के साथ जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में सकारात्मक जुड़ाव और भविष्य में सहयोग पर बल दिया गया।

वन्देमातरम पर कांग्रेस का फैसला राष्ट्र विरोधी: अमित शाह

Amit Shah

नई दिल्ली 20 अगस्त 2026, गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस कार्य समिति द्वारा ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण छंद के बजाय केवल दो छंद गाने के निर्णय की आलोचना की है। संवाददाताओं से बातचीत में श्री शाह ने कहा कि यह निर्णय संसद द्वारा पारित कानून का खुला उल्लंघन है और राष्ट्रविरोधी है। श्री शाह ने दावा किया कि 1937 में कांग्रेस ने तुष्टीकरण के नाम पर ‘वंदे मातरम’ को दो भागों में विभाजित किया था। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक गलती को सुधारते हुए पूर्ण गीत को कानूनी मान्यता दी। श्री शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर वोट बैंक की राजनीति के लिए तुष्टीकरण के रास्ते पर चल रही है।

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