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भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है: दत्तात्रेय होसबाले

July 30, 2026

भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है: दत्तात्रेय होसबाले

  • गुरु तेगबहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

भुवनेश्वर, 28 जुलाई 2026, रेलवे ऑडिटोरियम में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि धर्म विरोधी शक्तियों को यह लगता है कि भारत में धर्म जागृति, धर्म की रक्षा तथा समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने वाले महापुरुषों को शारीरिक रूप से समाप्त करने से यह कार्य रुक जाएगा, पर भारत में यह संभव नहीं है। इस तरह के कृत्यों से भारत न झुकेगा न रुकेगा। आततायियों द्वारा स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की हत्या की जाती है तो अनेक लक्ष्मणानंद सरस्वती पैदा होंगे तथा धर्म व राष्ट्र के कार्य को आगे बढ़ाएंगे क्योंकि यह मृत्युंजयी भारत है, अविनाशी भारत है।

कार्यक्रम में सरकार्यवाह ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती: कृति एवं व्यक्तित्व’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के अध्यक्ष स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी जी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन न्यास के न्यासी मनसुख लाल सेठिया ने किया।

धर्म के लिए बलिदान की गौरवशाली परंपरा

सरकार्यवाह ने कहा कि भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान देने की एक लंबी परंपरा रही है। गुरु तेग बहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रहित में कार्य करने वाले लोगों पर हमले होते रहे हैं। केरल में वामपंथी हिंसा और कई राज्यों में नक्सली हिंसा के उदाहरण हैं। ऐसी घटनाएं राष्ट्र सेवा के कार्य को रोक नहीं सकतीं। इसके विपरीत, ऐसी परिस्थितियां और अधिक लोगों को समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती हैं।

उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी ने अपना पूरा जीवन धर्म रक्षा, समाज संगठन और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने स्वयं कार्य करने के साथ-साथ हजारों ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार किया, जो आज भी उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। स्वामी जी पर लिखी गई यह पुस्तक केवल प्रशंसा का ग्रंथ नहीं है, बल्कि उनके जीवन, विचारों और कार्यों से प्रेरणा लेने का माध्यम है। यह पुस्तक समाज को प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे साहित्य की आवश्यकता इसलिए है ताकि नई पीढ़ी राष्ट्र और धर्म के लिए समर्पित महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण के कार्य में योगदान दे सके।

आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने सांसारिक जीवन और मोह-माया का त्याग कर अपना पूरा जीवन वनवासी समाज के उत्थान, गौ संरक्षण, धर्म जागरण और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समाज के दुख-दर्द को दूर करने और लोगों को मूल्यों एवं संस्कारों के मार्ग पर चलने के लिए निरंतर प्रेरित किया।

पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पुस्तक के लिए लिखे अपने संदेश में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के लिए “वीर” और “तपस्वी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, जो उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का सटीक परिचय देते हैं। समाज में दो प्रकार के महापुरुष होते हैं जो सूर्य मंडल को भेद सकते हैं। इनमें एक वे, जो अपने तप और साधना से आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं अर्थात योगी, और दूसरे वे, जो राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त होते हैं। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती उच्च आध्यात्मिक विभूति होने के साथ साथ धर्म, समाज व राष्ट्र के लिए बलिदान दिया। उनके जीवन में दोनों गुण एक साथ दिखाई देते हैं।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत

सरकार्यवाह ने कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शन करने वाली शक्ति बनाए रखने के लिए वर्तमान पीढ़ी को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के विचारों और जीवन दर्शन से प्रेरणा लेनी होगी। स्वामी जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार, एक दर्शन और राष्ट्र जीवन को प्रेरित करने वाली शक्ति हैं। उनकी जीवनी नई पीढ़ी में राष्ट्रभाव, सांस्कृतिक चेतना और सेवा के संस्कारों को मजबूत करेगी। सरकार्यवाह जी ने गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर लोगों से आह्वान किया कि ऐसे महान गुरुओं के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची गुरु दक्षिणा होगी।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जीवन प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ : मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का त्याग, संघर्ष, जनजातीय समाज की सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण से परिपूर्ण जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत बना रहेगा। महापुरुषों का जीवन केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक प्रकाश का कार्य करता है।

समाज के वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के कल्याण के लिए स्वामी जी की निष्ठापूर्ण साधना तथा राष्ट्र चेतना के प्रसार का कार्य भारतीय संस्कृति और सामाजिक जीवन को सदैव समृद्ध करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित यह पुस्तक भविष्य में स्कूलों और कॉलेजों के पुस्तकालयों में उपलब्ध होगी तथा विद्यार्थियों को उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरणा प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती केवल एक संत नहीं थे, बल्कि कंधमाल के वनवासी भाइयों और बहनों के लिए सुरक्षा कवच तथा जागृत आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक थे। चकापाड़ा और जलेशपट्टा आश्रमों के माध्यम से स्वामी जी ने वनवासी बालिकाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। स्वामी जी ने अवैध धर्मांतरण, गौ-हत्या और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के जन्म शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत 21 अगस्त से होगी। इस अवसर पर ओडिशा के विभिन्न गांवों और देश के विश्वविद्यालयों में सेमिनार एवं कार्यशालाओं के माध्यम से उनके विचारों और आदर्शों का प्रसार किया जाएगा।

वर्ष 2008 में जन्माष्टमी की रात हुई स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या का उल्लेख करते हुए तत्कालीन सरकार पर विफलता और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति नायडू आयोग की रिपोर्ट और संबंधित फाइलों का लोक सेवा भवन से गायब होना एक “सुनियोजित षड्यंत्र” है। इन गायब फाइलों की जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। जांच के बाद वास्तविक तथ्य सामने आएंगे और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के पीछे जो भी दोषी होंगे, उन्हें किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग का अनुसरण करना ही सच्ची श्रद्धांजलि – धर्मेंद्र प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पूज्य वेदांत केसरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके दिखाए मार्ग और सेवा कार्यों का अनुसरण किया जाए। जिन मूल्यों, समाजसेवा और राष्ट्रसेवा के लिए स्वामी जी ने अपना जीवन समर्पित किया, उन्हें आत्मसात कर ओडिशा को आगे ले जाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

चार दशक पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन ओडिशा के मुख्यमंत्री डॉ. हरेकृष्ण महताब कंधमाल क्षेत्र में तेजी से हो रहे धर्मांतरण को लेकर अत्यंत चिंतित थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महताब ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी भूपेन बसु के माध्यम से संदेश भेजकर आग्रह किया था कि कोई संत तत्काल फुलबाणी (वर्तमान कंधमाल जिला) भेजा जाए। उनका मानना था कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रकाशित पुस्तक केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक महान व्यक्तित्व की तपस्या, संघर्ष और समर्पण का अमूल्य दस्तावेज है। ऐसी पुस्तक की आवश्यकता लंबे समय से अनुभव की जा रही थी, जिसकी पूर्ति अब हुई है।

उन्होंने कहा कि स्वामी जी पूरे ओडिशा और सनातन समाज में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के केंद्र हैं। स्वामी जी केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं थे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, सामाजिक विकास और जनकल्याण के कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। जन्माष्टमी की रात हुई उनकी निर्मम हत्या की घटना आज भी लोगों को झकझोर देती है।

उन्होंने कहा कि स्वामी जी स्वयं एक दीपक की तरह जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाते रहे। उनके द्वारा दिखाए गए मूल्यों, सेवा कार्यों और सत्य के मार्ग को अपनाना तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना ही उनके प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर स्वामी जी के जीवन और साधना को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने वाले लेखक द्वय बिपिन बिहारी नंद और बांच्छानिधि पंडा भी उपस्थित थे।

Bhubaneswar, 28th July, 2026: At the book release function held at Railway Auditorium, Dattatreya Hosabale ji, Sarkaryavah of Rashtriya Swayamsevak Sangh said that anti-Dharma forces feel that in India, awakening of Dharma, protection of Dharma and physical elimination of great men working for society and nation will stop this work, but in India it is not possible. India will not be cowed down or deterred by such acts. If Swami Laxmanananda Saraswati ji is killed by terrorists, many Laxmanananda Saraswatis will be born and will carry forward the work of Dharma and the nation because this is Mrityunjayee Bharat, indestructible Bharat. At the event, Sarkaryavah released the book “Vedanta Keshari Swami Laxmanananda Saraswati: Kriti and Personality” published by Swami Laxmanananda Saraswati Smriti Nyas. Chief Minister of Odisha Mohan Charan Majhi, Member of Parliament from Sambalpur Dharmendra Pradhan, Chairman of Swami Laxmanananda Saraswati Smriti Nyas Swami Jeevan Muktananda Puri Ji along with a large number of saints, social workers and dignitaries were present on the occasion. The programme was compered by Mansukh Lal Sethia, trustee of the trust.

 

July 29, 2026

पीएम की सचिवों संग बैठक: भविष्य के रोड़मैप पर चर्चा और निर्देश

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर केन्द्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग, तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भावी कार्य योजना की समीक्षा की। यह बैठक विकसित भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को और तेज़ करने पर केंद्रित रही।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मंत्रालयों और विभागों के बीच मजबूत टीम भावना विकसित करने पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने सरकार के भीतर क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार की कार्यगत बाधाओं को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और एकीकृत एवं प्रभावी परिणाम सुनिश्चित कर सकें।

जन-केंद्रित सुशासन का महत्व बतलाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत के नागरिक ही सदैव शासन व्यवस्था के केंद्र में रहने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि हर निर्णय और नीति आम-नागरिक के हितों और आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जहां बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय निवेश कर रहा है, वहीं स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने को भी समान प्राथमिकता दिया जाना चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू क्षमताओं के निर्माण के महत्व पर विशेष बल दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत को नवाचार, विविधता और क्षमता निर्माण में तेजी लाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना होगा।

सुधारों को सिरफ एक चलन या फैशनेबल शब्द न मानकर प्रभावी शासन के लिए एक निरंतर आवश्यकता बतलाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यप्रणालियों में सुधार लाने, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने तथा संस्थागत दक्षता को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ डिजिटल प्रणालियों और अवसंरचना को सुरक्षित रखने के लिए साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने उभरते साइबर खतरों के प्रति निरंतर सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में युवा नवोन्मेषकों और उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया और इस दिशा में इसे एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन रणनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय संवाद और जनसंपर्क के महत्व पर भी बल दिया, जहां देश महत्वपूर्ण पहल कर रहा है, जिससे इन प्रयासों से जुड़ी भ्रामक जानकारी और बेबुनियाद आशंकाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कार्यबल को उभरते और भविष्य के उद्योगों द्वारा आवश्यक कौशल से सुसज्जित करने के लिए नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की योजना उद्योग जगत के साथ साझेदारी में बनानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को सदैव युवा, गतिशील और दूरदर्शी बने रहना चाहिए तथा नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप फुर्ती एवं नवाचार के साथ निरंतर स्वयं को ढालते रहना चाहिए।

बैठक में सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित प्रगति, प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

 

छह दशकों की हिंसा के बाद देश वामपंथी उग्रवाद से मुक्त: नित्यानंद राय

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, सरकार ने कहा है कि लगभग छह दशकों की हिंसा के बाद देश वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो गया है, जिसे कभी आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक माना जाता था। राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह उपलब्धि वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए 2015 की राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना के दृढ़ कार्यान्वयन और केंद्र तथा राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से हासिल हुई है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि वर्तमान में कोई भी जिला वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत नहीं है।

श्री राय ने बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या अप्रैल 2018 में 126 से घटकर 90, जुलाई 2021 में 70, अप्रैल 2024 में 38, दिसंबर 2025 में 8 और मार्च 2026 में शून्य हो गई। श्री राय ने यह भी बताया कि वर्तमान में 37 जिलों को विरासत और महत्वपूर्ण जिलों के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो अब नक्सल प्रभावित नहीं हैं। इन जिलों की स्थिति को मजबूत करने के लिए सुरक्षा और विकास उपायों के संबंध में कुछ और समय तक निरंतर समर्थन की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि एक जिले को चिंताजनक जिले की श्रेणी में रखा गया है, जहां नक्सल प्रभावित हिंसक गतिविधियों को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है और उनकी संगठनात्मक संरचना को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। श्री राय ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बाद की स्थिति में सरकारी कल्याण कार्यक्रमों के व्यापक प्रसार, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने, आत्मसमर्पण करने वाले कार्यकर्ताओं के पुनर्वास को सुगम बनाने और दूरदराज के क्षेत्रों में शासन और सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

श्री राय ने कहा कि कुल मिलाकर, केंद्र देश के पूर्व नक्सल प्रभावित जिलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके त्वरित विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में और संशोधन करेगा। प्रस्तावित विधेयक वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करेगा। इन अपराधों के लिए तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि विधेयक में संशोधन केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं है। उन्होंने कहा कि यह भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गृह राज्य मंत्री ने कहा कि 1971 में राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जन गण मन के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए थे। श्री राय ने कहा कि वंदे मातरम का जानबूझकर अपमान करना मौजूदा कानून के तहत दंडनीय होगा। राष्ट्र गीत वंदे मातरम की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।

गृह राज्य मंत्री ने दावा किया कि 1935 में जब जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष बने, तो उन्होंने वंदे मातरम को केवल दो छंदों तक सीमित कर दिया था। दूसरी ओर, 1928 में जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस अध्यक्ष थे, तो उन्होंने तिमीर बरन बनर्जी से इस गीत का एक पूर्ण और गरिमापूर्ण संगीत संस्करण तैयार करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने पंडित ओंकारनाथ ठाकुर से सुबह साढ़े 6 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर पूर्ण वंदे मातरम का गायन करने का अनुरोध किया था, जो पहले स्वतंत्रता दिवस का प्रतीक था।

श्री राय ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में कहा था कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक महत्व रखने वाले वंदे मातरम को जन गण मन के समान सम्मान दिया जाएगा। श्री राय ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध तुष्टीकरण की नीति को दर्शाता है जो राष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंचाता है।

इससे पहले, चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि पिछले 123 वर्षों से वंदे मातरम गीत का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस गीत से प्रेरित होकर देश के क्रांतिकारियों ने राष्ट्र के लिए बलिदान दिए। श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया कि 1923 में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष ने वंदे मातरम का अपमान किया था।

वाईएसआरसीपी के गोल्ला बाबूराव ने सदन के सभी सदस्यों से राष्ट्र गीत का सम्मान करने का अनुरोध किया। उन्होंने इस विधेयक को पेश करने के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री बाबूराव ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है जिसने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को देश के लिए प्राणों का बलिदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस गीत से उत्पन्न भावना ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस चर्चा में बीजेडी की सुलता देव, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, एआईएडीएमके के डॉ. एम. थंबीदुरई और अन्य सदस्य उपस्थित थे।

विधेयक पारित होने के बाद राज्यसभा में विशेष उल्लेख सत्र हुआ, जिसमें सदस्यों ने अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। इसके बाद राज्यसभा को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

लोकसभा में लोक परीक्षा-अनुचित साधन रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026 पारित

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, लोकसभा ने आज लोक परीक्षा-अनुचित साधन रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया। इस विधेयक से लोक परीक्षा-अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम, 2024 में संशोधन किया गया है।

इस विधेयक में दस वर्ष तक के कारावास, दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना और दोषी अपराधियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े दंड के प्रावधान शामिल हैं। मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए, विधेयक में प्रत्येक राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश को दैनिक सुनवाई के लिए विशेष त्वरित न्यायालय स्थापित करने का आदेश दिया गया है। इसमें यह भी प्रावधान है कि अपराधों की जांच पुलिस थाने में सूचना दर्ज होने की तारीख से दो महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए। मुकदमे की सुनवाई आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए।

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कार्मिक, लोक शिकायत और राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि विधेयक में संशोधन कानून को और अधिक सख्त बनाने तथा त्वरित न्याय दिलाने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि नया विधेयक विद्रयार्थियों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। डॉ. सिंह ने कहा कि विभिन्न दलों द्वारा शासित राज्यों में पेपर लीक होने की घटनाएं हुई हैं।

विपक्ष के आचरण पर निशाना साधते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि जब एक महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा हो रही है, तो विपक्ष सुझाव देने के बजाय राजनीति कर रहा है। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा असंसदीय भाषा का इस्‍तेमाल करने की भी आलोचना करते हुए इसे अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कोई गोली नहीं चलाई गई और केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि चूंकि कोई गोली नहीं चलाई गई, इसलिए आदेश जारी करने का प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है।

इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए जनता दल यूनाईटेड के दिलेश्वर कामायत ने संसद में विधेयक लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्‍होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित होगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी। श्री कामायात ने कहा कि यह विधेयक विद्यार्थियों के हित में लाया गया है। उन्‍होंने कहा कि नए विधेयक में समयबद्ध जांच और कड़ी सजा का प्रावधान है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

विधेयक का विरोध करते हुए रिवोल्‍यूनश्‍नरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह विधेयक अपने उद्देश्य को पूरा करने में अपर्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विधेयक में किए गए बदलाव केवल दिखावटी हैं।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था अब बहुत महंगी हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट-यूजी परीक्षा आयोजित करने पर खर्च की गई राशि देश के शिक्षा बजट से अधिक है। श्री गांधी ने कहा कि नीट मुद्दे पर छात्रों का विरोध हिंसा या घृणा नहीं, बल्कि युवाओं की गहरी भावनाओं की अभिव्यक्ति है और सभी राजनीतिक दलों को इस अभिव्यक्ति का सम्मान करना चाहिए।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध राहुल गांधी की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। श्री रिजिजू ने मांग की कि राहुल गांधी को सदन में अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी राहुल गांधी से अनुरोध किया कि वे केवल विधेयक पर ही बोलें और बिना किसी तथ्य के आरोप न लगाएं। चर्चा के दौरान सदन को दो बार स्थगित भी किया गया। विधेयक पारित करने के बाद श्री बिरला ने सदन को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

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