Web News

www.upwebnews.com

यूपीटीईटी-2026 की परीक्षा 2 से 4 जुलाई तक

July 1, 2026

यूपीटीईटी-2026 की परीक्षा 2 से 4 जुलाई तक

Breaking News UP Web News

UP TET Exam News, Posted on 01.07.2026, Time 09.57 PM, Lucknow

60 जनपदों के 955 केंद्रों पर 19.94 लाख से अधिक अभ्यर्थी होंगे शामिल

एआई सीसीटीवी और इंटीग्रेटेड कमांड रूम से होगी निगरानी, परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू

पारदर्शी, निष्पक्ष और शुचितापूर्ण परीक्षा के लिए आयोग कृत संकल्पित

लखनऊ, 01 जुलाई 2026, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी-2026) की लिखित परीक्षा 02 व 03 जुलाई 2026 को दो-दो पालियों तथा 04 जुलाई 2026 को एक पाली, इस प्रकार कुल 05 पालियों में प्रदेश के 60 जनपदों में 955 परीक्षा केंद्रों पर संपन्न होगी। इस परीक्षा में कुल 19,94,661 पंजीकृत परीक्षार्थी प्रतिभाग करेंगे।

आयोग के अनुसार 02 जुलाई की दोनों पालियों एवं 03 जुलाई की प्रथम पाली में उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी, जबकि 03 जुलाई की द्वितीय पाली एवं 04 जुलाई की प्रथम पाली में प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित की जाएगी।

आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशान्त कुमार (सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक, उ.प्र.) ने बताया कि सभी 60 जनपदों के 955 परीक्षा केंद्रों पर तैयारियों की गहन समीक्षा कर ली गई है। सभी केंद्रों पर परीक्षा संबंधी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गईं हैं। परीक्षा केंद्रों के सभी कक्षों एवं महत्वपूर्ण हिस्सों को एआई सीसीटीवी से आच्छादित कर जनपद के कंट्रोल रूम तथा आयोग में स्थापित अत्याधुनिक एआई कैमरों से लैस इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से जोड़ा गया है। आयोग के कंट्रोल रूम से सभी केंद्रों की कनेक्टिविटी का परीक्षण कर लिया गया है।

आयोग स्तर से प्रत्येक जनपद के लिए एक-एक सदस्य, सेवानिवृत्त आईएएस व सेवानिवृत्त आईपीएस को प्रेक्षक के रूप में नामित किया गया है, जो अपने आवंटित जनपद में पहुंचकर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर चुके हैं। शासन के निर्देशों के अनुसार परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारीगण तथा उनकी निगरानी टीमों द्वारा परीक्षा केंद्रों पर लगातार भ्रमण किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा केंद्रों पर पर्याप्त फोर्स की तैनाती की जा रही है। संदिग्ध व असामाजिक तत्वों पर विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सतर्क दृष्टि रखी जा रही है।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि नकल कराने अथवा परीक्षा की शुचिता व गोपनीयता को प्रभावित करने वाले व्यक्ति, संस्था या संबंधित के विरुद्ध उ.प्र. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों द्वारा किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मोबाइल फोन आदि का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्रतिभाग करने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन द्वारा आगमन, प्रवास व प्रस्थान के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। आकस्मिक स्थिति हेतु समुचित सुरक्षा एवं चिकित्सीय प्रबंध के निर्देश भी शासन द्वारा दिए गए हैं।

आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने सभी परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे समय से परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे तथा प्रवेश पत्र में मुद्रित निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन करें। शासन के निर्देशों के अनुरूप केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उनके हित में सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी किसी अफवाह अथवा बहकावे में न आएं और सूचनाओं की पुष्टि आयोग की वेबसाइट www.upessc.up.gov.in एवं ‘X’ हैंडल @upesscprayagraj से कर लें।

अध्यक्ष ने कहा कि शासन एवं आयोग इस परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष तथा शुचितापूर्ण ढंग से कराने के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने सभी परीक्षार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

June 23, 2026

एबीआरएसएम आंदोलन का द्वितीय चरण – “सांसद संपर्क एवं सांसद समर्थन अभियान” शुरू

टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु एबीआरएसएम के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का द्वितीय चरण – “सांसद संपर्क एवं सांसद समर्थन अभियान” शुरू


5 जुलाई तक देश के सभी राज्य सभा व लोकसभा सांसदों से संपर्क कर उन्हें ज्ञापन सौंपकर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु समर्थन करने का किया जाएगा आग्रह

लखनऊ : 22 जून।  टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु देश के सभी राज्य सभा व लोकसभा सांसदों से 5 जुलाई 2026 तक सम्पर्क कर टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत लाखों शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने का आग्रह किया जाएगा।

उक्त निर्णय सोमवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आभासी पटल पर आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर नारायण लाल गुप्ता ने की एवं संचालन राष्ट्रीय महामंत्री प्रोफेसर गीता भट्ट जी द्वारा किया गया। बैठक में अखिल भारतीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री मोहन राजपुरोहित सहित सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं सभी राज्यों के अध्यक्ष, महामंत्री एवं संगठन मंत्री उपस्थित रहे।

प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए एबीआरएसएम के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत प्रथम चरण में 18 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सहित देशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल धरना-प्रदर्शन एवं जिला अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन दिए गए। इससे शिक्षक समाज की भावनाएं एवं अपेक्षाएं सरकार और समाज के समक्ष प्रभावी रूप से पहुंची है।

प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर संजय मेधावी ने बताया कि एबीआरएसएम के देशव्यापी अभियान के तहत अब आंदोलन के द्वितीय चरण में “सांसद संपर्क एवं सांसद समर्थन अभियान” चलाया जाएगा जिसमें 5 जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में संगठन की जिला इकाइयों द्वारा राज्य सभा व लोकसभा सांसदों से संपर्क कर उन्हें ज्ञापन सौंपकर टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत लाखों शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु उनका समर्थन प्राप्त किया जाएगा।
प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की दिनांक 27 जुलाई 2011 से पहले से सेवारत 2 लाख से अधिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा एवम् आजीविका पर संकट खड़ा हो गया। शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। संगठन किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने देगा।

प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने कहा कि संगठन पूरी शक्ति और गंभीरता के साथ प्रत्येक लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद से संपर्क कर उन्हें अवगत कराएगा कि टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत लाखों शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपना शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, मानवीय गरिमा, शिक्षक हित व नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है।

      प्रदेश कोषाध्यक्ष नीलमणि शुक्ला ने कहा कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा एवम् गौरव गरिमा से जुड़ी इस गंभीर समस्या समाधान हेतु सभी सांसदों का समर्थन जरूरी है ताकि संसद के मानसून सत्र में इस समस्या पर व्यापक चर्चा हो व इस समस्या के समाधान का विधायी मार्ग प्रशस्त हो सके।

         उपरोक्त जानकारी प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।

May 14, 2026

केलकर जी से विद्यार्थी परिषद में जीवन दृष्टि मिली, संघ में वह विकसित हुई: दत्तात्रेय होसबाले

‘प्रिय केलकर जी’ अभिवाचन कार्यक्रम में जीवंत हुआ संगठन शिल्पी प्रा. यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व

नई दिल्ली, 10 मई, 2026, अभाविप के संगठन शिल्पी एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रा. यशवंतराव केलकर जी के जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में ‘प्रिय केलकर जी’ विशेष अभिवाचन कार्यक्रम का आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अभाविप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. राजकुमार भाटिया जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी जी, अखिल भारतीय छात्रा कार्य प्रमुख मनु शर्मा कटारिया जी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ. तपन बिहारी जी तथा प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, प्राध्यापक, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष, दिल्ली सरकार के मंत्री, संघ प्रेरित संगठनों के कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

राष्ट्रनिष्ठ चिंतक, संगठन शिल्पी एवं विद्यार्थी चेतना के प्रखर प्रेरणास्रोत प्रा. यशवंतराव केलकर जी का जन्म 25 अप्रैल, 1925 को महाराष्ट्र के पंढरपुर (सोलापुर) में हुआ था। विद्यार्थी जीवन से ही राष्ट्र कार्य को जीवन का ध्येय मानने वाले केलकर जी 1945 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बने। 1955 में अंग्रेजी के प्राध्यापक के तौर पर उन्होंने नेशनल कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया और संघ के निर्देशानुसार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कार्य प्रारम्भ किया। उनकी कार्यशैली से अभाविप को वैचारिक स्पष्टता, संगठनात्मक दृष्टि एवं कार्यकर्ता निर्माण की ऐसी कार्यपद्धति प्राप्त हुई, जिसने अभाविप को अखिल भारतीय स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने छात्र शक्ति को राष्ट्र निर्माण की शक्ति के रूप में स्थापित करने का कार्य किया।

कार्यक्रम में पुणे से आई मिलिंद भड़गे के नेतृत्व वाली अभिवाचन टोली ने ‘प्रिय केलकर जी’ प्रस्तुति के माध्यम से प्रा. केलकर जी के जीवन, विचार एवं कार्यपद्धति को मंचित किया। प्रस्तुति में अभाविप की कार्यशैली, पूर्व योजना-पूर्ण योजना, समय संतुलन, अनुशासन, सामूहिकता तथा कार्यकर्ता निर्माण की उस जीवंत पद्धति को प्रस्तुत किया गया।

सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा, “बालासाहेब देवरस जी कहा करते थे कि यशवंतराव केलकर जी डॉ. हेडगेवार के कुलोत्पन्न हैं। प्रा. केलकर जी ने संगठन निर्माण के वे सूत्र दिए, जिन पर अभाविप की सशक्त नींव खड़ी हुई। उन्होंने अभाविप को केवल आंदोलन तक सीमित न रखते हुए रचनात्मकता, प्रतिनिधित्व एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा प्रदान की। प्रा. केलकर जी ने टीम वर्क, समय पालन, सादगी, संसाधनों के सदुपयोग एवं आत्मीय कार्यपद्धति के माध्यम से संगठन जीवन का आदर्श प्रस्तुत किया। वे बिना किसी ईर्ष्या-द्वेष के सभी को साथ लेकर चलने वाले व्यक्तित्व थे। उनका जीवन कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का अखंड स्रोत है।” उन्होंने कहा, “प्रा. यशवंतराव केलकर जी के साथ कार्य करते हुए, विद्यार्थी परिषद में मुझे जीवन दृष्टि मिली और संघ में वह विकसित हुई।”

अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी जी ने कहा, “प्रा. यशवंतराव केलकर जी का जीवन प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए आदर्श है। आज अभाविप की जो कार्यपद्धति देशभर में दिखाई देती है, वह प्रा. केलकर जी द्वारा प्रदत्त है। उनके जीवन से यह सीखने की आवश्यकता है कि कार्यकर्ता के जीवन में कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।”

अभाविप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. राजकुमार भाटिया जी ने कहा, “यदि हमें प्रा. केलकर जी के व्यक्तित्व एवं अभाविप की कार्यपद्धति को समझना है, तो उनके जीवन एवं विचारों पर आधारित साहित्य का अध्ययन करना आवश्यक है। प्रा. केलकर जी विद्यार्थी परिषद को व्यक्तित्व निर्माण की कार्यशाला मानते थे।”.

April 15, 2026

गर्व गोयल ने 90% अंक प्राप्त कर बढ़ाया विद्यालय व क्षेत्र का मान

मुजफ्फरनगर। Central Board of Secondary Education की हाईस्कूल परीक्षा में डी.एस. पब्लिक स्कूल के प्रतिभाशाली छात्र गर्व गोयल ने 90 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय, परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि समर्पण, अनुशासन और निरंतर मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है।
गर्व गोयल, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिज्ञ राजीव गोयल और शिक्षिका रीटा के सुपुत्र हैं। बचपन से ही शिक्षा और संस्कारों से परिपूर्ण वातावरण मिलने के कारण उन्होंने हर कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी सफलता उनके मजबूत संकल्प, समय प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का परिणाम है।
विद्यालय के शिक्षकों के मार्गदर्शन और डी.एस. पब्लिक स्कूल के उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय लगातार अपने छात्रों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देते हुए उन्हें शैक्षणिक और नैतिक रूप से सशक्त बना रहा है, जिसके परिणामस्वरूप छात्र विभिन्न स्तरों पर श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं।
गर्व की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। परिजनों, मित्रों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
गर्व गोयल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग के बिना यह संभव नहीं था। उन्होंने भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प भी व्यक्त किया।
उनकी यह उपलब्धि अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है, जो यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

April 14, 2026

क्लिनिकल एक्सपोजर और रिसर्च-बेस्ड लर्निंग का समावेश जरूरीः प्रो. मंजुला

टीएमयू फिजियोविज़न इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस
ज्ञान, नवाचार और शोध का उत्कृष्ट संगम

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में जुटे देश-विदेश के जाने-माने विशेषज्ञ

ख़ास बातें
न्यूरोप्लास्टिसिटी तकनीकें गुणवत्ता, स्वतंत्रता, सशक्तिकरण में सहायकः प्रो. चित्रा
प्रो. शिवानी कौल बोलीं, नवाचार से क्लिनिकल परिणाम प्रभावी और रोगी-केंद्रित
श्रीमती शिवानी लाल ने लोड मॉनिटरिंग पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण किया प्रस्तुत
एआई टूल्स से शिक्षा और क्लिनिकल प्रैक्टिस प्रभावी और उन्नतः नवजोत
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन 46 पोस्टर प्रजेंट, प्रोसिडिंग का विमोचन भी हुआ

Moradabad April 14, 2026,
इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर, नई दिल्ली की प्रिंसिपल प्रो. चित्रा कटारिया ने आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में फिजियोथेरेपी की बढ़ती भूमिका और न्यूरोलॉजिकल रिहैबिलिटेशन की गहन व्याख्या करते हुए कहा, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी जैसे जटिल मामलों में प्रारंभिक और संरचित फिजियोथेरेपी हस्तक्षेप, न्यूरोप्लास्टिसिटी आधारित तकनीकों और व्यक्तिगत रिहैबिलिटेशन प्लानिंग के जरिए न केवल कार्यात्मक क्षमता में सुधार लाया जा सकता है, बल्कि मरीजों के जीवन की गुणवत्ता, स्वतंत्रता और मानसिक सशक्तिकरण को भी बढ़ाया जा सकता है। वैज्ञानिक सत्र स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के बाद रिकवरी में सुधार में उन्होंने उन्नत फिजियोथेरेपी इंटरवेंशन्स, तकनीकी एकीकरण और दीर्घकालिक पुनर्वास रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। प्रो. कटारिया तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस-फिजियोविज़न 1.0 के शुभारम्भ मौके पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं। इससे पूर्व प्रिंसिपल प्रो. चित्रा कटारिया ने बतौर मुख्य अतिथि, टीएमयू की डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, फिजियोथेरेपी विभाग की एचओडी प्रो. शिवानी एम. कौल, डेंटल एंड एलाइड साइंस की डायरेक्टर गवर्नेंस श्रीमती नीलिमा जैन आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके ऑडी में कॉन्फ्रेंस का शंखनाद किया। इस मौके पर प्रो. हरबंश दीक्षित, श्री रविन्द्र देव आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। इस अवसर पर कुल 46 पोस्टर भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने अपने शोध एवं नवाचारी विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस मौके पर कॉन्फ्रेेंस प्रोसिडिंग का विमोचन भी हुआ।

डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने टीएमयू में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को रेखांकित करते हुए स्टुडेंट्स को शोध, नवाचार तथा प्रतियोगी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। साथ ही कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में क्लिनिकल एक्सपोजर और रिसर्च-आधारित लर्निंग का समावेश स्टुडेंट्स को भविष्य के लिए अधिक सक्षम बनाता है। एचओडी प्रो. शिवानी एम. कौल ने नॉवल्टी मीट्स रिहेबिलिटेशन एक्सीलेंस थीम के महत्व को बताते हुए कहा, फिजियोथेरेपी में नवाचार और उत्कृष्टता का समन्वय क्लिनिकल परिणामों को अधिक प्रभावी और रोगी-केंद्रित बनाता है। तकनीकी सत्रों में स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट श्रीमती शिवानी लाल ने लोड मॉनिटरिंग इन स्पोर्ट्स रिहैबिलिटेशन पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जबकि श्रीमती नवजोत त्रिवेदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए बताया, एआई टूल्स शिक्षा और क्लिनिकल प्रैक्टिस दोनों को अधिक प्रभावी और उन्नत बना रहे हैं। कॉन्फ्रेंस में डॉ. नंद किशोर साह, श्रीमती हिमानी, सुश्री नीलिमा चौहान, डॉ. हरीश शर्मा, श्रीमती समर्पिता सेनापति आदि की भी मौजूदगी रही।

 

 

Older Posts »