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छुआछूत निंदनीय

August 14, 2026

छुआछूत निंदनीय

Editorial

Editorial 14.08.2026, Time 09.51 AM, by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

जातिगत आधार पर छुआछूत निंदनीय है। यह किसी भी स्तर पर हो, स्कूल कॉलेज में हो या किसी संस्थान में छुआछूत का समर्थन आज का सभ्य समाज नहीं कर सकता। यदि राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों को छुआछूत का सामना करना पड़े तो यह और अधिक निंदनीय और चिंतनीय है। हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ जो घटना उत्तराखंड में हुई वह चिंता का विषय तो है ही यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा लोकतंत्र और गणतांत्रिक सोच से समाज की मानसिकता कितनी सबल हुई है? क्या वास्तव में हम समरस समाज की ओर बढ़ सके हैं। नहीं तो फिर विचार करना पड़ेगा कि प्राथमिकता क्या हो। सामाजिक समरसता को अभियान बनाए बिना यह समाज समरस नहीं बनेगा। जिस राष्ट्रीय एकता और सद्भाव की बात हम करते हैं। वह केवल नारों और भाषण से आने वाली नहीं है।

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में विजय संकल्प रैली में 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाषण दिया। उनकी विचारधारा, विषय और राजनीतिक सोच महत्वपूर्ण नहीं है। वे अपने दल की रीति नीति और सोच के अनुसार ही भाषण देंगे और उन्होंने दिया भी। किंतु उसके दो दिन बाद यानी 10 अगस्त को जो हुआ वह अनुचित और अस्वीकार्य है। स्थानीय श्रीराम सेना नामक संगठन ने ये कहकर रामलीला मैदान के मंच का शुद्धिकरण और हवन कराया कि खड़गे के आने से स्थान अशुद्ध हो गया।

यह बात जब खड़गे तक पहुंची तो वे आहत हुए। उनका आहत होना स्वाभाविक भी है। उन्होंने 13 अगस्त को राज्यसभा में घटना का उल्लेख किया और अपनी पीड़ा व्यक्त की। खड़गे ने कहा जब मेरे साथ आप छुआछूत के कारण भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं तो आप मेरा अपमान करते हैं। मुझे नीचा दिखाते हैं। उन्होंने मांग की है कि मेरे भाषण के बाद मंच का शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ छुआछूत कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

इस प्रकरण पर भाजपा और सरकार ने दलगत भावना से ऊपर उठकर संपूर्ण प्रकरण की निंदा की है। राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। हम पार्टी की विचारधारा से ऊपर उठकर निंदा करके है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।

उधर इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति शुरू हो गई है। मुद्दे का राजनीतीकरण करना भी निंदनीय है। कांग्रेस की नेता केरल से सांसद प्रियंका गांधी ने इसे आरएसएस और भाजपा से जोड़ दिया और कहा कि इन संगठनों की मानसिकता उजागर हुई है। जबकि प्रकरण का संघ या भाजपा से कुछ भी संबंध नहीं है। लेकिन कांग्रेस को हर मुद्दे पर राजनीति करनी है। प्रियंका गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री से ही इस्तीफा मांग लिया। वहीं समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा है।

यह मामला सामाजिक भेदभाव का है न कि राजनीतिक। इसे वहीं तक सीमित रखा जाए। सरकार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उस पर भरोसा किया जाना चाहिए। दोषियों को सजा मिले। इसके लिए प्रयास जारी रहने चाहिए, लेकिन घटना की आड़ में देश में वैमनस्य फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

 

August 11, 2026

महिला आरक्षण से भयभीत कांग्रेस

Editorial 11.08.2026 by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

Posted on 11.08.2026

संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को रोकने के लिए कांग्रेस और अन्य विपक्ष हर हथकंडा अपना रहा है। इस विधेयक को पारित कराने के लिए एनडीए सरकार पूरी कोशिश में है। इसके लिए का व्यवस्थित संचालन जरूरी है। लेकिन कांग्रेस लोकसभा और राज्यसभा दोनों को अव्यवस्थित बनाए रखना चाहती है। सदन सुचारू करने के लिए कांग्रेस ने मांग रखी कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर नीट पेपर लीक मामले में प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठी चार्ज पर बयान दें। जब सरकार इसके लिए सोमवार को तैयार हो गई तो कांग्रेस ने नई मांगें रख दी। अब कांग्रेस कह रही है कि लाठी चार्ज की जिम्मेदारी तय हो, पीएम मोदी माफी मांगें और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर चर्चा हो तब सदन चलने देंगे। इससे ऐसा लगता है कि कांग्रेस जानबूझकर ऐसे मुद्दे और मांगे रख रही है, जिन्हें सत्ता पक्ष स्वीकार नहीं करेगा। परिणाम गतिरोध बरकरार रहेगा और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं होगा। दरअसल कांग्रेस महिला आरक्षण की विरोधी है। वह शुरू से अड़ंगेबाजी करती रही है। इसलिए इस लोक महत्व का बिल को अटकाए रखना चाहती है। यह बिल दो तिहाई बहुमत से पारित होगा, जिसके लिए सरकार ने बहुमत जुटा लिया है। डीएमके, एनसीएपी, शिवसेना उद्धव गुट, टीएमसी का बागी गुट सरकार के साथ हैं। सरकार बिल आसानी से पास कर लेगी, इस बात को कांग्रेस अच्छी तरह जानती है। इसी लिए सदन को सुचारू नहीं होने दे रही, ताकि बिल अटका रहे। ये बिल अगर अभी पारित नहीं हुआ तो वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकेगा। महिला आरक्षण भारत की राजनीति में 30 वर्ष पुराना मुद्दा है। इसे समय समय पर भाजपा और कांग्रेस दोनों उठती रही हैं। लेकिन जब इसे क्रियान्वयन का समय आया तो विपक्षी दल कांग्रेस ने अपना महिला विरोधी रुख स्पष्ट दिखा दिया। खास बात यह है कि इस बिल के विरोध में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियां भी है। महिला आरक्षण का विरोध करके इन दलों को कुछ भी हासिल नहीं होगा बल्कि राजनीतिक नुकसान ही होगा। लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकार और राहुल गांधी के सलाहकार ये समझने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस अब भी रुख बदल ले तो वह संभावित नुकसान को टाल सकती है।

August 10, 2026

उच्च सदन में फर्जी प्रश्न

Editorial 10.08.2026

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कार्यप्रणाली को भेदकर फर्जी प्रश्न लगाना न केवल विस्मयकारी है, बल्कि चिंताजनक भी है। प्रदेश विधान मंडल का ये उच्च सदन है। यहां विधान सभा से प्रेरित होकर विधेयक और प्रस्ताव स्वीकृति के लिए आते हैं। इसलिए इसका महत्व भी अधिक है। इस सदन का गरिमापूर्ण अतीत रहा है। लेकिन हाल ही में प्रकाश में आया प्रकरण अत्यंत गंभीर है। किसी व्यक्ति ने फर्जीवाड़ा करके सदस्य मुकुल यादव के नाम से प्रश्न लगा दिया। ये प्रश्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़ा था। इसमें विभाग के अधिकारियों की शिकायत की गई थी। प्रश्न पर एमएलसी के फर्जी हस्ताक्षर थे। इस प्रश्न पर विधान परिषद सचिवालय ने विभाग से आख्या भी मांग ली। विभाग को संदेह हुआ तो अधिकारियों ने एमएलसी मुकुल यादव से संपर्क किया। उन्होंने कहा उनके द्वारा ऐसा कोई प्रश्न नहीं लगाया गया है। इस पर विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं।

आजकल सदन में सदस्यों के लेटर हेड के दुरुपयोग और फर्जी हस्ताक्षर के मामले सामने आ रहे हैं। इस तरह के प्रकरण विधान मंडल की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। इन पर रोक लगनी चाहिए।

विधान सभा और विधान परिषद की समस्त कार्यवाही और विभागीय कार्य डिजिटल किए जा रहे हैं। ऐसे में प्रणाली को सुरक्षित और त्रुटिरहित करना अनिवार्य है। सदनों में पैसे लेकर या प्रलोभनवश सवाल लगाने के प्रकरण सामने आते रहे हैं। लोकसभा में भी पैसा लेकर सवाल पूछने का मामला सामने आया था। तब भी सांसदों की बहुत बदनामी हुई थी।

लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों के विधान मंडल लोकतंत्र के स्तंभ हैं। इनकी कार्यप्रणाली में सुचिता और निष्पक्षता आवश्यक है। ये बनी रहेगी तभी लोकतंत सुरक्षित रहेगा। इसलिए सदनों के अध्यक्षों की जिम्मेदारी है कि वे जनता का विश्वास बनाए रखने के कड़े नियम और कानून बनाएं।

 

August 9, 2026

विषय एक, विचार दो

POSTED ON 0.08.2026 TIME 01.03 PM, EDITORIAL BY SARVESH KUMAR SINGH

शनिवार को देश के दो अलग-अलग स्थानों पर दो संवाद कार्यक्रम हुए। इनमें समानता यह है कि दोनों संवाद कार्यक्रम युवाओं के साथ थे। लेकिन, अंतर यह है कि दोनों के भाव, विचार और मार्गदर्शन दो ध्रुवीय थे। एक में युवाओं को सिर्फ उकसाया गया, उनके आत्मविश्वास को तोड़ा गया। उन्हें देश की व्यवस्था की कमियां बतायी गईं और हतोत्साहित किया गया। कोई समाधान नहीं, कोई भविष्य का रास्ता नहीं सुझाया गया। दूसरी ओर एक संवाद और हुआ। युवाओं की विशेषताएं, उनकी क्षमता, उनकी बुद्धिमत्ता की प्रशंसा करके भविष्य के लक्ष्य साधने के लिए प्रेरित किया। इसके लिए उन्हें प्रेरणा दी गई। यह फर्क उन दो संवादों का है, जो 8 अगस्त को हुए। इनमें एक संवाद कांग्रेस नेता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता विरोधी दल राहुल गांधी ने प्रयागराज के केपी कालेज मैदान में छात्रों और युवाओं के साथ किया। दूसरा संवाद दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दीक्षांत समारोह के अवसर पर छात्रों के साथ किया। दोनों संवाद के संदेश अलग-अलग हैं। एक संवाद दिशा दिखाता है एक संवाद परिवर्तन के नाम पर राष्ट्रीय आस्था में कमी करता है, कुंठा को बढावा देता है। देश ने दोनों संवाद के निहितार्थ भी समझ लिये हैं।

प्रयागराज के केपी कालेज के ऐतिहासिक मैदान में राहुल गांधी ने पूर्वांचल के छात्रों, युवाओं को आमंत्रित कर संवाद किया। इसका नाम “छात्रों की गूंज” रखा गया था। लेकिन, यहां गूंज सिर्फ राहुल गांधी की ही सुनाई दी। इसमें उन्होंने सिस्टम की खामियां बतायीं। कहा सर्टिफिकेट और डिग्रियां अहमियत खो चुकी हैं। देश के 40 करोड़ युवा आज डिग्री, रोजगार और डिजिटल के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। सिस्टम युवाओं को रोजगार की बजाय सिर्फ डिग्री थमा देता है। खराब व्यवस्था ने युवाओं को चक्रव्यूह में फंसा रखा है। आज आपको बैंक से लोन नहीं मिलेगा लेकिन, अदाणी को तत्काल लाखों करोड़ मिल जाएगा। उन्होंने कोई समाधान बताने की बजाय आरएसएस को निशाना बनाया, कहा आज हर जगह आरएसएस की सोच फैलायी जा रही है। पुलिस, प्रशासन, शिक्षण संस्थान, न्यायिक व्यवस्था, मीडिया सभी जगह आरएसएस की सोच के लोगों को बैठाया जा रहा है। रोजगार के सारे दरवाजे बंद हो गए हैं। यह राहुल गांधी का छात्रों की गूंज के रूप में तीसरा राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम था। इसके पहले ऐसे संवाद कार्यक्रम कोटा और देहरादून में हो चुके हैं।

दूसरा संवाद दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आईआईटी दिल्ली के छात्रों के साथ किया। यह अवसर था दीक्षांत समारोह का, इसमें उन्होंने छात्रों को उज्ज्वल भविष्य के सपने दिखाये और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया। श्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। दुनिया की स्ट्रेटेजिक इक्वेशन तेजी से बदल रही है ग्वोबल पावर बैलेंस भी प्रतिपल बदल रहा है। आपके पीछे सबसे बड़ी फोर्स है टेक्नोलाजी की स्पीड। आज कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि अगले 20 से 30 साल की दुनिया कैसी होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया बदलेगी, टैक्नोलाजी भी बदलेगी, इंडस्ट्रीज बदलेगी, प्रोफेसंस भी बदलेंगे। लेकिन इन सबके बीच मेरी बात याद रखियेगा जो सीखेगा वो जीतेगा। जो नए चैलेंज के लिए नए सोल्यूशन खोजने का साहस रखेगा, चैलेंज उसके लिए अवसर बन जाएंगे।

मोदी ने कहा कि आईआईटी की परीक्षा में सिलेबस होता है लेकिन जिंदगी की परीक्षा का कोई सिलेबस नहीं होता। सब कुछ आउट आफ सिलेबस होता है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि लाइफ में क्यूरोसिटी बनाए रखिये, अपनी लर्निंग इंस्टिक्ट को जगाये रखिये, चेतना बनाये रखिये। केवल सवाल पूछकर मत रुकिये, उनका समाधान खोजने का साहस भी रखिये।

एक ही दिन के ये दो संवाद कार्यक्रम देश की भविष्य की राजनीति की दिशा का भी संकेत देते हैं।

August 8, 2026

खोजी ए आईः वायरस बनाम बैक्टीरिया

Editorial 08.08.2026 BY SARVESH KUMAR SINGH

Editorial

सर्वेश कुमार सिंह

ए आई अब केवल सूचना देने, आपके प्रश्नों के उत्तर देने या किसी समाधान का रास्ता बताने तक का सीमित साधन नहीं रहा है, बल्कि इससे आगे यह मानव जीवन को प्रभावित करने वाला खोजी टूल बन गया है। खोज भी ऐसी जो भौतिक विज्ञान से आगे रसायन और जैव विज्ञान के क्षेत्र में है। यह केवल निर्जीव वस्तुओं की खोज नहीं है, बल्कि जैविक खोज तक पहुंच गई है। जो मानव जीवन को प्रभावित करने की क्षमता रखती है, दोनों तरह से सकारात्मक भी और नकारात्मक भी। यानि कि यह लाभ भी पहुंचाएगी और कभी गलत हाथों में गई तो भारी हानि भी करेगी।

ऐसी ही खोज हाल ही में अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और कैलीफोर्निया के आर्क इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ए आई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से एक वायरस को तैयार किया है। यह वायरस ए आई द्वारा कृत्रिम जीनोम (जैनेटिक कोड) तैयार करने के बाद लैब में सिंथेटिक्स वायरस के रूप में बनाया गया। वायरस को इस प्रकार ट्रेंड किया गया कि वह रोग के कारण बैक्टीरिया पर हमला कर सके और उसे नष्ट कर दे। इस प्रयोग में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है। इसे बैक्टीरियोफेज नाम दिया गया है। यह खतरनाक बैक्टारिया को खोजने और मारने में सक्षम है।

शोधकर्ताओं ने जेनरेटिव ए आई माडल ( ईवो-1 और ईवो-2) का इस्तेमाल करके 16 ऐसे नये सिंथेटिक वायरस बनाये हैं जो प्रकृति में पहले से मौजूद नहीं हैं। प्रयोग में ये ई कोलाई बैक्टीरिया को नष्ट करने में पूरी तरह सफल रहे। भविष्य में इस तकनीक के प्रयोग से दवाएं और खासकर ऐसी दवाएं जो एंटीबायोटिक हैं और बेसर हो चुकी हैं, उनको फिर से कारगर करने या बनाने में प्रयोग किया जाएगा।

आम नागरिकों की जिज्ञासा यह है कि यह वायरस कम्यूटर ने कैसे तैयार कर लिया। इस बारे में गहराई से अध्ययन करने से पता चला कि कम्यूटर ने ए आई के माध्यम से सिर्फ जीनोम कोड तैयार किया। यह बहुत सारे पहले से मौजूद कोडों के अध्ययन के  बाद ए आई ने तैयार किया। ए आई ने एक नये वायरस का डीएनए कोड (ब्लू प्रिंट) तैयार किया। वैज्ञानिकों ने पहले ईवो नाम के ए आई माडल को लाखों जीवों के डीएनए कोड और आरएनए कोड की भाषा सिखायी। इससे ए आई ने यह समझ लिया कि एक वायरस को जीवित रहने और बैक्टीरिया पर हमला करने के लिए किस प्रकार के जैनेटिक कोड की जरूरत होती है। फिर ए आई ने खुद से 16 वायरस का जीनोम (जैनेटिक कोड) तैयार कर दिया। यह कोड एकदम नया था। फिर इस डिजिटल कोड को असली में बदला गया। इसके लिए प्रयोगशाला (लैब) का इस्तेमाल किया गया। यह कार्य मानवीकृत रूप से सम्पन्न हुआ। वैज्ञानिकों ने डिजीटल कोड को रसायनों के माध्यम से इसे जैविक और असली डीएनए में बदल दिया। इस कृत्रिम डीएनए को एक वायरस के खाली खोल (सेल) में डाल दिया गया। इसके बाद यह एक जीवित बैक्टीरियोफेज के रूप में काम करने लगा। प्रयोग के लिए इस बैक्टीरियोफेज को एक डिश में रखकर ई-कोलाई बैक्टीरिया के साथ छोड़ा गया तो इसने खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान कर ली और यह उसकी दीवार को भेदकर उसके अंदर प्रवेश कर गया, यानि अपना डीएनए वहीं छोड दिया। यहां उसने लाखों वायरस के रूप में खुद को परिवर्तित किया । इसने अपने स्वरूप की लाखों की संख्या में बनी कापियों को एक साथ नष्ट किया जिससे बैक्टीरिया फट कर नष्ट हो गया।

ये तकनीक भविष्य की चिकित्सा सुविधाओं और चिकित्सा विज्ञान की दिशा बदल देगी। इसका सबसे बड़ा लाभ कैंसर चिकित्सा में हो सकता है। क्योंकि खराब कैंसर कोशिकाओं को ए आई की मदद से जन्मे बैक्टीरियोफेज आसानी से नष्ट कर सकते हैं। लेकिन, इस तकनीक और खोज के खतरे भी इतने ही बड़े हैं। यह तकनीक यदि आतंकवादियों और कुछ कमजोर राष्ट्रों के हाथों में पड़ गई तो जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। इससे जैविक युद्ध का नया खतरा जन्म ले रहा है। इसलिए सतर्कता जरूरी है। वर्ष 2019 में कोविड महामारी का एक महत्वपूर्ण कारक भी चीन की प्रयोगशाला में निर्मित कृत्रिम वायरस ही था। यह वायरस वैज्ञानिकों की असावधानी अथवा उनके द्वारा स्वयं ही लैब से बाहर निकाल दिया गया, यह अभी तक पता नहीं चला है। लेकिन, इस महामारी ने पूरी दुनिया को हलकान कर दिया। कई लाख लोगों को इस महामारी से जान गंवानी पड़ी थी। इसलिए इस नई खोज का स्वागत करने के साथ-साथ इसकी सुरक्षा के उपायों पर भी गंभीरता से चिंतन और रणनीति बनाने की जरूरत है।

लेखक परिचयः स्वतंत्र पत्रकार, लखनऊ

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