Editorial Posted on 30.03.2026, Time 06.26 AM , Monday, By Editor Sarvesh Kumar Singh
पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की बात एक बार फिर से उठी है और यह बात उठाई है बसपा की अध्यक्ष बहन मायावती ने। तो यह प्रश्न एक बार फिर यह चर्चा में आ गया है कि क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव जो 2027 में होना है उसमें पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मुद्दा अहम रूप से उठेगा और क्या यह एक खास मुद्दा बन पाएगा।
बहन मायावती ने एक ट्वीट किया है। वैसे यह ट्वीट तो जो कल प्रधानमंत्री का भाषण हुआ, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कल उद्घाटन हुआ । उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और तमाम नेता वहां मौजूद थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बहन मायावती ने ट्वीट में यह कहा है कि इस एयरपोर्ट का पूरा प्रोजेक्ट , नक्शा और इसकी भूमिका सब कुछ हमारी सरकार में बन चुकी थी। अगर केंद्र सरकार ने उस समय जो केंद्र में यूपीए की सरकार थी, कांग्रेस के नेतृत्व की सरकार थी, अगर उसने अड़ंगा ना लगाया होता और हमारा सहयोग किया होता, तो यह पहले ही बन चुका होता। यह जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट दरअसल बहुजन समाज पार्टी की कल्पना है और उसने ही इसकी भूमिका तैयार की थी। उसने ही निर्माण के लिए पहल भी की थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आगरा एक्सप्रेसवे बना उसी तरह से यह भी अब तक बन चुका होता। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी कटाक्ष किए। उन्होंने कह समाजवादी पार्टी की सरकार आई 2012 में और उसने हमारी सरकार द्वारा शुरू किए गए जन कल्याण के कार्य गरीबों के उत्थान के लिए कार्य और योजनाएं बंद करने का उन्हें पलटने का नाम बदलने का काम किया। तमाम जो महापुरुषों के नाम पर हमने नगरों का नामकरण किया उन्हें बदल diya।
समाजवादी पार्टी सरकार ने दलित महापुरुषों के नाम हटा दिए गए और वह केवल बदले की भावना से ही काम करते रहे। इसके साथ ही मायावती ने जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही है वह सबसे आखिर में अपने ट्वीट में कही है।मायावती जी ने कहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मुद्दा भी अहम है और यह बनना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच की स्थापना की बात को भी बल दिया। यह दो मांगे बहुत लंबे समय से या कहा जाए तीन से चार दशक से चली आ रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच पश्चिम उत्तर प्रदेश में बने इसकी मांग तो लगभग 40 साल पुरानी है। लेकिन आज तक उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। बड़ा राज्य होने के कारण दो या तीन राज्य बनाने की बात भी बार-बार होती रही है। पश्चिम उत्तर प्रदेश अलग राज्य होना चाहिए। यह मांग कई मंचों से उठी लेकिन कभी भी प्रभावी रूप से इसकी ना तो पैरवी हो पाई और ना ही कोई दल इसे प्रभावी रूप से उठाने के लिए तैयार हो पाया। हां, यह बात जरूर है कि बीच-बीच में समय-समय पर हरित प्रदेश के नाम पर इस मांग को राष्ट्रीय लोकदल उठाता रहा। लेकिन अब राष्ट्रीय लोकदल भी इसके बारे में कोई बात नहीं करता।
मायावती जी की जब सरकार थी तो उन्होंने तीन बार पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग करके एक नया राज्य बनाने की और पूरे उत्तर प्रदेश के विभाजन की की मांग रखी थी। उन्होंने इसके लिए विधानसभा से प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार के पास भेजे भी थे। उन प्रस्तावों में पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ-साथ एक पूर्वांचल राज्य और बुंदेलखंड राज्य को अलग से बनाने की मांग की गई थी। लेकिन उस समय की केंद्र सरकारों ने इन प्रस्तावों पर भी कोई ध्यान नहीं दिया।
अब मायावती ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले इस मुद्दे को फिर से उठाकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है और यह उम्मीद भी जगा दी है पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों में कि उनको एक नया राज्य मिल सकता है अगर बहुजन समाज पार्टी का साथ दें तो। इसके साथ ही बुंदेलखंड में भी यह मांग उठती रही है कि अलग राज्य बने। पूर्वांचल में भी इसकी मांग होती रही है।
भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी चर्चा होती है। भारतीय जनता पार्टी भी यूं तो अलग राज्य के मुद्दे पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है। लेकिन उत्तर प्रदेश को अलग करने के लिए अभी तक कोई निर्णय नहीं ले सकी है। पश्चिम उत्तर प्रदेश अगर बनता है तो ये पश्चिम की जनता के लिए एक बड़ा ही लाभकारी और सुविधाजनक राज्य होगा क्योंकि उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की दूरी भी बहुत ज्यादा है। तमाम वादकारियों को इलाहाबाद पहुंचने में बहुत कष्ट होता है। तो यूं तो इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच संभवत नहीं मिलेगी जब तक कि राज्य नहीं बनेगा। जब राज्य बनेगा तो स्वाभाविक रूप से हर राज्य का एक हाई कोर्ट होता है और वह हाई कोर्ट फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश को स्वाभाविक रूप से मिल जाएगा। अब देखना पड़ेगा कि कितना समर्थन होता है। क्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता मायावती जी की इस मांग के साथ खड़ी होती है और इस मांग के साथ ही इसको बल मिलता है।
यह बात भी स्पष्ट है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग करने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी कभी भी साथ नहीं आई है। समाजवादी पार्टी नीतिगत रूप से यह मानती है कि राज्य का विभाजन उचित नहीं है। यह बात मुलायम सिंह यादव जी ने भी स्पष्ट कर दी थी कि वह राज्य के विभाजन के पक्ष में नहीं है। देखना है कि राज्य का विभाजन होता है या नहीं होता है या यह चुनावी मुद्दा बनकर रह जाएगा और अगर चुनावी मुद्दा बनेगा भी तो यह कितना प्रभावी मुद्दा बनेगा आने वाले विधानसभा चुनाव में। लेकिन बहन मायावती ने एक बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर बहस छेड़ दी चर्चा छेड़ दी है। इसके लिए जरूरी है, जनमानस तैयार हो। लोग खड़े हो और लोग इस मांग को प्रभावी रूप से उठाएं तब शायद राजनीतिक निर्णय हो सकता है।
सर्वेश कुमार सिंह
The demand for a separate state for western Uttar Pradesh has been raised once again by BSP president Mayawati. So the question has once again come up as to whether the issue of western Uttar Pradesh as a separate state will figure prominently in the Uttar Pradesh Assembly elections to be held in 2027 and whether it will be able to become a major issue.




