Editorial 27.05.2026 Wednesday by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News
सही समय पर उचित निर्णय है, जनसांख्यिकी परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति। यह समय की मांग है। भारत के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पिछले लगभग 5 दशक से जनसंख्या का धार्मिक और सामाजिक अनुपात गड़बड़ा रहा है, या कहा जा रहा है संतुलन बिगड़ रहा है। ये कई तरह से ही रहा है, घुसपैठ से, कुछ खास क्षेत्रों में रणनीतिक पलायन से, कुछ खास वर्गों और धार्मिक विश्वासों को अपनाने वाले समाज द्वारा सीमित परिवार की अवधारणा को नकार कर, आबादी बढ़ाने की सुनियोजित योजना के द्वारा। कुल मिलकर राज्यों, महानगरों, नगरों, कस्बों और गांवों में जनसांख्यिकी अनुपात तेजी से असंतुलित हो रहा है। इस स्थिति ने जहां कई तरह की आंतरिक सुरक्षा की समस्याएं खड़ी की हैं, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती खड़ी हुई है।
हमें इस तथ्य को स्पष्टता और दृढ़ता के साथ स्वीकारना चाहिए कि जम्मू और कश्मीर की समस्या सिर्फ और सिर्फ जनसांख्यिकी परिवर्तन का परिणाम है। वहां जब से हिन्दू अल्पसंख्यक हुए और मुस्लिम बहुसंख्यक कश्मीर में समस्याएं आने लगीं। पूर्वोत्तर की समस्याएं भी कुछ ऐसी ही हैं। चिंता की बात ये है कि क्षेत्र विशेष में जनसंख्या का धार्मिक अनुपात बदलने से आस्थाएं भी बदल रही है। अच्छी बात यह है कि भारत सरकार ने इस खतरे को समय रहते भांप लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस समारोह में लालकिले से इस पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने वहीं से घोषणा कर दी थी कि एक उच्च स्तरीय डेमोग्राफिक चेंज कमेटी बनेगी, जोकि इस परिवर्तन का अध्ययन करेगी और इसे रोकने के उपायों पर सुझाव देगी।
सरकार ने इस दिशा में सार्थक प्रयास करते हुए 11 सितंबर 2025 को ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक में समिति गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी। कल 26 मई को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने समिति की घोषणा कर दी। उन्होंने एक्स (पूर्ववर्ती ट्विटर) पर समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के नाम घोषित कर दिए। समिति सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में गठित हुई है। इसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यसचिव दुर्गाशंकर मिश्र, जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण, आईपीएस (सेवानिवृत) बाला जी श्रीवास्तव, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य डॉ शामिका रवि, और सदस्य सचिव ग्रह मंत्रालय के संयुक्त सचिव(विदेश मामले) को शामिल किया गया है। समिति एक वर्ष में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
इस समिति की संस्तुतियों पर भारत सरकार नीति बनाएगी और जनसांख्यिकी असंतुलन रोकने के प्रयास करेगी। ये न केवल सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, बल्कि भारत की सनातन चेतना को अक्षुण्ण बनाए रखने में भी सहायक होगी।







