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संघ का वक्तव्य

July 4, 2026

संघ का वक्तव्य

Editorial 04.07.2926 Saturday, By Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

श्रीराम मंदिर अयोध्या में चढ़ावा चोरी की घटना प्रकाश में आने के बाद पहली बार 3 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS का अधिकृत वक्तव्य जारी हुआ है। हालांकि वक्तव्य जारी होने में विलंब हुआ है। दुर्भाग्यपूर्ण घटना प्रकाश में आने के 26 दिन बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने वक्तव्य दिया है। संघ ने संतुलित और विधि के अनुसार अपना वक्तव्य जारी किया है। इसमें सम्पूर्ण हिंदू समाज की आस्था पर आघात को इंगित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि संघ का विश्वास उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल में है। इसके साथ ही दत्तात्रेय होसबाले जी ने यह भी कहा है कि जांच का आग्रह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ही किया था।

संघ ने ट्रस्ट से अपेक्षा की है कि वह समस्त व्यवस्थाओं को पूर्ण आध्यात्मिकता के वातावरण में ठीक से संचालित करेगा। इसमें मंदिर प्रबंधन और वित्तीय प्रबंधन को भी व्यवस्थित किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वक्तव्य में मंदिर निर्माण के लिए लंबे संघर्ष और बलिदान का भी उल्लेख है। संघ ने हिन्दू समाज और रामभक्तों से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपेक्षा की है। साथ ही कहा है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लाभ उठाकर हिन्दू विरोधी, राष्ट्र विरोधी शक्तियों के हिन्दू धर्म और समाज को बदनाम करने के षड्यंत्रों को विफल करें।

संघ ने काफी सोच विचार के बाद वक्तव्य जारी किया है। निश्चित ही इस पर संघ ने शीर्ष स्तर पर मंथन किया होगा। क्योंकि मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में संघ की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। इसलिए संघ का इस प्रकरण पर चिंतित होना स्वाभाविक है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से उन तत्वों को बल मिला है, जो कभी श्रीराम मंदिर और आंदोलन के विरोधी थे। वे अब समूचे आंदोलन और संघर्ष को बदनाम करना चाहते है। वे मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में पूर्ण मनोयोग से जुटे रहे विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट महासचिव चंपतराय जी के योगदान को भी नकारने और धूमिल करने को कोशिश में है। इतना ही नहीं इस घटना की आड़ में संघ विचार परिवार पर हमले किए जा रहे है। कुछ ऐसे तत्व सामने आए हैं जो नितांत मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। प्रचारक व्यवस्था पर आक्रमण किए जा रहे हैं। मंतव्य साफ है हिन्दू पुनर्जागरण का जो अभियान श्रीराम मंदिर निर्माण से शुरू हुआ है उसे किसी भी तरह रोका जाए। इस पूरे आंदोलन को बदनाम कर देने से शेष दो धर्म स्थलों की मुक्ति की लड़ाई प्रभावित हो सकती है। साथ ही देश में एक ऐसा विमर्श बनाने का षडयंत्र है कि भारत में मंदिरों के पुजारी और व्यवस्थापक भ्रष्ट हैं, ताकि धर्मस्थलों में हिंदू समाज की आस्था को कमजोर किया जा सके।

विशेष जांच दल की अंतिम आख्या आने के बाद समाज को व्यवस्थित ढंग से तथ्यों से अवगत कराने के लिए वृहद अभियान की आवश्यकता पड़ेगी।

Statement of the Sangh

An official statement of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) has been issued on 3 July for the first time after the incident of theft of offerings in Shri Ram Mandir Ayodhya came to light. However, the release of the statement has been delayed. 26 days after the unfortunate incident came to light, Dattatreya Hosabale ji, the Sarkaryavah of the Sangh has given a statement. The Union has issued its statement in a balanced and lawful manner. It indicates an attack on the faith of the entire Hindu society. It has also made it clear that the Sangh has faith in the Special Investigation Team set up by the Uttar Pradesh government. Along with this, Dattatreya Hosabale has also said that the investigation was requested by the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust itself. The Sangh expects the Trust to conduct all the arrangements properly in an atmosphere of complete spirituality. It will also systematize temple management and financial management. The statement of the Rashtriya Swayamsevak Sangh also mentions the long struggle and sacrifice for the construction of the temple. The Sangh expects the Hindu society and Ram bhakts to maintain patience and restraint. It is also said that take advantage of this unfortunate incident to foil the conspiracies of anti-Hindu, anti-national forces to defame Hindu Dharma and society. The association has issued a statement after much deliberation. The Sangh must have brainstormed on this at the highest level. Because the Sangh has had a direct and indirect role in the temple movement and temple construction. It is, therefore, natural for the Sangh to be concerned about this episode.

June 26, 2026

चढ़ावा चोरी पर एफआईआर 

Editorial

Editorial 26.06.2026 By Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर बने भव्य दिव्य मंदिर से चढ़ावा चोरी की घटना अत्यंत कष्टकारी और स्तब्ध करने वाली है। ये बात कल्पना से भी बाहर है कि कोई सनातन समाज का व्यक्ति ही सपने आराध्य को अर्पित श्रद्धालुओं के अर्पण को चुरा लेगा। लेकिन ऐसा हुआ, ये दुर्भाग्यपूर्ण और समस्त हिन्दू समाज को लज्जित करने वाला है। मामले में गुरुवार (25 जून) को एफआईआर दर्ज हो गई है। सभी 8 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अयोध्या कोतवाली में दर्ज एफआईआर में चोरी, संगठित अपराध, धोखाधड़ी की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। मामले की जांच विशेष जांच दल ने की थी। इसकी अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की। एसआईटी का गठन 13 जून को हुआ और 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत हो गई। एसआईटी का गठन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर प्रदेश सरकार ने किया था।

यह प्रकरण 7 जून को चर्चा में आया, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे से 7 करोड़ की चोरी हुई है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट को पहले ही गड़बड़ का शक हो गया था और आंतरिक जांच की शुरुआत कर दी गई थी। यह बात ही अखिलेश यादव तक पहुंची और उन्होंने इसमें धनराशि का उल्लेख अपनी तरफ से कर दिया। उन्हें एक मौका मिल गया कि वे संघ, विहिप और राममंदिर आंदोलन को बदनाम कर सके तथा 2027 के चुनाव में इस मुद्दे को भुना सकें। वे बार बार प्रभुश्रीराम के दान चोरी की बात कर रहे है अब भगवान श्रीराम में उनकी अगाध श्रद्धा उमड़ रही है, लेकिन मंदिर बनने से लेकर आजतक प्रभु के दर्शन को नहीं गए। खैर वे राजनीतिज्ञ है और राजनीतिक नफा नुकसान की दृष्टि से ही मुद्दों को देखेंगे।

अब मामला एफआईआर तक पहुंच गया है। एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट भी शीघ्र आ जाएगी। लेकिन मुख्य प्रश्न ये है कि मंदिर की व्यवस्था में फिर कोई सेंधमारी न हो, ये प्रबंध कैसे हों। इसका एक उपाय तो श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी) ने बताया है। उनका सुझाव है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंध की व्यवस्था के लिए किसी अधिकारी को विशेष कार्याधिकारी या मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया जाय। दूसरा सुझाव विश्व हिंदू परिषद के कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार ने दिया है। उनका कहना है कि मंदिर का प्रबंध केवल आस्था से नहीं हो सकता। इसके लिए एक विस्तृत एस ओ पी की जरूरत है। एक विशेष मानक संचालन प्रणाली बनानी होगी। इसके लिए अनुभवी लोगों का सहयोग लेना होगा। इन दोनों सुझावों पर निर्णय अंतिम रूप से ट्रस्ट की कार्यकारिणी को लेना है। हिंदू समाज की चिंता सब ये है कि कोई भी उपाय किया जाए। कोई भी व्यवस्था हो, वह त्रुटिरहित और आस्था को संरक्षण देनी वाली हो। फिर कोई ऐसा समाचार नहीं मिले जो श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचा सके। इसी से जुड़ा प्रश्न विश्व हिंदू परिषद और मंदिर आंदोलन की साख को बचाने का भी है। पांच सौ साल के संघर्ष का तेज और 40 साल के आंदोलन की प्रतिष्ठा भी बची रहनी चाहिए। अगर ये धूमिल हुई तो शेष दो धर्म स्थल काशी और मथुरा की आकांक्षा प्रभावित हो सकती है।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

June 23, 2026

लापरवाही की आग

Editorial 22.06.2026 MONDAY  by Sarvesh Kumar Singh Editor, UP Web News 

सम्पादकीय/सर्वेश कुमार सिंह 

लखनऊ में भयावह अग्निकांड हुआ है। सोमवार की अपरान्ह एक घण्टे के भीतर दावानल बने एनिमेशन कोचिंग सेंटर में 15 छात्र छात्राओं की असमय मृत्यु हो गई। किसी को बचने और निकलने का रास्ता नहीं मिला। फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंची। बिल्डिंग में आपातकाली बचाव के कोई उपाय नहीं थे। अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं था। मानक विपरीत बनी बिल्डिंग में चल रही थीं व्यवसायिक गतिविधियां। ये सब ऐसे कारण हैं जो 15 बच्चों के लिए काल बन गए। आग की सूचना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में कार्यक्रम निरस्त करके लखनऊ दौडे चले आये। रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह तत्काल सभी कार्यक्रम छोड़ कर दिल्ली से लखनऊ रात में ही आ गए। लेकिन, ये जब पहुंचे तो सिर्फ इनके पास शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। कर भी क्या सकते थे, 15 जीवन तो वापस नहीं ला सकते। वे तो अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ चुके थे। राजधानी के 15 परिवारों की खुशियां, उनके सपने टूट गए। परिवार बिखऱ गए, उनके होनहार असमय ही भविष्य की सीडिय़ां चढ़ते हुए टूट गए, काल के गाल में समा गए।

राजधानी के जिस अलीगंज इलाके के पुरनिया चौराहे के पास यह अग्निकांड हुआ,वह व्यस्ततम क्षेत्र है। यहां आबादी के बीच ही मार्केट स्थापित है। बगैर किसी मानक के सैकड़ों दुकानें, आफिस, शोरूम और कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। किसी के पास कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं हैं। आवासीय भवनों और आवासीय भूखण्डों पर व्यवसायिक गतिविधियां चलती हैं, व्यवसायिक काम्पलेक्स बन गए हैं। लापरवाही की हालत यह है कि आवासीय भवनों में बिजली विभाग ने व्यवसायिक कनेक्शन दे दिये हैं। जिस एनीमेशन सेंटर के कोचिंग में आग लगी है। उसके नीचे पेट शाप है। गोदाम है, पहली मंजिल पर कोचिंग और दूसरी पर लायब्रेरी है। लेकिन, फायर विभाग ने कभी भी यहां आकर सत्यापन की कोशिश नहीं की थी। अगर की होती तो आज 15 घरों में अंधेरा न होता।

दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में लगी आग में एक महीना पहले ही 21 लोगों की मृत्यु हुई। इससे सबक लेने के की कोई कोशिश नहीं हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिये थे, लेकिन विभाग की नींद नहीं टूटी और 15 बच्चे कभी न टूटने वाली नींद में सो गए। लापरवाही कई स्तर पर हुई है। सरकारी विभागों से लेकर निजी स्तर तक। जहां सरकारी विभागों की सतर्कता की जिम्मेदारी है वहीं निजी संस्थान, दुकान, काम्पलेक्स के स्वामियों की भी जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षा मानक पूरे करें। तकनीक का इस्तेमाल करें लेकिन, उसके खतरों से भी आगाह रहें। उसके उपायों पर भी विचार करके समाधान खोज कर रखें। इस अग्निकांड में एक बात महत्वपूर्ण सामने आयी है वह यह कि जब आग लगी तो एनिमेशन सेंटर के बायोमेट्रिक से खुलने वाले दरवाजे आग के बाद स्वतः सील हो गए। इससे बच्चे बाहर नहीं निकल सके। इसके साथ ही कोचिंग चलाने वालों ने छत की तरफ जाने वाला दरवाजा भी लाक किया हुआ था। इससे छात्र छात्राएं छत की तरफ नहीं भाग सके, ताकि उन्हें सांस मिल सकती। ऐसी स्थिति में वे कमरे में ही लाक हो गए, कुछ छात्र बाथरूम में घुस गए। लेकिन आग और उसके धुंये ने 15 बच्चों की सांसें रोक दीं। कुछ बच्चों ने कोशिश करके बिडों के शीशे तोड़ लिये और वे साहस करके दूसरी मंजिल से नीचे कूद गए। इससे उन्हें चोटें लगीं, कई को गंभीर चोट लगी। फ्रेक्चर हुए लेकिन कुछ बच्चों की जान बच गई. ऐसे नौ छात्र ट्रामा सेंटर में भर्ती कराये गए। घटना स्थल का दृश्य इतना भयावह था कि उसे देखकर कोई भी संयत नहीं रह सका, सबकी आंखों में आंसू थे। अभिभावकों की चीख पुकारें और विलाप ने अत्यधिक कष्टकारी दृश्य उत्पन्न किया। अब सरकार ने चार अधिकारियों को निलंबित किया है। कुछ दोषियों की गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन यह सरकारी कार्रवाई है जो होनी है , लेकिन वे जानें नहीं लौट सकतीं जो भविष्य की कल्पना संजो के इस कोचिंग सेंटर पर आयी थीं। सरकार प्रशासन और समाज सजग हो जाए और भविष्य के लिए कोई ऐसी व्यवस्था बना ले कि फिर किसी निर्दोष की जान न जाए।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

June 22, 2026

योग की महत्ता

Editorial 22 June 2026 Monday, Topic Inpotance of Yoga, by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

भारतीय ज्ञान परंपरा द्वारा प्रतिपादित योग ने 21 जून का दिन अमृत तुल्य निधि से आच्छादित किया। विश्व भर में बड़े ही उत्साह के साथ योग दिवस मनाया गया। भारत के कोने कोने में जहां योग दिवस की धूम रही, वहीं विश्व के सभी प्रमुख देशों की राजधानियों और शहरों में योग किया गया। पार्कों, क्लबों में योग की विभिन्न मुद्राओं के चित्र आज समाचार पत्रों, सोशल मीडिया में देखे जा सकते है। जर्मनी के बर्लिन और चीन के शंघाई जैसे शहरों में भी योग की गूंज सुनाई दी।

मानव जीवन के लिए योग की महत्ता को आज विश्व स्वीकार कर रहा है। स्वस्थ्य शरीर और शांत चित्त के लिए योग इतर कोई और श्रेष्ठ मार्ग नहीं है। यौगिक जीवन कर्मप्रधान व्यक्तिव का निर्माण करता है। योगी राज कृष्ण ने अपनी वाणी में कहा है, श्रीमद्भगदगीता में योग को कुशलता से किया जाने वाला कर्म कहा है। उन्होंने अर्जुन से कहा था “योग: कर्मसुकौशलम”। ध्यान योग की व्याख्या करते हुए सांख्य दर्शन के प्रतिपदक महर्षि कपिल ने बताया कि “ध्यान निर्विषयम मन:”। यानि कि मन के विषय रहित होने की स्थिति ध्यान योग है। इससे चित्त की एकाग्रता आती है। मन के संयम और चित्तवृत्तियां को नियंत्रित करने के लिए, महर्षि पतंजलि ने कहा “योगस्स  चित्तवृत्ति निरोध:”।

कल योग दिवस पर प्रधानमंत्री ने कोलकाता के रेडरोड पर योग किया। हजारों लोगों के बीच उन्होंने योग का संदेश भी दिया और सामूहिक योग में सम्मिलित हुए। इसके एक दिन पहले हुगली में उन्होंने योग के लिए बंगाल की देन का उल्लेख करते हुए स्वामी विवेकानंद, परमहंस योगानंद, रामकृष्ण परमहंस, लाहिड़ी महाराज का स्मरण किया। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी के ऐतिहासिक किला मैदान में योग किया।

योग की महत्ता जीवन को निरोग, दीर्घायु बनाने में सर्वोपरि है। इसीलिए इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। प्रथम विश्व योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया। तब से निरंतर योग अपनाने वालों की विश्व संख्या बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 दिसंबर 2014 को सर्वसम्मति से 21 जून का दिन विश्व योग दिवस घोषित किया था। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। जिसे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69बे अधिवेशन में प्रस्तुत किया था।

योग भारत के विश्व शांति और सर्वेभवन्तु सुखिन: के संदेश का शाश्वत, चिरंतर और निरंतर का ही प्रकटीकरण है।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

 

June 17, 2026

पाक अधिकृत कश्मीर में हस्तक्षेप की जरूरत

Editorial 17.06.2026 Sunday by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News 

एक पखवाड़े से पाकिस्तान के बलात कब्जे वाला कश्मीर अशांत है। पुलिस और पाकिसनी रेंजरों की क्रूर और दमनात्मक कार्रवाई से अब तक 53 नागरिक मरे जा चुके है। दमन चक्र इसके बाद भी जारी है। कश्मीर के इस हिस्से के लोग जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएसी) के नेतृत्व में आंदोलनरत है। हम भारतवासी और हमारी सरकार का स्पष्ट मत है और यह तथ्यात्मक सच्चाई भी है कि संपूर्ण जम्मू कश्मीर, लद्दाख क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है। हम संयुक्त राष्ट्र महासभा में अनेक बार पाकिस्तान को इस विषय पर लताड़ चुके है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थाई प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान को फिर इस मुद्दे पर लताड़ा था। जब पाकिस्तान ने कश्मीर का राग अलाप दिया था।  भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पीओके में हो रहीं घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने हिंसा और दमन की निंदा की तथा खा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ये सब देख रहा है।  ये बयान मात्र औपचारिकता है। वास्तव में पाक अधिकृत कश्मीर के नागरिकों को भारत से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा है। उनकी उम्मीद की किरण सिर्फ भारत है। आखिर जब समूचा जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो वहां के नागरिक भी भारतीय है। उनकी रक्षा करना हमारा धर्म है। इस धर्म को निभाने के लिए हमें सक्रिय हस्तक्षेप करना चाहिए। 

पाकिस्तान इस क्षेत्र की शासन व्यवस्था बदलना चाहता है। वह इस इलाके की सरकार को हटाकर सीधे इस्लामाबाद का नियंत्रण चाहता है। एक तरह से पूरा शासन सैन्य सरकार के रूप में स्थापित करने के प्रयास में है। पाक अधिकृत कश्मीर बेहद गरीबी,बेरोजगारी की मार झेल रहा है। मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है। पाकिस्तान ने इस 78 हजार वर्ग किमी के क्षेत्र पर कब्जा तो कर लिया पर इसका विकास नहीं किया। शिक्षा,सड़क,उद्योग सभी का अभाव है। इन मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर और जुलाई के चुनाव के विरोध में ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी आंदोलनरत है। पाकिस्तान के कब्जे के बाद इस क्षेत्र के लिए ऐसा कानून बनाया गया, जिससे विधान सभा में बाहरी हस्तक्षेप बना रहे। यहां की विधानसभा में 45 सीटे है इन्हें 12 शरणार्थियों के लिए आरक्षित है। इन सीटों पर मनोनयन करके पाकिस्तान सरकार अन्य प्रांतों और गैर कश्मीरियों को घुसा देती है। इससे यहां के लोगों में भारी आक्रोश है। आंदोलन का एक मुख्य मुद्दा ये भी है। 

जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी पर पाकिस्तान ने प्रतिबंध लगा दिया है। इसे आतंकवाद विरोधी कानून में प्रतिबंधित किया है। इस संगठन ने गत मंगलवार को लॉक डाउन का आह्वान किया था। इसके एक दिन पहले 8 जून को ही पुलिस ने रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी, जिससे 11 लोग मौके पर ही मारे गए और 50 लोग घायल हुए। अभी तक एक सप्ताह में 53 निर्दोष लोग पुलिस ने मार दिए हैं। पिछले साल अक्टूबर 2025 में प्रदर्शन में 6 लोग मारे गए। मई 2924 में लांग मार्च के दौरान भी पुलिस ने गोली चलाई इसमें 3 लोगों की मृत्यु हुई। पाकिस्तान के सुरक्षा बल कश्मीरियों को विदेशी मानकर उनका जनसंहार कर रहे है। उन्हें उनके जान मॉल से कोई सहानुभूति नहीं है। क्योंकि वे मानते है कि ये सब भारतीय ही है।

ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। अत: पाक अधिकृत कश्मीर के भारतीय नागरिकों को नैतिक समर्थन के साथ साथ, प्रत्यक्ष और सार्थक समर्थन भी दिया जाय। आवश्यकता सीधे हस्तक्षेप कर अपना कश्मीर वापस लेने की है। 

 

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