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उचित निर्णय

July 26, 2026

उचित निर्णय

Editorial 26.07.2026 Time 10.21 AM, Sunday, by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र पूर्णतः उचित और समझदारी का निर्णय है। इसे दवाब में लिया गया निर्णय कहकर एक वर्ग द्वारा प्रचारित किया जा रहा है। वस्तुत: यह दवाब में लिया गया निर्णय नहीं अपितु युवाओं की वाणी और भावनाओं का सम्मान है। इस निर्णय को इस रूप में भी नहीं देखना चाहिए कि सरकार झुक गई। सरकार लोकतंत्र, लोकतांत्रिक मूल्यों और असहमति की भावना का सम्मान करती स्पष्ट दिखाई दी है।

यह बात बिल्कुल सही है कि 3 मई को हुई नीट परीक्षा का पेपर लीक के बाद जब 12 मई को इसे रद्द किया गया तो लाखों परीक्षार्थियों के सपने टूटे। वे आहत हुए, सदमे में आए, भविष्य के लिए चिंतित हुए। इसी अवसाद की स्थिति में एक दर्जन से अधिक परीक्षार्थियों ने आत्म हत्या कर ली। ये इस प्रकरण का दुखद पहलू है। इसके बाद पूरे देश की भावनाएं इस प्रकरण से जुड़ गईं। परीक्षार्थियों से सहानुभूति हो गई।

ये भावनात्मक लगाव और सहानुभूति ही कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को ऊर्जा देने वाले साबित हुए। कॉकरोच जनता पार्टी और उसके संस्थापकों ने मात्र एक माह 19 दिन में आंदोलन को सफलता के शिखर पर पहुंचा दिया। कल 25 जुलाई को इनकी सभी मांगें मान ली गईं। ये आंदोलन की उपलब्धि है। मोदी सरकार के 12 साल में ये दूसरा और सबसे कम समय चला पहला आंदोलन है जो अपनी मांगें मनवाने के बाद ही समाप्त हुआ है। पहला ऐसा आंदोलन किसानों का था। जिसमें तीन कृषि कानूनों को सरकार ने अधिसूचित करने के बाद वापस लिया था।

दोनों आंदोलनों में दो बातें समान हैं। पहली ये कि आंदोलनकारियों द्वारा बार बार पुलिस को उकसाया गया, ऐसे हालात पैदा किए गए की पुलिस संयम तोड़ दे और अधिकतम बल प्रयोग करे। याद है 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर किसान आंदोलन में घुसे पंजाब के कुछ युवाओं ने लालकिले पर राष्ट्रीय ध्वज हटा दिया था और निशान साहिब स्थापित कर दिए थे। वहां तक किसान ट्रैक्टर लेकर पहुंचे थे, पुलिस जवानों को रौंदने की कोशिश हुई थी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने संयम दिखाया था। अन्यथा हालत ऐसे थे कि लालकिले की सुरक्षा के लिए पुलिस बल गोली भी चला सकते थे। लेकिन पुलिस ने सूझबूझ का परिचय दिया। हालांकि कुछ तत्व यही चाहते थे कि पुलिस संयम खो दे और विश्व में भारत की छवि को खराब करे तथा देश में माहौल बिगाड़ दें।

यही बात सीजेपी के आंदोलन में भी हुई। संसद मार्च के लिए 20 जुलाई,ठीक उसी दिन का चयन हुआ, जिस दिन संसद का मानसून सत्र शुरू होना था। जंतर मंतर पर धरना चल रहा था। इससे सरकार या दिल्ली पुलिस को कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन जब संसद मार्च हुआ तो इसमें गैर छात्रों और राजनीतिक विचार के युवाओं और कुछ अधेड़ उम्र के लोगों की घुसपैठ हो गई। ये हर हाल में माहौल बिगाड़ने पर आमादा थे। संसद कूच में इन लोगों ने दो बेरीकेड तोड़ दिए, तीसरे को तोड़कर संसद पहुंचना चाहते थे। जहां मानसून सत्र शुरू हुआ था। इनकी योजना संसद भवन में घुसने की थी, ताकि पुलिस नेपाल की तरह अधिकतम बल प्रयोग कर दे, यानि फायरिंग हो जाए। लेकिन पुलिस ने इन्हें जब तीसरे बैरिकेड पर रोका तो ये पुलिस से भिड़ गए। यहां पुलिस पर पथराव हुआ। पुलिस जवानों को पीटा गया, हमले किए गए। जवाब में पुलिस ने लाठी चार्ज किया। इस पूरे टकराव में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। आंदोलनकारी भी घायल हुए। पुलिस ने उतना ही बल प्रयोग किया जितना सामान्य रूप से किसी भी जुलूस या मार्च को संसद जाने से रोकने के लिए किया जाता है। यहां भी पुलिस ने संयम दिखाया, अन्यथा हालात बहुत खराब हो सकते थे।

दोनों आंदोलनों में दूसरी समान बात ये है कि सरकार ने मांगे मानने के लिए उस खुफिया इनपुट को महत्व दिया, जिसमें बताया गया कि आंदोलन में बाहरी हस्तक्षेप हो गया है। बाहरी और देशविरोधी शक्तियां आंदोलन को उग्र करके अशांति पैदा करना चाहती हैं। ये तत्व चिन्हित भी किए गए, जो आंदोलन को बैक डोर से सपोर्ट कर रहे थे। दोनों आंदोलनों में मांगों से अधिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निशाना बनाने की भरसक कोशिश हुई।

शिक्षा मंत्री पद से त्यागपत्र देते समय धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया कि वे राष्ट्रवाद की भावना से प्रेरित होकर त्यागपत्र दे रहे हैं। आंदोलन के नाम पर कुछ लोग अशांति पैदा कर सकते है। दूसरी तरफ आंदोलन समाप्ति पर देश भर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं हुई हैं सभी ने त्यागपत्र और आंदोलन समाप्ति को उचित बताया है। लेकिन ये युवाओं की अच्छी छवि लेकर समाप्त नहीं हुआ। आंदोलन में अश्लील भाषा, अश्लील पोस्टर और अभद्रता, आक्रामकता, पत्रकारों पर हमले की घटनाएं हुई, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए शोभा नहीं देती हैं। इस पहलू पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को विचार करना चाहिए। भविष्य की राजनीति के लिए वे ऐसे तत्वों से दूरी बना लें, तो बेहतर होगा। क्योंकि अभिजीत दीपके को अंततः राजनीति ही करनी है।

The resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan is entirely appropriate and prudent. It is being propagated by a section as a decision taken under pressure. In fact, it is not a decision taken under pressure but out of respect for the voice and sentiments of the youth. This decision should also not be seen as the government bowing down. The government has been clear in respecting democracy, democratic values and the spirit of dissent.

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

 

July 14, 2026

वर्तमान विश्व परिदृश्य और भारत

Editorial

Editorial 14.07.2026 Tuesday Time 11.16 AM, by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

वर्तमान विश्व परिदृश्य अशांति का है, देशों के बीच युद्ध का है, अथवा युद्ध की तैयारियों का है। इस परिदृश्य, अविश्वसनीय विश्व नेताओं के आक्रामक रवैए के बीच आज भारत की भूमिका और महत्ता क्या है? यह चर्चा का विषय है।

भारत को विश्व शांति और समृद्धि की कामना का संदेश देने वाले राष्ट्र के रूप में स्वीकारा गया है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया:’ ये हमारा विश्व दृष्टिकोण है। हम अपनी विशाल जनसंख्या और प्रचुर संसाधनों के बाद भी संयमित और संतुलित विश्व दृष्टिकोण रखते हैं। इस उदार और मैत्रीपूर्ण भावना के बावजूद हमारे तीन पड़ोसी हमसे ईर्ष्या, शत्रुता और कटुता का व्यवहार रखते हैं। ये तीनों चीन,पाकिस्तान और बांग्लादेश हैं। इनकी समस्या ये है कि इन्हें भारत की चतुर्दिक प्रगति अच्छी नहीं लगती। चीन भारत की अगले दो दशक यानि कि 2047 के विकसित भारत के परिदृश्य से आशंकित और चिंतित है। उसे लगता है कि विज्ञान, तकनीक, कृषि और सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के बल पर भारत उससे कहीं आगे न निकल जाए। रक्षा उत्पादन में जिस गति से भारत आगे बढ़ रहा है वह चीन की नींद उड़ाए हुए है। दूसरा पड़ोसी पाकिस्तान जन्मजात शत्रुता से ग्रसित है। वह इस्लाम के नाम पर भारत को अशांत करने की कोशिश करता रहता है। इसकी जिहादी मानसिकता से ग्रसित सेना इसके लिए खुद समस्या बनी हुई है, जिसने कभी भी पाकिस्तान में लोकतंत्र की जड़ें नहीं जमने दीं । यहां के नेता जब तक सेना के हाथ की कठपुतली बने रहते हैं तब तक सुरक्षित रहते हैं। अन्यथा जेल में या फिर कब्र में भेज दिए जाते है। भारत के लिए इससे कोई खतरा नहीं है, लेकिन पड़ोस में एक अस्थिर और अशांत देश होना असहज अवश्य करता है। तीसरा पड़ोसी मित्र से शत्रुता की ओर बढ़ रहा बांग्लादेश है। इसने यह साबित कर दिया है कि इनके लिए कुछ भी कर दो, किंतु ये आपके नहीं हो सकते। इन्हें अपने एजेंडे पर ही चलना है। इस पड़ोसी ने भारतीय जनमानस और अपने देश के हिंदुओं को जो दंश दिया है वह बुलाया नहीं जा सकता। यहां 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद जो हुआ उसने मित्र राष्ट्र नमक शब्द को कलंकित कर दिया।

इस पड़ोसी परिदृश्य के बावजूद भारत का विश्व में महत्व बना हुआ है। यूरोप, खाड़ी के देश, मध्य पूर्व, कनाडा के साथ भारत की मित्रता प्रगाढ़ हो रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत दो महीने के भीतर इन देशों की यात्रा की। वहां जो स्वागत हुआ, विभिन्न क्षेत्रों में सहमति बनी, समझौते हुए। ये भारत की विश्व महत्ता को प्रमाणित करते हैं। भारत से यूपीआई तकनीक साझा करने के लिए समझौते हो रहे हैं। ब्रह्मोस मिसाइल प्राप्त करने के लिए कई देश प्रयासरत है। भारत के साथ यूरोप, कनाडा और अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते कर रहे है। ये परिदृश्य भी भारत की महत्ता को दर्शाता है।

अमेरिका, इसराइल और ईरान युद्ध ने विश्व के समक्ष ऊर्जा संकट खड़ा किया। किंतु भारत ने अपनी महत्ता के बल पर ही वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया। लेकिन भारत के सामने आंतरिक चुनौती हर समय रहती है। ये चुनौती वे तत्व खड़ी करते हैं जो अपनी विफल राजनीति के कारण भारत की हर पहल का विरोध करते हैं या नकारात्मक वातावरण बना कर देश विरोधियों को बल देते हैं। ऐसे तत्वों के साथ कठोरता की आवश्यकता है।

The current world scenario and India

the current world scenario is of unrest, of war between countries, or preparations for war. In this scenario, what is the role and importance of India today in the face of the aggressive attitude of unreliable world leaders? This is a matter of debate. India has been acknowledged as a nation that conveys the desire for world peace and prosperity. Sarve Bhavantu Sukhinah Sarve Santu Niramayah: “This is our world view. We maintain a restrained and balanced world view despite our large population and abundant resources. Despite this generous and friendly spirit, we are treated with envy, hostility and bitterness by our three neighbours. These three are China, Pakistan and Bangladesh. Their problem is that they do not like the all-round progress of India. China is apprehensive and concerned about India’s developed India scenario in the next two decades ie2047. It feels that with science, technology, agriculture and a strong economy, India should not be outdone. The pace at which India is advancing in defence production is giving sleepless nights to China. The other neighbour, Pakistan, is plagued by innate hostility. He keeps trying to disturb India in the name of Islam. Its jihadi-minded army has been a problem for it, which has never allowed democracy to take root in Pakistan. Its leaders are safe as long as they remain puppets in the hands of the military. Otherwise, they are sent to prison or to the grave. It poses no threat to India, but being an unstable and troubled country in the neighbourhood does make it uncomfortable. The third neighbour is Bangladesh, moving from friend to foe.

It has proven that do anything for them, but they cannot be yours. They have to follow their own agenda. What this neighbour has done to the Indian people and to the Hindus of his country cannot be called. What happened here after the change of power in 2024 tarnished the term friendly nation salt. Despite this neighbourhood scenario, India continues to be important in the world. India’s friendship with Europe, the Gulf countries, the Middle East, Canada is deepening. Indian Prime Minister Narendra Modi visited these countries within the last two months. The reception that took place there, consensus was reached in different areas, agreements were reached. These attest to India’s global importance. Agreements are in place to share UPI technology with India. Several countries are trying to acquire the BrahMos missile. Europe, Canada, and the United States have free trade agreements with India. This scenario also shows the importance of India. The US, Israel, and Iran war created an energy crisis before the world. But India met its energy needs from alternative sources only on the strength of its importance. But India faces an internal challenge all the time. These challenges create elements that oppose every initiative of India due to their failed politics or give strength to the anti-nationals by creating a negative atmosphere. Rigidity is required with such elements.

July 13, 2026

दागी होती वर्दी

Editorial

Editorial 13.07.2026 by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

खाकी की जिम्मेदारी सुरक्षा, संरक्षण और जनसहयोग की है। लेकिन हाल के दिनों में खाकी को दागी करने वाले तत्व इसमें घुस गए हैं। इससे इसकी पहचान भय पैदा करने वाले समूह की बन रही है। हालांकि अनेक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करने वाले भी पुलिसकर्मी हैं। लेकिन कुछ लोग अपने कारनामों से इस बल को बदनाम कर रहे हैं। ताजा उदाहरण आगरा और झांसी के हैं, जहां वर्दी दागी हो गई। झांसी जहां पुलिस वर्दी पहने जवान लुटेरे बन गए, वहीं आगरा में रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने अनुशासनहीनता और अपराधी प्रवृति का परिचय देकर अपने बल को शर्मसार कर दिया।

गुरुवार को झांसी में 6 लोगों ने सूरत के व्यवसाई जितेंद्र पटेल के मुंशी किशन पांचाल को लूट लिया। उनसे 24 लाख 90 हजार रुपए लूटे गए। किशन पांचाल व्यवसाई की सूखे मेवे की बिक्री के पैसों की उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में वसूली करते हैं। मामले की जांच में सामने आया कि लूटपाट करने वाले जालौन पुलिस लाइन में तैनात 3 सिपाही हैं। तीनों को हिरासत में लिया गया और एसपी जालौन ने तत्काल निलंबित कर दिया। इनके तीन अन्य साथियों की तलाश जारी है।

उधर रविवार को सुबह आगरा कैंट स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने स्टेशन पर उप स्टेशन अधीक्षक को पीट दिया। उन्हें जमीन पर घसीटते हुए आरपीएफ पोस्ट में ले गए। स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर ने एक महिला यात्री की सुविधा के लिए अमृतसर एक्सप्रेस को स्टार्ट होने के बाद रुकवा दिया था। इससे नाराज होकर आरपीएफ जवानों ने महिला यात्री पर पहले चैन पुलिंग का आरोप लगाया और 1000 रुपए वसूल लिए। फिर स्टेशन उप अधीक्षक से अभद्रता की। उनके ये कहने पर कि ट्रेन उन्होंने यात्री की मदद के लिए रुकवाई थी। इससे नाराज सिपाहियों ने पहले स्टेशन पर ही नरेंद्र सिंह चाहर को पिता फिर घसीटते हुए अपनी पोस्ट में ले गए। वहां भी उनको पिता गया। इस पूरी घटना का यात्रियों ने वीडियो बना लिया और वायरल कर दिया। इसके बाद तत्काल कारवाई हुई और दो सहायक उप निरीक्षक और दो कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ जीआरपी थाने ने एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है। इन दोनों घटनाओं से पुलिस और आरपीएफ की बहुत बदनामी हुई है। लोगों में पुलिस बल के प्रति विश्वास कम हो रहा है। बल्कि भय बढ़ रहा है। आम आदमी यह सोचने पर मजबूर है कि खाकी पहने लोग उनकी सुरक्षा के लिए हैं या उत्पीड़न के लिए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को जवानों की अनुशासनतीनता की प्रवृत्ति और आपराधिक मानसिकता पर अंकुश लगाने के लिए उपाय खोजने होंगे। इन दोनों मामलों में कड़ी करवाई भी होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

July 4, 2026

संघ का वक्तव्य

Editorial 04.07.2926 Saturday, By Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

श्रीराम मंदिर अयोध्या में चढ़ावा चोरी की घटना प्रकाश में आने के बाद पहली बार 3 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS का अधिकृत वक्तव्य जारी हुआ है। हालांकि वक्तव्य जारी होने में विलंब हुआ है। दुर्भाग्यपूर्ण घटना प्रकाश में आने के 26 दिन बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने वक्तव्य दिया है। संघ ने संतुलित और विधि के अनुसार अपना वक्तव्य जारी किया है। इसमें सम्पूर्ण हिंदू समाज की आस्था पर आघात को इंगित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि संघ का विश्वास उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल में है। इसके साथ ही दत्तात्रेय होसबाले जी ने यह भी कहा है कि जांच का आग्रह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ही किया था।

संघ ने ट्रस्ट से अपेक्षा की है कि वह समस्त व्यवस्थाओं को पूर्ण आध्यात्मिकता के वातावरण में ठीक से संचालित करेगा। इसमें मंदिर प्रबंधन और वित्तीय प्रबंधन को भी व्यवस्थित किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वक्तव्य में मंदिर निर्माण के लिए लंबे संघर्ष और बलिदान का भी उल्लेख है। संघ ने हिन्दू समाज और रामभक्तों से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपेक्षा की है। साथ ही कहा है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लाभ उठाकर हिन्दू विरोधी, राष्ट्र विरोधी शक्तियों के हिन्दू धर्म और समाज को बदनाम करने के षड्यंत्रों को विफल करें।

संघ ने काफी सोच विचार के बाद वक्तव्य जारी किया है। निश्चित ही इस पर संघ ने शीर्ष स्तर पर मंथन किया होगा। क्योंकि मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में संघ की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। इसलिए संघ का इस प्रकरण पर चिंतित होना स्वाभाविक है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से उन तत्वों को बल मिला है, जो कभी श्रीराम मंदिर और आंदोलन के विरोधी थे। वे अब समूचे आंदोलन और संघर्ष को बदनाम करना चाहते है। वे मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में पूर्ण मनोयोग से जुटे रहे विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट महासचिव चंपतराय जी के योगदान को भी नकारने और धूमिल करने को कोशिश में है। इतना ही नहीं इस घटना की आड़ में संघ विचार परिवार पर हमले किए जा रहे है। कुछ ऐसे तत्व सामने आए हैं जो नितांत मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। प्रचारक व्यवस्था पर आक्रमण किए जा रहे हैं। मंतव्य साफ है हिन्दू पुनर्जागरण का जो अभियान श्रीराम मंदिर निर्माण से शुरू हुआ है उसे किसी भी तरह रोका जाए। इस पूरे आंदोलन को बदनाम कर देने से शेष दो धर्म स्थलों की मुक्ति की लड़ाई प्रभावित हो सकती है। साथ ही देश में एक ऐसा विमर्श बनाने का षडयंत्र है कि भारत में मंदिरों के पुजारी और व्यवस्थापक भ्रष्ट हैं, ताकि धर्मस्थलों में हिंदू समाज की आस्था को कमजोर किया जा सके।

विशेष जांच दल की अंतिम आख्या आने के बाद समाज को व्यवस्थित ढंग से तथ्यों से अवगत कराने के लिए वृहद अभियान की आवश्यकता पड़ेगी।

Statement of the Sangh

An official statement of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) has been issued on 3 July for the first time after the incident of theft of offerings in Shri Ram Mandir Ayodhya came to light. However, the release of the statement has been delayed. 26 days after the unfortunate incident came to light, Dattatreya Hosabale ji, the Sarkaryavah of the Sangh has given a statement. The Union has issued its statement in a balanced and lawful manner. It indicates an attack on the faith of the entire Hindu society. It has also made it clear that the Sangh has faith in the Special Investigation Team set up by the Uttar Pradesh government. Along with this, Dattatreya Hosabale has also said that the investigation was requested by the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust itself. The Sangh expects the Trust to conduct all the arrangements properly in an atmosphere of complete spirituality. It will also systematize temple management and financial management. The statement of the Rashtriya Swayamsevak Sangh also mentions the long struggle and sacrifice for the construction of the temple. The Sangh expects the Hindu society and Ram bhakts to maintain patience and restraint. It is also said that take advantage of this unfortunate incident to foil the conspiracies of anti-Hindu, anti-national forces to defame Hindu Dharma and society. The association has issued a statement after much deliberation. The Sangh must have brainstormed on this at the highest level. Because the Sangh has had a direct and indirect role in the temple movement and temple construction. It is, therefore, natural for the Sangh to be concerned about this episode.

June 26, 2026

चढ़ावा चोरी पर एफआईआर 

Editorial

Editorial 26.06.2026 By Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर बने भव्य दिव्य मंदिर से चढ़ावा चोरी की घटना अत्यंत कष्टकारी और स्तब्ध करने वाली है। ये बात कल्पना से भी बाहर है कि कोई सनातन समाज का व्यक्ति ही सपने आराध्य को अर्पित श्रद्धालुओं के अर्पण को चुरा लेगा। लेकिन ऐसा हुआ, ये दुर्भाग्यपूर्ण और समस्त हिन्दू समाज को लज्जित करने वाला है। मामले में गुरुवार (25 जून) को एफआईआर दर्ज हो गई है। सभी 8 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अयोध्या कोतवाली में दर्ज एफआईआर में चोरी, संगठित अपराध, धोखाधड़ी की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। मामले की जांच विशेष जांच दल ने की थी। इसकी अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की। एसआईटी का गठन 13 जून को हुआ और 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत हो गई। एसआईटी का गठन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर प्रदेश सरकार ने किया था।

यह प्रकरण 7 जून को चर्चा में आया, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे से 7 करोड़ की चोरी हुई है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट को पहले ही गड़बड़ का शक हो गया था और आंतरिक जांच की शुरुआत कर दी गई थी। यह बात ही अखिलेश यादव तक पहुंची और उन्होंने इसमें धनराशि का उल्लेख अपनी तरफ से कर दिया। उन्हें एक मौका मिल गया कि वे संघ, विहिप और राममंदिर आंदोलन को बदनाम कर सके तथा 2027 के चुनाव में इस मुद्दे को भुना सकें। वे बार बार प्रभुश्रीराम के दान चोरी की बात कर रहे है अब भगवान श्रीराम में उनकी अगाध श्रद्धा उमड़ रही है, लेकिन मंदिर बनने से लेकर आजतक प्रभु के दर्शन को नहीं गए। खैर वे राजनीतिज्ञ है और राजनीतिक नफा नुकसान की दृष्टि से ही मुद्दों को देखेंगे।

अब मामला एफआईआर तक पहुंच गया है। एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट भी शीघ्र आ जाएगी। लेकिन मुख्य प्रश्न ये है कि मंदिर की व्यवस्था में फिर कोई सेंधमारी न हो, ये प्रबंध कैसे हों। इसका एक उपाय तो श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी) ने बताया है। उनका सुझाव है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंध की व्यवस्था के लिए किसी अधिकारी को विशेष कार्याधिकारी या मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया जाय। दूसरा सुझाव विश्व हिंदू परिषद के कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार ने दिया है। उनका कहना है कि मंदिर का प्रबंध केवल आस्था से नहीं हो सकता। इसके लिए एक विस्तृत एस ओ पी की जरूरत है। एक विशेष मानक संचालन प्रणाली बनानी होगी। इसके लिए अनुभवी लोगों का सहयोग लेना होगा। इन दोनों सुझावों पर निर्णय अंतिम रूप से ट्रस्ट की कार्यकारिणी को लेना है। हिंदू समाज की चिंता सब ये है कि कोई भी उपाय किया जाए। कोई भी व्यवस्था हो, वह त्रुटिरहित और आस्था को संरक्षण देनी वाली हो। फिर कोई ऐसा समाचार नहीं मिले जो श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचा सके। इसी से जुड़ा प्रश्न विश्व हिंदू परिषद और मंदिर आंदोलन की साख को बचाने का भी है। पांच सौ साल के संघर्ष का तेज और 40 साल के आंदोलन की प्रतिष्ठा भी बची रहनी चाहिए। अगर ये धूमिल हुई तो शेष दो धर्म स्थल काशी और मथुरा की आकांक्षा प्रभावित हो सकती है।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

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