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नवागत नगर आयुक्त अजय जैन ने संभाला मोर्चा, विभागों का किया निरीक्षण

May 7, 2026

नवागत नगर आयुक्त अजय जैन ने संभाला मोर्चा, विभागों का किया निरीक्षण

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
06/05/2026

ईमानदारी से कार्य करने के निर्देश, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

गोरखपुर। नवागत नगर आयुक्त अजय जैन ने पदभार ग्रहण करने के बाद नगर निगम के विभिन्न संभागों का निरीक्षण कर कार्यप्रणाली का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने-अपने पटलों पर ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के सख्त निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने विभिन्न शाखाओं में लंबित कार्यों, फाइलों के निस्तारण और जनसंबंधित मामलों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नगर निगम की सेवाएं सीधे जनता से जुड़ी हैं, इसलिए कार्य में पारदर्शिता और समयबद्धता अनिवार्य है।
अजय जैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी पटल से लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे कार्यालय समय का पूर्ण पालन करें और आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम की छवि को बेहतर बनाने के लिए सभी अधिकारी और कर्मचारी टीम भावना के साथ कार्य करें। सफाई व्यवस्था, जल निकासी, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुदृढ़ किया जाए।
नगर आयुक्त के इस सख्त रुख से नगर निगम में कार्य संस्कृति में सुधार और व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

आईएएस अभिनव गोयल ने जीडीए उपाध्यक्ष का पदभार संभाला

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
06/05/2026

नया गोरखपुर’ योजना, मास्टर प्लान के क्रियान्वयन व अवैध निर्माण पर सख्ती होगी प्राथमिकता

गोरखपुर। 2020 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी अभिनव गोपाल ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष का पदभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने शहर के सुनियोजित विकास, ‘नया गोरखपुर’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया।
अभिनव गोपाल मूल रूप से प्रयागराज के निवासी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल में हुई, जबकि स्नातक की पढ़ाई प्रयागराज से पूरी करने के बाद उन्होंने आईआईटी मद्रास से बी.टेक/एम.टेक की डिग्री प्राप्त की। वे एक ‘आयरन मैन’ ट्रायथलॉन चैंपियन भी हैं, जो उनके अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
गोरखपुर आने से पूर्व वह गाजियाबाद में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने विभिन्न विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि गोरखपुर के समग्र और योजनाबद्ध विकास के लिए मास्टर प्लान को सख्ती से लागू किया जाएगा। शहर में अवैध निर्माण पर प्रभावी अंकुश लगाया जाएगा और सभी विकास कार्य नियमानुसार सुनिश्चित किए जाएंगे।
उन्होंने ‘नया गोरखपुर’ योजना को तेजी से धरातल पर उतारने पर जोर देते हुए कहा कि इस योजना के तहत आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
अभिनव गोपाल ने यह भी कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उनके पदभार ग्रहण करने से जीडीए की योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

May 5, 2026

14 करोड़ के नए पुल का उद्घाटन, सीएम योगी ने मजदूरों को पास बुलाकर खिंचवाई फोटो

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
05/05/2026

गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद के तारामंडल क्षेत्र में एक नए विकास कार्य की सौगात दी। उन्होंने वॉटर बॉडी के ऊपर ₹14 करोड़ से अधिक की लागत से बने दो-लेन ब्रिज का विधि-विधान से उद्घाटन किया।
​उद्घाटन के बाद जब मुख्यमंत्री ब्रिज का निरीक्षण कर रहे थे, तभी उनकी संवेदनशीलता देखने को मिली। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री की नज़र वहां दूर खड़े कुछ मजदूरों पर पड़ी। सीएम ने प्रोटोकॉल किनारे रख तुरंत उन मजदूरों को अपने पास बुलाया और उनसे बातचीत कर उनका हाल-चाल जाना। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने उन श्रमजीवियों के सम्मान में उनके साथ खड़े होकर फोटो भी खिंचवाई। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।

डेढ़ लाख शिक्षामित्र परिवारों को संभाला हमारी सरकार ने: मुख्यमंत्री

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
05/05/2026

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित समारोह में शिक्षामित्रों का किया सम्मान

वर्षों से चली आ रही आपकी मांग को सरकार ने संवाद और सहयोग के माध्यम से हल किया है, न कि टकराव के रास्ते से: सीएम

गोरखपुर, 05 मई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले की सरकारों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने बिना नियम-कानून के शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में मान्यता देने का कुत्सित प्रयास किया, जो पूरी तरह नियम-विरुद्ध था। उनकी इस गलती के कारण सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षामित्रों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया। ऐसे में हमारे सामने बड़ी चुनौती थी। डेढ़ लाख परिवार सड़कों पर भूखों मरने की नौबत पर आ सकते थे। ये लोग 18-19 वर्षों से सेवाएं दे रहे थे। उम्र के इस पड़ाव में वे कहां जाते? तब हमने मंत्रिमंडल में फैसला किया कि इनकी सेवाएं समाप्त नहीं करेंगे, बल्कि इनका सहयोग लेंगे। 2017 में ही सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया था। अब इसे और बढ़ाते हुए 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जो अप्रैल महीने से लागू भी हो गया है। सीएम योगी मंगलवार को गोरखपुर में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय शिक्षामित्र सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि अब ट्रेड यूनियन वाली सोच और नकारात्मक वृत्ति को पूरी तरह त्याग देना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक या शिक्षामित्र केवल मांगों पर अड़े रहेंगे, नकारात्मक सोच रखेंगे, तो न केवल बच्चों की नींव कमजोर करेंगे बल्कि पूरे समाज व राष्ट्र को क्षति पहुंचाएंगे। हमारा नेचर ट्रेड यूनियन जैसा नहीं हो सकता। पहले देश, फिर हम। सकारात्मक भाव के साथ कार्य करने वाले ही अच्छी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं। सरकार सकारात्मक सोच के साथ आपके साथ है, इसलिए नकारात्मक भाव बिल्कुल नहीं आने चाहिए। वर्षों से चली आ रही आपकी मांग को सरकार ने संवाद व सहयोग के माध्यम से हल किया, न कि टकराव के रास्ते से।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आज सुबह जनता दर्शन कार्यक्रम में एक शिक्षामित्र परिवार आया था, जिसकी बेटी गंभीर रूप से बीमार है, डायलिसिस की जरूरत है। इसीलिए मैंने शिक्षामित्रों को भी प्रधानमंत्री की कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा देने का निर्णय किया था। 5 लाख रुपये का सालाना कैशलेस स्वास्थ्य कवर सभी शिक्षामित्रों को उपलब्ध कराया जाएगा। जो छूट गए होंगे, उन्हें भी यह सुविधा दी जाएगी। बेसिक शिक्षा परिषद को तत्काल सभी जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही एक भव्य समारोह आयोजित कर सभी को यह कार्ड प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाया गया है और यह परिवर्तन साफ दिख रहा है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों की हालत बदली गई है। पहले जहां टॉयलेट, पेयजल, फ्लोरिंग, फर्नीचर और स्मार्ट क्लास की उपलब्धता मात्र 30-36% थी, वह अब 96-99% हो गई है। ड्रॉपआउट दर 19% से घटकर 3% पर आ गई है। एक बच्चे का स्कूल छोड़ना राष्ट्रीय क्षति है। पहले बालिकाएं इसलिए स्कूल नहीं जाती थीं क्योंकि वहां पेयजल, अलग टॉयलेट और सुरक्षा नहीं थी। आज 1 करोड़ 60 लाख बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, बुक्स, जूते, मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

निपुण भारत, पीएम श्री, कस्तूरबा गांधी विद्यालय आदि योजनाओं का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों को 12वीं तक बढ़ाया गया है और नए विकास खंडों में आवासीय स्कूल खोले जा रहे हैं। पीएम श्री, अटल टिंकरिंग लैब, सीएम कंपोजिट और अटल आवासीय विद्यालय मॉडल बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2017 से पहले बच्चे एक लाइन भी नहीं पढ़ पाते थे, आज दूसरी कक्षा की बच्चियां पूरा पेज पढ़ रही हैं। एक दृष्टिबाधित बच्ची ब्रेल में पढ़कर फ्लुएंट बोल रही थी। यह होता है विकास। एक और घटना का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि एक 3 साल के बच्चे ने अपने मुंडन पर कहा कि मैंने आपके जैसा दिखने के लिए बाल बनवाए हैं, उसकी यह बात उन्हें गहराई से छू गई।

मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों का आह्वान किया कि जुलाई के पहले सप्ताह में स्कूल खुलते ही ‘स्कूल चलो’ अभियान तेज करें। हर बच्चा स्कूल पहुंचना चाहिए। शिक्षक आधा घंटा पहले स्कूल पहुंचें, 25-25 घरों में जाकर अभिभावकों से बात करें। बच्चों को प्यार से पढ़ाएं, कभी मारपीट न करें। अच्छी कहानियां, कविताएं और उदाहरण देकर उन्हें प्रेरित कीजिए। अभिभावकों को भी जागरूक करें कि दी गई यूनिफॉर्म, स्वेटर आदि का सही उपयोग हो। परिवार की खींचतान स्कूल तक नहीं लाइए।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 1,43,000 शिक्षामित्रों को बधाई दी और कहा कि आप लगन, ईमानदारी और सकारात्मकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। शिक्षित समाज ही सशक्त राष्ट्र बनाएगा। यहीं से विकसित व आत्मनिर्भर भारत की नींव पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने समारोह में चयनित शिक्षामित्रों को अपने कर-कमलों से सम्मानित किया और उन्हें बढ़े मानदेय का चेक भी प्रदान किया। इनमें संगीता (गोरखपुर), प्रतिमा गुप्ता (गोरखपुर), फारिया तबस्सुम (गोरखपुर), तेजभान सिंह (कासगंज), धीरेंद्र कुमार शर्मा (फिरोजाबाद), संजय (महाराजगंज), शशि प्रभा सिंह (महाराजगंज), अभय कुमार (देवरिया), सुमन लता देवी (देवरिया), सर्वेश कुमार पांडे (कुशीनगर), अनुराधा (कुशीनगर), लालता प्रसाद (बस्ती), सोनू यादव (संत कबीर नगर) और मीरा (गोरखपुर) शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी नेतृत्व आधारित प्रार्थना सभा गतिविधि कैलेंडर ‘अरुणोदय’ का विमोचन किया। इस कैलेंडर का उद्देश्य प्रार्थना सभा को परंपरागत गतिविधि से ऊपर उठाकर विद्यार्थियों के समग्र विकास का माध्यम बनाना है। इसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विज्ञान, गणित, भाषीय कौशल, परस्पर संवाद, विचार अभिव्यक्ति, रोल प्ले, एक्शन गीत तथा कला-क्राफ्ट जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है, ताकि बच्चे प्रार्थना सभा के दौरान ही सीख सकें और नेतृत्व गुणों का विकास कर सकें। इस कैलेंडर का विमोचन कर मुख्यमंत्री ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को एक बेहतरीन मार्गदर्शक उपलब्ध कराया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कई बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया और महिलाओं को उपहार प्रदान किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा से संबंधित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए नवाचारी मॉडल्स को देखा और उनकी सराहना की। उन्होंने नन्हे बच्चों पर स्नेह बरसाया और उनसे संवाद भी किया।

इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग के मंत्री संदीप सिंह, गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायकगण विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ला, राजेश त्रिपाठी, विमलेश पासवान, श्रवण निषाद, उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग चारु चौधरी, क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, राजेश गुप्ता, अपर मुख्य सचिव शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, महानिदेशक मोनिका रानी व अन्य लोग उपस्थित रहे।

May 3, 2026

गाय की रक्षा न करने वाला मुख्यमंत्री कमजोर: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
03/05/2026

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का गोरखपुर में हुंकार:, मुझे रोकने की हिम्मत किसी में नहीं”

​गोरखपुर : ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने रविवार 3 मई को गोरखपुर के सहारा स्टेट स्थित भारत माता मंदिर से ‘गोविष्टि यात्रा’ का शंखनाद किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की सत्ता और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोरखपुर आने से पहले उन्हें धमकियां मिलीं, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं।
​सत्ता और ‘परम सत्ता’ का संघर्ष
​शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें दो तरह से डराने की कोशिश की गई—एक ‘सत्ता’ द्वारा और दूसरी ‘परम सत्ता’ (प्रकृति) द्वारा। उन्होंने कहा, “हमें धूप और गर्मी का डर दिखाया गया, लेकिन आज का सुहावना मौसम गवाह है कि परम सत्ता हमारे साथ है। रही बात धमकियों की, तो किसी ‘माई के लाल’ में हिम्मत नहीं कि हमें मरवा दे। अगर किसी पार्टी ने ऐसा किया, तो वह सत्ता से बेदखल हो जाएगी।”

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना उन्होंने उनके “कथित साहस” पर सवाल उठाए। शंकराचार्य ने कहा जो मुख्यमंत्री गाय की रक्षा नहीं कर पा रहा, वह कमजोर है। अगर उनमें साहस होता, तो वे केंद्र की परवाह किए बिना गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित कर देते।
​सरकार डरती है कि गोमाता को सम्मान देने से गो-हत्यारे और कुछ समुदाय उन्हें वोट नहीं देंगे। भाजपा के मुख्यमंत्री अब गो-हत्यारों का भी वोट मांग रहे हैं। क्या आप गाय का खून और दूध मिलाकर पिएंगे?

सरकार में कई इंजन होने का दावा किया जाता है, लेकिन जनता के लिए कोई डिब्बा नहीं है। जो हैं भी, वे केवल चापलूसों के लिए ‘फर्स्ट क्लास’ डिब्बे हैं।

​शंकराचार्य ने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भारत हिंदू राष्ट्र होता या सत्ता में बैठी पार्टी हिंदूवादी होती, तो गो-हत्या कब की बंद हो चुकी होती। उन्होंने कहा कि ईसाई और मुस्लिम देशों में उनके धर्म की सुनी जाती है, लेकिन भारत में गोमाता की पुकार सरकार नहीं सुन रही। उन्होंने आगाह किया कि देश में 37 से ज्यादा कानून हिंदुओं के खिलाफ हैं और मंदिरों को जेसीबी से ढहाया जा रहा है।

​इस आंदोलन को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल उनका अकेले का निर्णय नहीं है। यह आवाज चारों शंकराचार्यों की है। जैसे किसी पार्टी का एक प्रवक्ता होता है, वैसे ही चारों पीठों ने मुझे गोमाता की आवाज उठाने के लिए आगे किया है। पश्चिम के शंकराचार्य भी जल्द ही इस यात्रा में शामिल होंगे।

उन्होंने जनता से अपील की कि वे ‘एक नोट और एक वोट’ गो-रक्षा के नाम पर दें। यदि हर विधानसभा में एक हजार वोट इधर-उधर हुए, तो सत्ता को समझ आ जाएगा। हर विधानसभा में गो-रक्षा के लिए ‘रामाधाम’ बनाने का संकल्प लिया गया। उन्होंने तंज कसा कि प्रधानमंत्री 8,000 करोड़ के विमान में चलते हैं, जबकि देश की प्राथमिकताएं कुछ और होनी चाहिए।
​शंकराचार्य ने गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा से यात्रा को झंडी दिखाकर रवाना किया और घोषणा की कि यात्रा के तीसरे चरण में वे बूचड़खानों की ओर कूच करेंगे। उन्होंने अंत में कहा कि वे योगी के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उनकी गलतियों और गोमाता के प्रति उनकी उदासीनता के विरोधी हैं।

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