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राना बेनी माधव की जयंती पर रायबरेली में विरासत, विकास और अंत्योदय का संगम

August 25, 2026

राना बेनी माधव की जयंती पर रायबरेली में विरासत, विकास और अंत्योदय का संगम

प्रणय विक्रम सिंह

*अवध मा राना भयो मरदाना…*
रायबरेली 24 अगस्त 2026, कुछ नाम इतिहास के पन्नों पर लिखे जाते हैं और कुछ लोक की आत्मा में। ‘अवध केसरी’ राना बेनी माधव बख्श सिंह ऐसा ही नाम हैं, जिन्हें बैसवारे की माटी ने अपने स्वाभिमान में, लोक ने अपने गीतों में और पीढ़ियों ने अपनी स्मृतियों में सहेज रखा है।

1857 में जब मेरठ से उठी स्वाधीनता की चिंगारी अवध पहुंची, तब राना ऐसे सेनानायक बनकर सामने आए, जिनके लिए सत्ता से बड़ा स्वाभिमान और जीवन से बड़ी मातृभूमि थी। अंग्रेजी सत्ता के अपार सैन्य बल और संसाधनों के सामने उनके पास अपनी माटी के प्रति अगाध प्रेम और पराधीनता के विरुद्ध संघर्ष का अदम्य संकल्प था।

उन्होंने समझौते और समर्पण के बजाय संघर्ष चुना तथा अपना सामर्थ्य और संसाधन मातृभूमि की स्वतंत्रता के यज्ञ में अर्पित कर दिए। उनके लिए यह राजसत्ता की नहीं, भारत की अस्मिता और अपने जन के स्वाभिमान की लड़ाई थी।

इसीलिए उनका शौर्य इतिहास के अभिलेखों तक सीमित नहीं रहा, लोकगीतों और जनस्मृतियों में उतर गया। बैसवारे ने उन्हें केवल अपना राजा नहीं, अपने स्वाभिमान का प्रतीक माना। पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन उनकी वीरगाथा चौपालों और लोककंठ में जीवित रही।
राना बेनी माधव का जीवन शस्त्र और साधना, शौर्य और स्वाभिमान, संघर्ष और समर्पण का अद्भुत संगम था। मातृभूमि उनके लिए भूगोल नहीं, आराधना थी और यही भाव उन्हें इतिहास से आगे बढ़ाकर लोकमानस में अमर कर गया।

‘अवध केसरी’ राना बेनी माधव बख्श सिंह ने जिस माटी की अस्मिता के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगाया और जिस जन के स्वाभिमान के लिए विदेशी सत्ता से लोहा लिया, उनकी 222वीं जयंती पर क्रांतिभूमि रायबरेली ने उसी गौरवशाली विरासत को कृतज्ञता से स्मरण किया।

रायबरेली में आयोजित ‘भाव समर्पण समारोह’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राना के अप्रतिम शौर्य और राष्ट्रभक्ति को नमन करते हुए उनके स्वाभिमान और संघर्ष के संस्कारों को अंत्योदय, सामाजिक न्याय और विकास के वर्तमान संकल्प से जोड़ा।

समय बदला, परिस्थितियां बदलीं और शासन की भूमिका भी बदली, किंतु जनसम्मान का मूल भाव नहीं बदला। लोकतांत्रिक भारत में उस स्वाभिमान की सार्थक अभिव्यक्ति यही है कि विकास की पंक्ति में कोई अंतिम न रहे, शासन की योजनाओं से कोई वंचित न रहे और अभाव किसी व्यक्ति के सम्मानपूर्ण जीवन में बाधा न बने।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ₹21 करोड़ से अधिक की लागत से नवनिर्मित ‘राना बेनी माधव बख्श सिंह स्मृति सभागार’ का लोकार्पण कर उनकी गौरवशाली विरासत को स्थायी स्वरूप दिया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों के परिजनों का सम्मान तथा ‘अवध केसरी स्मारिका’ एवं विशेष आवरण का विमोचन इस भाव को और गहरा कर गया कि स्वतंत्रता केवल हमें मिला अधिकार नहीं, पूर्वजों के त्याग से प्राप्त उत्तराधिकार है।

यह केवल इतिहास को सहेजने का उपक्रम नहीं, स्वतंत्र वर्तमान पर बलिदानी अतीत के ऋण की स्वीकारोक्ति भी थी। यह सभागार आने वाली पीढ़ियों को राना की शौर्यगाथा से जोड़ेगा और बलिदानी परिवारों का सम्मान सदैव स्मरण कराएगा कि राष्ट्र अपने लिए सर्वस्व अर्पित करने वालों को कभी विस्मृत नहीं करता।

लेकिन राना की स्मृति को प्रणाम करने के साथ उनकी धरती के वर्तमान को संवारने का संकल्प इस आयोजन को विशेष अर्थ देता है। मुख्यमंत्री ने रायबरेली, बछरावां एवं हरचंदपुर विधान सभा क्षेत्रों में ₹879 करोड़ से अधिक लागत की 346 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। यहां विकास केवल निर्माण कार्यों का हिसाब नहीं था, बल्कि उस विचार की अभिव्यक्ति था जिसमें विरासत आत्मविश्वास देती है और विकास उस आत्मविश्वास को भविष्य देता है।

विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को DBT के माध्यम से ₹19 करोड़ का अंतरण, आयुष्मान कार्ड, लैपटॉप, स्वीकृति-पत्र और चाबी का वितरण इसी विकास-दृष्टि को व्यक्ति के जीवन तक ले गया। किसी जरूरतमंद को उपचार का भरोसा, किसी युवा के हाथ में तकनीक, किसी परिवार को योजना का अधिकार, यही अंत्योदय का वह व्यावहारिक स्वरूप है, जिसमें शासन की सफलता सबसे ऊपर खड़े व्यक्ति की समृद्धि से नहीं, सबसे पीछे खड़े व्यक्ति तक पहुंची सुविधा से मापी जाती है।

इस पूरी तस्वीर का सबसे मार्मिक पक्ष सपेरा समुदाय एवं अन्य वर्गों के 60 से अधिक आवास विहीन परिवारों को आवासीय पट्टों का आवंटन रहा। सामाजिक और आर्थिक हाशिए पर जीवन बिताते किसी परिवार के हाथ में अपनी भूमि का अधिकार पहुंचना केवल प्रशासनिक आवंटन नहीं है, यह सामाजिक न्याय को जमीन देना, अंत्योदय को अधिकार में बदलना और जीवन को स्वाभिमान से जोड़ना है। जिसके पास अपनी कही जा सकने वाली जमीन न हो, उसके लिए भूमि का छोटा-सा टुकड़ा भी केवल संपत्ति नहीं होता.. वह पहचान है, स्थायित्व है, आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा है। कल इसी भूमि पर घर बनेगा, आंगन में बच्चे खेलेंगे, चौखट पर दीप जलेगा और वर्षों से ठिकाने की तलाश में रहा परिवार पूरे अधिकार से कह सकेगा कि यह हमारी जमीन है, यह हमारा घर है।

यहीं बैसवारे के मान ‘राना’ के संस्कार और वर्तमान शासन का संकल्प एक बिंदु पर मिलते दिखाई देते हैं।

राना ने अपनी माटी के स्वाभिमान के लिए संघर्ष किया था, आज उसी माटी पर अंतिम व्यक्ति के स्वाभिमान की रक्षा सुशासन का धर्म है। तब संघर्ष विदेशी सत्ता से मुक्ति का था, आज संकल्प गरीबी, वंचना और अवसरों की असमानता से मुक्ति का है। तब मातृभूमि की अस्मिता की रक्षा के लिए शस्त्र उठे थे, आज शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और विकास के माध्यम से प्रत्येक नागरिक की गरिमा को सामर्थ्य देना समय का दायित्व है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रायबरेली का यह आयोजन इसी अर्थ में विशेष बन गया। राना की स्मृति को सम्मान मिला, उनकी धरती को विकास की सौगात मिली और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों तक अधिकार पहुंचा। सांस्कृतिक स्वाभिमान और सामाजिक न्याय यहां अलग-अलग धाराएं नहीं रहे, बल्कि लोक-कल्याण के एक ही संकल्प में समाहित दिखाई दिए।

महापुरुषों का वास्तविक अनुगमन उनके नाम के स्मरण से नहीं, उनके संस्कार को अपने समय के कर्तव्य में उतारने से होता है। राना का शौर्य हमें स्वाभिमान का संस्कार देता है, अंत्योदय उसी स्वाभिमान को अंतिम व्यक्ति के सम्मान से जोड़ता है और विकास उसे आने वाली पीढ़ियों के सामर्थ्य में बदलता है।

रायबरेली की उस धरती पर, जहां राना की वीरता आज भी लोककंठ में जीवित है, विरासत, विकास और अंत्योदय का यह संगम एक सुंदर निरंतरता रचता है।

दो शताब्दियों के अंतराल में समय और चुनौतियां भले बदल गई हों, लेकिन लोकमंगल का मूल मंत्र वही है… अपने जन का सम्मान, अपनी माटी का गौरव और राष्ट्र सर्वोपरि। यही राना की विरासत का अनुगमन है, यही विरासत से विकास, स्वाभिमान से सम्मान और अंत्योदय से राष्ट्रोदय की यात्रा है।

August 19, 2026

अत्यधिक बारिश व मौसम चेतावनी के चलते रायबरेली के कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यालय आज बंद

उत्तर प्रदेश समाचार सेवा

रायबरेली। जिले में अत्यधिक वर्षा और खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर आज, 18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को रायबरेली जिले के कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है।
​जिला विद्यालय निरीक्षक संजीव कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह अवकाश जिले में संचालित सभी परिषदीय, शासकीय, सहायता प्राप्त, संस्कृत, वित्त विहीन और अन्य सभी मान्यता प्राप्त (समस्त बोर्डों के) विद्यालयों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा।
​प्रशासन ने सभी विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

August 4, 2026

लोकतंत्र की रक्षा में अधिवक्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान- मनोज पाण्डेय

कलेक्ट्रेट बार व सेन्ट्रल बार के अधिवक्ताओं ने कैबिनेट मंत्री का किया भव्य अभिनंदन

रायबरेली 02 अगस्त 2026, अधिवक्ताओं द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति कैबिनेट मंत्री श्री मनोज कुमार पाण्डेय जी का भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया, कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुय कैबिनेट मंत्री श्री मनोज कुमार पाण्डेय जी ने कहा कि देश के लोकतंत्र को मजबूत करने में अधिवक्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। देश की आजादी से लेकर आज तक कमजोर, गरीब, व शोषितों को मा0 न्यायालय द्वारा उनकी बात मजबूती से रखकर न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही है।

श्री पाण्डेय ने कहा कि देश के अधिवक्ताओं द्वारा समय-समय पर सरकारों और आम जनता के बीच में सेतु के रूप में अपनी भूमिका देकर जहां अपने अहम विचारों से देश के विकास, प्रगति और न्याय के महत्वपूर्ण रास्ते दिखाये हैं, वहीं पीड़ितों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं श्री पाण्डेय ने कहा कि ‘‘वह व्यक्तिगत रूप से सदैव सबका सम्मान करते हैं और उनके हर संघर्षों में अधिवक्ता साथियों ने सदैव बढ़ चढ़ कर मजूबती से साथ दिया है। जिसे वह सदैव याद रखेंगे।‘‘

इस अवसर पर जहां बार एसोशियेसन के सभी पदाधिकारियों द्वारा प्रदेश के कैबिनेट मंत्री का बड़ी माला व भगवान राम का भव्य मंदिर का प्रतीक देकर सम्मानित किया गया वहीं श्री पाण्डेय जी द्वारा बार के पदाधिकारियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर सेन्ट्रल बार के पूर्व अध्यक्ष कमलेश पाण्डेय, पूर्व महामंत्री विजय बाजपेयी, शशिकान्त शुक्ला, पूर्व महामंत्री कलेक्ट्रेट रमाकान्त चौधरी, पूर्व महामंत्री राम अवध यादव, पूर्व अध्यक्ष कलेक्टेªट राम बक्श मौर्या, संयुक्त मंत्री अनिरुद्ध सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष सुशील शुक्ला, वर्तमान उपाध्यक्ष संतोष शुक्ला, सुशील श्रीवास्तव, करूणाशंकर त्रिपाठी, शेखर शुक्ला अधिवक्ता

आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

August 1, 2026

समय से नहीं पहुंचते गुरु जी विद्यालय, प्रधान ने कर दी डीएम से शिकायत 

महराजगंज रायबरेली। विकासखंड अमावां के प्राथमिक विद्यालय पहरेमऊ में शुक्रवार को शिक्षकों की समयपालन को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राम किशोर यादव ने आरोप लगाया कि सुबह 9:14 बजे तक विद्यालय में न तो प्रधानाध्यापक मौजूद थे और न ही अधिकांश शिक्षक, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के अनुसार उन्होंने पहले कई बार बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने सीधे जिलाधिकारी को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया। शिकायत मिलते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।
आरोप है कि शिकायत के बाद एक महिला शिक्षिका विद्यालय पहुंचीं। इसके बाद सुबह 9:20 बजे शिक्षक धीरेन्द्र तथा 9:30 बजे प्रधानाध्यापक प्रदीप सिंह विद्यालय पहुंचे। कुछ देर बाद शिक्षा विभाग से कोई शिक्षक भी पास के विद्यालय से निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंचे, विद्यालय का निरीक्षण कर फोटो लिए और वापस लौट गए।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राम किशोर यादव का आरोप है कि शिकायत के बाद भी विद्यालय में मनमानी जारी रही। उनके अनुसार प्रधानाध्यापक प्रदीप सिंह दोपहर 12:20 बजे ही विद्यालय से चले गए, जबकि उस समय विद्यालय की छुट्टी नहीं हुई थी।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति और समय से पहले विद्यालय छोड़ने जैसी घटनाओं से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। जब शासन की ओर से विद्यालयों के संचालन के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, तब इस प्रकार की लापरवाही उचित नहीं है। ग्रामीणों एवं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की नियमित एवं समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित कराने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

रायबरेली: प्रेमी की हत्या कर शव कमरे में दफनाने का आरोप, दुर्गंध से खुला मामला

रायबरेली के डलमऊ कोतवाली क्षेत्र के पूरे रजऊ गांव में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक महिला और उसके पति पर महिला के प्रेमी की हत्या कर शव को घर के एक कमरे में गड्ढा खोदकर दफनाने का आरोप है।
बताया जा रहा है कि घटना 29 जुलाई की रात की है। दो दिन बाद कमरे से तेज दुर्गंध आने पर महिला ने ग्राम प्रधान को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, कमरे की खुदाई कर शव बरामद किया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका पति फरार बताया जा रहा है। मामले की जांच जारी है और पुलिस आरोपी पति की तलाश कर रही है।
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