Posted on 06.05.2026 Time 01.24 PM Wednesday, New Delhi, #IIMC, #200 Years of Hindi Journalism in India
आईआईएमसी ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘संचार माध्यम’ का विशेषांक जारी
बदलते दौर में सपना देखने का साहस करें और उसे साकार करने के लिए अपनी पूरी शक्ति समर्पित करें: हरिवंश, उपसभापति, राज्यसभा
‘संचार माध्यम’ का विशेषांक हिंदी पत्रकारिता के विकास और भारत की ज्ञान परंपराओं को दर्शाता है: प्रज्ञा पालीवाल गौड़, कुलपति, आईआईएमसी
नई दिल्ली, 05 मई 2026, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश Haivansh ने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) IIMC की प्रमुख शोध पत्रिका ‘संचार माध्यम’ के विशेष स्मारक अंक के विमोचन के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। यह विशेषांक भारत में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफर को दर्शाता है। इस अवसर पर आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ Dr Pragya Paliwal Gaur तथा संयुक्त सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, डॉ. के.के. निराला Dr KK Nirala और प्रो प्रमोद सैनी Prof Pramod Saini की गरिमामयी उपस्थिति रही।
राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध विरासत और उसकी बदलती भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि त्वरित परिवर्तन के इस दौर में साक्षर और निरक्षर की परिभाषा पारंपरिक पढ़ने-लिखने के दायरे से आगे बढ़ चुकी है। निरंतर सीखते रहने और उभरती ज्ञान प्रणालियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता अनिवार्य हो गई है। जो प्रौद्योगिकियाँ पहले विकसित होने में सदियाँ लेती थीं, वे अब कुछ वर्षों और महीनों में ही बदल रही हैं।
इसी पृष्ठभूमि में, उन्होंने व्यक्तियों, विशेषकर युवा संचारकों से आह्वान किया कि वे इस बदलते परिदृश्य में सार्थक सपने देखें और उन्हें अटूट प्रतिबद्धता के साथ साकार करें। उन्होंने कहा, “केवल तभी, कोई व्यक्ति अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है, ठीक उसी तरह, जैसे 1826 में कलकत्ता से प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ Udant Martand ने छोड़ी थी।”
‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने भारत के भविष्य को आकार देने में संचार, अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने वर्तमान युग को “कौशल-प्रधान युग” करार दिया, जहाँ कौशल का अर्जन और उसका प्रभावी उपयोग जीवन को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। आर्थिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यही व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा निर्धारित करता है। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत में हाल के वर्षों में हाई-स्पीड रेल, आधुनिक बंदरगाहों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों सहित बुनियादी ढाँचे में हुई प्रगति का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सूचना क्रांति के इस युग में व्यक्तिगत और राष्ट्रीय भविष्य को आकार देने के लिए नवाचार तथा पारंपरिक मार्गों से आगे बढ़ने के साहस की आवश्यकता है। श्री हरिवंश ने कहा कि पत्रकारिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि सूचनाओं का सबसे छोटा अंश भी जन-जन तक पहुँचे, ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सुविज्ञ सार्वजनिक चर्चा हो सके और आम सहमति बन सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संचारकों को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पूरा अहसास होना चाहिए।
आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहा कि ‘संचार माध्यम’ का यह विशेषांक प्रमुख शिक्षाविदों और मीडिया पेशेवरों के आलेखों का संकलन है, जो पिछली दो शताब्दियों में हिंदी पत्रकारिता के विकास के महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर यह पत्रिका पत्रकारिता के उभरते रुझानों पर निरंतर नजर रखती है, वहीं भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं के तत्वों को समकालीन परिप्रेक्ष्य में पुनः समझने और प्रस्तुत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।






