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भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है: दत्तात्रेय होसबाले

July 30, 2026

भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है: दत्तात्रेय होसबाले

  • गुरु तेगबहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

भुवनेश्वर, 28 जुलाई 2026, रेलवे ऑडिटोरियम में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि धर्म विरोधी शक्तियों को यह लगता है कि भारत में धर्म जागृति, धर्म की रक्षा तथा समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने वाले महापुरुषों को शारीरिक रूप से समाप्त करने से यह कार्य रुक जाएगा, पर भारत में यह संभव नहीं है। इस तरह के कृत्यों से भारत न झुकेगा न रुकेगा। आततायियों द्वारा स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की हत्या की जाती है तो अनेक लक्ष्मणानंद सरस्वती पैदा होंगे तथा धर्म व राष्ट्र के कार्य को आगे बढ़ाएंगे क्योंकि यह मृत्युंजयी भारत है, अविनाशी भारत है।

कार्यक्रम में सरकार्यवाह ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती: कृति एवं व्यक्तित्व’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के अध्यक्ष स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी जी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन न्यास के न्यासी मनसुख लाल सेठिया ने किया।

धर्म के लिए बलिदान की गौरवशाली परंपरा

सरकार्यवाह ने कहा कि भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान देने की एक लंबी परंपरा रही है। गुरु तेग बहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रहित में कार्य करने वाले लोगों पर हमले होते रहे हैं। केरल में वामपंथी हिंसा और कई राज्यों में नक्सली हिंसा के उदाहरण हैं। ऐसी घटनाएं राष्ट्र सेवा के कार्य को रोक नहीं सकतीं। इसके विपरीत, ऐसी परिस्थितियां और अधिक लोगों को समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती हैं।

उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी ने अपना पूरा जीवन धर्म रक्षा, समाज संगठन और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने स्वयं कार्य करने के साथ-साथ हजारों ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार किया, जो आज भी उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। स्वामी जी पर लिखी गई यह पुस्तक केवल प्रशंसा का ग्रंथ नहीं है, बल्कि उनके जीवन, विचारों और कार्यों से प्रेरणा लेने का माध्यम है। यह पुस्तक समाज को प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे साहित्य की आवश्यकता इसलिए है ताकि नई पीढ़ी राष्ट्र और धर्म के लिए समर्पित महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण के कार्य में योगदान दे सके।

आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने सांसारिक जीवन और मोह-माया का त्याग कर अपना पूरा जीवन वनवासी समाज के उत्थान, गौ संरक्षण, धर्म जागरण और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समाज के दुख-दर्द को दूर करने और लोगों को मूल्यों एवं संस्कारों के मार्ग पर चलने के लिए निरंतर प्रेरित किया।

पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पुस्तक के लिए लिखे अपने संदेश में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के लिए “वीर” और “तपस्वी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, जो उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का सटीक परिचय देते हैं। समाज में दो प्रकार के महापुरुष होते हैं जो सूर्य मंडल को भेद सकते हैं। इनमें एक वे, जो अपने तप और साधना से आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं अर्थात योगी, और दूसरे वे, जो राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त होते हैं। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती उच्च आध्यात्मिक विभूति होने के साथ साथ धर्म, समाज व राष्ट्र के लिए बलिदान दिया। उनके जीवन में दोनों गुण एक साथ दिखाई देते हैं।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत

सरकार्यवाह ने कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शन करने वाली शक्ति बनाए रखने के लिए वर्तमान पीढ़ी को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के विचारों और जीवन दर्शन से प्रेरणा लेनी होगी। स्वामी जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार, एक दर्शन और राष्ट्र जीवन को प्रेरित करने वाली शक्ति हैं। उनकी जीवनी नई पीढ़ी में राष्ट्रभाव, सांस्कृतिक चेतना और सेवा के संस्कारों को मजबूत करेगी। सरकार्यवाह जी ने गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर लोगों से आह्वान किया कि ऐसे महान गुरुओं के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची गुरु दक्षिणा होगी।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जीवन प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ : मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का त्याग, संघर्ष, जनजातीय समाज की सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण से परिपूर्ण जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत बना रहेगा। महापुरुषों का जीवन केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक प्रकाश का कार्य करता है।

समाज के वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के कल्याण के लिए स्वामी जी की निष्ठापूर्ण साधना तथा राष्ट्र चेतना के प्रसार का कार्य भारतीय संस्कृति और सामाजिक जीवन को सदैव समृद्ध करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित यह पुस्तक भविष्य में स्कूलों और कॉलेजों के पुस्तकालयों में उपलब्ध होगी तथा विद्यार्थियों को उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरणा प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती केवल एक संत नहीं थे, बल्कि कंधमाल के वनवासी भाइयों और बहनों के लिए सुरक्षा कवच तथा जागृत आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक थे। चकापाड़ा और जलेशपट्टा आश्रमों के माध्यम से स्वामी जी ने वनवासी बालिकाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। स्वामी जी ने अवैध धर्मांतरण, गौ-हत्या और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के जन्म शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत 21 अगस्त से होगी। इस अवसर पर ओडिशा के विभिन्न गांवों और देश के विश्वविद्यालयों में सेमिनार एवं कार्यशालाओं के माध्यम से उनके विचारों और आदर्शों का प्रसार किया जाएगा।

वर्ष 2008 में जन्माष्टमी की रात हुई स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या का उल्लेख करते हुए तत्कालीन सरकार पर विफलता और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति नायडू आयोग की रिपोर्ट और संबंधित फाइलों का लोक सेवा भवन से गायब होना एक “सुनियोजित षड्यंत्र” है। इन गायब फाइलों की जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। जांच के बाद वास्तविक तथ्य सामने आएंगे और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के पीछे जो भी दोषी होंगे, उन्हें किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग का अनुसरण करना ही सच्ची श्रद्धांजलि – धर्मेंद्र प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पूज्य वेदांत केसरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके दिखाए मार्ग और सेवा कार्यों का अनुसरण किया जाए। जिन मूल्यों, समाजसेवा और राष्ट्रसेवा के लिए स्वामी जी ने अपना जीवन समर्पित किया, उन्हें आत्मसात कर ओडिशा को आगे ले जाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

चार दशक पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन ओडिशा के मुख्यमंत्री डॉ. हरेकृष्ण महताब कंधमाल क्षेत्र में तेजी से हो रहे धर्मांतरण को लेकर अत्यंत चिंतित थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महताब ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी भूपेन बसु के माध्यम से संदेश भेजकर आग्रह किया था कि कोई संत तत्काल फुलबाणी (वर्तमान कंधमाल जिला) भेजा जाए। उनका मानना था कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रकाशित पुस्तक केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक महान व्यक्तित्व की तपस्या, संघर्ष और समर्पण का अमूल्य दस्तावेज है। ऐसी पुस्तक की आवश्यकता लंबे समय से अनुभव की जा रही थी, जिसकी पूर्ति अब हुई है।

उन्होंने कहा कि स्वामी जी पूरे ओडिशा और सनातन समाज में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के केंद्र हैं। स्वामी जी केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं थे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, सामाजिक विकास और जनकल्याण के कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। जन्माष्टमी की रात हुई उनकी निर्मम हत्या की घटना आज भी लोगों को झकझोर देती है।

उन्होंने कहा कि स्वामी जी स्वयं एक दीपक की तरह जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाते रहे। उनके द्वारा दिखाए गए मूल्यों, सेवा कार्यों और सत्य के मार्ग को अपनाना तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना ही उनके प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर स्वामी जी के जीवन और साधना को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने वाले लेखक द्वय बिपिन बिहारी नंद और बांच्छानिधि पंडा भी उपस्थित थे।

Bhubaneswar, 28th July, 2026: At the book release function held at Railway Auditorium, Dattatreya Hosabale ji, Sarkaryavah of Rashtriya Swayamsevak Sangh said that anti-Dharma forces feel that in India, awakening of Dharma, protection of Dharma and physical elimination of great men working for society and nation will stop this work, but in India it is not possible. India will not be cowed down or deterred by such acts. If Swami Laxmanananda Saraswati ji is killed by terrorists, many Laxmanananda Saraswatis will be born and will carry forward the work of Dharma and the nation because this is Mrityunjayee Bharat, indestructible Bharat. At the event, Sarkaryavah released the book “Vedanta Keshari Swami Laxmanananda Saraswati: Kriti and Personality” published by Swami Laxmanananda Saraswati Smriti Nyas. Chief Minister of Odisha Mohan Charan Majhi, Member of Parliament from Sambalpur Dharmendra Pradhan, Chairman of Swami Laxmanananda Saraswati Smriti Nyas Swami Jeevan Muktananda Puri Ji along with a large number of saints, social workers and dignitaries were present on the occasion. The programme was compered by Mansukh Lal Sethia, trustee of the trust.

 

July 29, 2026

पीएम मोदी की मन की बात 26 जुलाई 2026

मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार | हमारे जीवन में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें याद रखने के लिए कैलेंडर देखने की जरूरत नहीं पड़ती | आज, 26 जुलाई ऐसी ही एक तारीख है | आज ‘कारगिल विजय दिवस’ है | ये दिन हमें गर्व से भर देता है | ये दिन हमें अपने वीर जवानों के अद्भुत साहस की याद दिलाता है | कारगिल की ऊंची-ऊंची चोटियाँ, कठिन मौसम, दुश्मन की चुनौती, हर परिस्थिति हमारे सैनिकों के सामने थी, लेकिन उनका हौंसला हर चुनौती से बड़ा था | उन्होंने माँ भारती की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया | आज ‘कारगिल विजय दिवस’ पर मैं सभी वीर शहीदों और वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ |

साथियो,

आज का भारत अपने वीरों को सिर्फ याद ही नहीं करता, बल्कि नई पीढ़ी तक उनकी गाथा भी पहुंचाता है | इसी भावना से इस वर्ष एक विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ निकाली गई है | 14 जुलाई को दिल्ली के ‘National War Memorial’ से शुरू हुई यह मोटरसाइकिल यात्रा, द्रास के कारगिल वॉर मेमोरियल तक पहुंचेगी | इसका संदेश है – “One Ride, One Nation, One Salute.” यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि राष्ट्र के लिए दिया गया बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता |

साथियो,

आज भारत अपने सैनिकों के साहस के साथ-साथ अपनी तकनीकी क्षमता को भी लगातार मजबूत कर रहा है | कुछ दिन पहले भारतीय नौ-सेना में INS महेंद्रगिरि शामिल किया गया | यह आधुनिक जंगी जहाज भारत में ही design किया गया है, भारत में ही बना है | इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है | यह आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती शक्ति का प्रतीक है | इसी महीने DRDO ने Pinaka Long Range Guided Rocket का भी सफल परीक्षण किया | इस सफलता के पीछे हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का सामूहिक परिश्रम है | दो-तीन दिन पूर्व ही DRDO ने कुशा मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया है |

साथियो,

आज रक्षा उत्पादन हो, रक्षा निर्यात हो या मित्र देशों के साथ राजनीतिक सहयोग – भारत लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है | इस महीने की शुरुआत में, मैं, इंडोनेशिया में था, जहाँ, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है |

दुनिया का भरोसा भारत के रक्षा उपकरणों और तकनीक पर बढ़ रहा है | आइए, इस ‘कारगिल विजय दिवस’ पर हम अपने अमर शहीदों को नमन करें, और एक सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का अपना संकल्प और मजबूत करें |

मेरे प्यारे देशवासियो,

‘मन की बात’ के पिछले Episode में मैंने आपसे ‘Catch The Rain’ अभियान की चर्चा की थी | मैंने आग्रह किया था कि बारिश की हर बूँद को सहेजने के इस अभियान को जन-आंदोलन बनाएं | ‘Catch The Rain’ का संदेश बहुत सीधा है – जहाँ बारिश गिरे, जब बारिश गिरे, पानी को वहीं सहेजिए, इसलिए 04 जुलाई से देश-भर में एक विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है | इसके तहत बारिश के पानी के संचयन, Ground Water Recharge, पुराने जल-स्त्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण को नई गति दी जा रही है | मुझे बहुत खुशी है कि गाँव हों या शहर, पंचायतें हों या सामाजिक संस्थाएं हर जगह लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की है | कहीं पुराने तालाबों से गाद निकाली जा रही है, कहीं कुओं और बावड़ियों को फिर से जीवन दिया जा रहा है | बंद पड़े Borewell अब Ground Water Recharge का माध्यम बन रहे हैं |

साथियो,

मध्य-प्रदेश के सीधी जिले में करीब डेढ़ हजार तालाब बनाए गए हैं | नरसिंहपुर में अमृत सरोवरों को संवारा गया है | महाराष्ट्र के नासिक में बड़ी मात्रा में पानी सहेजने की क्षमता विकसित हुई है | आंध्र-प्रदेश के नंद्याल में सभी ग्राम पंचायतें इस अभियान से जुड़ी हैं और पुराने तालाबों को फिर से उपयोगी बनाया गया है | हमारे शहर भी पीछे नहीं हैं | छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र-प्रदेश के विजयनगरम – इस अभियान के उत्साहजनक परिणाम दिखाई दे रहे हैं | आइए, हम भी अपने आस-पास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी की जिम्मेदारी लें – पानी की हर बूँद बचाएं | आज बचाई गई हर बूँद, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

कुछ ही दिन पहले Glasgow में Commonwealth Games शुरू हुए हैं | हर देशवासी भारतीय दल को निरंतर अपनी शुभकामनाएं दे रहा है | उनकी कामना है कि सभी खिलाड़ी और athlete बेहतरीन प्रदर्शन करें और लोगों का दिल भी जीतें |

साथियो,

हमारे युवाओं ने हाल के दिनों में sports में कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं | PV Sindhu Badminton में Japan Open का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं | उनकी इस उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है | भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी लंदन में Lord’s Stadium में अपना पहला Test Match जीता है | यह एक ऐतिहासिक जीत है | हमारी टीम ने 270 रनों के बड़े अंतर से यह मुकाबला जीता है | लेकिन बात सिर्फ इतनी सी नहीं है | Lord’s के लंबे इतिहास में यह महिलाओं की टीम का पहला Test Match था | 1983 में इसी मैदान पर भारत ने अपना पहला क्रिकेट विश्व कप जीता था | अब हमारी नारी शक्ति ने यहां देश का नाम रोशन किया है |

साथियो,

कुछ छोटे प्रयास ऐसे भी होते हैं, जो बहुत मायने रखते हैं | मुझे केरलम में एर्णाकुलम के साउथ चित्तूर में sports के ऐसे ही एक प्रयास के बारे में पता चला है | वहां के एक स्कूल में संस्कृत club है | यहां के teacher अभिलाष जी बड़े अनूठे तरीके से संस्कृत को लोकप्रिय बना रहे हैं | इस project को ‘अक्षरकंदुक’ नाम दिया गया है | इसमें संस्कृत के अक्षरों को football में इस्तेमाल होने वाले शब्दों से जोड़कर आसान तरीके से समझाया जाता है | इससे सीखने में आनंद मिलता है, साथ ही खेलों से लोगों का जुड़ाव भी बढ़ता है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

पिछले रविवार Vikram-1 इसके सफल launch से हर देशवासी गौरव से भरा हुआ है | हम सभी भारतीय space sector के इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने | ये private sector द्वारा विकसित भारत का पहला rocket है | हमारे युवा innovators ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी | उन्होंने गजब की skill, passion और patience दिखाया | लंबे समय तक हमारा space sector निजी क्षेत्र के लिए बंद रहा था | इस sector में रुचि रखने वाले काफी युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं मिल पा रहा था | युवा हित को देखते हुए हमने space sector को private sector के लिए खोला | आज इसका परिणाम दुनिया देख रही है |

साथियो,

हमारे युवा साथी science में भी भारत का मस्तक ऊंचा कर रहे हैं| Science Olympiads दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण competition में से एक हैं | इनमें बड़ी संख्या में students हिस्सा लेते हैं | इसी महीने Physics, Chemistry, Biology और Mathematics के Olympiad हुए | इन competitions में भारतीय दल का प्रदर्शन शानदार रहा | Physics Olympiad में हमारे सभी पाँच students ने Gold Medal जीते और भारत ने पहली rank हासिल की | पिछले एक दशक में हुए हर Physics Olympiad में हमारे देश के students ने Gold या Silver Medal जरूर जीता है | Chemistry Olympiad में भी हमारे सभी students ने Gold Medal जीता | यह अब तक की best performance रही है | Biology Olympiad में भी हमारे सभी students ने medal जीते, इनमें एक Gold Medal भी शामिल है | वहीं, Mathematics Olympiad में हमारे students ने दो Gold और चार Silver Medals अपने नाम किए | मुझे देश की युवा शक्ति पर बहुत गर्व है | यह देखकर खुशी होती है कि भारत में Olympiads और Hackathons का culture निरंतर बढ़ रहा है| मुझे विश्वास है कि देश के अधिक से अधिक युवा ऐसे forums में अपना interest दिखाएंगे और भारत का परचम भी लहराएंगे |

मेरे प्यारे देशवासियो,

जब हुनर भी हो और कुछ करने का जज्बा भी हो, तो हर राह, आसान हो जाती है | कश्मीर की पारंपरिक चटाई ‘वगू’ को लेकर आज जो प्रयास हो रहे हैं उसमें इसी की झलक मिलती है | इसे सरकंडे और धान के पुआल से, straw से, तैयार किया जाता है | इस चटाई को बनाने की परंपरा बरसों पुरानी है | इसके लिए सबसे पहले कश्मीर के दलदली इलाकों की घास और सरकंडे की कटाई की जाती है | धूप में सुखाने के बाद छंटाई होती है और फिर शुरू होता है हाथों से बुनाई का काम | दो कारीगरों को एक चटाई बनाने में करीब-करीब चार दिन लगते हैं | यह चटाई अनूठी भी है और eco-friendly भी है | एक बड़ी खासियत ये है कि आपको गर्मियों में इससे ठंडक मिलेगी और सर्दियों में गर्माहट| पहले यह कश्मीर के हर घर में दिखती थी, लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में इसका उपयोग कम होने लगा था | ऐसे में श्रीनगर के गुलाम हुसैन जी और उनकी बेटी तंजीला जी ने एक संकल्प लिया | दोनों ‘वगू’ craft की परंपरा को एक नया जीवन देने में जुट गए | गुलाम हुसैन जी बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं | उन्हें इस काम में कई तरह की चुनौतियां भी आई | लेकिन ‘वगू’ के संरक्षण का उनका संकल्प अडिग था | देखते ही देखते उनके इस प्रयास से बहुत सारे लोग जुड़ते चले गए | गुलाम हुसैन जी ने इस कौशल को खूब बढ़ाया | अपने मिशन में उन्हें स्थानीय स्तर पर सरकारी सहयोग भी मिला | आज तेजी से लोकप्रिय हो रहा, ‘वगू’ देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच रहा है | मुझे इस प्रयास से जुड़े सभी लोगों पर बहुत गर्व है | आज हम सभी का Local products पर जोर है | हम Vocal for Local के मंत्र को लेकर चल रहे हैं | ऐसे में कश्मीर का ‘वगू’ भी आपके घर का हिस्सा बने, इस पर एक बार जरूर सोचिएगा |

साथियो,

हमारे देश में चाय सिर्फ एक पेय नहीं है – ये अपनापन भी है | सुबह की शुरुआत हो, दोस्तों की मुलाकात हो या परिवार के साथ कुछ पल बिताने हों ‘चाय’ हर मौके का हिस्सा बन जाती है | वैसे तो आप भी भलीभाँति जानते हैं मेरा चाय से रिश्ता क्या है | लेकिन आज मैं जिस चाय की चर्चा कर रहा हूं, उसने सिर्फ स्वाद ही नहीं दिया, बल्कि अनेक बहनों के जीवन में, आत्मनिर्भरता की नई खुशबू भी घोल दी है | उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गांव में Self Help Group से जुड़ी महिलाओं ने ‘विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी’ तैयार की है | इसमें lemongrass, गिलोय, मुलेठी, तुलसी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसी प्राकृतिक सामग्रियां शामिल हैं | अपने अनोखे स्वाद और गुणों की वजह से इस चाय ने बहुत कम समय में लोगों के बीच खास पहचान बना ली | प्रयागराज के महाकुंभ और दिल्ली के International Food Festival में इस हर्बल चाय को खूब सराहना मिली है | विदेशों से आए लोगों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है |

साथियो,

सबसे प्रेरक बात इसकी शुरुआत है | यह पूरा प्रयास सिर्फ एक लाख रुपये से शुरू हुआ था | आज यह brand देश के बड़े संस्थानों तक पहुंच चुका है | ये पहल हमें बताती है कि जब स्थानीय ज्ञान, प्रकृति और महिलाओं का आत्मविश्वास साथ आते हैं, तो एक छोटा-सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन जाता है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

आज देश-भर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से लोग प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभा रहे हैं| जब समाज इस भावना से जुड़ता है, तो बहुत सुन्दर और प्रेरक उदाहरण सामने आते हैं | साथियो, अमदाबाद (अहमदाबाद) में जन-भागीदारी की अद्भुत शक्ति दिखाई दी है | भाड़ज़ क्षेत्र में एक घंटे के भीतर साढ़े 3 लाख से अधिक पौधे रोपे गए, इसमें, 25 हजार से अधिक लोग जुटे | स्कूली बच्चे, NCC Cadets, स्वयंसेवक और आम नागरिक – सभी ने इस अभियान में हिस्सा लिया | आने वाले वर्षों में यही पौधे एक घने शहरी वन का रूप लेंगे | इस प्रयास को Guinness Book of World Record में दर्ज किया गया है | साथियो ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत यूपी में भी जन-शक्ति का अद्भुत संकल्प देखने को मिला है | वहां एक ही दिन में 12 जुलाई को 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं | UP का सांसद होने के नाते मेरे लिए ये भी विशेष गर्व की बात है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

पेड़ केवल मनुष्यों के लिए नहीं होते, वे अनगिनत जीवों के घर भी होते हैं | गुजरात के गिर के जंगलों में करीब 60 वर्षों बाद Indian Grey Hornbill फिर से बसेरा बना रहा है | ये गिर में बरसों से हो रहे संरक्षण और पुनर्स्थापन के प्रयासों का परिणाम है | Hornbill को जंगलों का किसान कहा जाता है | ये फल खाते हैं और बीजों को दूर-दूर तक पहुंचाते हैं, उन्हीं बीजों से, जंगल में नए पेड़ उगते है इस तरह एक पक्षी जंगल को फिर से हरा-भरा बनाने में मदद करता है | मैं आप सभी से कहूँगा, हम सभी अपने जीवन के किसी विशेष अवसर को, प्रकृति से जरूर जोड़ें | एक पेड़ माँ के नाम लगाएं | आज का लगाया एक छोटा सा पौधा, आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली, स्वच्छ हवा और सुंदर भविष्य की विरासत बन सकता है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

हम सभी जानते हैं कि आज plastic प्रदूषण पूरी दुनियाँ के पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है | Single use plastic का कचरा कई वर्षों तक प्रकृति को नुकसान पहुंचाता रहता है, इसलिए, plastic का सही निस्तारण बहुत जरूरी है | साथियो, बिहार के सीतामढ़ी में ‘Waste to Wealth’ का शानदार उदाहरण सामने आया है | यहां कचरे की recycling कर उससे आकर्षक bench बनाई जा रही है | एक bench तैयार होने में करीब 40 किलो single use plastic खप जाती है | यह मजबूत, टिकाऊ और आरामदायक होने के साथ-साथ eco-friendly भी होती है | इसे सरकारी स्कूलों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जाता है | इसके जरिए लोगों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है | इस प्रयास में स्थानीय इकाई के साथ ही जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है | इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं | सीतामढ़ी का ये प्रयास हमें बताता है कि Reduce, Reuse और Recycle आज केवल एक नारा नहीं बल्कि हमारा जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है |

साथियो,

आपको याद होगा पिछली बार ‘मन की बात’ में, मैंने ‘गणेश उत्सव’ की बात की थी | मैंने आग्रह किया था कि हमें अपने देश की मिट्टी से ही बने गणेश जी की पूजा करनी चाहिए | जो POP (पी.ओ.पी.) से बने गणेश जी होते हैं या विदेश से आई गणेश जी की प्रतिमा होती है, उसके बजाय हमें देश की मिट्टी से बने गणेश जी को घर में स्थापित करना चाहिए | इस विषय पर अनेक लोगों ने मुझे संदेश भेजा है और अपने विचार रखे हैं | लोगों ने बताया कि उन्होंने मेरे आग्रह को अपनाया है | उन्होंने स्थानीय मिट्टी से तैयार होने वाले गणेश जी को स्थापित करने का संकल्प लिया है | लोगों ने लिखा है कि ‘मन की बात’ में पहले ही इस पर चर्चा हुई, इससे उन्हें सही वक्त पर सही कदम उठाने में मदद मिली | मैं एक बार फिर अपना आग्रह दोहराता हूं, इस बार गणपति पूजा में देश की मिट्टी से बने गणेश जी को अपने घर पर स्थापित करें, उनकी पूजा करें | आपका ये प्रयास भी एक तरह से प्रकृति की ही पूजा होगा |

मेरे प्यारे देशवासियो,

अब मैं आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताऊँगा, जिनके बारे में सुनकर आपको बहुत गर्व होगा | एक ऐसे व्यक्ति जो science और innovation के क्षेत्र में बढ़-चढ़कर काम कर रहे हैं, दुनिया में जिनकी पहचान बन रही है, लेकिन इसके बाद भी वो अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं, अवसर मिलते ही वो अपनी मिट्टी का सम्मान करना नहीं भूलते – वो व्यक्ति हैं, मणिपुर के Dr. Ronaldo Laishram जी | नाम उनका Ronaldo है लेकिन काम से वो एक Astrophysicist हैं | वे जापान में काम करते हैं और young galaxies के एक विशाल समूह की खोज करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं | आप जानना चाहेंगे कि उन्होंने आखिर किया क्या है? दरअसल, उन्होंने इस पूरे समूह का नाम मणिपुर की एक खूबसूरत झील से जोड़कर Loktak proto-cluster रखा है | Loktak ताजे पानी की बहुत बड़ी झील है | Loktak लेक में तैरती हुई फूमडी मिलकर एक अनोखा landscape बनाती है | ऐसा लगता है कि विशाल समंदर में छोटे-छोटे द्वीप तैर रहे हों | उसी प्रकार universe में ये young galaxies भी एक विशाल संरचना का निर्माण करती हैं | आज मणिपुर की Loktak केवल देश के Map पर ही नहीं, बल्कि विशाल ब्रह्मांड में भी अपनी चमक बिखेर रही है | यह उपलब्धि हर भारतीय का गौरव बढ़ाने वाली है | इससे हमारे युवा साथियों को सीख मिलती है कि वे अपनी परंपरा से जुड़े रहकर भी नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं | ये ऐसी जड़ें हैं, जो सितारों की दुनिया को भी जगमगा सकती हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो,

कुछ ही दिनों बाद, 7 अगस्त को हमारा देश ‘National Handloom Day’ मनाएगा | इस अवसर पर हम अपने बुनकर भाई-बहनों के कौशल और उनकी सृजनशीलता का उत्सव मनाते हैं | हमारे ये साथी पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं |

साथियो,

हथकरघे से बना हर परिधान किसी-न-किसी क्षेत्र, समुदाय और इससे जुड़े असंख्य लोगों की कहानी को सामने लाता है | ये वो लोग हैं, जो गर्व के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोने में जुटे हैं | आज के दिन मेरा आग्रह है कि हम हस्तकला को प्रोत्साहित कर, अपने बुनकर साथियो का सम्मान करें | आइए, हम vocal for local की भावना को और सशक्त करें |

साथियो,

आज देश में जिस तरह handloom को बढ़ावा दिया जा रहा है | उससे बड़ी संख्या में लोगों का जीवन बेहतर हो रहा है | पोचमपल्ली से पटना और कुथमपल्ली से कच्छ तक इसके कई उदाहरण देखने को मिलते हैं | आज ऐसे कई लोग और समूह हैं, जो, handloom की हमारी गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा और पहचान दे रहे हैं | कोई ‘पोचमपल्ली इकत’ की सुंदर परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, तो कोई महिला बुनकरों को जोड़कर wool products बना रहा है | कुछ लोग केरलम की पारंपरिक ‘कसावु कला’ को संरक्षित कर रहे हैं | इससे हमारी माताओं-बहनों को रोजगार भी मिल रहा है |

साथियो,

एक और विषय जिसका मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा, वह है ‘खादी’ | हम सभी जानते हैं कि ‘खादी’ महात्मा गांधी को बहुत प्रिय थी | बीते कुछ वर्षों में ‘खादी’ काफी लोकप्रिय हुई है | पिछले 12 वर्षों में इसकी बिक्री 6 गुना बढ़ी है | बिक्री का यह आंकड़ा अब 8,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है | मेरा आप सभी से आग्रह है कि आने वाले त्योहार में ‘खादी’ का कोई-न-कोई, handloom का कोई-न- कोई, handicraft का कोई-न-कोई product जरूर खरीदें|

मेरे प्यारे देशवासियो,

अगर आपसे पूछा जाए कि भारत के कितने तरह के musical instruments हैं, तो आप सोच में पड़ जाएंगे | ऐसा इसलिए, क्योंकि हमारे यहां बहुत से वाद्ययंत्र और उनसे जुड़ी परम्पराएं हैं | इसी तरह का एक instrument है – त्रिपुरा का ‘चौंगप्रेंग’ | यह वहां की tribal communities में काफी लोकप्रिय है | बांस से बने इस वाद्ययंत्र में तीन तार होते हैं | इससे निकली धुन बहुत मधुर होती है, जो सरोद से मिलती-जुलती है | कुछ वजहों से युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता कम होने लगी थी | ऐसे में सूरज कुमार देबबर्मा जी ने इसे फिर से लोकप्रिय बनाने का संकल्प लिया | आज उनका प्रयास रंग ला रहा है | वे चौंगप्रेंग के साथ ही वहां के अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर भी perform करते रहे हैं | Kokborok folk songs, Baul songs, Bangali Folk उन्हें खूब भाता है | अब मैं आपको एक छोटी सी clip सुनाना चाहता हूं | इस संगीत को आप कभी भूल नहीं पाएंगे |

साथियो,

मुझे विश्वास है इसे सुनकर आपके मन को बहुत अच्छा लगा होगा | मुझे देबबर्मा जी पर बहुत गर्व है | पारंपरिक संगीत को लोकप्रिय बनाने का उनका प्रयास बहुत ही सराहनीय है | मेरा आग्रह है कि आप भी अपने आस-पास के पारंपरिक वाद्ययंत्र की जानकारी social media पर जरूर share करें | आपकी यह कोशिश दूसरों को भी पारंपरिक भारतीय संगीत से जरूर जोड़ेगी |

मेरे प्यारे देशवासियो,

कल 27 जुलाई को, भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की पुण्यतिथि है | डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में कई प्रेरक रूप थे, लेकिन, उनके हृदय के सबसे करीब एक शिक्षक की भूमिका थी | वे बच्चों और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे | संयोग से, इसी हफ्ते हम ‘गुरु पूर्णिमा’ का पावन पर्व मनाएंगे | हमारे माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं | स्कूल के शिक्षक हमें अक्षर ज्ञान देते हैं | गुरु पूर्णिमा ऐसे सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है | मैं देश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं |

साथियो,

कुछ ही सप्ताह बाद हम अपनी स्वतंत्रता का महापर्व भी मनाएंगे | 15 अगस्त हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है | ये उन असंख्य वीरों को याद करने का दिन है, जिन्होंने ‘भारत माता’ की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया | उनके त्याग और तपस्या की वजह से आज हमारे हाथ में तिरंगा है | इस तिरंगे में हमारे संविधान के आदर्श हैं |

साथियो,

पिछले कुछ वर्षों में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने पूरे देश को एक अद्भुत भावना से जोड़ा है | हर घर, हर गली में तिरंगे का उत्सव दिखाई देता है | इस वर्ष भी हमें ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाना है | अपने घर पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराना है |

साथियो,

हर वर्ष 15 अगस्त से पहले आप मुझे बहुत से विचार और सुझाव भेजते हैं | इस वर्ष भी आप अपने विचार MyGov पर जरूर साझा कीजिए | मुझे आपके सुझावों का इंतजार है |

साथियो,

‘मन की बात’ में आज इतना ही | अगले महीने हम फिर मिलेंगे देशवासियों की अनेक नई उपलब्धियां, और, प्रेरक प्रयासों के साथ, तब तक के लिए मुझे अनुमति दीजिए | बहुत-बहुत धन्यवाद, नमस्कार |

पीएम की सचिवों संग बैठक: भविष्य के रोड़मैप पर चर्चा और निर्देश

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर केन्द्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग, तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भावी कार्य योजना की समीक्षा की। यह बैठक विकसित भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को और तेज़ करने पर केंद्रित रही।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मंत्रालयों और विभागों के बीच मजबूत टीम भावना विकसित करने पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने सरकार के भीतर क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार की कार्यगत बाधाओं को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और एकीकृत एवं प्रभावी परिणाम सुनिश्चित कर सकें।

जन-केंद्रित सुशासन का महत्व बतलाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत के नागरिक ही सदैव शासन व्यवस्था के केंद्र में रहने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि हर निर्णय और नीति आम-नागरिक के हितों और आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जहां बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय निवेश कर रहा है, वहीं स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने को भी समान प्राथमिकता दिया जाना चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू क्षमताओं के निर्माण के महत्व पर विशेष बल दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत को नवाचार, विविधता और क्षमता निर्माण में तेजी लाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना होगा।

सुधारों को सिरफ एक चलन या फैशनेबल शब्द न मानकर प्रभावी शासन के लिए एक निरंतर आवश्यकता बतलाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यप्रणालियों में सुधार लाने, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने तथा संस्थागत दक्षता को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ डिजिटल प्रणालियों और अवसंरचना को सुरक्षित रखने के लिए साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने उभरते साइबर खतरों के प्रति निरंतर सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में युवा नवोन्मेषकों और उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया और इस दिशा में इसे एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन रणनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय संवाद और जनसंपर्क के महत्व पर भी बल दिया, जहां देश महत्वपूर्ण पहल कर रहा है, जिससे इन प्रयासों से जुड़ी भ्रामक जानकारी और बेबुनियाद आशंकाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कार्यबल को उभरते और भविष्य के उद्योगों द्वारा आवश्यक कौशल से सुसज्जित करने के लिए नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की योजना उद्योग जगत के साथ साझेदारी में बनानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को सदैव युवा, गतिशील और दूरदर्शी बने रहना चाहिए तथा नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप फुर्ती एवं नवाचार के साथ निरंतर स्वयं को ढालते रहना चाहिए।

बैठक में सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित प्रगति, प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

 

छह दशकों की हिंसा के बाद देश वामपंथी उग्रवाद से मुक्त: नित्यानंद राय

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, सरकार ने कहा है कि लगभग छह दशकों की हिंसा के बाद देश वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो गया है, जिसे कभी आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक माना जाता था। राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह उपलब्धि वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए 2015 की राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना के दृढ़ कार्यान्वयन और केंद्र तथा राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से हासिल हुई है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि वर्तमान में कोई भी जिला वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत नहीं है।

श्री राय ने बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या अप्रैल 2018 में 126 से घटकर 90, जुलाई 2021 में 70, अप्रैल 2024 में 38, दिसंबर 2025 में 8 और मार्च 2026 में शून्य हो गई। श्री राय ने यह भी बताया कि वर्तमान में 37 जिलों को विरासत और महत्वपूर्ण जिलों के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो अब नक्सल प्रभावित नहीं हैं। इन जिलों की स्थिति को मजबूत करने के लिए सुरक्षा और विकास उपायों के संबंध में कुछ और समय तक निरंतर समर्थन की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि एक जिले को चिंताजनक जिले की श्रेणी में रखा गया है, जहां नक्सल प्रभावित हिंसक गतिविधियों को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है और उनकी संगठनात्मक संरचना को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। श्री राय ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बाद की स्थिति में सरकारी कल्याण कार्यक्रमों के व्यापक प्रसार, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने, आत्मसमर्पण करने वाले कार्यकर्ताओं के पुनर्वास को सुगम बनाने और दूरदराज के क्षेत्रों में शासन और सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

श्री राय ने कहा कि कुल मिलाकर, केंद्र देश के पूर्व नक्सल प्रभावित जिलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके त्वरित विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

POK हिंसा पर OHCHR से हस्तक्षेप की मांग

Shrinagar, July 29, 2026, पाकिस्तान के कब्‍जे वाले जम्मू-कश्मीर में अशांति लगातार बढ़ रही है। मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) से हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है। यह आह्वान पाकिस्तानी सेना की अधिकृत क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बर गोलीबारी की खबरों के बाद किया गया है। इस गोलीबारी में 40 से अधिक नागरिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। ये हत्याएं 27 जुलाई को रावलकोट से मुजफ्फरबाद की ओर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के शांतिपूर्ण मार्च के फिर से शुरू होने के बाद हुईं।

इस बीच, पाकिस्तानी अधिकारियों ने पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले जम्मू-कश्मीर में 13 निजी स्कूलों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। इन स्कूलों के प्रबंधन, कर्मचारियों और छात्रों ने विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था। ये विरोध प्रदर्शन पाकिस्‍तान के दशकों पुराने नियंत्रण को सीधी चुनौती दे रहे हैं। पाकिस्तानी सेना की बार-बार दमनात्‍मक कार्रवाई में कई नागरिक मारे गए और कई अन्‍य घायल हुए हैं। क्षेत्र में सख्त नाकाबंदी और कर्फ्यू लागू है तथा संचार व्‍यवस्‍था पूरी तरह से ठप है।

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