Web News

www.upwebnews.com

कार्य विस्तार के साथ विचारों को कायम रखना बड़ी चुनौती: डॉ. मोहन भागवत जी

July 4, 2026

कार्य विस्तार के साथ विचारों को कायम रखना बड़ी चुनौती: डॉ. मोहन भागवत जी

News Posted on 04.07.2026, Time 07.24 PM Saturday, Nagpur RSS

नागपुर, 03 जुलाई 2026। लक्ष्मीनगर स्थित साइंटिफिक सोसायटी सभागार में आयोजित ‘डॉ. हेडगेवार – आधुनिक युग के शालिवाहन’ यूट्यूब वीडियो के सार्वजनिक प्रसारण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि किसी भी संगठन का कार्य समय के साथ विस्तार पाता है, प्रतिष्ठा बढ़ती है और समाज में उसके प्रति विश्वास तथा सम्मान भी बढ़ता है। लेकिन ऐसे समय में सबसे बड़ी चुनौती अपने मूल विचारों और तत्वों को कायम रखने की होती है। कार्य का स्वरूप बदल सकता है, पर उसके मूल तत्व नहीं बदलने चाहिए। स्वयंसेवक बनना कोई अल्पकालीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवनभर निरंतर चलने वाली साधना है। जिसके लिए अहंकार ही नहीं, बल्कि अपने स्वभाव तक का समर्पण करना पड़ता है। यहां तक कि ‘समर्पण का भी अहंकार’ मन में नहीं आना चाहिए।

इस अवसर पर मिलिंद रहाटगांवकर की दृकश्रव्य श्रृंखला ‘असु आम्ही सुखाने, पत्थर पायातील’ के 101वें भाग का लोकार्पण सरसंघचालक जी ने किया। कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश अवचट, सचिव श्रीराम पिंपळीकर सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

सरसंघचालक जी ने कहा कि किसी भी संस्था के कार्य का विस्तार होने पर समाज में उसके प्रति विश्वास और प्रेम बढ़ता है। संघर्ष और उपेक्षा का दौर समाप्त होने लगता है, संसाधन उपलब्ध होने लगते हैं और प्रशंसा भी मिलने लगती है। लेकिन यह आत्मसंतुष्ट होकर बैठ जाने का समय नहीं होता। यह निरंतर आत्ममंथन करने का समय है कि हमारा समर्पण अभी भी ध्येय के प्रति उतना ही दृढ़ है या नहीं तथा हमारे प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं। विचारों और सिद्धांतों को केवल पुस्तकों से नहीं समझा जा सकता। उन्हें जीवन में उतारना पड़ता है। किसी भी कार्य को समझने के लिए उसकी जड़ों तक जाना आवश्यक है। दूसरों से अपेक्षा करने से पहले स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य केवल सक्रिय कार्यकर्ता तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसा स्वयंसेवक बनाना है जो अपने जीवन में संघ के संस्कारों को जीता हो।

उन्होंने कहा कि संघ की शाखा केवल दैनिक गतिविधियों का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण की प्रयोगशाला है। शाखा से निकलने वाला स्वयंसेवक विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर समाज के लिए कार्य करता है। पढ़ने और सुनने की अपेक्षा संघ को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से अधिक गहराई से समझा जा सकता है। उन्होंने स्वयंसेवक निर्माण की प्रक्रिया को आजीवन साधना बताते हुए कहा कि यह एक दिन में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है। स्वयंसेवक को जीवनभर स्वयं को निरंतर विकसित करना पड़ता है। इसके लिए केवल समय या श्रम का नहीं, बल्कि अपने स्वभाव और अहंकार तक का समर्पण आवश्यक है। समर्पण करने के बाद भी व्यक्ति के भीतर ‘मैं समर्पित हूं’ का अहंकार नहीं आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक का पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन आदर्श होना चाहिए। समाज में श्रेष्ठ आचरण प्रस्तुत करते हुए नए स्वयंसेवकों का निर्माण करना ही वास्तविक सक्रियता है। देश-विदेश से अनेक लोग संघ के कार्य को देखने आते हैं। क्या उनके देशों के युवाओं को भी समाज के प्रति समर्पित होकर कार्य करने का प्रशिक्षण संघ दे सकता है, ऐसा वह पूछते हैं।

उन्होंने संघ को लेकर प्रचलित एक धारणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी भी संगठन या संस्था का ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं चलाता। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संगठन स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं, जबकि संघ का मूल कार्य केवल व्यक्ति निर्माण और समाज के लिए समर्पित स्वयंसेवकों का निर्माण करना है।

July 3, 2026

श्रीराम जन्मभूमि प्रकरण: हिंदू समाज धैर्य और संयम बनाए रखे

RSS news Posted on 03.07.2026, Time 09.49 PM Friday, Dattatreya Hosbale

नई दिल्ली, 03 जुलाई 2025, श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केन्द्र बना है।

अयोध्या में श्री रामलला मंदिर में रखे हुए दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से समूचे समाज और राम भक्तों की भावना एवं श्रद्धा को आघात पहुँचा है तथा इस घटना से हम सभी आहत हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के आग्रह पूर्वक निवेदन पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जाँच दल का गठन कर उसकी अनुशंसा पर क़ानूनी प्रक्रिया प्रारंभ की है। जाँच में जो भी दोषी पाए जाएँगे उन्हें कठोर दंड हो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित संपूर्ण हिंदू समाज की न्यास से स्वाभाविक ही अपेक्षा है कि इस घोर निंदनीय घटना को असाधारण मान कर गंभीरता से व्यवस्था एवं संचालन की सभी कमियों को दूर करने हेतु परिणामकारक कदम उठाए ताकि अयोध्या मंदिर पर करोड़ों रामभक्तों की आस्था व श्रद्धा अखंड एवं अटूट बनी रहे। वर्तमान भ्रम और असमंजस की स्थिति समाप्त होनी चाहिए। इस दृष्टि से हमारी अपेक्षा है कि सभी आवश्यक पहल मंदिर प्रबंधन और शासन द्वारा गठित विशेष जाँच दल करेंगे। हमारा यह विश्वास है कि समुचित वित्तीय प्रबंधन, सुचारू संचालन हेतु निर्दोष पारदर्शी व्यवस्थाओं एवं शुद्धता और पवित्रता से परिपूर्ण धार्मिकता से ओतप्रोत वातावरण के द्वारा श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास हिन्दू समाज की आस्था एवं विश्वास को सुदृढ़ बनाये रखेगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संपूर्ण हिन्दू समाज से भी आह्वान करता है कि इस कठिन क्षण में वह आवश्यक धैर्य और संयम का परिचय दें तथा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लाभ उठाकर हिन्दू विरोधी, राष्ट्र विरोधी शक्तियों के हिंदू धर्म एवं समाज को बदनाम करने के षड़यंत्रों को विफल करे।

June 23, 2026

अमित शाह ने NAFED के ई-ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in का शुभारंभ किया

देश की एकता-अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को बलिदान दिवस पर शत्-शत् नमन

2014 में बंद होने के कगार पर खड़ा NAFED आज मोदी सरकार में ₹500 करोड़ के मुनाफे के साथ 74 लाख किसानों की सेवा कर रहा

बिचौलिए होंगे खत्म, किसान के पसीने की कमाई 48 घंटे में सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचेगी

अगले 2 वर्षों में दलहन का एक-एक दाना सीधे किसानों से खरीदेगा NCCF और NAFED

किसानों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर के लिए NAFED की छात्रवृत्ति शुरू, मुनाफे का एक हिस्सा किसान परिवारों को दी जाएगी

Posted Date:- Jun 23, 2026

New Delhi, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) के ई-ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी और NAFED के अध्यक्ष जेठाभाई अहीर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि NAFED ने आज चार प्रमुख पहलों की शुरुआत की है, जिसमें NAFEX.in, दृष्टि, ईआरपी और NAFED कल्याण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि NAFEX.in सहित अन्य पहलें काफी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वर्ष 2014 में NAFED बंद होने की कगार पर था, लेकिन आज इन प्रयासों के कारण NAFED 30,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर और 500 करोड़ रुपये के मुनाफे के साथ देश के 74 लाख से अधिक किसानों की सेवा कर रहा है। श्री शाह ने कहा कि जब NAFED गहरे आर्थिक संकट में था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इसे पूरी पारदर्शिता के साथ चलाने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने आर्थिक सहायता प्रदान कर NAFED को एक बार फिर मजबूती से खड़ा कर दिया है।

श्री शाह ने कहा कि आज NAFED उत्पादन और खरीद दोनों में काफी बढ़ोत्तरी कर चुका है। देश को दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए NCCF और NAFED को सीधे किसानों से दलहन का एक-एक दाना खरीदने की दिशा में और भी तेजी से आगे बढ़ना है। इससे किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य मिलेगा, तो दलहन की खेती का रकबा अपने आप बढ़ेगा और देश दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हमने दलहन, मक्का तथा अन्य उत्पादों की सीधी खरीद के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है। अब इस इंफ्रास्ट्रक्चर को नीचे तक पहुंचाना है। श्री शाह ने कहा कि NAFED और NCCF को पूरी दृढ़ता और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा, तभी परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हम सुनिश्चित करेंगे कि अगले दो वर्षों के भीतर सभी किसान इन दोनों संगठनों को सीधे दलहन बेच सकें और उन्हें भुगतान भी सीधे उनके खाते में मिले।

उन्होंने कहा कि आज NAFED केवल कृषि उत्पादों की खरीद तक सीमित नहीं रहा है। विगत तीन वर्षों में NAFED ने जैविक खेती, बीज उत्पादन, खुदरा कारोबार, जैव उर्वरक निर्माण, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे क्षेत्रों में बहुत अच्छा कार्य किया है, जिससे NAFED की प्रासंगिकता भी बढ़ी है और मुनाफा भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जब सहकारिता मंत्रालय बना था, तब NAFED का टर्नओवर 20,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़ कर 30,000 करोड़ रुपये हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दो वर्षों में यह टर्नओवर बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये के पार हो जाएगा। श्री शाह ने कहा कि NAFED का शुद्ध मुनाफा 139 करोड़ रुपये से बढ़कर 405 करोड़ रुपये हो गया है और नेटवर्थ 358 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,050 करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि NAFED आज एक मजबूत, आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर संगठन के रूप में उभरा है। अब समय है कि NAFED और NCCF पूरी पारदर्शिता के साथ दलहन तथा अन्य फसलों का एक-एक दाना सीधे किसानों से खरीदें, बिचौलियों के पूरे तंत्र को समाप्त करें और मुनाफा जिन किसानों का हक है, वह उन तक अवश्य पहुंचाएं।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि NAFED ने अपने मुनाफे का 1% किसान परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर विकास के लिए छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था किसानों के बच्चों को उच्च शिक्षा और करियर बनाने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने में सहयोग करेगी।

अपने संबोधन की शुरुआत में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री शाह ने कहा कि आज ही के दिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने ‘एक राष्ट्र, एक विधान, एक प्रधान’ के सूत्र को चरितार्थ करने और देश को एकजुट रखने के लिए बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस राष्ट्र के बड़े नेताओं में शुमार हैं। उन्होंने जीवन में कुछ भी प्रसिद्धि के लिए नहीं किया और जो किया उसके दूरगामी परिणाम इस देश के लिए शुभ साबित हुए। श्री शाह ने कहा कि भारत के विभाजन के समय अंग्रेजों से लड़ाई लड़ कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने सुनिश्चित किया था कि पश्चिम बंगाल भारत में रहे। इसी कारण आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना हुआ है। गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू किया गया, जिसकी वजह से कश्मीर का राष्ट्रध्वज और संविधान अलग था। श्री शाह ने कहा कि यह संकल्पना भारत की एकता और अखंडता के लिए बहुत खतरनाक थी। तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने एक आंदोलन छेड़ा कि एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं रहेंगे। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से कश्मीर तक मार्च किया और कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा है। कश्मीर जाने के लिए उन्होंने कोई परमिट लेने से इनकार कर दिया, जिसकी वजह से श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को गिरफ्तार कर लिया गया। कश्मीर की जेल में ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संहेदास्पद मृत्यु हो गई। श्री शाह ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तत्कालीन सरकार के उद्योग मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। गृह मंत्री ने कहा कि आज श्यामा प्रसाद जी का सपना साकार हो चुका है। अनुच्छेद 370 समाप्त हो चुका है और उनकी बनाई पार्टी की सरकार गंगोत्री से लेकर बंगाल के गंगासागर तक है। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के प्रखर हिमायती थे।

June 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली में पश्चिमबंग दिवस समारोहों में हिस्सा लिया

प्रधानमंत्री ने रेलवे, कृषि, ग्रामीण विकास, मछली पालन और पशुपालन क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, समर्पण और शिलान्यास किया

पश्चिम बंगाल दिवस का यह समय, यह तारीख ज्यादा खास है; स्वतंत्रता के बाद बंगाल के उज्जवल भविष्य के लिए जो सपने देखे गए थे, बंगाल की महान आत्माओं ने जिस दृष्टि की कल्पना की थी आज, एक तरह से पहली बार, बंगाल दिवस पर हम इन सपनों को वास्तविकता में बदलते देख रहे हैंः प्रधानमंत्री

यह ऐतिहासिक दिन पश्चिम बंगाल के विकास के लिए प्रेरणा बने, हम एक नए और गरिमामय इतिहास का सृजन करेंः प्रधानमंत्री

आज, सैंकड़ों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास है, रेल, सड़क, कृषि और मछली पालन से संबंधित ये परियोजनाएं बंगाल के विकास को नई गति देंगी, राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगीः प्रधानमंत्री

बंगाल ने खूनखराबा सहा, बंगाल ने अपने लोगों को गंवाया; इसने अपनी मातृभूमि के टुकड़े होते देखा, लेकिन बंगाल ने अपनी पहचान और आत्मबोध को नष्ट नहीं होने दियाः प्रधानमंत्री

पश्चिमबंग दिवस पर हम सिर्फ एक तारीख को याद नहीं कर रहे, हम समूचे इतिहास को स्मरण कर रहे हैं, हम बंगाल की हजारों साल पुरानी परंपरा को श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैंः प्रधानमंत्री

भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम कर रहा है, विकसित भारत के इस संकल्प की सबसे बड़ी बुनियाद पूर्वी भारत का विकास है, इसके लिए हम ‘मिशन पूर्वोदय’ पर काम कर रहे हैंः प्रधानमंत्री

Posted Date:- Jun 20, 2026

प्रधानमंत्री, श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज ‘पश्चिमबंग दिवस’ (पश्चिम बंगाल दिवस) समारोह में भाग लिया। इस राज्य-स्तरीय समारोह का आयोजन हुगली के तारकेश्वर में किया जा रहा है, जो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से जुड़ा एक ऐतिहासिक महत्व का स्थान है। इस वर्ष के पश्चिमबंग दिवस का मुख्य विषय: “पश्चिम बंगाल: विरासत, सद्भाव और विकास,” है। यह राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि, सामाजिक एकजुटता और विकास की आकांक्षाओं को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया, उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया और उनकी आधारशिला रखी। रेलवे, कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्रों से जुड़ी ये पहलकदमियां अवसंरचना को मजबूत करेंगी, आजीविका में सुधार करेंगी, किसानों के कल्याण को बढ़ावा देंगी और पूरे राज्य में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देंगी।

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 23वीं किस्त भी जारी की। इस किस्त के तहत, देश भर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी जाएगी।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। हाल ही में हुए चुनावों और नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद राज्य का यह उनका पहला दौरा था। पश्चिम बंगाल और देश की जनता का अभिवादन करते हुए, श्री मोदी ने इस अवसर को एक ऐतिहासिक पल बताया, जो पूरे राज्य में नई उम्मीद, आत्मविश्वास और प्रगति की भावना को दर्शाता है। श्री मोदी ने कहा, “पश्चिम बंगाल विकास और राष्ट्र-निर्माण की एक नई यात्रा पर निकल पड़ा है। लोगों में दिख रहा उत्साह और राज्य का सकारात्मक माहौल एक उज्ज्वल भविष्य के प्रति बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।”

प्रधानमंत्री ने “स्वच्छता से स्वागत” पहल में हिस्सा लेने के लिए नागरिकों को बधाई दी और इस बात पर ज़ोर दिया कि स्वच्छता को रोज़मर्रा की ज़िंदगी और संवहनीय विकास का अहम हिस्सा बनाना चाहिए। पश्चिम बंगाल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह अवसर स्वतंत्रता और विभाजन से पहले के उतार-चढ़ाव भरे दौर के दौरान बंगाल की सांस्कृतिक पहचान, विरासत और भारत के भीतर उसके स्थान को सुरक्षित रखने के लिए दिए गए बलिदानों की याद दिलाता है। उन्होंने उन मनीषियों, सामाजिक नेताओं, विद्वानों और सार्वजनिक हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने बंगाल के लोगों के हितों और आकांक्षाओं की रक्षा के लिए काम किया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद किया, जिन्होंने विभाजन के समय बंगाल का एक हिस्सा भारत के पास बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने उन जाने-माने बुद्धिजीवियों, विद्वानों, समाज सुधारकों, समुदाय के नेताओं और उद्योगपतियों के सहयोग को भी सराहा, जिन्होंने उस ऐतिहासिक आंदोलन में हिस्सा लिया था। श्री मोदी ने कहा, “रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसी महान हस्तियों से समृद्ध पश्चिम बंगाल की विरासत देश को प्रेरित करती आ रही है। इस विरासत को संजोने और इसका जश्न मनाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर पैदा करने की भी ज़रूरत है।”

श्री मोदी ने कहा कि नई सरकार ने दशकों से जमा हो रही चुनौतियों का समाधान करना शुरू कर दिया है और विकास की गति बढ़ाने के लिए तेज़ी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिए तेज़ी से फ़ैसले लिए जा रहे हैं और लंबे समय से पड़ी लंबित परियोजनाओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा, “इस कार्यक्रम के दौरान रेलवे, सड़कों, कृषि और मत्स्य पालन से जुड़े सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। ये पहलें ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत करेंगी, कनेक्टिविटी में सुधार करेंगी, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देंगी और रोजगार व विकास के नए अवसर पैदा करेंगी।”

प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी किए जाने पर विशेष प्रकाश डाला, जो देश भर के 9 करोड़ से ज़्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजी गई है। उन्होंने सभी लाभार्थी किसान परिवारों को अपनी शुभकामनाएं दीं। नागरिकों से राज्य के इतिहास से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पास अपार सांस्कृतिक, बौद्धिक और आर्थिक शक्ति है और यह एक बार फिर भारत की विकास यात्रा में अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभर सकता है। श्री मोदी ने कहा, “पश्चिम बंगाल दिवस न केवल इतिहास को याद करने का दिन होना चाहिए, बल्कि विकास, प्रगति और राष्ट्रीय एकता के प्रति नए संकल्प का भी दिन होना चाहिए। राज्य के लोग एक मज़बूत और समृद्ध भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चुनावों के दौरान पश्चिम बंगाल की जनता से किए गए वादे तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि राज्य के हर जरूरतमंद  गरीब परिवार को अब ‘आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा’ योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने अन्नपूर्णा योजना की शुरुआत, जल जीवन मिशन के ज़रिए साफ़ पेयजल तक बेहतर पहुँच, सरकारी नौकरियों के लिए आयु सीमा में छूट और महिलाओं के लिए मुफ़्त बस यात्रा की सुविधा लागू करने का भी ज़िक्र किया। श्री मोदी ने कहा, “जो कल्याणकारी योजनाएँ बरसों से अटकी हुई थीं, वे अब जन-संपर्क शिविरों के ज़रिए सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाई जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित हो रही है और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है।”

अवसंरचना के विकास पर ज़ोर देते हुए, श्री मोदी ने बताया कि काफी समय से लंबित कई परियोजनाएं अब तीव्र गति से आगे बढ़ रही हैं। इनमें चिंगरीघाटा क्रॉसिंग पर कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन का काम पूरा होना, हावड़ा में नए डिविज़नल रेलवे हॉस्पिटल की आधारशिला रखना, पूर्वी मेदिनीपुर में रोड ओवरब्रिज और संकराइल-सांत्रागाछी रेल लिंक परियोजना शामिल हैं। किसानों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ शुरू किए जाने का स्वागत किया, जो फसल के नुकसान से किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी। उन्होंने ‘डिजिटल कृषि मिशन’ में राज्य को शामिल करने की भी घोषणा की, जिससे किसानों की रजिस्ट्री, ज़मीन के डिजिटल रिकॉर्ड और कृषि सेवाओं व लाभों की बेहतर डिलीवरी संभव हो सकेगी। श्री मोदी ने कहा, “पीएम धन-धान्य कृषि योजना के तहत, पश्चिम बंगाल के चार ज़िलों—पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झारग्राम—को कृषि उत्पादकता बढ़ाने, भण्डारण अवसंरचना को मज़बूत करने और ऋण तक पहुँच में सुधार करने के लिए विशेष सहायता दी जाएगी।”

राज्य की अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन के महत्व को स्वीकार करते हुए, श्री मोदी ने दक्षिण 24 परगना में फ्रेजरगंज मत्स्य बंदरगाह के विस्तार और बीरभूम में एक आधुनिक मछली बाजार के विकास पर ज़ोर दिया। इससे आजीविका को बढ़ावा मिलने और मत्स्य क्षेत्र के मजबूत होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने देश भर के किसानों से सरकार के “खेत बचाओ अभियान” में भाग लेने की भी अपील की। यह अभियान मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने को बढ़ावा देता है।

वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सरकार के दृष्टिकोण को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘पूर्वोदय पहल’ के तहत पूर्वी भारत का विकास इस मिशन के केंद्र में है, जिसमें पश्चिम बंगाल क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विकास को गति देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। श्री मोदी ने कहा, “संवहनीय विकास के साथ-साथ शांति, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण भी आवश्यक है, ताकि सामूहिक प्रगति के लिए मिलकर काम करते हुए बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत किया जा सके।”

अपने संबोधन के समापन पर, प्रधानमंत्री ने राज्य भर के लोगों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया और विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी विवेकानंद और श्री अरबिंदो की यह भूमि योग, कल्याण और मानवीय एकता के संदेश के माध्यम से एक बार फिर दुनिया को प्रेरित करेगी।

यह देश धर्मशाला नहीं है; घुसपैठियों को चुन-चुनकर निकाला जाएगा” – कोल्हापुर से गृह मंत्री अमित शाह का स्पष्ट संदेश

  • केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज कोल्हापुर, महाराष्ट्र में आयोजित ‘धन्यवाद सभा’ को मुख्य अतिथि के रुप में सम्बोधित किया
  • ₹1500 करोड़ की लागत से अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर के निर्माण की शुरुआत महाराष्ट्र में एक बार फिर धर्म और संस्कृति के शासन का आरंभ है
  • राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ-बद्रीनाथ, सोमनाथ और कामाख्या के बाद अब अंबाबाई कॉरिडोर – विरासत के संरक्षण के प्रति हमारी सरकार कटिबद्ध
  • ग्रामीण-सहकारी विकास से लेकर सेमीकंडक्टर, क्वांटम और न्यू-एज टेक्नोलॉजी तक, हर क्षेत्र में मोदी जी ने भारत को नई पहचान दिलाई

Posted Date:- Jun 20, 2026, News Maharastra Kolhapur, Amit Shah

कोल्हापुर (महाराष्ट्र), 20 जून 2026, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज यहां आयोजित ‘धन्यवाद सभा’ को मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडण्वीस और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

WhatsApp Image 2026-06-20 at 16.20.07.jpeg

इस अवसर पर श्री शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में, जब से नरेन्द्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से असंभव माने जाने वाले अनेक कार्य हमारे नेता नरेन्द्र मोदी जी ने पूरे कर के दिखाए हैं। प्रभु श्री राम की ही कृपा से वर्ष 2014 में मोदी जी प्रधानमंत्री बने और अयोध्या में भव्य राम मंदिर आज अपनी दिव्य भव्यता के साथ खड़ा है। इसके साथ ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण, केदारधाम और बद्रीधाम का पुनर्निर्माण किया गया। सोमनाथ मंदिर को फिर से सोने का बनाया जा रहा है। माँ कामाख्या का कॉरिडोर बन रहा है और अब अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर का कॉरिडोर बनाने का कार्य भी शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि देशभर में‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र के तहत संस्कृति का पुनर्जागरण हो रहा है। महाराष्ट्र में सभी ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ मंदिर पुनर्निर्मित हो रहे है, ये हमारे लिए गौरव का विषय है।

केन्द्रीय गृह एवं सहाकारिता मंत्री ने कहा इन 12 वर्षों में अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर के जीर्णोद्धार और कॉरिडोर निर्माण का कार्य शुरू होना भी कई अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर निर्माण की शुरुआत, महाराष्ट्र में एक बार फिर से धर्म के शासन और सांस्कृतिक जागरूकता को नई ऊँचाई दी है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 12 वर्षों में मोदी जी के नेतृत्व में सोमनाथ से लेकर गंगासागर तक पूरे देश में हमारी सरकार को जनता का समर्थन और विश्वास मिला है। श्री शाह ने कहा कि न केवल बंगाल की सीमाओं से घुसपैठ पूरी तरह बंद की जाएगी, बल्कि देश भर से एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा, यह देश कोई धर्मशाला नहीं है।

WhatsApp Image 2026-06-20 at 16.22.08.jpeg

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ चाहे ग्रामीण विकास हो, शहरी विकास हो, कृषि को समृद्ध बनाने के लिए सहकारिता मंत्रालय का गठन हो, नगर नियोजन के नए मानक स्थापित करना हो या पीएलआई स्कीम लाकर भारत को वैश्विक उत्पादन का हब बनाना हो — हर क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सेमीकंडक्टर, क्वांटम इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, डेटा सेंटर और न्यू एज टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने की ठोस शुरुआत की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने चंद्रयान-3 के माध्यम से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक पहुंचकर ‘शिव शक्ति पॉइंट’ स्थापित किया और समूचे भारतवासियों के हृदय को गर्व और खुशी से भर दिया।

WhatsApp Image 2026-06-20 at 16.21.22.jpeg

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, कोल्हापुर में पवित्र करवीर क्षेत्र स्थित माता अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर, जहां माता स्वयं सैकड़ों वर्षों से विराजमान हैं, के जीर्णोद्धार और विकास के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कार्य शुरू किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा करवीर नगर स्थित श्री अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर के जीर्णोद्धार तथा मंदिर कॉरिडोर निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना की कुल लागत 1500 करोड़ रुपये है और यह 28,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सातवीं शताब्दी में स्थापित इस प्राचीन मंदिर के पुनर्विकास के दौरान पुरातत्व विभाग के परामर्श से आसपास के लगभग 41छोटे-बड़े मंदिरों के संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से युक्त करते हुए एआई आधारित सुरक्षा कैमरों, एलईडी प्रकाश सज्जा, आउटडोर गैलरी, हेरिटेज वॉकवे, लाइट एवं साउंड शो, मल्टीपर्पस हॉल, अन्नछत्र, पुलिस चौकी तथा हेरिटेज कोर्टयार्ड सहित पूर्ण यात्री सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। श्री शाह ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने पर कोल्हापुर का यह पावन तीर्थ स्थल छह माह के भीतर एक पूर्ण विकसित यात्रा धाम बन जाएगा। इससे न केवल अंबाबाई माता के लाखों भक्तों में भक्ति का पुनर्जागरण होगा, बल्कि कोल्हापुर और महाराष्ट्र के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास को संरक्षित और प्रचारित करने का अवसर भी मिलेगा, जो विशेष रूप से युवा पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि 1500 करोड़ रुपये कोई बड़ी राशि नहीं है, क्योंकि जहां हमारा इतिहास, हमारी आस्था और हमारी संस्कृति बसी हुई है, ऐसे पावन स्थानों का विकास और महिमा-मंडन पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणादायक है।

Older Posts »