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केमिकल अटैक की साजिश में तीन के खिलाफ NIA ने चार्जशीट दाखिल की

May 6, 2026

केमिकल अटैक की साजिश में तीन के खिलाफ NIA ने चार्जशीट दाखिल की

Logo NIA

नई दिल्ली, 06 मई 2026,उत्तर प्रदेश के एक आरोपी समेत तीन के खिलाफ एनआईए ने गुजरात की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। तीनों ने आईएस आईएस के नेटवर्क से जुड़कर भारत में घातक रासायनिक हमले की साजिश रची थी। तीनों को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया था। इस षड्यंत में एक डॉक्टर भी शामिल था।

राष्ट्रीय अन्‍वेषण अभिकरण (एन.आई.ए) ने एक डॉक्टर समेत तीन लोगों के खिलाफ आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट से जुड़े एक षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप पत्र दायर किया है। इस षड्यंत्र में सार्वजनिक स्थानों पर जैविक विष का इस्तेमाल करके सामूहिक नरसंहार करने की योजना थी। हैदराबाद के डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन और उत्तर प्रदेश के सह-आरोपी आजाद तथा मोहम्मद सुहेल को गुजरात के अहमदाबाद की विशेष एनआईए अदालत में पेश किया गया है।

इस्लामिक स्टेट से जुड़े आरोपियों ने समन्वित तरीके से काम करते हुए कट्टरपंथी बनाए गए युवाओं को जिहाद का समर्थन करने और प्रतिबंधित हथियारों के माध्यम से आतंक फैलाने के लिए भर्ती किया। उन्होंने इस्‍लामिक स्‍टेट के नापाक एजेंडे को अंजाम देने के लिए रिसिन का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी।

रिसिन अरंडी के बीजों से प्राप्त एक अत्यधिक विषैला पदार्थ है, जिसे रासायनिक हथियार की अनुसूची में वर्गीकृत किया गया है। यह मामला मूल रूप से गुजरात आतंक रोधी दस्ते द्वारा नवंबर 2025 में डॉ. मोहिउद्दीन की गिरफ्तारी के बाद दर्ज किया गया था। जांच के बाद दो अन्‍य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

गन्ना किसानों को 2026-27 के लिए 365 रु. प्रति क्विंटल FRP: शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान

केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान

सरकार का बड़ा किसान हितैषी फैसला
5 करोड़ गन्ना किसानों और 5 लाख श्रमिकों को मिलेगा लाभ, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत- श्री शिवराज सिंह

Posted on May 06, 2026, Time 02.06 PM

नई दिल्ली, 05 मई 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने एक बार फिर किसानों के हित में बड़ा, संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय लिया है। चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो गन्ना किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें उत्पादन का बेहतर प्रतिफल दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

श्री चौहान ने कहा कि यह निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार किसानों की समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा लिया गया यह फैसला देश के करोड़ों गन्ना उत्पादक किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला है। उन्होंने कहा कि 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी दर पर 365 रु. प्रति क्विंटल FRP स्वीकृत किया गया है। साथ ही, 10.25 प्रतिशत से अधिक रिकवरी पर प्रत्येक 0.1 प्रतिशत वृद्धि के लिए 3.56 रु. प्रति क्विंटल का प्रीमियम दिया जाएगा, जबकि 10.25 प्रतिशत से कम रिकवरी पर इसी दर से FRP में कमी का प्रावधान है।

श्री चौहान ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि केंद्र सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक अत्यंत मानवीय और किसान-पक्षीय निर्णय भी लिया है। जिन चीनी मिलों में रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम रहेगी, वहां भी किसानों के FRP में कोई कटौती नहीं की जाएगी और ऐसे किसानों को 338.30 रु. प्रति क्विंटल का मूल्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल मूल्य वृद्धि भर नहीं है, बल्कि किसानों को सुरक्षा, स्थिरता और सम्मान देने का संकल्प भी है। चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने की उत्पादन लागत 182 रु. प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि घोषित FRP 365 रु. प्रति क्विंटल है, जो लागत से 100.5 प्रतिशत अधिक है। यह भी उल्लेखनीय है कि नया FRP वर्तमान चीनी सत्र 2025-26 की तुलना में 2.81 प्रतिशत अधिक है।

श्री चौहान ने कहा कि देश का चीनी क्षेत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृषि आधारित क्षेत्र है, जो लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और उनके परिजनों के जीवनयापन से जुड़ा है। इसके साथ ही, चीनी मिलों तथा संबंधित गतिविधियों में कार्यरत लगभग 5 लाख श्रमिकों को भी इस निर्णय से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्पिछले चीनी सत्र 2024-25 में देय 1,02,687 करोड़ रु. में से लगभग 1,02,209 करोड़ रु. का भुगतान 20 अप्रैल 2026 तक किया जा चुका था, यानी लगभग 99.5 प्रतिशत गन्ना बकाया भुगतान हो चुका था। वहीं, चालू चीनी सत्र 2025-26 में देय 1,12,740 करोड़ रु. में से लगभग 99,961 करोड़ रु. का भुगतान 20 अप्रैल 2026 तक किया जा चुका है, जो लगभग 88.6 प्रतिशत है।

सपना देखने का साहस करें और उसे साकार करने को शक्ति समर्पित करें:हरिवंश

Posted on 06.05.2026 Time 01.24 PM Wednesday, New Delhi, #IIMC, #200 Years of Hindi Journalism in India

आईआईएमसी ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘संचार माध्यम’ का विशेषांक जारी 

बदलते दौर में सपना देखने का साहस करें और उसे साकार करने के लिए अपनी पूरी शक्ति समर्पित करें: हरिवंश, उपसभापति, राज्यसभा

संचार माध्यम’ का विशेषांक हिंदी पत्रकारिता के विकास और भारत की ज्ञान परंपराओं को दर्शाता है: प्रज्ञा पालीवाल गौड़, कुलपति, आईआईएमसी

नई दिल्ली, 05 मई 2026, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश Haivansh ने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) IIMC की प्रमुख शोध पत्रिका ‘संचार माध्यम’ के विशेष स्मारक अंक के विमोचन के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। यह विशेषांक भारत में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफर को दर्शाता है। इस अवसर पर आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ Dr Pragya Paliwal Gaur तथा संयुक्त सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, डॉ. के.के. निराला Dr KK Nirala और प्रो प्रमोद सैनी  Prof Pramod Saini की गरिमामयी उपस्थिति रही।

Harivansh Vice Chairman Rajya Sabha

राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध विरासत और उसकी बदलती भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि त्‍वरित परिवर्तन के इस दौर में साक्षर और निरक्षर की परिभाषा पारंपरिक पढ़ने-लिखने के दायरे से आगे बढ़ चुकी है। निरंतर सीखते रहने और उभरती ज्ञान प्रणालियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता अनिवार्य हो गई है। जो प्रौद्योगिकियाँ पहले विकसित होने में सदियाँ लेती थीं, वे अब कुछ वर्षों और महीनों में ही बदल रही हैं।

इसी पृष्‍ठभूमि में, उन्होंने व्यक्तियों, विशेषकर युवा संचारकों से आह्वान किया कि वे इस बदलते परिदृश्य में सार्थक सपने देखें और उन्हें अटूट प्रतिबद्धता के साथ साकार करें। उन्होंने कहा, “केवल तभी, कोई व्यक्ति अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है, ठीक उसी तरह, जैसे 1826 में कलकत्ता से प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ Udant Martand ने छोड़ी थी।”

‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने भारत के भविष्य को आकार देने में संचार, अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने वर्तमान युग को “कौशल-प्रधान युग” करार दिया, जहाँ कौशल का अर्जन और उसका प्रभावी उपयोग जीवन को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। आर्थिक परिवर्तन की महत्‍वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यही व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा निर्धारित करता है। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत में हाल के वर्षों में हाई-स्‍पीड रेल, आधुनिक बंदरगाहों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों सहित बुनियादी ढाँचे में हुई प्रगति का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सूचना क्रांति के इस युग में व्यक्तिगत और राष्ट्रीय भविष्य को आकार देने के लिए नवाचार तथा पारंपरिक मार्गों से आगे बढ़ने के साहस की आवश्यकता है। श्री हरिवंश ने कहा कि पत्रकारिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि सूचनाओं का सबसे छोटा अंश भी जन-जन तक पहुँचे, ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सुविज्ञ सार्वजनिक चर्चा हो सके और आम सहमति बन सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संचारकों को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पूरा अहसास होना चाहिए।

आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहा कि ‘संचार माध्यम’ का यह विशेषांक प्रमुख शिक्षाविदों और मीडिया पेशेवरों के आलेखों का संकलन है, जो पिछली दो शताब्दियों में हिंदी पत्रकारिता के विकास के महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर यह पत्रिका पत्रकारिता के उभरते रुझानों पर निरंतर नजर रखती है, वहीं भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं के तत्वों को समकालीन परिप्रेक्ष्य में पुनः समझने और प्रस्तुत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

April 29, 2026

विकास की लाइफ लाइन बनेगा एक्सप्रेस वे: नरेंद्र मोदी

उत्तर प्रदेश के हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

प्रविष्टि तिथि: 29 APR 2026 2:03PM by PIB Delhi

भारत माता की जय।

गंगा मइया की जय।

गंगा मइया की जय।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश जी पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी जितिन प्रसाद जी, पंकज चौधरी जी, यूपी सरकार के मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, अन्य जनप्रतिनिधि और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

सर्वप्रथम, मैं भगवान नरसिंह की इस पुण्य भूमि को प्रणाम करता हूं। यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर मां गंगा कृपा बहाती हुई गुजरती है। इसलिए, ये पूरा क्षेत्र ही तीर्थ से कम नहीं है। और मैं मानता हूं यूपी को एक्सप्रेसवे का ये वरदान, ये भी मां गंगा का ही आशीर्वाद है। अब आप कुछ ही घंटों में संगम भी पहुंच सकते हैं, और काशी में बाबा के दर्शन करके भी वापस आ सकते हैं।

साथियों,

जैसे मां गंगा हजारों वर्षों से यूपी की और इस देश की जीवन रेखा रही है, वैसे ही आधुनिक प्रगति के इस दौर में, उनके समीप से गुजरता ये एक्सप्रेसवे, ये यूपी के विकास की नई लाइफ लाइन बनेगा। ये भी अद्भुत संयोग है कि पिछले चार-पांच दिनों में, मैं मां गंगा के सानिध्य में ही रहा हूं। 24 अप्रैल को मैं जब बंगाल में था, तो मां गंगा के दर्शन किए थे, और फिर कल तो मैं काशी में था। आज सुबह ही फिर बाबा विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा और मां गंगा के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। और अब मां गंगा के नाम पर बने इस एक्सप्रेसवे के लोकार्पण का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि यूपी सरकार ने इस एक्सप्रेसवे का नाम मां गंगा के नाम पर रखा है। इसमें विकास का हमारा विजन भी झलकता है, और हमारी विरासत के भी दर्शन होते हैं। मैं यूपी के करोड़ों लोगों को गंगा एक्सप्रेसवे की बधाई देता हूं।

साथियों,

आज लोकतंत्र के उत्सव का भी एक अहम दिन है। बंगाल में इस समय दूसरे चरण का मतदान हो रहा है, और जो खबरें आ रही हैं, उनसे पता चलता है कि बंगाल में भारी मतदान हो रहा है। पहले चरण की तरह ही जनता वोट देने के लिए बड़ी संख्या में घरों से निकल रही हैं, लंबी-लंबी का कतारों की तस्वीरें सोशल मीडिया में छाई हुई हैं। पिछले 6-7 दशक में जो नहीं हुआ, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी, वैसे निर्भीक वातावरण में बंगाल में इस बार वोटिंग हो रही है। लोग भय मुक्त होकर वोट दे रहे हैं। ये देश के संविधान और देश के मजबूत होते लोकतंत्र का पुण्य प्रतीक है। मैं बंगाल की महान जनता का आभार व्यक्त करता हूं कि वो अपने अधिकार के प्रति इतनी सजग है, बड़ी संख्या में वोटिंग कर रही है। अभी वोटिंग खत्म होने में कई घंटे बाकी हैं, मैं बंगाल के जनता से आग्रह करूंगा कि लोकतंत्र के इस पर्व में ऐसे ही उत्साह से भाग लें।

साथियों,

कुछ समय पहले जब बिहार में चुनाव हुए, तो बीजेपी एनडीए ने प्रचंड जीत दर्ज की थी, एक इतिहास रच दिया था। अभी-अभी कल ही गुजरात में महा नगरपालिका, नगर पालिका, जिला पंचायतें, नगर पंचायतें, तहसील पंचायत, इन सबके चुनाव के नतीजे आए हैं। और आप मेरे उत्तरप्रदेश वासियों को खुशी होगी, 80 से 85 प्रतिशत नगर पालिका और पंचायतों को भाजपा ने जीत ली है। और मुझे विश्वास है कि इन पांच राज्यों के चुनाव में भी भाजपा ऐतिहासिक जीत की हैट्रिक लगाने जा रही है। 4 मई के नतीजे, विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करेंगे, देश के विकास की गति को नई ऊर्जा से भरेंगे।

साथियों,

देश के तेज विकास के लिए हमें तेजी से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी निर्माण करना है। दिसम्बर 2021 में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करने मैं शाहजहाँपुर आया था। अभी 5 साल से भी कम समय हुआ है, और आप देखिए, देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवेज में शुमार यूपी का सबसे लंबा ग्रीन कॉरिडॉर एक्सप्रेसवे, ये 5 साल के भीतर-भीतर बनकर तैयार हो गया है। आज

हरदोई से इसका लोकार्पण भी हो रहा है। यही नहीं, एक ओर गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हुआ है, तो साथ ही, इसके विस्तार की योजना पर काम भी शुरू हो गया है। जल्द ही, गंगा एक्सप्रेसवे, मेरठ से आगे बढ़कर हरिद्वार तक पहुंचेगा। इसके और बेहतर उपयोग के लिए फ़र्रुख़ाबाद लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कर, इसे अन्य एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा। ये है, डबल इंजन सरकार का विजन! ये है भाजपा सरकार के काम करने की स्पीड! ये है, भाजपा सरकार के काम का तरीका!

भाइयों-बहनों,

कुछ ही दिन पहले मुझे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण का अवसर मिला था। तब मैंने कहा था कि ये नए बनते एक्सप्रेसवे, विकसित होते भारत की हस्तरेखाएं हैं और ये आधुनिक हस्तरेखाएं, आज भारत के उज्ज्वल भविष्य का जयघोष कर रही हैं।

साथियों

अब वो दौर चला गया, जब एक सड़क के लिए दशकों तक इंतज़ार करना पड़ता था! एक बार घोषणा हो गई, तो वर्षों तक फाइलें चलतीं थीं! चुनाव के लिए पत्थर लग जाता था, उसके बाद सरकारें आती रहतीं थीं, जाती रहतीं थीं, लेकिन, काम का कुछ अता-पता नहीं लगता था। कभी-कभी तो पुराने फाइलें ढूंढने के लिए बड़े-बड़े अफसरों को दो-दो साल तक मेहनत करनी पड़ती थी। डबल इंजन सरकार में शिलान्यास भी होता है, और तय समय में लोकार्पण भी होकर के रहता है। इसलिए ही, आज यूपी के एक्सप्रेसवेज़ से भी ज्यादा रफ्तार अगर कहीं है, तो वो यूपी के विकास की रफ्तार ही है।

साथियों,

ये एक्सप्रेसवे केवल एक हाइस्पीड सड़क नहीं है। ये नई संभावनाओं का, नए सपनों का, नए अवसरों का गेटवे है। गंगा एक्सप्रेसवे करीब 600 किलोमीटर लंबा है। पश्चिमी यूपी में मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, सम्भल और बदायूँ। मध्य यूपी में शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली। पूर्वी यूपी में प्रतापगढ़ और प्रयागराज, इनके आस पास के दूसरे जिले, गंगा एक्सप्रेसवे, इससे इन इलाकों के करोड़ों लोगों का जीवन बदलेगा।

साथियों,

इन क्षेत्रों को गंगा जी और उनकी सहायक नदियों की उपजाऊ मिट्टी का वरदान मिला है। लेकिन, पहले की सरकारों ने जिस तरह किसानों की उपेक्षा की, उसके कारण किसान परेशानियों में ही घिरकर के रह गए! यहाँ के किसानों की फसलें बड़े बाज़ारों तक नहीं पहुँच पाती थीं। कोल्ड स्टोरेज की कमी थी। लॉजिस्टिक्स का अभाव था। किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिलता था। अब उन कठिनाइयों का समाधान भी तेजी से होगा। गंगा एक्सप्रेसवे से कम समय में बड़े बाज़ारों तक पहुँच मिलेगी। यहाँ खेती के लिए जरूरी इनफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। इससे हमारे किसानों की आय बढ़ेगी।

साथियों,

गंगा एक्सप्रेसवे यूपी के एक छोर को दूसरे छोर से तो जोड़ता ही है। ये NCR की असीम संभावनाओं को भी करीब लाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियाँ तो दौड़ेंगी ही, इसके किनारे नए औद्योगिक अवसर विकसित होंगे। इसके लिए हरदोई जैसे दूसरे जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर विकसित किए जा रहे हैं। इससे हरदोई, शाहजहाँपुर, उन्नाव समेत सभी 12 जनपदों में नए उद्योग आएंगे। अलग-अलग सेक्टर्स जैसे फार्मा, टेक्सटाइल आदि के क्लस्टर्स विकसित होंगे। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।

साथियों,

हमारे ये युवा मुद्रा योजना और ODOP जैसी योजनाओं, उसकी ताकत से खुद भी नए-नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं। यहाँ छोटे उद्योग, MSMEs को बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा से उनके लिए भी नए रास्ते खुलेंगे। मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री, संभल का handicraft, बुलंदशहर के सिरेमिक, हरदोई का हैंडलूम, उन्नाव का लेदर, प्रतापगढ़ के आंवला प्रॉडक्ट्स, ये सब बड़े स्केल में देश दुनिया के मार्केट में पहुंचेगे। लाखों परिवारों की इससे आमदनी बढ़ेगी। आप मुझे बताइए, क्या पुरानी सपा सरकार में हरदोई, उन्नाव जैसे जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर बनाने की कल्पना तक हो सकती थी क्या? हमारे हरदोई से भी एक्सप्रेसवे गुजरेगा, ये कोई सोच सकता था क्या कभी? ये काम केवल भाजपा सरकार में ही संभव है।

साथियों,

पहले यूपी को पिछड़ा और बीमारू प्रदेश कहा जाता था। वही उत्तर प्रदेश, आज 1 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने के लिए आगे बढ़ रहा है। ये एक बहुत बड़ा लक्ष्य है। लेकिन, इसके पीछे उतनी ही बड़ी तैयारी भी है। क्योंकि, यूपी के पास इतनी असीम क्षमता है। देश की इतनी बड़ी युवा आबादी का potential यूपी के पास है। इस ताकत का इस्तेमाल हम यूपी को manufacturing हब बनाने के लिए कर रहे हैं। यूपी में नए उद्योग और कारखाने लगेंगे, यहाँ जब बड़ी मात्रा में निवेश आएगा, तभी यहाँ आर्थिक प्रगति के दरवाजे खुलेंगे, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

भाइयों-बहनों,

इसी विज़न को केंद्र में रखकर बीते वर्षों में लगातार काम हुआ है। आप सब खुद भी महसूस कर रहे हैं, जिस यूपी की पहचान पहले पलायन से होती थी, आज उसे इन्वेस्टर्स समिट और इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर के लिए जाना जा रहा है। यूपी की इन्वेस्टर समिट में देश और दुनिया से कंपनियाँ आतीं हैं। यूपी में हजारों करोड़ रुपए का निवेश हो रहा है। आज अगर भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है तो, उसमें बहुत बड़ा योगदान यूपी का है। आज भारत जितने मोबाइल बना रहा है, उसमें आधे मोबाइल हमारे यूपी में बन रहे हैं। अभी कुछ ही हफ्ते पहले, मैंने नोएडा में सेमीकंडक्टर प्लांट का शिलान्यास भी किया है।

साथियों,

आप सब जानते हैं, AI के इस दौर में, सेमीकंडक्टर कितनी बड़ी फील्ड बनती जा रही है। यूपी उसमें भी लीड लेने के लिए आगे बढ़ रहा है। भविष्य में असीम अवसरों वाला बहुत बड़ा क्षेत्र

यूपी के लोगों के लिए खुल रहा है।

साथियों,

उत्तर प्रदेश का औद्योगिक विकास आज भारत की सामरिक ताकत भी बन रहा है। आज देश के दो डिफेंस कॉरिडॉर्स में से एक यूपी में है। बड़ी-बड़ी डिफेंस कंपनियाँ यहाँ अपनी फ़ैक्टरी लगा रहीं हैं। ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें, जिनका लोहा दुनिया मानती है, आज वो यूपी में बन रहीं हैं। रक्षा उपकरणों के निर्माण में जो छोटे-छोटे पार्ट्स चाहिए होते हैं, उनकी सप्लाइ के लिए MSMEs को काम मिलता है। इसका बहुत बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के MSME सेक्टर को हो रहा है। छोटे-छोटे जिलों में भी अब युवा बड़े-बड़े उद्योगों से जुड़ने का सपना देख सकते हैं।

साथियों,

आज उत्तर प्रदेश इतनी तेज गति से विकास कर रहा है, क्योंकि, यूपी ने पुरानी सियासत को भी बदला है, और नई पहचान भी बनाई है। आप याद करिए, एक समय यूपी की पहचान गड्ढों से होती थी। आज वही यूपी, देश में सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवेज वाला प्रदेश बन चुका है। पहले यहाँ पड़ोस के जिले तक जाना भी बड़ा मुश्किल था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में 21 एयरपोर्ट हैं, 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। अब तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भी हो चुका है। गंगा एक्सप्रेसवे से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कुछ ही घंटों की दूरी पर है।

भाइयों-बहनों,

हमारा उत्तर प्रदेश भगवान राम और भगवान कृष्ण की धरती है। लेकिन, पिछली सरकारों ने अपनी करतूतों के कारण अपराध और जंगलराज को यूपी की पहचान बना दिया था। यूपी के माफियाओं पर फिल्में बनतीं थीं। लेकिन, अब यूपी की कानून व्यवस्था का देश भर में उदाहरण दिया जाता है।

भाइयों बहनों,

संसाधनों का बंदरबाँट करने वाले जिन सपाइयों के हाथ से सत्ता गई है, उन्हें यूपी की ये प्रगति

पसंद नहीं आ रही है। वो एक बार फिर यूपी को पुराने दौर में धकेलना चाहते हैं। वो एक बार फिर, समाज को बांटना और तोड़ना चाहते हैं।

साथियों,

समाजवादी पार्टी विकास विरोधी भी है और नारी विरोधी भी है। अभी बीते दिनों देश ने एक बार फिर सपा और काँग्रेस जैसी पार्टियों का असली चेहरा देखा है। केंद्र की NDA सरकार संसद में नारीशक्ति वंदन संशोधन लेकर आई थी। अगर ये संशोधन पास हो जाता, तो, साल 2029 के चुनाव से ही महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण मिलता! बड़ी संख्या में हमारी माताएँ बहनें सांसद विधायक बनकर दिल्ली-लखनऊ पहुँचती। वो भी, किसी और वर्ग की सीटें कम हुये बिना! लेकिन, सपा ने इस संशोधन बिल के खिलाफ वोट किया।

साथियों,

इस बिल से सभी राज्यों की सीटें भी बढ़तीं। हमने संसद में साफ साफ कहा था, सभी राज्यों की सीटें एक ही अनुपात में बढ़ेंगी। लेकिन यूपी को गाली देकर पॉलिटिक्स करने वाली DMK जैसी पार्टियां, उन्हें इस बात पर आपत्ति थी कि यूपी की सीटें क्यों बढ़ेंगी? आप देखिए, समाजवादी पार्टी संसद में उन्हीं के सुर में सुर मिला रही थी। ये सपा वाले यहाँ से आपके वोट लेकर संसद जाते हैं, और, संसद में यूपी के लोगों को गाली देने वालों के साथ खड़े होते हैं। इसीलिए, यूपी के लोग कहते हैं, समाजवादी पार्टी कभी सुधर नहीं सकती है। ये लोग हमेशा महिला विरोधी राजनीति ही करेंगे। ये हमेशा तुष्टीकरण और अपराधियों के साथ खड़े होंगे। सपा कभी भी परिवारवाद और जातिवाद से ऊपर नहीं उठ सकती। ये लोग हमेशा विकास विरोधी राजनीति ही करेंगे। यूपी को सपा और उसके सहयोगियों से सावधान रहना है।

साथियों,

आज देश एक ही संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है- विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की बहुत बड़ी भूमिका है। आप सब देख रहे हैं, आज पूरी दुनिया कैसे

युद्ध, अशांति और अस्थिरता में फंसी हुई है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों में हालात खराब हैं। लेकिन, भारत विकास के रास्ते पर उसी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। बाहर के दुश्मनों को ये पसंद नहीं आ रहा। भीतर बैठे कुछ लोग भी सत्ता की भूख में भारत को नीचा दिखाने की कोशिशों में लगे हैं। फिर भी, हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि, विकास के नए-नए कीर्तिमान भी गढ़ रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम आधुनिक से आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहे हैं। गंगा एक्सप्रेसवे इसी दिशा में एक और मजबूत कदम है। मुझे विश्वास है, गंगा एक्सप्रेसवे, जिन संभावनाओं को हमारे दरवाजे तक लेकर आएगा, यूपी के लोग अपने परिश्रम और अपनी प्रतिभा से उन्हें साकार करके रहेंगे। इसी संकल्प के साथ, आप सभी को एक बार बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद!

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

बहुत-बहुत धन्यवाद

April 24, 2026

यूपी में कृषि विकास दर 8 से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ : 24 अप्रैल, 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केन्द्रीय कृषि, किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां कृषि उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण एवं विपणन को गति प्रदान कर अन्नदाता किसान की आय में वृद्धि हेतु 09 राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, कृषक उत्पादक संगठन एवं प्रगतिशील किसानों के महासंगम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन एक व्याहारिक दृष्टिकोण स्थापित कर रहा है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों के एग्रोक्लाइमेटिक जोन व भौगोलिक तथा क्षेत्रीय परिस्थितयों के अनुसार कृषि क्षेत्र के लिये लक्ष्य तय करना अत्यन्त आवश्यक है। इस प्रकार की संगोष्ठियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र के कल्याण के लिये व्यापक रोडमैप तैयार करने सहायता मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गत वर्ष ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात खेत में’ कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनपदों में किसानों का उत्साह तथा कृषि वैज्ञानिकों व कृषि शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षुओं के मन में बेहतरीन जिज्ञासा देखने को मिली। इस दौरान किसानों को पहली बार इनोवेशन को व्यवहारिक धरातल पर उतारने का बेहतरीन अवसर प्राप्त हुआ। लैब को लैण्ड तक पहुँचाने का अभिनव प्रयास पहली बार हुआ है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने इस अभियान को देश के धरातल पर व्यवहारिक रूप से उतारने का कार्य किया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में 69 कृषि विज्ञान केन्द्र थे। ज्यादातर कृषि विज्ञान केन्द्र बन्दी के कगार पर थे। आज प्रदेश में 89 कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित हो चुके हैं। प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र में इनोवेशन हो रहे हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों ने प्रदेश के सभी एग्रोक्लाइमेटिक जोन में सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से बहुत कुछ बेहतरीन करने का कार्य किया है। इनसे जुड़े वैज्ञानिक स्थानीय स्तर पर किसानों के साथ बैठते हैं। परिणामस्वरूप, उत्तर प्रदेश में कृषि विकास की दर 08 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत पहुंच गयी है। हम इससे भी बेहतर परिणाम दे सकते हैं।
आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था में एग्रीकल्चर का योगदान लगभग 41 से 42 प्रतिशत था। कृषि का योगदान लगातार कम होता गया। एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग में बेहतर समन्वय हो, तो विकास तेजी से होता है। हमारे यहां अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान अभी भी 15 से 16 प्रतिशत है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था में एग्रीकल्चर का योगदान 41 से 42 प्रतिशत से घटकर 20 से 21 प्रतिशत हो गया। प्रदेश सरकार ने इसको वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की पहल को मजबूती से आगे बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज के समय में तकनीक बहुत ही निर्णायक साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश में अलग-अलग प्रोडक्ट के कुछ इण्टरनेशनल सेण्टर उपलब्ध कराए हैं। वाराणसी में इण्टरनेशनल राइस रिसर्च इन्स्टीट्यूट का साउथ एशिया रीजनल सेण्टर बेहतर परिणाम दे रहा है। इस संस्थान ने चावल की कई नई प्रजातियां दी हैं। प्रदेश के अलग-अलग क्लाइमेटिक जोन में कौन सी प्रजाति प्रभावी हो सकती है और कौन सी तकनीक अपनाई जानी है, तकनीक का क्या प्रभाव हो सकता है, समय पर बुआई का उत्पादन पर क्या असर पड़ता है, और क्वालिटी सीड उत्पादन को कैसे आगे बढ़ा सकता है, यह सारे परिणाम हमें देखने को मिले हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में धान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 100 कुन्तल तक पहुंचा है, जो पहले 50 से 60 कुन्तल तक सीमित था। अल-नीनो के नाते गेहूं की फसल पर असर पड़ा है। औद्यानिकी में आम की फसल को भी इसने प्रभावित किया है। हमें लागत को कम करके उत्पादन को बढ़ाना है। अच्छा सीड समय पर उपलब्ध कराना है। केमिकल फर्टिलाइजर एण्ड पेस्टिसाइड की खपत को कम करते हुए नेचुरल फार्मिंग को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास करना है। विकसित कृषि अभियान के अन्तर्गत गत वर्ष बाराबंकी निवासी प्रगतिशील किसान पद्म श्री रामसरन वर्मा के खेत में जाने का अवसर मिला था। इनके खेत में पूरी तरह व्यवहारिक चीजें देखने को मिलती हैं। रामसरन जी ने वैज्ञानिक पद्धति से खेती करके कम लागत में अच्छा उत्पादन प्राप्त करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार की पहल के परिणामस्वरूप, प्रदेश के जिन क्षेत्रों में पहले वर्ष में एक फसल होती थी, वहां तीन-तीन फसलें हो रही हैं। उत्तर प्रदेश की भूमि अत्यन्त उर्वरा है। यहां 85 से 86 प्रतिशत भूमि सिंचित है। यहां बेहतरीन कनेक्टिविटी है। प्रदेश सरकार किसानों के खेतों में 10 से 12 घण्टे बिजली उपलब्ध करा रही है। यह स्थितियां हमारे लिए बेहतरीन अवसर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अकेले उत्तर प्रदेश में 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन धान, 245 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। दलहन और तिलहन के उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश ने प्रगति की है। आज उत्तर प्रदेश में लगभग 48 लाख मीट्रिक टन तिलहन का उत्पादन हो रहा है। इसी प्रकार सब्जी, अलसी, जौ, बाजरा के उत्पादन में भी प्रदेश ने ऊंची छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री जी ने आगरा के लिए इण्टरनेशनल पोटैटो सेण्टर स्वीकृत किया है, जो शीघ्र ही प्रारम्भ होने वाला है। सेण्ट्रल यू0पी0 का पूरा क्षेत्र आलू उत्पादन के लिए जाना जाता है। किसान यहां दो फसलों के साथ आलू का अच्छा उत्पादन करता है। उसको वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि डिमाण्ड के अनुसार मांग की आपूर्ति में अन्नदाता किसान सहभागी बन सके। इण्टरनेशनल पोटैटो सेण्टर से सेण्ट्रल यू0पी0 के जनपदों में फूड प्रोसेसिंग की अनेक यूनिट लगनी प्रारम्भ हो गयी हैं। इन प्रयासों से अब किसान को उनके उत्पाद का बेहतरीन दाम स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से मिलना प्रारम्भ होगा।
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कर्मठ और यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश में विकास और जन कल्याण का एक नया इतिहास रचा है। आज उत्तर प्रदेश अनेक क्षेत्रों में देश में नम्बर वन राज्य है। यह दूसरी रीजनल कॉन्फ्रेंस है। पहली जयपुर में हुई थी। यह कॉन्फ्रेंस हमारे लिये अत्यन्त उपयोगी है। एक तरफ यहां पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के प्रतिनिधि हैं, हरित क्रांति की शुरुआत इन्हीं राज्यों से हुई थी। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश देश में खाद्यान्न उत्पादन में नम्बर एक पर है। यहां की माटी, जलवायु और मेहनती किसान इस राज्य की शोभा बढ़ाते हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रत्येक राज्य का कृषि रोड मैप बनना चाहिये, क्योंकि जब तक लक्ष्य तय नहीं होगा और लक्ष्य की पूर्ति के लिए हम रोड मैप नहीं बनाएंगे तब तक हम पूरी तरह से खेती और किसान का भला नहीं कर पाएंगे। देश में फार्मर आई0डी0 बनाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ राज्य बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। फार्मर आई0डी0 किसान की अलग पहचान बनाती है। इस आई0डी0 के माध्यम से किसान विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर व भागीरथ चौधरी, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री  सूर्य प्रताप शाही, उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह ओलख, हिमाचल प्रदेश के उद्यान मंत्री जगत सिंह नेगी, जम्मू कश्मीर के कृषि उत्पादन मंत्री जाविद अहमद डार, पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, पंजाब के उद्यान मंत्री मोहिन्दर भगत एवं उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री गणेश जोशी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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