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श्वेत क्रांति, सहकार बीमा और भारत टैक्सी जैसे नए उपक्रमों से सहकारिता का दायरा निरंतर व्यापक हो रहा है: श्री मोहोल

September 22, 2026

श्वेत क्रांति, सहकार बीमा और भारत टैक्सी जैसे नए उपक्रमों से सहकारिता का दायरा निरंतर व्यापक हो रहा है: श्री मोहोल

केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने कर्नाटक के बेलगावी में श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के नए प्रधान कार्यालय के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश का सहकारिता क्षेत्र निरंतर सशक्त हो रहा है: श्री मुरलीधर मोहोल

श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र में 160 से अधिक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, लगभग 80 हजार PACS के कम्प्यूटरीकरण पर लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का कार्य शुरू किया गया: श्री मोहोल

तीन राष्ट्रीय स्तर की मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियों से लगभग 70 हजार सहकारी संस्थाएं जुड़ीं, गांव की सहकारी संस्थाओं को 25 से अधिक प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ा गया

अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के लिए अम्ब्रेला ऑर्गनाइजेशन और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ‘सहकार सारथी’ प्लेटफॉर्म से सहकारी बैंकिंग को मिल रही नई मजबूती

अगले 10 वर्षों में सहकारिता क्षेत्र के लिए लगभग 17 लाख प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता, ‘त्रिभुवन’ सहकारी यूनिवर्सिटी इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल: श्री मोहोल

श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के लगभग 4 लाख 60 हजार सदस्य, देशभर में 263 शाखाएं और 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार

Posted Date:- Sep 19, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश के सहकारिता क्षेत्र को सशक्त, आधुनिक, पारदर्शी और व्यापक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने आज कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिकोडी तालुका में नांदी स्थित श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड (मल्टी-स्टेट) के नए प्रधान कार्यालय के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी, कर्नाटक राज्य के कई गणमान्य व्यक्ति एवं सहकारिता क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि आज का दिन कर्नाटक में सहकारिता क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और आनंद का दिन है। श्री मोहोल ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह और केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की ओर से संस्था की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।

केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री ने कहा कि श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के लगभग 4 लाख 60 हजार सदस्य हैं, इसकी 263 शाखाएं देशभर में विस्तारित हैं और सोसाइटी का कारोबार 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि आज संस्था का 36वां स्थापना दिवस भी है। उन्होंने इतने बड़े स्तर पर सहकारिता का कार्य संचालित करने वाली संस्था की पूरी टीम को बधाई दी।

श्री मोहोल ने कहा कि देश में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सहकारिता का बड़े स्तर पर विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के सहकारिता क्षेत्र में श्री अण्णासाहेब जोल्ले और उनकी धर्मपत्नी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सहकारी चीनी कारखानों, सहकारी बैंकों और क्रेडिट सोसाइटियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए श्री मोहोल ने उनके योगदान की सराहना की।

केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री ने कहा कि देश की सहकारिता व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का अभिनंदन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में आज साढ़े आठ लाख से अधिक सहकारी सोसाइटियां और सहकारी संस्थाएं कार्य कर रही हैं और लगभग 32 करोड़ लोग इन सहकारी संस्थाओं के सदस्य हैं। लगभग 20 से 25 करोड़ परिवार सीधे तौर पर सहकारिता से जुड़े हैं और इस प्रकार देश की लगभग आधी आबादी किसी न किसी रूप में सहकारिता व्यवस्था से जुड़ी हुई है।

श्री मोहोल ने कहा कि पूर्व में देश में सहकारिता का कार्य कृषि क्षेत्र के एक विभाग के अंतर्गत एक संयुक्त सचिव के अधिकार क्षेत्र में संचालित होता था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सहकारिता क्षेत्र की व्यापकता और महत्व को समझते हुए देश में एक स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश के सहकारिता क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है।

श्री मोहोल ने कहा कि श्री अमित शाह को गांव की सोसाइटी से लेकर जिला बैंक और राज्य स्तर की सहकारी बैंक व्यवस्था तक कार्य करने का व्यापक अनुभव है। देश के पहले सहकारिता मंत्री के रूप में उनके नेतृत्व में देश की सहकारिता को नई गति मिली और पूरे देश में सहकारिता के समान विस्तार और विकास की दिशा में कार्य प्रारंभ हुआ।

केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री ने कहा कि श्री अमित शाह के कार्यकाल में सहकारिता क्षेत्र के लिए 160 से अधिक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन निर्णयों के माध्यम से देश के सहकारिता आंदोलन को मजबूत और सशक्त बनाने का कार्य किया गया है। देश की लगभग 80 हजार गांव स्तर की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कम्प्यूटरीकरण के लिए लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का कार्य शुरू किया गया है। इसके साथ ही गांव की सहकारी संस्थाओं को 25 अलग-अलग प्रकार के व्यवसायों से जोड़कर उनकी आर्थिक गतिविधियों और आय के स्रोतों का विस्तार किया गया है।

श्री मोहोल ने कहा कि किसानों के लिए एक व्यापक सहकारी इकोसिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से तीन मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियों का निर्माण किया गया है और देश की लगभग 70 हजार सहकारी संस्थाएं इनसे सदस्य के रूप में जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों और सहकारी संस्थाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री ने कहा कि देश में लगभग 1,500 से अधिक अर्बन कोऑपरेटिव बैंक हैं। पहले इन बैंकों की कठिनाइयों और समस्याओं को समझने, भारतीय रिजर्व बैंक से संबंधित विषयों के समाधान और उनके कारोबार को सुगम बनाने के लिए कोई साझा संगठन नहीं था। उन्होंने कहा कि इसके लिए देश में एक अम्ब्रेला ऑर्गनाइजेशन NUCFDC की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के कामकाज को सुचारु बनाने में सहायता मिल रही है।

श्री मोहोल ने कहा कि ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ‘सहकार सारथी’ नाम का एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए सहकारिता को देश के प्रत्येक हिस्से तक पहुंचाने, उसके दायरे को और व्यापक बनाने, सहकारी संस्थाओं के संचालन को अधिक व्यवस्थित और बेहतर बनाने तथा सहकारिता व्यवस्था में विश्वास और विश्वसनीयता को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री ने कहा कि अगले लगभग 10 वर्षों में सहकारिता क्षेत्र में काम करने के लिए करीब 17 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से देश के पहले सहकारिता विश्वविद्यालय ‘त्रिभुवन’ सहकारी यूनिवर्सिटी की शुरूवात की गयी, जो सहकारिता क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

श्री मोहोल ने कहा कि श्वेत क्रांति के क्षेत्र में भी नए सिरे से कार्य प्रारंभ हुआ है। इसके साथ ही सहकार बीमा और भारत टैक्सी जैसे अनेक नए उपक्रम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से देश की सहकारिता लगातार सशक्त हो रही है।

केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि NCDC के माध्यम से देश की सहकारी संस्थाओं को सहायता और आर्थिक सहयोग दिया जाता है। उन्होंने सहकारी संस्थाओं को वित्तीय और संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराने में NCDC के महत्व को रेखांकित किया। श्री मोहोल ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के माध्यम से सहकारिता का कार्य भविष्य में भी इसी प्रकार आगे बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को सही अर्थों में साकार करने और उसकी पूर्ति करने में ऐसी सहकारी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

September 13, 2026

ब्रिक्स सिर्फ़ देशों का समूह नहीं है, बल्कि समाधानों का पारिस्थितिकीतंत्र है: मोदी

नई दिल्ली 13 सितम्बर 2026, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि ब्रिक्स सिर्फ़ देशों का समूह नहीं है, बल्कि समाधानों का पारिस्थितिकीतंत्र है और पिछले दो दिनो की चर्चाओं ने इस विश्वास को और मज़बूत किया है।

श्री मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर सत्र में आशा प्रकट की कि ब्रिक्स सम्मेलन में स्वीकार किया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ साझा विज़न और भविष्य के सहयोग के लिए स्पष्ट दिशा देगा। उन्होंने सभी परिणामों को समय-सीमा के भीतर ऐसे कार्यों में बदलने की ज़रूरत पर बल दिया जिनका ज़मीनी स्तर पर असर दिखाई दे। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि ब्रिक्स का ढांचा कागज़ी कार्रवाई से आगे बढ़कर असल ज़िंदगी में ठोस असर डाले।

श्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। दुनिया अब इस समूह से ठोस परिणामों की आशा करती है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सामूहिक प्रयासों से निश्चित रूप से इन उम्मीदों पर खरा उतरेगा। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के अगले अध्यक्ष के तौर पर चीन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नई दिल्ली सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी ब्रिक्स देशों, सहयोगी देशों और उनकी टीमों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने नेताओं की सक्रिय भागीदारी और बहुमूल्य योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि नेताओं के महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने सहयोग को व्यापक और प्रगाढ बनाया है। उन्‍होंने कहा कि उनकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती अहमियत, खुलेपन और समावेशिता का प्रमाण है।

इससे पहले सम्मेलन के खुले सत्र में श्री मोदी ने कहा कि महामारियों, जलवायु संबंधी आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं ने यह दिखा दिया है कि परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने कहा कि इसीलिए ब्रिक्स देशों ने इस समूह के भीतर लचीलापन और संकटों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ विषय पर आयोजित सत्र में प्रधानमंत्री ने चुनौतियों की समय पर पहचान, पहले से तैयारी और तत्काल कदम उठाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ‘ब्रिक्स एकीकृत पूर्व चेतावनी प्रणाली’  पर आम सहमति बन गई है। श्री मोदी ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए भी ‘पूर्व चेतावनी डेटा एकीकरण दिशानिर्देश’ तैयार कर लिए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने आगाह किया है कि प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियार की तरह प्रयोग प्रगति के मार्ग में बड़ी बाधा बन सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों ने नई तकनीकों को अपनाने में समावेशिता पर विशेष जोर दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे उद्यमों को ज्ञान, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के लिए ‘ब्रिक्स-एम.एस.एम.ई. सहयोग पोर्टल’ स्थापित करने की पहल का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, शहरों के बीच बेहतर तौर-तरीकों को साझा करने की सुविधा के लिए ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ का गठन किया गया है। श्री मोदी ने बताया कि स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ‘ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र’ की स्थापना की गई है, जो स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को अधिक विश्वसनीय, कुशल और सुलभ बनाने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स के भीतर विकसित समाधानों के लाभों को ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुसार ढाला और उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ‘ब्रिक्स रसद आपूर्ति श्रृंखला सहयोग प्रारूप’ आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विश्वसनीय और सुदृढ़ बनाने में मदद करेगा। नवाचार के तहत, ‘ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क’ स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को आपस में जोड़ेगा। उन्होंने बताया कि भारत ने नए और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधानों को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स स्टार्टअप नवाचार कोष’ का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही, ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर’ से किसानों के लिए नए अवसर सृजित होंगे, जिसके जरिए एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल बनाया जाएगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स सहयोगी देशों के नेताओं का स्वागत किया। इन नेताओं में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग, सऊदी अरब के विदेश मंत्री युवराज फैसल बिन फरहान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतरश शामिल हैं। सामूहिक फोटो सत्र के बाद, सभी नेता इस समय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार’ विषय पर आधारित मुख्य सत्र में भाग ले रहे हैं।

ब्रिक्स के दस सहयोगी देशों में बेलारूस, बोलिविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। सत्र के समापन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कजाखस्तान, फिलीपींस, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका और बुरुंडी के राष्ट्रपतियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इसके अलावा, वह नाइजीरिया और युगांडा के उपराष्ट्रपतियों के साथ भी बैठकें करेंगे। यह शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्य विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है।

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन से अलग मिस्र के राष्ट्रपति अबदुल फत्ताह अस्सीसी के साथ बैठक की।श्री मोदी कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोक़ायेफ, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और बुरुंडी के राष्ट्रपति एवारिस्ते इंदायिशिमिये के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करने वाले हैं। इसके अलावा, वे नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टिमा और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो के साथ भी बैठकें करेंगे।

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्र: “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना” में प्रधानमंत्री के प्रारंभिक वक्तव्य

Posted Date:- Sep 13, 2026

Your Highness,
Excellencies,
नमस्कार।

ब्रिक्स के विस्तृत परिवार में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

आज यह सभागार अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक साथ जोड़ रहा है। यह ब्रिक्स की बढ़ती ताकत, आकर्षण और अभूतपूर्व विश्वास का प्रमाण है।

Friends,

भारत की अध्यक्षता में हमने सभी प्रयास Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability, इन चार स्तंभों पर केंद्रित किये हैं। मुझे खुशी है कि आप सबके सहयोग और समर्थन से हम अपने साझा vision को win-win सहयोग में बदल सके।

आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और सामान्य मानव के जीवन पर इसका बहुत negative प्रभाव भी हो रहा है, और व्यापक प्रभाव भी हो रहा है।

महामारियों, climate disasters और supply-chain disruptions ने दिखाया है कि आज के interconnected world में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समूह में Resilience बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है।

इसी सोच के साथ, infectious diseases के prevention और response के लिए BRICS Integrated Early Warning System पर सहमति बनी है। Disaster Management के लिए Early Warning Data Integration Guidelines तैयार की गई हैं। BRICS Logistics Supply Chain Cooperation Framework हमारी supply chains को अधिक reliable और resilient बनाने में सहायक होगा।

Friends,

Innovation के अंतर्गत BRICS Incubator Network हमारे start-ups और incubators को आपस में जोड़ेगा। Innovative और scalable solutions को बढ़ावा देने के लिए हमने BRICS Startup Innovation Fund का प्रस्ताव रखा है।

BRICS Network on Digital Agriculture किसानों के लिए नई संभावनाएं तैयार करेगा। इसके माध्यम से AI, geospatial technology और Digital Public Infrastructure को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ा जाएगा।

Technology और Critical Minerals का weaponization हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए हमने technology के adoption में inclusivity पर बल दिया है।

Friends,

भारत ने ब्रिक्स के मंच से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है।

हमारा प्रयास रहा है कि ब्रिक्स cooperation केवल सरकारों तक सीमित न रहे। हमारे entrepreneurs, farmers, researchers, women, youth और सामान्य नागरिक भी इसके सक्रिय भागीदार बनें।

हमने BRICS CONNECT के माध्यम से skills, employability, women in workforce, social security और capacity building को बढ़ावा दिया है।

छोटे उद्यमों को knowledge, finance और नए markets से जोड़ने के लिए, BRICS MSME Cooperation Portal का इनिश्यटिव लिया गया है।

हमारे शहरों के बीच best practices साझा करने के लिए BRICS Urban Mobility Hub की स्थापना की गई है।

Friends,

भारतीय सभ्यता में प्रकृति को माँ का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, पूरक हैं। BRICS में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है।

यही Sustainability का आधार है। यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। इस दिशा में हमने कई पहलुओं पर प्रगति की है।

Smart Grids और Energy Storage के लिए हमने BRICS Digital Centre of Excellence बनाया है। यह हमारे clean energy systems को अधिक reliable, efficient और accessible बनाने में मदद करेगा।

Agro-Ecology और Regenerative Agriculture के Centers of Excellence, पारंपरिक ज्ञान को modern science से जोड़ेंगे। Community-based climate adaptation के लिए तैयार किये गए सिद्धांत, indigenous knowledge को climate action का महत्वपूर्ण आधार बनाएँगे।

Friends,

इन चारों स्तंभों पर आगे बढ़ते हुए BRICS के माध्यम से हमने inclusive global growth को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। क्योंकि हमारा मानना है कि BRICS में विकसित solutions का लाभ केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं के अनुरूप adaptable और accessible बनाना चाहिए।

साथियों,

मैं मेरे निजी अनुभव से कह सकता हूं कि BRICS में Global South के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि BRICS में-

उनकी आवाज सुनी जाती है।
उनके अनुभव का सम्मान होता है।
और solutions उनके लिए नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं।

BRICS की शक्ति हमारी diversity और cooperation में है।

We may be rooted in different realities, but together, we rise through cooperation, and blossom for humanity.

हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने, और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए।

आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्रधानमंत्री ने “समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने” पर आयोजित ब्रिक्स सत्र की अध्यक्षता की

Posted Date:- Sep 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान “समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने” पर आयोजित ब्रिक्स सत्र की अध्यक्षता की।

2. अपने वक्तव्य में, प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि:

  1. ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना करने के मामले में सबसे अग्रिम पंक्ति में है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे। हमें “पिरामिड ऑफ प्रिविलेज” को “प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप” में बदलना होगा।
  2. वैश्विक शासन में आज की वास्तविकताओं को दर्शाना चाहिए, जिसमें विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है।
  3. ग्लोबल साउथ को केवल नियम मानने वाले के बजाय नियम बनाने वाले की भूमिका में लाने के प्रयास किए जाने चाहिए। ब्रिक्स के माध्यम से, हम ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को वार्ता कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता प्रदान कर सकते हैं।
  4. समुद्री नाविक, वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, फिर भी संकट के समय उन्हें अक्सर पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने समुद्री नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

3. प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य का समापन यह कहते हुए किया कि चूंकि हमारा भविष्य साझा है, इसलिए उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए – आवाज उठाने से लेकर प्रभाव छोड़ने तक, और विशेषाधिकार से लेकर साझेदारी तक। प्रधानमंत्री का प्रारंभिक वक्तव्य यहां देखा जा सकता है।

4. सत्र का समापन नई दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स घोषणापत्र को अपनाने के साथ हुआ, जो भविष्य में ब्रिक्स सहयोग की साझा प्राथमिकताओं, प्रतिबद्धताओं और दिशा को तय करता है। यह घोषणापत्र यहां देखा जा सकता है।

प्रधानमंत्री की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक

Posted Date:- Sep 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन जनवादी गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की।

दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने दोहराया कि दोनों देशों को अपने संबंधों के प्रति रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। मतभेदों को विवादों का रूप नहीं लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिकताओं—पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित—से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास का एक आवश्यक आधार बनी हुई है। उन्होंने सीमा से संबंधित मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा पालन किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा प्रश्न के निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने जन-से-जन संबंधों में हुई प्रगति का संज्ञान लिया और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कारोबारी संबंधों तथा लोगों की अधिक आवाजाही को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आर्थिक और व्यापारिक संबंधों के संबंध में, उन्होंने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों सहित एक-दूसरे की चिंताओं का समाधान करने तथा सार्थक और पूर्वानुमेय बाजार पहुंच को सुगम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों तथा चुनौतियों के समाधान के लिए साझे आधार का लगातार विस्तार करते रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 की सफलता में उसके योगदान की सराहना की।

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