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Breaking: जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगे प्रशासक

July 10, 2026

Breaking: जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगे प्रशासक

लखनऊ, 10 जुलाई 2026, (उप्र समाचार सेवा)। शासन ने जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया। निर्वाचित अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पूर्व पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने आदेश जारी कर दिया है।

आदेश के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष ही कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक होंगे। यह अवधि 6 माह अथवा नया चुनाव होने तक जो भी पहले हो, तक रहेगी। किंतु प्रशासक कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। वे केवल सामान्य कार्य ही करेंगे। आवश्यक होने पर नीतिगत प्रस्ताव का अनुमोदन जिलाधिकारी से लेना होगा ।

ज्ञातव्य है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण निर्धारण में विलंब के कारण पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सके हैं। इसी कारण पहले ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया था। अब जिला पंचायत अध्यक्षों को भी प्रशासक बना दिया गया है। अनुमान है कि क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर ब्लाक प्रमुखों को भी प्रशासक बना दिया जाएगा

हालांकि ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।

Ayodhya: सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीकापुर में 432 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

लखनऊ : 10 जुलाई, 2026, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि डबल इंजन सरकार विरासत और विकास के समन्वय से कार्य कर रही है। डबल इंजन सरकार ने अयोध्या में वह कर करके दिखाया है, जो विगत 500 वर्षों में नहीं हो सका था। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर का निर्माण हो चुका है। लाखों श्रद्धालु अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दर्शन कर अभिभूत होकर जाते हैं। अब अयोध्या तीनां लोकों से न्यारी दिख रही है। यहां की गलियां तथा सड़कें चमक रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन के अनुरूप अयोध्या सोलर सिटी के रूप में देश के चुनिन्दा शहरों से एक है। सूर्यवंश की राजधानी रात्रि के समय भी सूर्य की तरह चमक रही है।
मुख्यमंत्री जी आज जनपद अयोध्या में बीकापुर विधान सभा क्षेत्र की 432 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 217 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक, प्रमाण पत्र, चाभी, स्वीकृति पत्र, आयुष्मान कार्ड आदि प्रदान किये। इसके पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के पूर्व सिंचाई एवं बाढ़ नियन्त्रण मंत्री स्व0 मुन्ना सिंह चौहान की प्रतिमा का अनावरण, विभिन्न विभागों द्वारा लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन, पौधरोपण, महिलाओं की गोदभराई तथा बच्चों का अन्नप्राशन किया।

बिहार विधानसभा के प्रबोधन कार्यक्रम में शामिल होंगे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना

हिमाचल प्रदेश की सार्वजनिक उपक्रम समिति का उत्तर प्रदेश विधान सभा का भ्रमण

विधायकों को संसदीय परंपराओं एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का देंगे संदेश

लखनऊ/पटना । बिहार विधानसभा के नवनिर्वाचित एवं वर्तमान सदस्यों के लिए गया जी स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) में आयोजित होने वाले दो दिवसीय ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ में उत्तर प्रदेश विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री सतीश महाना भी शामिल होंगे।
बिहार विधानसभा सचिवालय, लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) तथा बिहार सरकार के बिपार्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम 11 एवं 12 जुलाई, 2026 को संपन्न होगा। कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा किया जाएगा।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश, बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, बिहार विधान परिषद के सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहेंगे।
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना कार्यक्रम में विधायकों को संबोधित करते हुए संसदीय परंपराओं, सदन की गरिमा, विधायी प्रक्रियाओं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।
श्री महाना ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि जनप्रतिनिधि संविधान की भावना, संसदीय मर्यादाओं और सदन की कार्यप्रणाली को गहराई से समझें। प्रबोधन जैसे कार्यक्रम विधायकों को न केवल विधायी कार्यों की जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रभावी जनसेवा के लिए भी प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देने और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने का सर्वोच्च माध्यम है। सदन की गरिमा, अनुशासन और सकारात्मक चर्चा लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाती है।
प्रबोधन कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में विधायकों को सदन की कार्यवाही, प्रश्नकाल, विधायी प्रक्रिया, संसदीय शिष्टाचार, समितियों की भूमिका तथा जनप्रतिनिधि के रूप में उनके दायित्वों से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना द्वारा विधानसभा की कार्यप्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने के लिए किए गए नवाचारों—ई-विधान व्यवस्था, डिजिटल सुविधाओं और सदन की कार्यक्षमता बढ़ाने के प्रयासों को देशभर में सराहा गया है। उनके अनुभव इस प्रबोधन कार्यक्रम में भाग लेने वाले विधायकों के लिए उपयोगी और प्रेरणादायी होंगे।

साहित्य वही, जो सीधे हृदय तक पहुँचे: कुंवर मानवेंद्र सिंह

श्री कृष्ण प्रताप सिंह, जयंती पर आयोजित हुई 23वीं अध्यात्म चिंतन व्याख्यानमाला

साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा क्षेत्र की विभूतियों का हुआ सम्मान, तीन पुस्तकों का लोकार्पण

‘संत विवेक’ विशेषांक
समाज को दिशा देने वाली विभूतियों का सम्मान हमारी सांस्कृतिक परंपरा : कुंवर मानवेंद्र सिंह

लखनऊ, 10 जुलाई। ‘कृष्णप्रताप विद्याविन्दु लोकहित न्यास’, ‘शिव सिंह सरोज स्मारक समिति’ और ‘अखिल भारतीय साहित्य परिषद’ के संयुक्त तत्वावधान में गोमती नगर स्थित सीएमएस विशाल खंड के सभागार में श्री कृष्ण प्रताप सिंह की जयंती के अवसर पर 23वीं अध्यात्म चिंतन व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। स्वर्गीय कृष्ण प्रताप सिंह एवं अखंड प्रताप सिंह के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि साहित्य का वास्तविक उद्देश्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय तक पहुंचकर उसे संवेदनशील और संस्कारित बनाना है। उन्होंने यह विचार ‘श्री कृष्ण प्रताप विद्या विन्दु लोकहित न्यास’ एवं ‘श्री शिव सिंह सरोज स्मारक समिति’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन धर्म, संस्कृति, समाज, संस्कार और सेवा की भावना को सशक्त करते हैं तथा नई पीढ़ी को भारतीय चिंतन और मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि ‘संत विवेक-2026’ का विशेषांक भक्ति काव्य, भारतीय आध्यात्मिक चिंतन और सांस्कृतिक विरासत का समृद्ध दस्तावेज है। उन्होंने डॉ. विद्या विन्दु के संपादकीय की सराहना करते हुए कहा कि इसमें भारतीय संस्कृति, भक्ति और पारिवारिक मूल्यों का गहन एवं प्रेरणादायी चित्रण है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के प्रति श्रद्धा ही ईश्वर भक्ति का प्रथम सोपान है और यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह विशेषांक पाठकों को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ते हुए समाज में सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करेगा। समारोह को विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने साहित्यकारों का अभिनंदन कर आभार व्यक्त किया।
शिव सिंह सरोज स्मारक समिति की अध्यक्ष रमा सिंह ने संगोष्ठी की आवश्यकता पर बल दिया।
समारोह में पद्मश्री अनिल रस्तोगी, डॉ. आनंद प्रकाश माहेश्वरी, डॉ. दिनेश प्रताप सिंह, चंद्रशेखर वर्मा, डॉ. मांडवी सिंह, सरिता सिंह, डॉ. शुभदा पाण्डेय, डॉ. मीनू खरे, पद्मश्री डॉ राम कठिन सिंह, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, इन्द्रासन सिंह ‘इन्दु’ अर्चना शुक्ला हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा डॉ. दिवाकांत मिश्र सहित विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों को स्मृति सम्मान से अलंकृत किया गया। साथ ही अनेक युवा प्रतिभाओं को प्रमाणपत्र, मेडल, अंगवस्त्र, बैग एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान तीन पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ। समारोह का संचालन डॉ. भारती सिंह, अर्चना सतीश एवं विजय कृष्ण सिंह मानक ने किया। राष्ट्रगान एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

July 9, 2026

सनातन ही समाजवाद: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

Posted on 09.07.2026, Time 06.35 PM Thursday, Lucknow, Swami Avimukteshvaranand, Akhilesh Yadav

लखनऊ, 09 जुलाई 2026, उत्तर प्रदेश में गो रक्षा और गाय को माता घोषित करने के लिए जन जागरण कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद राजधानी पहुंचे हैं। आज उनसे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिष्टाचार भेंट की और आशीर्वाद लिया। भेंट के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने कहा कि जो सनातन है वहीं समाजवाद है।

भेंट में उन्होंने अखिलेश यादव को बताया कि प्रदेश में गाय की रक्षा और माता घोषित करने के लिए व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। भेंट के बाद अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान जारी कर कहा कि आज प्रातः काल पूज्य शंकराचार्य जी के दर्शन एवं आशीर्वाद के सौभाग्यशाली क्षण और सनातन पर आए संकट को दूर करने व अधर्मियों के चंगुल से धर्म को मुक्ति दिलाने के लिए सार्थक वार्ता हुई।

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