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मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान बचेगा: शिवराज सिंह चौहान

June 2, 2026

मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान बचेगा: शिवराज सिंह चौहान

  • मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान
  • रायसेन से श्री शिवराज सिंह चौहान का देशभर को संदेश: स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारत
  • संतुलित खाद, सॉयल हेल्थ कार्ड और वैज्ञानिक खेती पर श्री शिवराज सिंह का जोर
  • “धरती हमारी मां है”: मिट्टी संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का श्री शिवराज सिंह ने किया आह्वान
  • गांव-गांव पहुंचेंगे वैज्ञानिक, किसानों को देंगे खेती की नई तकनीक
Posted on 02.06. 2026, Time 01.23 PM , News Source PIB

रायसेन (मध्य प्रदेश), 01 जून 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिले के ग्राम रमासिया से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ करते हुए किसानों को साफ संदेश दिया कि मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

 

1 से 30 जून तक देशभर में चलने वाले इस अभियान के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धरती हमारी माता है और इसकी सेहत बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग न करें, बल्कि मिट्टी की जांच के आधार पर जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि ज्यादा रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन और खेती की लागत पर पड़ता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती माता को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प है। इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें और जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत खेती के तरीके सिखाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि हर किसान का सॉयल हेल्थ कार्ड बनना जरूरी है, ताकि किसान अपनी जमीन की जरूरत समझकर खाद का उपयोग करे। इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका मतलब जरूरत से ज्यादा उपयोग नहीं है। सही मात्रा में खाद का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है।

 

श्री चौहान ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन, धान और दलहन फसलों के लिए क्षेत्र में विशेष प्रदर्शन किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक बुवाई, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीक और पानी बचाने वाली खेती के तरीके सिखाए जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

 

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने महिला सशक्तिकरण को भी अभियान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, आयवर्धन और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। पात्र महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और छोटे व्यवसाय शुरू करने के अवसर दिए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और परिवार की आय बढ़ा सकें।

युवाओं को लेकर भी श्री चौहान ने विशेष बात कही और कहा कि उनके लिए मार्गदर्शन और तैयारी के अवसर बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल सड़क, मकान और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता के अवसर पैदा करना भी उतना ही जरूरी है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से गांवों में पहुंचें, किसानों को तकनीकी सहायता दें और खेती को बचाने के इस संकल्प को जमीन पर उतारें। उन्होंने किसानों, महिलाओं और युवाओं से अपील की कि वे विकास अभियानों में सक्रिय भागीदारी करें, क्योंकि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही समृद्ध गांव, सशक्त किसान, आत्मनिर्भर महिलाएं और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी बहुत विज़नरी हैं, बहुत पहले बहुत दूर का सोचते हैं। ये धरती माता केवल हमारे लिए नहीं आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है। तो इसकी हालत ऐसी ना हो जाए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अन्न उत्पादित करने से इंकार कर दे, इसलिए माटी बची रहे, इसलिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, धरती के तत्वों की आवश्यकता देखते हुए करने की बात करेंगे। केवल इतना ही नहीं, नकली पेस्टीसाइड और खाद उसके खिलाफ भी अभियान चलेगा। हम इस दौरान किसानों को वहाँ की एग्रो-क्लाइमैटिक कंडीशन के हिसाब से कौन सी फसल और कौन से बीज ठीक रहेंगे, कृषि प्रणाली कैसी होनी चाहिए, बीजों का उपचार और बाकी चीजें, वो भी बताएँगे। धरती को बचाने के लिए हरित खाद भी जरूरी है, उसके बारे में भी जानकारी देंगे और विभिन्न योजनाओं का केंद्र सरकार की और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में दिया जाएगा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कुपोषित बच्चों को पोषण किट भी वितरित की गई।

May 31, 2026

संकल्प: खेत बचाओ अभियान एक जून से

  • धरती मां को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प, 1 जून से रायसेन से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’
  • केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के कृषि तंत्र को किया आह्वान, बोले- कर्मकांड नहीं, पूरी अंतरात्मा से उतरें खेतों में

Posted Date:- May 31, 2026 New Delhi

नई दिल्ली, 31 मई 2016, एक जून को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से होने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ के राष्ट्रीय शुभारंभ से पूर्व, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ कृषि अधिकारियों तथा किसान हित में कार्यरत साथियों से वर्चुअल संवाद कर अभियान को जनभागीदारी, वैज्ञानिक दृष्टि और राष्ट्रीय दायित्व के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया। शिवराज सिंह ने इस महत्वपूर्ण अभियान में शामिल होने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर चर्चा की है, वहीं वे केंद्रीय मंत्रियों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों से भी सहभागिता की अपील कर रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती मां को बचाने, खेती का भविष्य सुरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करने का राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने कहा कि बढ़ता तापमान, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट और बदलते जलवायु संकट खेती के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं, इसलिए समय रहते व्यापक जागरूकता और व्यवहारिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

श्री चौहान ने बताया कि 1 जून को रायसेन जिले के रामसिया गांव से प्रारंभ हो रहा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, फसल चयन, जल संरक्षण, हरी खाद, कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कृषि पद्धतियों तथा नकली खाद-बीज और पेस्टिसाइड की पहचान जैसे विषयों पर जागरूक करेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि खेत स्तर पर डेमो, वैज्ञानिक प्रमाण और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से किसानों का विश्वास मजबूत करना होगा। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि देशभर में 30 जून तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन अधिकारी, वैज्ञानिक, संस्थान या टीम किस तिथि को किस गाँव में जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि हर जिले का कार्यक्रम पूर्व नियोजित हो, डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग हो, स्थानीय स्तर पर समुचित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित हों और अभियान के हर चरण में प्रभावी समन्वय दिखाई दे।

श्री चौहान ने राज्यों के कृषि विभागों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य, आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और किसान हितैषी संस्थाएँ एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ने तथा प्राकृतिक खेती व टिकाऊ कृषि के व्यवहारिक नमूने प्रस्तुत करने पर बल दिया।

श्री शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान को बहुउद्देश्यीय स्वरूप देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड, मिनी बीज किट, दलहन-तिलहन मिशन तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का लाभ भी किसानों तक पहुँचाया जाए, इससे खेत बचाने के साथ-साथ किसान की आय, जागरूकता और कृषि प्रबंधन क्षमता को भी मजबूत किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने प्रचार-प्रसार पर जोर देकर इसे अभियान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि यह देशहित का कार्यक्रम है और इसकी जानकारी जितनी तेजी से गाँव-गाँव पहुँचेगी, अभियान उतना ही प्रभावशाली बनेगा। उन्होंने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से कहा कि वे बिना संकोच मीडिया से संवाद करें, क्योंकि यह अभियान धरती, खेती और अन्नदाता के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास व्यक्त किया कि जैसे पूर्व में विकसित कृषि संकल्प अभियान ने व्यापक प्रभाव छोड़ा, उसी प्रकार ‘खेत बचाओ अभियान’ भी देशव्यापी जनजागरण और कृषि सुधार का सफल अध्याय बनेगा। उन्होंने सभी साथियों से आह्वान किया कि वे पूरी निष्ठा, तैयारी और संवेदनशीलता के साथ गाँव-गाँव पहुँचकर किसानों को सही जानकारी दें और धरती माँ के संरक्षण का यह संकल्प जनआंदोलन में बदलें। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह स्वयं भी इस अभियान के दौरान विभिन्न राज्यों में गांवों में जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे।

इस वर्चुअल संवाद के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण सचिव श्री अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, आईसीएआर संस्थानों के निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक, राज्यों के कृषि विभागों के अधिकारी तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

May 20, 2026

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें: कृषि मंत्री

शिवराज सिंह चौहान

भुवनेश्वर, 20 मई 2026, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से उर्वरक प्राप्त करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। उन्‍होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक खेती पर अधिक जोर देने की आवश्‍यकता पर बल दिया। भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद केंद्र सरकार किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने सब्सिडी वाले उर्वरकों के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी और राज्यों से नकली और घटिया गुणवत्ता वाले उर्वरकों के आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

केंद्रीय मंत्री ने उर्वरक सब्सिडी के लिए केंद्र द्वारा स्वीकृत 41 हजार करोड़ रुपये की राशि पर भी प्रकाश डाला और किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। फसल के मौसम में संभावित अल नीनो की स्थिति और कम वर्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए, श्री चौहान ने किसानों को वर्षा के उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होने वाली फसलों का चुनाव करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस वर्ष एक से 15 जून तक राष्ट्रव्यापी “कृषि बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा।

May 15, 2026

यूपी में ‘चारा विकास’ हेतु मास्टर ट्रेनर्स एवं उत्पादकों का प्रशिक्षण संपन्न

Posted on 15.05.2026, Time 02.32 PM

लखनऊ, 15 मई 2026, उत्तर प्रदेश में हरे चारे की कमी के मद्देनजर प्रदेश के पशुपालन विभाग के तत्वावधान में भा.कृ.अनु.प.- भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झाँसी द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में ‘चारा विकास’ हेतु मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण 27 अप्रैल से 14 मई, 2026 तक आयोजित किया गया।

प्रदेश के समस्त 75 जिलों के पशुपालन एवं कृषि विभाग से कुल 125 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया गया। कार्यक्रम दो-दिवसीय कुल 6 बैच में सम्पन्न कराया गया ।इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर्स को चारा विकास के निम्न पहलुओं पर जानकारी दी गयी तथा प्रक्षेत्र भ्रमण भी कराया गया:
•उत्तर प्रदेश में पशुधन एवं चारा उपलब्धता का परिदृश्य तथा क्षेत्रवार चारा विकास योजना
•विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त चारा उत्पादन तकनीकियाँ एवं वर्ष पर्यंत चारा उत्पादन प्रणाली
•बारानी, गोचर भूमियों एवं गौशालाओं हेतु चरागाह, वन-चरागाह एवं उद्यान चरागाह प्रणाली
•समस्याग्रस्त दशाओं तथा गैर-परंपरागत स्रोतों से चारा उत्पादन तकनीकियाँ
•पशुधन आहार प्रबंधन एवं चारा संरक्षण की विधियाँ

प्रतिभागियों ने उन्नत चारा तकनीकियों की जानकारी के साथ-साथ तकनीकियों के प्रसार हेतु विशेषज्ञों से विचार-मंथन भी किया। कार्यक्रम से प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण उपरान्त अपने जनपदों के पशुपालक किसान, कृषि उद्यमी एवं गौशाला संचालकों को प्रशिक्षित कर उनका क्षमता विकास करने हेतु कार्ययोजना भी बताई गयी ।

मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण के अलावा प्रदेश के ‘चारा उत्पादक किसानों एवं गौशाला संचालकों’ हेतु आयोजित किये जा रहे ‘एकदिवसीय’ भ्रमण एवं प्रशिक्षण’ कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 7 जनपदों के कुल 106 चारा उत्पादकों एवं गौशाला संचालकों को ‘चारा उत्पादन, संरक्षण एवं उपयोग’ के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया गया । इस कार्यक्रम से कुल 1125 चारा उत्पादक किसानों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है ।

‘चारा विकास’ के लक्ष्य से आयोजित उक्त ‘प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम’ से चारा तकनीकियों का प्रदेशव्यापी प्रभावी प्रसार होगा जिससे हरे चारे का उत्पादन बढेगा जोकि पशुधन उत्पादकता एवं कृषक आजीविका के लिए हितकर होगा।
#AgriGoI
#icarindia
#mygovindia
#upagriculture
#DOAHUP
#ChouhanShivraj

May 6, 2026

गन्ना किसानों को 2026-27 के लिए 365 रु. प्रति क्विंटल FRP: शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान

केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान

सरकार का बड़ा किसान हितैषी फैसला
5 करोड़ गन्ना किसानों और 5 लाख श्रमिकों को मिलेगा लाभ, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत- श्री शिवराज सिंह

Posted on May 06, 2026, Time 02.06 PM

नई दिल्ली, 05 मई 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने एक बार फिर किसानों के हित में बड़ा, संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय लिया है। चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो गन्ना किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें उत्पादन का बेहतर प्रतिफल दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

श्री चौहान ने कहा कि यह निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार किसानों की समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा लिया गया यह फैसला देश के करोड़ों गन्ना उत्पादक किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला है। उन्होंने कहा कि 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी दर पर 365 रु. प्रति क्विंटल FRP स्वीकृत किया गया है। साथ ही, 10.25 प्रतिशत से अधिक रिकवरी पर प्रत्येक 0.1 प्रतिशत वृद्धि के लिए 3.56 रु. प्रति क्विंटल का प्रीमियम दिया जाएगा, जबकि 10.25 प्रतिशत से कम रिकवरी पर इसी दर से FRP में कमी का प्रावधान है।

श्री चौहान ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि केंद्र सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक अत्यंत मानवीय और किसान-पक्षीय निर्णय भी लिया है। जिन चीनी मिलों में रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम रहेगी, वहां भी किसानों के FRP में कोई कटौती नहीं की जाएगी और ऐसे किसानों को 338.30 रु. प्रति क्विंटल का मूल्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल मूल्य वृद्धि भर नहीं है, बल्कि किसानों को सुरक्षा, स्थिरता और सम्मान देने का संकल्प भी है। चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने की उत्पादन लागत 182 रु. प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि घोषित FRP 365 रु. प्रति क्विंटल है, जो लागत से 100.5 प्रतिशत अधिक है। यह भी उल्लेखनीय है कि नया FRP वर्तमान चीनी सत्र 2025-26 की तुलना में 2.81 प्रतिशत अधिक है।

श्री चौहान ने कहा कि देश का चीनी क्षेत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृषि आधारित क्षेत्र है, जो लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और उनके परिजनों के जीवनयापन से जुड़ा है। इसके साथ ही, चीनी मिलों तथा संबंधित गतिविधियों में कार्यरत लगभग 5 लाख श्रमिकों को भी इस निर्णय से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्पिछले चीनी सत्र 2024-25 में देय 1,02,687 करोड़ रु. में से लगभग 1,02,209 करोड़ रु. का भुगतान 20 अप्रैल 2026 तक किया जा चुका था, यानी लगभग 99.5 प्रतिशत गन्ना बकाया भुगतान हो चुका था। वहीं, चालू चीनी सत्र 2025-26 में देय 1,12,740 करोड़ रु. में से लगभग 99,961 करोड़ रु. का भुगतान 20 अप्रैल 2026 तक किया जा चुका है, जो लगभग 88.6 प्रतिशत है।

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