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सरकार भारत में ग्रीन यूरिया उत्पादन का सपना साकार करने की रूपरेखा तैयार कर रही है

June 28, 2026

सरकार भारत में ग्रीन यूरिया उत्पादन का सपना साकार करने की रूपरेखा तैयार कर रही है

प्रविष्टि तिथि: 26 JUN 2026 2:13PM by PIB Delhi

नई दिल्ली। सरकार ने सतत कृषि, कार्बन तटस्थता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस संबंध में उर्वरक विभाग ने भारत के पीडीआईएल में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए उच्च-स्तरीय ‘प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओआई) बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता डॉ. के.के. पाठक – संयुक्त सचिव (उर्वरक विभाग) ने की, जो पीडीआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक भी हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में, उर्वरक विभाग ने भारत में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ -ईओआई) के लिए निमंत्रण जारी किया था। पीडीआईएल मुख्यालय, नोएडा में आयोजित प्री-ईओआई बैठक ने निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के कई हितधारकों के लिए बेहतरीन मंच प्रदान किया। इनमें एनटीपीसी, भारतीय सौर ऊर्जा निगम, अमोनिया-यूरिया टेक्नोलॉजी सप्लायर्स, प्रमुख भारतीय उर्वरक कंपनियां और इलेक्ट्रोलाइज़र, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया बनाने वाली कंपनियां शामिल थीं। पूरी वैल्यू चेन से संभावित कंपनियों की बड़ी संख्या में ऑनलाइन और ऑफलाइन उपस्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इसमें शामिल सभी लोग इस पहल को निकट भविष्य में हकीकत बनाने के लिए कितने उत्सुक हैं।

नीति और परिचालन संबंधी मुख्य बातें

1. मंत्रालयों के बीच समन्वित सरकारी सहयोग: चर्चाओं में ग्रीन प्रोडक्शन को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए कई मंत्रालयों से मिलने वाले वित्तीय आवंटन पर ज़ोर दिया गया। बड़े स्तर पर फंडिंग की प्रतिबद्धताओं में ये शामिल हैं:

  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय: महत्वपूर्ण ग्रीन ऊर्जा अवसंरचना को तेज़ी से बढ़ाने और भारत की स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी को मज़बूत करने के लिए ₹19,744 करोड़।
  • उर्वरक विभाग: ग्रीन अमोनिया को राष्ट्रीय उर्वरक निर्माण शृंखला में आसानी से शामिल करने के लिए संस्थागत और बाज़ार-समानता ढांचा तैयार करने का काम सौंपा गया।

2. अलगअलग कीमत मैकेनिज़्म के ज़रिए निर्माताओं की सुरक्षा: लागत की चुनौतियों से निपटने और स्थानीय उर्वरक इकाइयों की सुरक्षा के लिए, मज़बूत ‘ऑफटेकर-साइड डिफरेंशियल प्राइसिंग मैकेनिज़्म’ (खरीददार-पक्ष की अलग-अलग कीमत व्यवस्था) की रूपरेखा तैयार की गई:

  • चुनौती: पारंपरिक ग्रे अमोनिया की तुलना में ग्रीन अमोनिया के उत्पादन में अभी ज़्यादा लागत आती है, जिससे बिना मदद के ग्रीन यूरिया प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाता।
  • समाधान: भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) ने उत्पादकों से ग्रीन अमोनिया खरीदने के लिए निविदा पहले ही जारी कर दी हैं। इसे घरेलू उर्वरक कंपनियों को स्टैंडर्ड मार्केट-लिंक्ड ग्रे अमोनिया की कीमतों (Platts और Argus इंडेक्स के दो हफ़्ते के औसत, साथ ही सीमा शुल्क और स्थानीय परिवहन  लागत के आधार पर) पर सप्लाई किया जाएगा। ग्रीन यूरिया के लिए भी कुछ इसी तरह के सिस्टम पर विचार किया जा सकता है।

3. धीरेधीरे कम होने वाली मदद के साथ उत्पादकपक्ष के लिए प्रोत्साहन: निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए, एनजीएचएम (ग्रीन अमोनिया मोड 2A) के तहत प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन योजना का विवरण दिया गया। एसईसीआई द्वारा प्रबंधित पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी ई-रिवर्स नीलामी के ज़रिए कुल 7.24 लाख एमटी/वर्ष ग्रीन अमोनिया की खरीद का लक्ष्य तय किया जाएगा। परियोजना के स्पष्ट चरणों में मदद दी जाएगी:

  • विकास चरण: नई ग्रीनफील्ड परियोजनाओं या निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए।
  • परिचालन चरण: वाणिज्यिक आपूर्ति की तारीख से नकद प्रोत्साहन शुरू होंगे।
  • दीर्घावधि निश्चितता: एक बाध्यकारी निश्चित समझौते (GAPA/GASA) के ज़रिए 10 वर्ष की अवधि के लिए लाभ सुरक्षित किए जाते हैं, जिससे डेवलपर्स को बाज़ार में मज़बूत भरोसा मिलता है।

तकनीकी आधार: पुदिमाडाका 150 TPD पायलट प्लांट

बातचीत में तकनीकी प्रक्रियाओं पर भी ध्यान दिया गया, जिसमें आंध्र प्रदेश के पुदिमाडाका में स्थित 150 TPD ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट को बेंचमार्क के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इस प्लांट को एनईटीआरए (एनटीपीसी की अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ) ने विकसित किया है। यह सुविधा एडवांस्ड कार्बन कैप्चर और यूटिलाइज़ेशन (सीसीयूएस) सिस्टम को वॉटर इलेक्ट्रोलेसिस के साथ जोड़ने का उदाहरण पेश करती है। इससे कार्बोनेटेड फ्लाई ऐश, फूड-ग्रेड मटीरियल और सिंथेटिक फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलता है।

यह पहल कार्बन-न्यूट्रल फर्टिलाइज़र प्रोडक्शन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भारतीय कृषि के लिए हरित भविष्य की दिशा में सोच-समझकर उठाया गया और अच्छी तरह से तैयार किया गया कदम है।

June 23, 2026

अमित शाह ने NAFED के ई-ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in का शुभारंभ किया

देश की एकता-अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को बलिदान दिवस पर शत्-शत् नमन

2014 में बंद होने के कगार पर खड़ा NAFED आज मोदी सरकार में ₹500 करोड़ के मुनाफे के साथ 74 लाख किसानों की सेवा कर रहा

बिचौलिए होंगे खत्म, किसान के पसीने की कमाई 48 घंटे में सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचेगी

अगले 2 वर्षों में दलहन का एक-एक दाना सीधे किसानों से खरीदेगा NCCF और NAFED

किसानों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर के लिए NAFED की छात्रवृत्ति शुरू, मुनाफे का एक हिस्सा किसान परिवारों को दी जाएगी

Posted Date:- Jun 23, 2026

New Delhi, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) के ई-ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी और NAFED के अध्यक्ष जेठाभाई अहीर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि NAFED ने आज चार प्रमुख पहलों की शुरुआत की है, जिसमें NAFEX.in, दृष्टि, ईआरपी और NAFED कल्याण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि NAFEX.in सहित अन्य पहलें काफी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वर्ष 2014 में NAFED बंद होने की कगार पर था, लेकिन आज इन प्रयासों के कारण NAFED 30,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर और 500 करोड़ रुपये के मुनाफे के साथ देश के 74 लाख से अधिक किसानों की सेवा कर रहा है। श्री शाह ने कहा कि जब NAFED गहरे आर्थिक संकट में था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इसे पूरी पारदर्शिता के साथ चलाने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने आर्थिक सहायता प्रदान कर NAFED को एक बार फिर मजबूती से खड़ा कर दिया है।

श्री शाह ने कहा कि आज NAFED उत्पादन और खरीद दोनों में काफी बढ़ोत्तरी कर चुका है। देश को दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए NCCF और NAFED को सीधे किसानों से दलहन का एक-एक दाना खरीदने की दिशा में और भी तेजी से आगे बढ़ना है। इससे किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य मिलेगा, तो दलहन की खेती का रकबा अपने आप बढ़ेगा और देश दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हमने दलहन, मक्का तथा अन्य उत्पादों की सीधी खरीद के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है। अब इस इंफ्रास्ट्रक्चर को नीचे तक पहुंचाना है। श्री शाह ने कहा कि NAFED और NCCF को पूरी दृढ़ता और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा, तभी परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हम सुनिश्चित करेंगे कि अगले दो वर्षों के भीतर सभी किसान इन दोनों संगठनों को सीधे दलहन बेच सकें और उन्हें भुगतान भी सीधे उनके खाते में मिले।

उन्होंने कहा कि आज NAFED केवल कृषि उत्पादों की खरीद तक सीमित नहीं रहा है। विगत तीन वर्षों में NAFED ने जैविक खेती, बीज उत्पादन, खुदरा कारोबार, जैव उर्वरक निर्माण, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे क्षेत्रों में बहुत अच्छा कार्य किया है, जिससे NAFED की प्रासंगिकता भी बढ़ी है और मुनाफा भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जब सहकारिता मंत्रालय बना था, तब NAFED का टर्नओवर 20,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़ कर 30,000 करोड़ रुपये हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दो वर्षों में यह टर्नओवर बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये के पार हो जाएगा। श्री शाह ने कहा कि NAFED का शुद्ध मुनाफा 139 करोड़ रुपये से बढ़कर 405 करोड़ रुपये हो गया है और नेटवर्थ 358 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,050 करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि NAFED आज एक मजबूत, आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर संगठन के रूप में उभरा है। अब समय है कि NAFED और NCCF पूरी पारदर्शिता के साथ दलहन तथा अन्य फसलों का एक-एक दाना सीधे किसानों से खरीदें, बिचौलियों के पूरे तंत्र को समाप्त करें और मुनाफा जिन किसानों का हक है, वह उन तक अवश्य पहुंचाएं।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि NAFED ने अपने मुनाफे का 1% किसान परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर विकास के लिए छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था किसानों के बच्चों को उच्च शिक्षा और करियर बनाने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने में सहयोग करेगी।

अपने संबोधन की शुरुआत में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री शाह ने कहा कि आज ही के दिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने ‘एक राष्ट्र, एक विधान, एक प्रधान’ के सूत्र को चरितार्थ करने और देश को एकजुट रखने के लिए बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस राष्ट्र के बड़े नेताओं में शुमार हैं। उन्होंने जीवन में कुछ भी प्रसिद्धि के लिए नहीं किया और जो किया उसके दूरगामी परिणाम इस देश के लिए शुभ साबित हुए। श्री शाह ने कहा कि भारत के विभाजन के समय अंग्रेजों से लड़ाई लड़ कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने सुनिश्चित किया था कि पश्चिम बंगाल भारत में रहे। इसी कारण आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना हुआ है। गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू किया गया, जिसकी वजह से कश्मीर का राष्ट्रध्वज और संविधान अलग था। श्री शाह ने कहा कि यह संकल्पना भारत की एकता और अखंडता के लिए बहुत खतरनाक थी। तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने एक आंदोलन छेड़ा कि एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं रहेंगे। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से कश्मीर तक मार्च किया और कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा है। कश्मीर जाने के लिए उन्होंने कोई परमिट लेने से इनकार कर दिया, जिसकी वजह से श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को गिरफ्तार कर लिया गया। कश्मीर की जेल में ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संहेदास्पद मृत्यु हो गई। श्री शाह ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तत्कालीन सरकार के उद्योग मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। गृह मंत्री ने कहा कि आज श्यामा प्रसाद जी का सपना साकार हो चुका है। अनुच्छेद 370 समाप्त हो चुका है और उनकी बनाई पार्टी की सरकार गंगोत्री से लेकर बंगाल के गंगासागर तक है। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के प्रखर हिमायती थे।

June 2, 2026

मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान बचेगा: शिवराज सिंह चौहान

  • मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान
  • रायसेन से श्री शिवराज सिंह चौहान का देशभर को संदेश: स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारत
  • संतुलित खाद, सॉयल हेल्थ कार्ड और वैज्ञानिक खेती पर श्री शिवराज सिंह का जोर
  • “धरती हमारी मां है”: मिट्टी संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का श्री शिवराज सिंह ने किया आह्वान
  • गांव-गांव पहुंचेंगे वैज्ञानिक, किसानों को देंगे खेती की नई तकनीक
Posted on 02.06. 2026, Time 01.23 PM , News Source PIB

रायसेन (मध्य प्रदेश), 01 जून 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिले के ग्राम रमासिया से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ करते हुए किसानों को साफ संदेश दिया कि मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

 

1 से 30 जून तक देशभर में चलने वाले इस अभियान के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धरती हमारी माता है और इसकी सेहत बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग न करें, बल्कि मिट्टी की जांच के आधार पर जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि ज्यादा रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन और खेती की लागत पर पड़ता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती माता को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प है। इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें और जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत खेती के तरीके सिखाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि हर किसान का सॉयल हेल्थ कार्ड बनना जरूरी है, ताकि किसान अपनी जमीन की जरूरत समझकर खाद का उपयोग करे। इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका मतलब जरूरत से ज्यादा उपयोग नहीं है। सही मात्रा में खाद का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है।

 

श्री चौहान ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन, धान और दलहन फसलों के लिए क्षेत्र में विशेष प्रदर्शन किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक बुवाई, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीक और पानी बचाने वाली खेती के तरीके सिखाए जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

 

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने महिला सशक्तिकरण को भी अभियान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, आयवर्धन और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। पात्र महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और छोटे व्यवसाय शुरू करने के अवसर दिए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और परिवार की आय बढ़ा सकें।

युवाओं को लेकर भी श्री चौहान ने विशेष बात कही और कहा कि उनके लिए मार्गदर्शन और तैयारी के अवसर बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल सड़क, मकान और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता के अवसर पैदा करना भी उतना ही जरूरी है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से गांवों में पहुंचें, किसानों को तकनीकी सहायता दें और खेती को बचाने के इस संकल्प को जमीन पर उतारें। उन्होंने किसानों, महिलाओं और युवाओं से अपील की कि वे विकास अभियानों में सक्रिय भागीदारी करें, क्योंकि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही समृद्ध गांव, सशक्त किसान, आत्मनिर्भर महिलाएं और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी बहुत विज़नरी हैं, बहुत पहले बहुत दूर का सोचते हैं। ये धरती माता केवल हमारे लिए नहीं आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है। तो इसकी हालत ऐसी ना हो जाए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अन्न उत्पादित करने से इंकार कर दे, इसलिए माटी बची रहे, इसलिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, धरती के तत्वों की आवश्यकता देखते हुए करने की बात करेंगे। केवल इतना ही नहीं, नकली पेस्टीसाइड और खाद उसके खिलाफ भी अभियान चलेगा। हम इस दौरान किसानों को वहाँ की एग्रो-क्लाइमैटिक कंडीशन के हिसाब से कौन सी फसल और कौन से बीज ठीक रहेंगे, कृषि प्रणाली कैसी होनी चाहिए, बीजों का उपचार और बाकी चीजें, वो भी बताएँगे। धरती को बचाने के लिए हरित खाद भी जरूरी है, उसके बारे में भी जानकारी देंगे और विभिन्न योजनाओं का केंद्र सरकार की और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में दिया जाएगा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कुपोषित बच्चों को पोषण किट भी वितरित की गई।

May 31, 2026

संकल्प: खेत बचाओ अभियान एक जून से

  • धरती मां को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प, 1 जून से रायसेन से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’
  • केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के कृषि तंत्र को किया आह्वान, बोले- कर्मकांड नहीं, पूरी अंतरात्मा से उतरें खेतों में

Posted Date:- May 31, 2026 New Delhi

नई दिल्ली, 31 मई 2016, एक जून को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से होने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ के राष्ट्रीय शुभारंभ से पूर्व, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ कृषि अधिकारियों तथा किसान हित में कार्यरत साथियों से वर्चुअल संवाद कर अभियान को जनभागीदारी, वैज्ञानिक दृष्टि और राष्ट्रीय दायित्व के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया। शिवराज सिंह ने इस महत्वपूर्ण अभियान में शामिल होने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर चर्चा की है, वहीं वे केंद्रीय मंत्रियों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों से भी सहभागिता की अपील कर रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती मां को बचाने, खेती का भविष्य सुरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करने का राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने कहा कि बढ़ता तापमान, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट और बदलते जलवायु संकट खेती के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं, इसलिए समय रहते व्यापक जागरूकता और व्यवहारिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

श्री चौहान ने बताया कि 1 जून को रायसेन जिले के रामसिया गांव से प्रारंभ हो रहा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, फसल चयन, जल संरक्षण, हरी खाद, कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कृषि पद्धतियों तथा नकली खाद-बीज और पेस्टिसाइड की पहचान जैसे विषयों पर जागरूक करेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि खेत स्तर पर डेमो, वैज्ञानिक प्रमाण और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से किसानों का विश्वास मजबूत करना होगा। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि देशभर में 30 जून तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन अधिकारी, वैज्ञानिक, संस्थान या टीम किस तिथि को किस गाँव में जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि हर जिले का कार्यक्रम पूर्व नियोजित हो, डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग हो, स्थानीय स्तर पर समुचित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित हों और अभियान के हर चरण में प्रभावी समन्वय दिखाई दे।

श्री चौहान ने राज्यों के कृषि विभागों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य, आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और किसान हितैषी संस्थाएँ एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ने तथा प्राकृतिक खेती व टिकाऊ कृषि के व्यवहारिक नमूने प्रस्तुत करने पर बल दिया।

श्री शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान को बहुउद्देश्यीय स्वरूप देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड, मिनी बीज किट, दलहन-तिलहन मिशन तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का लाभ भी किसानों तक पहुँचाया जाए, इससे खेत बचाने के साथ-साथ किसान की आय, जागरूकता और कृषि प्रबंधन क्षमता को भी मजबूत किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने प्रचार-प्रसार पर जोर देकर इसे अभियान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि यह देशहित का कार्यक्रम है और इसकी जानकारी जितनी तेजी से गाँव-गाँव पहुँचेगी, अभियान उतना ही प्रभावशाली बनेगा। उन्होंने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से कहा कि वे बिना संकोच मीडिया से संवाद करें, क्योंकि यह अभियान धरती, खेती और अन्नदाता के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास व्यक्त किया कि जैसे पूर्व में विकसित कृषि संकल्प अभियान ने व्यापक प्रभाव छोड़ा, उसी प्रकार ‘खेत बचाओ अभियान’ भी देशव्यापी जनजागरण और कृषि सुधार का सफल अध्याय बनेगा। उन्होंने सभी साथियों से आह्वान किया कि वे पूरी निष्ठा, तैयारी और संवेदनशीलता के साथ गाँव-गाँव पहुँचकर किसानों को सही जानकारी दें और धरती माँ के संरक्षण का यह संकल्प जनआंदोलन में बदलें। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह स्वयं भी इस अभियान के दौरान विभिन्न राज्यों में गांवों में जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे।

इस वर्चुअल संवाद के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण सचिव श्री अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, आईसीएआर संस्थानों के निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक, राज्यों के कृषि विभागों के अधिकारी तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

May 20, 2026

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें: कृषि मंत्री

शिवराज सिंह चौहान

भुवनेश्वर, 20 मई 2026, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से उर्वरक प्राप्त करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। उन्‍होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक खेती पर अधिक जोर देने की आवश्‍यकता पर बल दिया। भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद केंद्र सरकार किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने सब्सिडी वाले उर्वरकों के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी और राज्यों से नकली और घटिया गुणवत्ता वाले उर्वरकों के आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

केंद्रीय मंत्री ने उर्वरक सब्सिडी के लिए केंद्र द्वारा स्वीकृत 41 हजार करोड़ रुपये की राशि पर भी प्रकाश डाला और किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। फसल के मौसम में संभावित अल नीनो की स्थिति और कम वर्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए, श्री चौहान ने किसानों को वर्षा के उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होने वाली फसलों का चुनाव करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस वर्ष एक से 15 जून तक राष्ट्रव्यापी “कृषि बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा।

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