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लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पेश, चर्चा शुरू

July 28, 2026

लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पेश, चर्चा शुरू

नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026, लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को विचार और पारित करने के लिए चर्चा जारी की है। यह विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन करता है। इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान, दस वर्ष तक की कैद, दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना और दोषी पाए गए अपराधियों की संपत्ति की ज़ब्ती जैसे कठोर दंड शामिल हैं। मामलों के शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में प्रत्येक राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को दैनिक सुनवाई के लिए विशेष त्वरित न्यायालय स्थापित करने का प्रावधान है। इसमें यह भी प्रावधान है कि अपराधों की जांच पुलिस स्टेशन में सूचना दर्ज होने की तिथि से दो महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए। अभियोग पत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर मुकदमे समाप्त किए जाने चाहिए।

विधेयक पेश करते हुए, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह नया विधेयक देश के विद्यार्थियों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए सरकार की गहरी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि साथ ही, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प देश के युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं होने देने की पुष्टि भी है। डॉ. सिंह ने दावा किया कि यह भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर है। कांग्रेस और यूपीए शासनकाल में हुई कई परीक्षा लीक की घटनाओं का जिक्र करते हुए श्री सिंह ने कहा कि इन मामलों से निपटने के लिए कोई व्यापक कानून नहीं था। मोदी सरकार में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) अधिनियम, 2024 लाया गया।

डॉ. सिंह ने कहा कि हाल ही में हुई परीक्षा लीक की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री ने स्वयं यह निर्णय लिया कि अनुचित प्रथाओं को रोकने के लिए कानूनी ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि इस कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए यह संशोधन लाया गया है, ताकि इन परीक्षाओं की विश्वसनीयता को बढ़ाया और बहाल किया जा सके।

चर्चा में भाग लेते हुए, कांग्रेस के गौरव गगोई ने सरकार पर शिक्षा क्षेत्र के प्रति गंभीर न होने और वास्तविक सुधार लाने का इरादा न रखने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नया विधेयक महज दिखावा है, क्योंकि यह पहले के अधिनियम में केवल एक संशोधन है।

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने इस विधेयक को एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसा विधेयक समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है। सुश्री स्वराज ने कहा कि आज परीक्षा माफिया संगठित हो गया है और एक अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क में परिवर्तित हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधेयक में पेपर लीक से संबंधित मामलों की जांच के लिए एक विशेष कार्य बल गठित करने का प्रावधान है। सुश्री स्वराज ने कहा कि इस विधेयक के तहत प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालत स्थापित कर सकते हैं।

समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में आउटसोर्सिंग के माध्यम से अधिकारियों की भर्ती के सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाया। श्री यादव ने कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) अधिनियम 2024 में लागू होने के बावजूद इस वर्ष नीट यूजी का पेपर लीक हुआ।

विधेयक का समर्थन करते हुए एआईटीसी के अभिषेक बनर्जी ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी निष्पक्ष परीक्षा का हकदार है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक को रोकने के लिए एक सख्त कानून आवश्यक है।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के दयानिधि मारन ने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) ही मुख्य मुद्दा है। यह एकसमान नहीं है और विद्यार्थियों के हित में नहीं है।

तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के लावु श्री कृष्ण देवरायलु ने विधेयक में संशोधनों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ने पेपर लीक मामले को स्वीकार कर लिया है और आवश्यक बदलाव करने को तैयार है। उन्होंने कोचिंग संस्थानों में सुधार की मांग की ताकि शिक्षा को गैर-लाभकारी बनाया जा सके। टीडीपी सांसद ने प्रश्न पत्र तैयार करने वाली समितियों के विकेंद्रीकरण की भी मांग की।

विधेयक का समर्थन करते हुए शिवसेना के डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि यह ऐतिहासिक विधेयक देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, आकांक्षाओं और प्रयासों को सम्मान देगा। उन्होंने केंद्र सरकार की 37 दिनों के भीतर नीट की पुनर्परीक्षा आयोजित करने और 25 दिनों के भीतर परिणाम प्रकाशित करने के लिए प्रशंसा की।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने में विफल रहने और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार से विद्यार्थियों से किए गए वादों को पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवा शिक्षा व्यवस्था में अपना विश्वास बहाल करने और जवाबदेही की मांग करने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

श्रीमति प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा नव नियुक्त शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर भी आरोप लगाए जाने के कारण लोकसभा में तीखी बहस हुई। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और किरेन रिजिजू ने उनसे अपने बयानों की प्रामाणिकता साबित करने या सदन से माफी मांगने को कहा।

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि विद्यार्थी राजनीति के बजाय भविष्य को सुरक्षित बनाने वाली व्यवस्था चाहते हैं। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा करोड़ों परिवारों के लिए अवसरों का एकमात्र द्वार है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने लीक प्रूफ और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा सुधारों पर एक व्यापक विधेयक तैयार करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग की। उन्होंने सरकार से शिक्षा सुधारों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का भी अनुरोध किया।

समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का दर्द वह खुद महसूस कर सकती हैं, क्योंकि वह खुद वहां मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी उस दौरान विद्यार्थियों के साथ खड़ी रही।

रात्रि में सड़कों पर उतरीं पालिकाध्यक्ष, सफाई व्यवस्था और पंपिंग स्टेशन का लिया जायजा

जलभराव रोकने के लिए अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, मशीनें हर समय चालू रखने पर जोर

फोटो –सफाई व्यवस्था का जायजा लेती पालिकाध्यक्ष श्वेता चौधरी

हाथरस। बरसात के मौसम में शहर को स्वच्छ और जलभराव मुक्त बनाए रखने के लिए नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्वेता चौधरी लगातार रात्रिकालीन निरीक्षण कर रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने देर रात शहर के प्रमुख मार्गों, बाजारों और विभिन्न वार्डों का भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद पंपिंग स्टेशन पहुंचकर जल निकासी व्यवस्था, मशीनों की कार्यप्रणाली और आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की।निरीक्षण के दौरान पालिकाध्यक्ष ने रात्रिकालीन सफाई, कूड़ा उठान, नालियों की सफाई और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि शहर के किसी भी हिस्से में जलभराव या गंदगी की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए तथा सभी व्यवस्थाएं पूरी सतर्कता और गुणवत्ता के साथ संचालित की जाएं।पंपिंग स्टेशन पर उन्होंने मशीनों के संचालन की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि सभी पंप हर समय पूर्ण क्षमता के साथ क्रियाशील रहें, ताकि वर्षा के दौरान जल निकासी में किसी प्रकार की बाधा न आए और नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।पालिकाध्यक्ष श्वेता चौधरी ने कहा कि नगरवासियों को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना नगर पालिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से वह स्वयं देर रात तक व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और सफाई व्यवस्था प्रभावी बनी रहे।उन्होंने अधिकारियों को रात्रिकालीन निरीक्षण नियमित रूप से जारी रखने तथा सफाई और जल निकासी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। नगरवासियों ने भी पालिकाध्यक्ष की इस पहल की सराहना करते हुए इसे स्वच्छ, सुंदर और सुव्यवस्थित हाथरस की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

एम्स रायबरेली के डॉक्टरों ने महिला के शरीर से 7.5 किलोग्राम का गर्भाशय ट्यूमर निकाला।

रायबरेली, सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए, रायबरेली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉक्टरों ने एक जटिल बहु-विभागीय सर्जिकल प्रक्रिया के ज़रिए 46 साल की महिला के शरीर से 7.5 किलोग्राम वज़न का एक बहुत बड़ा गर्भाशय ट्यूमर सफलतापूर्वक बाहर निकाला। मरीज़ के पेट में लगातार सूजन बढ़ रही थी और जांच में पता चला कि उनके गर्भाशय में एक बहुत बड़ा ट्यूमर है, जिसका आकार लगभग 30 × 30 × 20 सेमी था और जिसने पेट के लगभग पूरे हिस्से को घेर रखा था। विस्तृत जांच में गर्भाशय में फाइब्रॉएड और अम्बिलिकल हर्निया (नाभि के पास हर्निया) होने का भी पता चला। मरीज़ को पहले से ही डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी, जिससे सर्जरी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो गई थी।
यह जटिल सर्जरी प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्षा, डॉ. पारुल सिन्हा और एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. अपाला प्रियदर्शिनी की देख-रेख में सफलतापूर्वक की गई। अम्बिलिकल हर्निया के इलाज के लिए जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. शिरीष ने टीम की मदद की, जबकि एनेस्थिसिया विभाग के डॉ. कालीचरण दास ने एनेस्थीसिया का काम बखूबी संभाला।
ऑपरेशन तीन घंटे से ज़्यादा समय तक चला, जिसके दौरान पूरे ट्यूमर और उससे जुड़ी अन्य विकृतियों को सफलतापूर्वक हटा दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज़ की रिकवरी बिना किसी परेशानी के हुई और अब उन्हें स्वस्थ और स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्षा ने बताया कि इतने जटिल मामले का सफल इलाज यह दिखाता है कि संस्थान महिलाओं की गंभीर गायनेकोलॉजिकल समस्याओं के लिए आधुनिक, सबूत-आधारित और मल्टी-डिसिप्लिनरी देखभाल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सफल परिणाम एम्स रायबरेली में मौजूद एडवांस्ड सर्जिकल विशेषज्ञता, बेहतर टीम वर्क और मरीज़-केंद्रित दृष्टिकोण को उजागर करता है।
विभाग ने कार्यकारी निदेशक (डॉ.) अमिता जैन का उनके दूरदर्शी नेतृत्व, लगातार प्रोत्साहन और संस्थान में मरीज़ों की बेहतर देखभाल और सर्जिकल सेवाओं को मज़बूत करने में अटूट सहयोग के लिए दिल से आभार व्यक्त किया। विभाग ने अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज श्रीवास्तव का भी उनके लगातार प्रशासनिक सहयोग, मार्गदर्शन और त्वरित मदद के लिए धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस जटिल मामले के सुचारू प्रबंधन और मरीज़ों को अच्छी देखभाल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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संपत्ति विवाद में महिला धरने पर बैठी, निष्पक्ष जांच के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना

फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति हड़पने का गंभीर आरोप

महराजगंज रायबरेली। नगर पंचायत महराजगंज के आजाद नगर निवासी ज्ञानवती ने अपने ही पुत्र अनिल कुमार पर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति हड़पने और घरेलू सामान पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि पति स्वर्गीय हनुमान प्रसाद गुप्ता के निधन के बाद संपत्ति में उनका वैधानिक अधिकार होने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और वह लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ज्ञानवती का कहना है कि उनके पुत्र ने कथित रूप से परिवार रजिस्टर से उनका नाम हटवा दिया, जिससे उन्हें उनकी वैधानिक हिस्सेदारी से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने से आहत महिला शनिवार को एसडीएम कार्यालय पहुंची और धरने पर बैठ गई। धरने की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे और पीड़िता से वार्ता की। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रशासन के आश्वासन के बाद ज्ञानवती ने अपना धरना समाप्त कर दिया। वहीं प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है। पीड़िता का कहना है कि वह लंबे समय से न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि अब प्रशासन उन्हें न्याय दिलाएगा।

मुड़िया पूर्णिमा मेले की तैयारियों का उच्चाधिकारियों ने लिया जायजा, सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष जोर

मथुरा। आगामी मुड़िया पूर्णिमा मेले के दृष्टिगत मंडलायुक्त आगरा, अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) आगरा जोन, पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) आगरा जोन, जिलाधिकारी मथुरा तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मथुरा ने संयुक्त रूप से गोवर्धन परिक्रमा मार्ग एवं आसपास के क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन तथा श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही जनसुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने परिक्रमा मार्ग के विभिन्न संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की।

मेले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य सीसीटीवी कंट्रोल रूम से परिक्रमा मार्ग की प्रत्येक गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों ने कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली का भी निरीक्षण किया और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।

इस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने, यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने तथा श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने देने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि मेले के दौरान सुरक्षा, सुविधा और सुचारु व्यवस्था प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

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