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मुद्दों से दूर कांग्रेस

September 30, 2026

मुद्दों से दूर कांग्रेस

Editorial

Editorial 30 September 2026

कांग्रेस अगर राजनीति में हाशिए पर खिसक रही है तो जिसका जिम्मेदार कोई और नहीं केवल कांग्रेस और इसके नेतृत्वकर्ता हैं। कांग्रेस को भारतीय जनता के मूल मुद्दों और उन प्रश्नों से कोई मतलब नहीं है जो मायने रखते हैं। वह केवल दोषारोपण करके, अधिकारियों पर आरोप लगाकर राजनीति करना चाहती है। इसका ताजा उदाहरण 29 सितंबर को नई दिल्ली में पार्टी कार्यसमिति की बैठक में पारित प्रस्ताव हैं। इस बैठक में उसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयानों से भी स्पष्ट है। कांग्रेस ने तीन प्रस्ताव पारित किए तीनों का संबंध निर्वाचन आयोग से है। पहला प्रस्ताव है कि 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम फिर से जोड़े जाएं। दूसरा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार त्यागपत्र दें। तीसरा एसआईआर प्रकिया बंद की जाय। इन तीनों मांगों का जानते कोई असर नहीं है। जनता एसआईआर से कतई भी नाराज नहीं है। यह गत चुनावों से स्पष्ट हो चुका है। लेकिन कांग्रेस की समझ में ये बात नहीं आ रही है। राहुल गांधी अभी भी वोट चोरी को मुख्य मुद्दा बनाए हुए हैं, जबकि ये मुद्दा फ्लॉप हो चुका है। यही बात कल की बैठक में वरिष्ठ नेता पी चिदबंरम ने भी कही। उन्होंने कहा एसआईआर का कोई असर नहीं है। इसका प्रमाण तमिलनाडु का चुनाव है। लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई।

दरअसल इस समय जो कांग्रेस कान्तृत्व है उसे जमीनी हकीकत और जनता को प्रभावित करने वाले मुद्दों की कोई समझ नहीं है। समाज में चल क्या रहा है? समाज किन मुद्दों पर चिंतित है? समाज की अपेक्षा और आकांक्षा क्या है? इससे कांग्रेस पूरी तरह अनजान है। इसका कारण सिर्फ राहुल गांधी का पार्टी पर एकाधिकार है। जब तक ये एकाधिकार नहीं टूटेगा, कांग्रेस की स्थिति नहीं सुधरेगी।

September 29, 2026

एटा में सड़क किनारे खाई में मिला अज्ञात व्यक्ति का शव, पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा, शिनाख्त के प्रयास जारी

 

एटा 29 सितंबर उप्रससे। जनपद के मलावन थाना क्षेत्र में एक 30 वर्षीय मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो गई। युवक का शव कुंवर मनोहर सिंह इंटर कॉलेज के पास सड़क किनारे गड्ढे में मिला।

स्थानीय लोगों ने आज मंगलवार सुबह 9 बजे पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही मलावन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कर शव पोस्टमार्टम के लिए मुख्यालय भेज दिया।
फिलहाल मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस युवक की पहचान करने और उसके परिवार का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

वर्जन
थाना प्रभारी छत्रपाल सिंह ने बताया कि युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त था और अक्सर भटकता रहता था। पुलिस घटना स्थल की जांच कर रही है।

सरायन नदी की बाढ़ से सीतापुर शहर के करीब 11 मोहल्ले प्रभावित, 2 हजार से अधिक घरों में पहुंचा पानी

आलोक कुमार बाजपेयी
सीतापुर(उप्र समाचार सेवा)। लगातार बढ़ते जलस्तर के चलते सरायन नदी ने एक बार फिर शहर के तटीय इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। नदी के उफान से शहर के करीब 11 मुहल्ले प्रभावित हुए हैं और स्थानीय स्तर पर 2 हजार से अधिक घरों में बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। कई स्थानों पर सड़कें और गलियां जलमग्न होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सरायन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण तरीनपुर, लोनियनपुरवा, दुर्गापुरवा, आलमनगर, गदियाना, नई बस्ती, मछली मंडी, कोट कर्बला, हबीबपुर , केशव ग्रीन सिटी , आगा कालोनी, समेत नदी किनारे और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। इससे पहले भी सरायन का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया था और कई तटीय मोहल्लों में घरों तक पानी पहुंचने की खबरें सामने आई थीं।

प्रशासन की निगरानी बढ़ी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहा है। जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने हाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को प्रभावित लोगों की सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन-पानी की व्यवस्था करने तथा जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने पर जोर दिया जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत चौकियों और आश्रय स्थलों पर व्यवस्थाएं की गई हैं तथा जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार शहर में चिन्हित विद्यालयों, धर्मशालाओं और अन्य बाढ़ आश्रय स्थलों में 600 से अधिक लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी की गई है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

अधिकारियों ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों के लिए टीमें सक्रिय रखी गई हैं।।

पॉक्सो अधिनियम, 2012 पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

विधि के विद्यार्थियों ने जीवंत नुक्कड़ नाटक का किया प्रदर्शन
शाहजहाँपुर, 29 सितम्बर ( संजीव गुप्त ) स्वामी शुकदेवानन्द विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संकाय स्थित विधिक सहायता केंद्र द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शाहजहाँपुर के तत्वाधान में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के बारे विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय जनपद एवं सत्र न्यायाधीश श्री धर्मेंद्र कुमार पांडेय, विशिष्ट अतिथि अपर जनपद न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार शर्मा तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शाहजहांपुर श्रीमती अपेक्षा सिंह उपस्थित रहीं। आयोजित शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को उनके विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा न्याय तक पहुँच के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विद्यार्थियों द्वारा अतिथियों का चन्दन तिलक, बैज एवं पुष्पकलिका भेंट कर स्वागत किया गया। इसके उपरांत डॉ. पवन कुमार गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया तथा अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि माननीय जनपद न्यायाधीश श्री धर्मेंद्र कुमार पांडेय जी ने अपने संबोधन में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के उद्देश्य एवं बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीड़न तथा अश्लील सामग्री से संबंधित अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना तथा ऐसे मामलों में बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए विधिक संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए केवल कानून का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रावधानों की जानकारी और उनका प्रभावी अनुपालन भी आवश्यक है। उन्होंने प्रियदर्शिनी मट्टू प्रकरण तथा निर्भया प्रकरण का उल्लेख करते हुए अपराधों की गंभीरता और प्रभावी अन्वेषण एवं न्यायिक प्रक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि थाने में शिकायत दर्ज नहीं की जाती है, तो पीड़ित न्यायालय की सहायता ले सकता है। पॉक्सो मामलों में बच्चे को भयमुक्त वातावरण प्रदान करने, संवेदनशील तरीके से बयान दर्ज करने तथा आवश्यक परामर्श की व्यवस्था पर भी उन्होंने जोर दिया। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनुराग अग्रवाल ने कहा कि जागरूकता तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ सकारात्मक अभिवृत्ति और तत्परता भी हो। उन्होंने विद्यार्थियों से विधिक ज्ञान प्राप्त कर स्वयं जागरूक बनने तथा समाज में भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों के साथ संवेदनशील एवं विश्वासपूर्ण व्यवहार रखने का आह्वान किया, ताकि बच्चे बिना भय के अपनी समस्या साझा कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों को समझें और अपने आस-पास के बच्चों तथा समाज को भी उनके अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार शर्मा ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत होने वाले अपराधों और बच्चों की सुरक्षा के संबंध में वर्तमान आपराधिक कानून तथा पॉक्सो अधिनियम के बीच संबंध और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए विशेष कानूनी संरक्षण की आवश्यकता समझाई।उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 15(3) के तहत बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। बाल संरक्षण और लैंगिक अपराधों की रोकथाम के उद्देश्य से पॉक्सो अधिनियम बनाया गया, जिसमें बच्चों के अनुकूल न्यायिक प्रक्रिया, शिकायत, साक्ष्य एवं पीड़ित के संरक्षण की विशेष व्यवस्था है।
विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अपेक्षा सिंह ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराध, यौन उत्पीड़न एवं बाल अश्लीलता से संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने बच्चों को गुड व बैड टच, अनुचित व्यवहार की रिपोर्टिंग तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम बालक एवं बालिका दोनों पर समान रूप से लागू होने वाला लैंगिक रूप से तटस्थ कानून है। पीड़ित बच्चे की सुरक्षा एवं गरिमा को ध्यान में रखते हुए न्यायालय में उसकी गवाही के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने अभिभावकों और समाज से बच्चों के प्रति संवेदनशील एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाने तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विधि अध्ययन संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “काश! किसी ने सुना होता” शीर्षक नुक्कड़ नाटक रहा। नाटक के माध्यम से विधिक अधिकारों एवं जागरूकता के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया । नाटक को प्रदीप कुमार सिंह द्वारा तैयार किया गया। अंत में विधि अध्ययन संकाय के प्रभारी डॉ. जयशंकर ओझा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधि समाज के आंतरिक एवं नैतिक मूल्यों को नियंत्रित और संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आज नैतिक मूल्यों को जीवन में वास्तविक रूप से अपनाना तथा बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सभी को जागरूक होना आवश्यक है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अनिल कुमार (संयोजक), श्री प्रदीप कुमार सिंह (सह-संयोजक), डॉ. दीप्ति गंगवार, श्री अशोक कुमार, डॉ. प्रेम सागर, श्री मृदुल शुक्ला, अजीत कुमार, सचिन कुमार, श्री विजय सिंह, डॉ. अमरेंद्र सिंह, डॉ. अमित कुमार यादव, डॉ ज्योत्सना गुप्ता, रूपल मिश्रा एवं समस्त शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

शास्त्रीय योग औषधि ही आयुर्वेद की पहचान, संकल्प के साथ हुआ राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस सप्ताह का समापन

शाहजहाँपुर। ( संजीव गुप्त ) भारत सरकार के आयुष मंत्रालय एवं जिलाधिकारी के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस सप्ताह के समापन अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय प्रांगण स्थित इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी कार्यालय में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। सप्ताह भर चले आयुर्वेद जागरूकता कार्यक्रमों के समापन दिवस पर शास्त्रीय योग औषधियों के संरक्षण, संवर्धन एवं चिकित्सकीय प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों ने सामूहिक संकल्प लेकर राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस सप्ताह का समापन किया।
बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, झाँसी के पूर्व शिक्षक एवं अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष तथा इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी शाखा शाहजहाँपुर के सचिव डॉ. विजय जौहरी ने कहा कि शास्त्रीय योग औषधि ही आयुर्वेद की पहचान है। आयुर्वेद चिकित्सकों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण के दौरान आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों के साथ शास्त्रीय योगों एवं औषधियों का अध्ययन कराया जाता है। यही ज्ञान आगे रोगियों की चिकित्सा में चिकित्सकीय विवेक के साथ प्रयोग किया जाता है।
गोष्ठी में उपस्थित चिकित्सकों ने कहा कि आसव-अरिष्ट, वटी, चूर्ण, क्वाथ, अवलेह, गुग्गुल एवं भस्म आदि शास्त्रीय औषधीय रूप आयुर्वेद की समृद्ध चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रत्येक शास्त्रीय योग के पीछे उसके घटक, निर्माण-विधि, मात्रा, अनुपान और चिकित्सकीय प्रयोग से संबंधित ज्ञान निहित है। इसलिए शास्त्रीय योग औषधियों का अध्ययन, संरक्षण और उचित चिकित्सकीय प्रयोग आयुर्वेद की पहचान को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
चिकित्सकों ने कहा कि आधुनिक समय में आयुर्वेदिक औषधि निर्माण के क्षेत्र में अनेक फार्मा संस्थाएं कार्य कर रही हैं और नए उत्पाद भी विकसित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के साथ यह भी आवश्यक है कि आयुर्वेद के मूल शास्त्रीय योगों और उनके स्वरूप का अध्ययन एवं चिकित्सकीय प्रयोग निरंतर बना रहे। किसी शास्त्रीय योग के स्थान पर केवल उसके एक-दो घटकों को ही उसका पूर्ण विकल्प मानने के बजाय चिकित्सक को शास्त्रीय संदर्भ और रोगी की आवश्यकता को ध्यान में रखना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि आयुर्वेद केवल औषधियों का संग्रह नहीं, बल्कि पंचमहाभूत, त्रिदोष, सप्तधातु, अग्नि, ओज तथा अष्टांग आयुर्वेद जैसे व्यापक सिद्धांतों पर आधारित चिकित्सा पद्धति है। शास्त्रीय योग इन सिद्धांतों के व्यावहारिक प्रयोग की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। आयुर्वेद की पहचान उसके शास्त्रीय ज्ञान और उस ज्ञान के चिकित्सकीय प्रयोग से जुड़ी है।
चिकित्सकों ने कहा कि आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा परंपरा का संरक्षण तभी संभव है, जब शास्त्रीय योगों का ज्ञान पुस्तकों तक सीमित न रहकर योग्य चिकित्सकों के माध्यम से चिकित्सा व्यवहार में जीवित रहे। इससे विद्यार्थियों को अपनी मूल चिकित्सा परंपरा का ज्ञान मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों तक आयुर्वेद की विरासत सुरक्षित रहेगी।
समापन अवसर पर चिकित्सकों ने सामूहिक संकल्प लिया—
“हम आयुर्वेद चिकित्सक आयुर्वेद के शास्त्रीय सिद्धांतों, शास्त्रीय योगों एवं औषधीय परंपरा का सम्मान करेंगे। रोगी के हित को सर्वोपरि रखते हुए उचित चिकित्सकीय विवेक से शास्त्रीय योग औषधियों का प्रयोग करेंगे तथा आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं जन-जन तक सही रूप में प्रसार के लिए कार्य करेंगे।”
संकल्प के साथ सप्ताह भर चले राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के कार्यक्रमों का समापन किया गया। चिकित्सकों ने कहा कि शास्त्रीय योग औषधि ही आयुर्वेद की पहचान है और इस पहचान को सुरक्षित रखना प्रत्येक आयुर्वेद चिकित्सक की जिम्मेदारी है।
गोष्ठी में उपस्थित चिकित्सकों में डॉ एस पी कौशल डॉ हितेश गुप्ता डॉ रवि सक्सेना डॉ मुकेश डॉ राजेंद्र कुशवाहा संजय अग्गरवाल और बृजेश गुप्ता आदि उपसथित थे
कार्यक्रम के अंत में डॉ. विजय जौहरी ने उपस्थित चिकित्सकों, अतिथियों एवं सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

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