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पॉक्सो अधिनियम, 2012 पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

September 29, 2026

पॉक्सो अधिनियम, 2012 पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

विधि के विद्यार्थियों ने जीवंत नुक्कड़ नाटक का किया प्रदर्शन
शाहजहाँपुर, 29 सितम्बर ( संजीव गुप्त ) स्वामी शुकदेवानन्द विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संकाय स्थित विधिक सहायता केंद्र द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शाहजहाँपुर के तत्वाधान में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के बारे विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय जनपद एवं सत्र न्यायाधीश श्री धर्मेंद्र कुमार पांडेय, विशिष्ट अतिथि अपर जनपद न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार शर्मा तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शाहजहांपुर श्रीमती अपेक्षा सिंह उपस्थित रहीं। आयोजित शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को उनके विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा न्याय तक पहुँच के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विद्यार्थियों द्वारा अतिथियों का चन्दन तिलक, बैज एवं पुष्पकलिका भेंट कर स्वागत किया गया। इसके उपरांत डॉ. पवन कुमार गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया तथा अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि माननीय जनपद न्यायाधीश श्री धर्मेंद्र कुमार पांडेय जी ने अपने संबोधन में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के उद्देश्य एवं बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीड़न तथा अश्लील सामग्री से संबंधित अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना तथा ऐसे मामलों में बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए विधिक संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए केवल कानून का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रावधानों की जानकारी और उनका प्रभावी अनुपालन भी आवश्यक है। उन्होंने प्रियदर्शिनी मट्टू प्रकरण तथा निर्भया प्रकरण का उल्लेख करते हुए अपराधों की गंभीरता और प्रभावी अन्वेषण एवं न्यायिक प्रक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि थाने में शिकायत दर्ज नहीं की जाती है, तो पीड़ित न्यायालय की सहायता ले सकता है। पॉक्सो मामलों में बच्चे को भयमुक्त वातावरण प्रदान करने, संवेदनशील तरीके से बयान दर्ज करने तथा आवश्यक परामर्श की व्यवस्था पर भी उन्होंने जोर दिया। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनुराग अग्रवाल ने कहा कि जागरूकता तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ सकारात्मक अभिवृत्ति और तत्परता भी हो। उन्होंने विद्यार्थियों से विधिक ज्ञान प्राप्त कर स्वयं जागरूक बनने तथा समाज में भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों के साथ संवेदनशील एवं विश्वासपूर्ण व्यवहार रखने का आह्वान किया, ताकि बच्चे बिना भय के अपनी समस्या साझा कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों को समझें और अपने आस-पास के बच्चों तथा समाज को भी उनके अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार शर्मा ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत होने वाले अपराधों और बच्चों की सुरक्षा के संबंध में वर्तमान आपराधिक कानून तथा पॉक्सो अधिनियम के बीच संबंध और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए विशेष कानूनी संरक्षण की आवश्यकता समझाई।उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 15(3) के तहत बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। बाल संरक्षण और लैंगिक अपराधों की रोकथाम के उद्देश्य से पॉक्सो अधिनियम बनाया गया, जिसमें बच्चों के अनुकूल न्यायिक प्रक्रिया, शिकायत, साक्ष्य एवं पीड़ित के संरक्षण की विशेष व्यवस्था है।
विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अपेक्षा सिंह ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराध, यौन उत्पीड़न एवं बाल अश्लीलता से संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने बच्चों को गुड व बैड टच, अनुचित व्यवहार की रिपोर्टिंग तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम बालक एवं बालिका दोनों पर समान रूप से लागू होने वाला लैंगिक रूप से तटस्थ कानून है। पीड़ित बच्चे की सुरक्षा एवं गरिमा को ध्यान में रखते हुए न्यायालय में उसकी गवाही के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने अभिभावकों और समाज से बच्चों के प्रति संवेदनशील एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाने तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विधि अध्ययन संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “काश! किसी ने सुना होता” शीर्षक नुक्कड़ नाटक रहा। नाटक के माध्यम से विधिक अधिकारों एवं जागरूकता के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया । नाटक को प्रदीप कुमार सिंह द्वारा तैयार किया गया। अंत में विधि अध्ययन संकाय के प्रभारी डॉ. जयशंकर ओझा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधि समाज के आंतरिक एवं नैतिक मूल्यों को नियंत्रित और संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आज नैतिक मूल्यों को जीवन में वास्तविक रूप से अपनाना तथा बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सभी को जागरूक होना आवश्यक है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अनिल कुमार (संयोजक), श्री प्रदीप कुमार सिंह (सह-संयोजक), डॉ. दीप्ति गंगवार, श्री अशोक कुमार, डॉ. प्रेम सागर, श्री मृदुल शुक्ला, अजीत कुमार, सचिन कुमार, श्री विजय सिंह, डॉ. अमरेंद्र सिंह, डॉ. अमित कुमार यादव, डॉ ज्योत्सना गुप्ता, रूपल मिश्रा एवं समस्त शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।