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शास्त्रीय योग औषधि ही आयुर्वेद की पहचान, संकल्प के साथ हुआ राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस सप्ताह का समापन

September 29, 2026

शास्त्रीय योग औषधि ही आयुर्वेद की पहचान, संकल्प के साथ हुआ राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस सप्ताह का समापन

शाहजहाँपुर। ( संजीव गुप्त ) भारत सरकार के आयुष मंत्रालय एवं जिलाधिकारी के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस सप्ताह के समापन अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय प्रांगण स्थित इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी कार्यालय में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। सप्ताह भर चले आयुर्वेद जागरूकता कार्यक्रमों के समापन दिवस पर शास्त्रीय योग औषधियों के संरक्षण, संवर्धन एवं चिकित्सकीय प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों ने सामूहिक संकल्प लेकर राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस सप्ताह का समापन किया।
बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, झाँसी के पूर्व शिक्षक एवं अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष तथा इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी शाखा शाहजहाँपुर के सचिव डॉ. विजय जौहरी ने कहा कि शास्त्रीय योग औषधि ही आयुर्वेद की पहचान है। आयुर्वेद चिकित्सकों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण के दौरान आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों के साथ शास्त्रीय योगों एवं औषधियों का अध्ययन कराया जाता है। यही ज्ञान आगे रोगियों की चिकित्सा में चिकित्सकीय विवेक के साथ प्रयोग किया जाता है।
गोष्ठी में उपस्थित चिकित्सकों ने कहा कि आसव-अरिष्ट, वटी, चूर्ण, क्वाथ, अवलेह, गुग्गुल एवं भस्म आदि शास्त्रीय औषधीय रूप आयुर्वेद की समृद्ध चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रत्येक शास्त्रीय योग के पीछे उसके घटक, निर्माण-विधि, मात्रा, अनुपान और चिकित्सकीय प्रयोग से संबंधित ज्ञान निहित है। इसलिए शास्त्रीय योग औषधियों का अध्ययन, संरक्षण और उचित चिकित्सकीय प्रयोग आयुर्वेद की पहचान को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
चिकित्सकों ने कहा कि आधुनिक समय में आयुर्वेदिक औषधि निर्माण के क्षेत्र में अनेक फार्मा संस्थाएं कार्य कर रही हैं और नए उत्पाद भी विकसित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के साथ यह भी आवश्यक है कि आयुर्वेद के मूल शास्त्रीय योगों और उनके स्वरूप का अध्ययन एवं चिकित्सकीय प्रयोग निरंतर बना रहे। किसी शास्त्रीय योग के स्थान पर केवल उसके एक-दो घटकों को ही उसका पूर्ण विकल्प मानने के बजाय चिकित्सक को शास्त्रीय संदर्भ और रोगी की आवश्यकता को ध्यान में रखना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि आयुर्वेद केवल औषधियों का संग्रह नहीं, बल्कि पंचमहाभूत, त्रिदोष, सप्तधातु, अग्नि, ओज तथा अष्टांग आयुर्वेद जैसे व्यापक सिद्धांतों पर आधारित चिकित्सा पद्धति है। शास्त्रीय योग इन सिद्धांतों के व्यावहारिक प्रयोग की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। आयुर्वेद की पहचान उसके शास्त्रीय ज्ञान और उस ज्ञान के चिकित्सकीय प्रयोग से जुड़ी है।
चिकित्सकों ने कहा कि आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा परंपरा का संरक्षण तभी संभव है, जब शास्त्रीय योगों का ज्ञान पुस्तकों तक सीमित न रहकर योग्य चिकित्सकों के माध्यम से चिकित्सा व्यवहार में जीवित रहे। इससे विद्यार्थियों को अपनी मूल चिकित्सा परंपरा का ज्ञान मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों तक आयुर्वेद की विरासत सुरक्षित रहेगी।
समापन अवसर पर चिकित्सकों ने सामूहिक संकल्प लिया—
“हम आयुर्वेद चिकित्सक आयुर्वेद के शास्त्रीय सिद्धांतों, शास्त्रीय योगों एवं औषधीय परंपरा का सम्मान करेंगे। रोगी के हित को सर्वोपरि रखते हुए उचित चिकित्सकीय विवेक से शास्त्रीय योग औषधियों का प्रयोग करेंगे तथा आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं जन-जन तक सही रूप में प्रसार के लिए कार्य करेंगे।”
संकल्प के साथ सप्ताह भर चले राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के कार्यक्रमों का समापन किया गया। चिकित्सकों ने कहा कि शास्त्रीय योग औषधि ही आयुर्वेद की पहचान है और इस पहचान को सुरक्षित रखना प्रत्येक आयुर्वेद चिकित्सक की जिम्मेदारी है।
गोष्ठी में उपस्थित चिकित्सकों में डॉ एस पी कौशल डॉ हितेश गुप्ता डॉ रवि सक्सेना डॉ मुकेश डॉ राजेंद्र कुशवाहा संजय अग्गरवाल और बृजेश गुप्ता आदि उपसथित थे
कार्यक्रम के अंत में डॉ. विजय जौहरी ने उपस्थित चिकित्सकों, अतिथियों एवं सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।