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नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर भी प्रशासन हरकत में नहीं आया !

June 24, 2026

नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर भी प्रशासन हरकत में नहीं आया !

Breaking News UP Web News

Posted on 24.06.2026 Time 08.54 PM, Dehradun, Nainital High Court

19 करोड़ की जमीन धोखाधड़ी मामला, मसूरी रोप वे प्रोजेक्ट आने पर रजिस्ट्री कराने से मुकरा विक्रेता।
– भूपत सिंह बिष्ट द्वारा
देहरादून, 24 जून 2026, उत्तराखंड में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद भी पुलिस अपनी एफआईआर सक्रिय नहीं हो पायी है।
विगत तीन जून को नैनीताल हाईकोर्ट से निर्णय पारित होने के बावजूद धोखाधड़ी के मामले में दर्ज एफआईआर पर थाना राजपुर पुलिस अभी तक हरकत में नहीं आई है।
मामला पुरकुल में मसूरी रोड स्थित करोड़ों की भूमि विक्रय से जुड़ा है। यहाँ से मसूरी के लिए रोप वे परियोजना का कार्य गतिमान होने से ज़मीन के भाव में भारी उछाल आ गया है और विक्रेता पुराने तय सौदों से पीछे हट रहे हैं।
उत्तराखंड के युवा उद्यमी के साथ ठगी और शोषण का यह अनूठा मामला है।
युवा उद्यमी बिक्रम राणा द्वारा राजपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद पुलिस प्रशासन और सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर हताश हैं। सीएम और पीएम पोर्टल पर न्याय की गुहार लगाने के बाद फिर से आर्थिक दबाव के चलते वे आत्मघात की बात करते हैं।
उल्लेखनीय है कि बिक्रम राणा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व गढ़वाल सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत के सगे भांजे और युवा उद्यमी पर्यटन और भूमि व्यवसाय से जुड़े हैं।
नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा स्पष्ट निर्णय के बावजूद पुलिस प्राथमिकी को अंजाम तक पहुंचाने की फिक्रमंद नहीं दिख रही और टालमटोल निरंतर जारी है।
मामले के अनुसार राजकुमार यादव एवं अन्य के विरुद्ध देहरादून के राजपुर थाने में 14 सितम्बर 2025 को आईपीसी की धारा 120 बी, 420, 467, 468, 471 के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) संख्या 181/2025 दर्ज कराई गई थी।
मसूरी रोड स्थित पुरकुल गांव में जमीन की खरीद फरोख्त के इस मामले में राजकुमार यादव, हरीश यादव, राजीव वाड्रा, संजय सिंह, श्रीमती मेघा भारद्वाज, बिज्जू, विनोद कुमार और नीरजा सिंह प्रतिवादी बनाए गए थे। इन पर आरोप है कि 19 करोड़ 81 लाख अपने खाते में जमा कराने के बाद ये सभी बिक्रम राणा के पक्ष में जमीन का बैनामा नहीं करा रहे हैं।
प्रतिवादियों ने साईं इंफ्रा प्रोडक्ट्स प्रा. लि. की पुरकुल स्थित भूमि का विक्रय का सौदा बिक्रम राणा के साथ किया। प्रतिवादियों ने बिक्रम राणा से 19.81 करोड़ रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवाए और इसके बाद उनकी नीयत में खोट आ गया।
धोखाधड़ी का यह मामला सुप्रीम कोर्ट और नैनीताल हाईकोर्ट में सुना जा चुका है।
राजपुर थाना देहरादून में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रतिवादियों ने अग्रिम जमानत ले ली, और प्राथमिकी निरस्त करवाने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में रिट अपील दायर की थी।
नैनीताल हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई और तथ्यों की पड़ताल के बाद अपील खारिज कर दी और वादियों पर दो लाख व पचास हजार का अर्थ दंड लगाकर अग्रिम जमानत निरस्त कर दी।
अब पुलिस को तुरंत हरकत में आकर अभियुक्तों की गिरफ्तारी, बैंक खातों व भूमि विक्रय पर अंकुश लगाना है।
प्रेस वार्ता में बिक्रम राणा ने बताया कि पुलिस अभियुक्तों को अनावश्यक छूट दे रही है ताकि सब कुछ कोर्ट के बाहर सुलटाया जा सके।
बिक्रम राणा का मानना है कि नैनीताल हाईकोर्ट के निर्णय को पूरा एक पखवाड़ा बीत चुका है किंतु पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही है तथा राज्य के बाहर के लोगों के साथ मिलकर रियायत बरती जा रही है, लेकिन अपने प्रदेश के लोगों के साथ बढ़ते ढगी के मामलों में कोई हमदर्दी का उदाहरण अथवा न्याय होता नहीं दिख रहा है।
दूसरे प्रदेशों से आकर अपराधी प्रवृत्ति के लोग उत्तराखंड में धड़ल्ले से गोरखधंधे कर रहे हैं, वे यहां के मूल निवासियों और युवाओं के साथ ठगी, धोखाधड़ी और छल कर रहे हैं, किंतु नैनीताल हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्णय के बावजूद पुलिस अपनी दर्ज प्राथमिकी पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा पा रही है।
– भूपत सिंह बिष्ट

June 23, 2026

फायर सेफ्टी मानकों से कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री

News Posted on 23.06.2026 Tuesday, Time 10.02 PM, Lucknow CM Yogi Adityanath

लखनऊ की दुर्भाग्यपूर्ण घटना प्रदेश के लिए बड़ा सबक

हर जनपद में विशेष टीम गठित कर व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाया जाए: मुख्यमंत्री

पहले जागरूकता, फिर कार्रवाई; अभियान के नाम पर किसी नागरिक का उत्पीड़न न हो: मुख्यमंत्री

जो भवन जिस गतिविधि के लिए अनुमन्य, वहां वही गतिविधि होगी, बेसमेंट में कोचिंग/नर्सिंग होम स्वीकार नहीं: मुख्यमंत्री

आपातकालीन सेवाओं को रिस्पॉन्स टाइम और कम करने के लिए उठाने होंगे ठोस कदम: मुख्यमंत्री

वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष बैठक कर मुख्यमंत्री ने की लखनऊ अग्नि दुर्घटना की बिंदुवार समीक्षा

लखनऊ, 23 जून: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के अलीगंज में बीते दिनों आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को प्रदेश के लिए एक बड़ा सबक बताते हुए कहा कि इस पीड़ादायक घटना से सीख लेते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए शासन, प्रशासन और आमजन को मिलकर अग्नि सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में मिशन मोड में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी जनपदों में अस्पतालों, नर्सिंग होमों, मेडिकल कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, शॉपिंग मॉल, सरकारी भवनों तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच कर आवश्यक सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।

मंगलवार को शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान पूरी तरह जनहित में संचालित किया जाएगा। पहले व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अभियान के नाम पर किसी भी नागरिक का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद में विशेष टीम गठित कर फायर ऑडिट अभियान संचालित किया जाए। सभी कोचिंग संस्थानों का विधिवत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा व्यावसायिक भवनों में अग्निशमन विभाग से प्राप्त अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भवन परिसर में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भवन अथवा भूमि का उपयोग उसी उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए, जिसके लिए उसे स्वीकृति प्रदान की गई है। आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन नहीं होना चाहिए तथा निर्धारित उपयोग के विपरीत किसी भी प्रकार की गतिविधि स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में बेसमेंट में कोचिंग अथवा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन न होने पाए। यदि बेसमेंट पार्किंग के लिए स्वीकृत है तो उसका उपयोग केवल पार्किंग के लिए ही किया जाए।

मुख्यमंत्री ने व्यावसायिक भवनों के विद्युत भार (लोड) का आकलन कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां विद्युत भार निर्धारित मानकों के विपरीत पाया जाए अथवा अन्य नियमों का उल्लंघन हो रहा हो, वहां तत्काल नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई की जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने बीते दिनों लखनऊ में घटित आग लगने की दुर्घटना के संबंध में अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, महानिदेशक अग्निशमन सेवा, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा एसडीआरएफ के अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने घटना की सूचना मिलने के बाद अग्निशमन दल, एम्बुलेंस और एसडीआरएफ की टीमों द्वारा किए गए राहत एवं बचाव कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम जितना कम होगा, संकट की परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य उतने ही प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को अपने रिस्पॉन्स टाइम को और कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने तथा उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने बैठक में बताया कि घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 14 एम्बुलेंस तत्काल मौके पर भेजी गई थीं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, सरकारी एवं निजी अस्पतालों तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की फायर सेफ्टी ऑडिट प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई अग्नि दुर्घटना का उल्लेख करते हुए प्रदेश में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि अग्निशमन विभाग को और अधिक सक्षम बनाने के लिए जिन आधुनिक उपकरणों, संसाधनों एवं तकनीकी सुविधाओं की आवश्यकता हो, उनकी उपलब्धता में किसी प्रकार का विलम्ब न किया जाए।

बैठक में महानिदेशक अग्निशमन सेवा ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए अग्निशमन केंद्र लोकार्पण के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त 47 नए केंद्रों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने शेष तहसीलों में भी अग्निशमन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। सभी विभाग समन्वित प्रयासों के साथ कार्य करते हुए प्रदेश में सुरक्षित एवं उत्तरदायी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

अमित शाह ने NAFED के ई-ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in का शुभारंभ किया

देश की एकता-अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को बलिदान दिवस पर शत्-शत् नमन

2014 में बंद होने के कगार पर खड़ा NAFED आज मोदी सरकार में ₹500 करोड़ के मुनाफे के साथ 74 लाख किसानों की सेवा कर रहा

बिचौलिए होंगे खत्म, किसान के पसीने की कमाई 48 घंटे में सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचेगी

अगले 2 वर्षों में दलहन का एक-एक दाना सीधे किसानों से खरीदेगा NCCF और NAFED

किसानों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर के लिए NAFED की छात्रवृत्ति शुरू, मुनाफे का एक हिस्सा किसान परिवारों को दी जाएगी

Posted Date:- Jun 23, 2026

New Delhi, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) के ई-ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी और NAFED के अध्यक्ष जेठाभाई अहीर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि NAFED ने आज चार प्रमुख पहलों की शुरुआत की है, जिसमें NAFEX.in, दृष्टि, ईआरपी और NAFED कल्याण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि NAFEX.in सहित अन्य पहलें काफी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वर्ष 2014 में NAFED बंद होने की कगार पर था, लेकिन आज इन प्रयासों के कारण NAFED 30,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर और 500 करोड़ रुपये के मुनाफे के साथ देश के 74 लाख से अधिक किसानों की सेवा कर रहा है। श्री शाह ने कहा कि जब NAFED गहरे आर्थिक संकट में था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इसे पूरी पारदर्शिता के साथ चलाने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने आर्थिक सहायता प्रदान कर NAFED को एक बार फिर मजबूती से खड़ा कर दिया है।

श्री शाह ने कहा कि आज NAFED उत्पादन और खरीद दोनों में काफी बढ़ोत्तरी कर चुका है। देश को दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए NCCF और NAFED को सीधे किसानों से दलहन का एक-एक दाना खरीदने की दिशा में और भी तेजी से आगे बढ़ना है। इससे किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य मिलेगा, तो दलहन की खेती का रकबा अपने आप बढ़ेगा और देश दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हमने दलहन, मक्का तथा अन्य उत्पादों की सीधी खरीद के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है। अब इस इंफ्रास्ट्रक्चर को नीचे तक पहुंचाना है। श्री शाह ने कहा कि NAFED और NCCF को पूरी दृढ़ता और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा, तभी परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हम सुनिश्चित करेंगे कि अगले दो वर्षों के भीतर सभी किसान इन दोनों संगठनों को सीधे दलहन बेच सकें और उन्हें भुगतान भी सीधे उनके खाते में मिले।

उन्होंने कहा कि आज NAFED केवल कृषि उत्पादों की खरीद तक सीमित नहीं रहा है। विगत तीन वर्षों में NAFED ने जैविक खेती, बीज उत्पादन, खुदरा कारोबार, जैव उर्वरक निर्माण, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे क्षेत्रों में बहुत अच्छा कार्य किया है, जिससे NAFED की प्रासंगिकता भी बढ़ी है और मुनाफा भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जब सहकारिता मंत्रालय बना था, तब NAFED का टर्नओवर 20,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़ कर 30,000 करोड़ रुपये हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दो वर्षों में यह टर्नओवर बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये के पार हो जाएगा। श्री शाह ने कहा कि NAFED का शुद्ध मुनाफा 139 करोड़ रुपये से बढ़कर 405 करोड़ रुपये हो गया है और नेटवर्थ 358 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,050 करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि NAFED आज एक मजबूत, आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर संगठन के रूप में उभरा है। अब समय है कि NAFED और NCCF पूरी पारदर्शिता के साथ दलहन तथा अन्य फसलों का एक-एक दाना सीधे किसानों से खरीदें, बिचौलियों के पूरे तंत्र को समाप्त करें और मुनाफा जिन किसानों का हक है, वह उन तक अवश्य पहुंचाएं।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि NAFED ने अपने मुनाफे का 1% किसान परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर विकास के लिए छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था किसानों के बच्चों को उच्च शिक्षा और करियर बनाने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने में सहयोग करेगी।

अपने संबोधन की शुरुआत में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री शाह ने कहा कि आज ही के दिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने ‘एक राष्ट्र, एक विधान, एक प्रधान’ के सूत्र को चरितार्थ करने और देश को एकजुट रखने के लिए बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस राष्ट्र के बड़े नेताओं में शुमार हैं। उन्होंने जीवन में कुछ भी प्रसिद्धि के लिए नहीं किया और जो किया उसके दूरगामी परिणाम इस देश के लिए शुभ साबित हुए। श्री शाह ने कहा कि भारत के विभाजन के समय अंग्रेजों से लड़ाई लड़ कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने सुनिश्चित किया था कि पश्चिम बंगाल भारत में रहे। इसी कारण आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना हुआ है। गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू किया गया, जिसकी वजह से कश्मीर का राष्ट्रध्वज और संविधान अलग था। श्री शाह ने कहा कि यह संकल्पना भारत की एकता और अखंडता के लिए बहुत खतरनाक थी। तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने एक आंदोलन छेड़ा कि एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं रहेंगे। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से कश्मीर तक मार्च किया और कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा है। कश्मीर जाने के लिए उन्होंने कोई परमिट लेने से इनकार कर दिया, जिसकी वजह से श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को गिरफ्तार कर लिया गया। कश्मीर की जेल में ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संहेदास्पद मृत्यु हो गई। श्री शाह ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तत्कालीन सरकार के उद्योग मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। गृह मंत्री ने कहा कि आज श्यामा प्रसाद जी का सपना साकार हो चुका है। अनुच्छेद 370 समाप्त हो चुका है और उनकी बनाई पार्टी की सरकार गंगोत्री से लेकर बंगाल के गंगासागर तक है। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के प्रखर हिमायती थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने योग के परिवर्तनकारी प्रभाव का उल्‍लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

PM Narendra Modi

Posted Date:- Jun 22, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की उल्लेखनीय सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनिया भर में लाखों लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त करने में मदद कर रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा किया।

“चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा योगस्य धारणा॥”

यह सुभाषितम् बताता है कि योग मन को पूर्णतः शांत करने का साधन है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योग की दो प्रमुख विधियाँ बताई गई हैं: मन को शांत करना और श्वास के प्रवाह को नियमित करना।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म एक्‍स पर लिखा;

“अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बड़ी सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनियाभर में करोड़ों लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा योगस्य धारणा॥”

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बड़ी सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनियाभर में करोड़ों लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा… pic.twitter.com/RotrHvHLLI

— Narendra Modi (@narendramodi) June 22, 2026

हाथरस में कॉल सेंटरों की आड़ में ठगी का खेल?

News Posted on 23.06.2026 Tuesday, Hathras News, Neeraj Chakrapani

नामी कंपनियों के ऑफर बताकर उपभोक्ताओं को बनाया जा रहा शिकार, अवैध कॉल सेंटरों की गतिविधियों पर उठे सवाल

नीरज चक्रपाणि

हाथरस। यदि किसी अनजान नंबर से कॉल कर कोई युवती आपको महंगे मोबाइल, आकर्षक गिफ्ट या नामी कंपनियों के उत्पादों पर विशेष ऑफर देने का दावा करे तो सावधान हो जाइए। जनपद में कथित रूप से संचालित हो रहे कई कॉल सेंटरों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों से उपभोक्ताओं को बड़े-बड़े ऑफर और इनाम का लालच देकर सामान बेचा जा रहा है, जबकि कई मामलों में ग्राहकों को अपेक्षित वस्तु नहीं मिलती।जानकारों के अनुसार कॉल करने वाले पहले ग्राहकों का विश्वास जीतते हैं और फिर उन्हें विशेष ऑफर, उपहार या महंगे मोबाइल फोन मुफ्त देने का झांसा देते हैं। इसके बाद उपभोक्ता से पार्सल स्वीकार करवाकर भुगतान करा लिया जाता है। कई लोगों का आरोप है कि पार्सल खोलने पर उसमें अपेक्षा से कम गुणवत्ता वाला सामान निकलता है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनपद में कई स्थानों पर बड़ी संख्या में कॉल सेंटर संचालित होने की चर्चाएं हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ के पास आवश्यक पंजीकरण और वैधानिक अनुमतियां भी नहीं हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

नामी ब्रांड और मुफ्त मोबाइल का लालच

शिकायतकर्ताओं के अनुसार कॉल करने वाले खुद को किसी प्रतिष्ठित कंपनी का प्रतिनिधि बताते हैं। उपभोक्ताओं को जूते, बेल्ट, घड़ी, टी-शर्ट, चश्मा, पर्स और अन्य उत्पादों के साथ महंगा स्मार्टफोन मुफ्त देने का दावा किया जाता है। बताया जाता है कि “विशेष ऑफर” सीमित समय के लिए है, जिससे ग्राहक जल्दबाजी में निर्णय ले लेता है। उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे किसी भी ऑफर की पहले आधिकारिक वेबसाइट या कंपनी से पुष्टि करनी चाहिए।

कार्यवाही क्यों नहीं?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कथित अवैध कॉल सेंटरों को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन बड़े स्तर पर कार्रवाई दिखाई नहीं देती। सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि प्रशासन सभी कॉल सेंटरों का सत्यापन कराए और बिना अनुमति संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों की जांच कराए। हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

डाकघरों के माध्यम से भेजे जाते हैं पार्सल

सूत्रों के अनुसार ऐसे कारोबार में पार्सल सेवा का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में पार्सल विभिन्न स्थानों पर भेजे जाने की बात कही जाती है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसी माध्यम से ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाए जाते हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इन क्षेत्रों में गतिविधियों की चर्चा

स्थानीय स्तर पर मैंडूगेट, विनोद विहार कॉलोनी, नहर के पास, चौबे वाले महादेव क्षेत्र, अनमोल वाटिका, विष्णुपुरी, गौशाला क्षेत्र, मुरसान गेट, लेबर कॉलोनी, साकेत कॉलोनी, जलेसर रोड, अशोका टॉकीज क्षेत्र तथा गांधी पार्क तिराहे के आसपास कुछ स्थानों पर कॉल सेंटर गतिविधियों की चर्चा की जा रही है। प्रशासन से मांग की गई है कि इन क्षेत्रों में सत्यापन अभियान चलाकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

उपभोक्ताओं के लिए सलाह

  • किसी भी अनजान कॉल पर तुरंत भरोसा न करें।
  • मुफ्त मोबाइल, कार, लैपटॉप या बड़े इनाम के दावों की स्वतंत्र पुष्टि करें।
  • पार्सल लेने से पहले उसकी शर्तें और विवरण अवश्य जानें।
  • संदिग्ध कॉल या ठगी की स्थिति में साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।
  • किसी भी ऑफर के बदले अग्रिम भुगतान करने से बचें.
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