Web News

www.upwebnews.com

आगरा कैंट स्टेशन पर तमिलनाडु एक्सप्रेस की जनरल बोगी से ट्रॉली बैग से मिले सड़े-गले मानव अंग

August 5, 2026

आगरा कैंट स्टेशन पर तमिलनाडु एक्सप्रेस की जनरल बोगी से ट्रॉली बैग से मिले सड़े-गले मानव अंग

आगरा। आगरा कैंट स्टेशन पर बुधवार को तमिलनाडु एक्सप्रेस की जनरल बोगी से बरामद ट्रॊली बैग, जिसमें मानव अंग बरामद हुए हैं।

पुलिस के अनुसार चेन्नई से नई दिल्ली की ओर जा रही तमिलनाडु एक्सप्रेस बुधवार तड़के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या तीन पर पहुंची थी। ट्रेन में यात्रा कर रहे एक यात्री ने रेलवे पुलिस को सूचना दी कि जनरल कोच में रखा एक ट्रॉली बैग काफी समय से लावारिस पड़ा है और उससे तेज बदबू के साथ तरल पदार्थ भी रिस रहा है।

सूचना मिलते ही जीआरपी और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान मौके पर पहुंचे। बैग को सुरक्षित कब्जे में लेकर जब उसकी तलाशी ली गई तो उसमें मानव शरीर के अंग मिले, जो काफी हद तक गल चुके थे और काले पड़ गए थे। इस भयावह दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी स्तब्ध रह गए।

जांच के दौरान बैग पर चेन्नई का रैपर और स्टिकर लगा मिला है। इसी आधार पर पुलिस का प्राथमिक अनुमान है कि बैग संभवतः चेन्नई से ही ट्रेन में रखा गया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि बैग किस यात्री का था और इसे ट्रेन में किस स्टेशन से चढ़ाया गया।

रेलवे पुलिस ने मानव अंगों के फॉरेंसिक नमूने सुरक्षित करा लिए हैं। बरामद अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अंग कितने पुराने हैं, वे एक ही व्यक्ति के हैं या नहीं, तथा मृत्यु का कारण क्या हो सकता है।

जांच अधिकारी इस संभावना को भी गंभीरता से देख रहे हैं कि मामला मानव अंगों की अवैध तस्करी से जुड़ा हो सकता है। वहीं दूसरी ओर हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें ट्रॉली बैग में भरकर ट्रेन के माध्यम से ठिकाने लगाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। दोनों बिंदुओं पर समानांतर जांच की जा रही है।

पुलिस अब तमिलनाडु एक्सप्रेस के रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, यात्रियों की जानकारी तथा रेलवे के अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से बैग रखने वाले व्यक्ति की पहचान करने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही जांच का दायरा चेन्नई तक बढ़ाया गया है और वहां की स्थानीय पुलिस से भी संपर्क स्थापित किया जा रहा है। जांच टीम के चेन्नई जाकर मामले की तह तक पहुंचने की तैयारी भी की जा रही है।

रेलवे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी। फिलहाल घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए सभी संभावित पहलुओं पर जांच जारी है।

चलती ट्रेन में जन्मा बच्चा: मुस्तैद मेडिकल टीम ने संभाली कमान, जच्चा-बच्चा सुरक्षित

आगरा। चलती ट्रेन में एक गर्भवती महिला ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। प्रसव की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और मेडिकल टीम तत्काल सक्रिय हो गई। ट्रेन के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचते ही डॉक्टरों और नर्सों ने मां और नवजात की स्वास्थ्य जांच की। प्राथमिक परीक्षण में दोनों की स्थिति सामान्य मिलने पर उन्हें आगे की चिकित्सकीय देखभाल के लिए रेलवे अस्पताल भेज दिया गया।

जानकारी के अनुसार, यात्रा के दौरान फर्रुखाबाद की गर्भवती महिला माधुरी को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला की हालत देखकर पति व अन्य सहयात्रियों ने तुरंत ट्रेन के टीटीई और रेलवे कर्मचारियों को सूचना दी। इसके बाद रेलवे कंट्रोल को संदेश भेजा गया और आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर मेडिकल टीम को पहले से ही तैयार रहने के निर्देश दिए गए।

रेलवे अधिकारियों के बीच समन्वय के चलते ट्रेन के स्टेशन पहुंचने से पहले ही डॉक्टर, नर्स और आवश्यक चिकित्सा उपकरण प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दिए गए। उधर साबरमती-आगरा एक्सप्रेस के छावनी स्टेशन पहुंचने से पहले ही ट्रेन में ही महिला को प्रसव हो चुका था। ट्रेन रुकते ही चिकित्सा दल ने महिला और नवजात की जांच की। दोनों स्वस्थ पाए जाने के बाद उन्हें एंबुलेंस से रेलवे अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में आगे की देखभाल की जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रसव के दौरान ट्रेन में मौजूद यात्रियों ने भी मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए महिला की हरसंभव सहायता की। महिला यात्रियों ने सहयोग कर सुरक्षित माहौल बनाया, जबकि रेलवे स्टाफ लगातार स्थिति पर नजर बनाए रहा।

इस घटना में समय पर मिली चिकित्सा सहायता और रेलवे कर्मचारियों की तत्परता के कारण मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। चलती ट्रेन में जन्मे इस शिशु की किलकारी ने कुछ देर के लिए पूरे कोच का माहौल भावुक और खुशियों से भर दिया। यात्रियों ने भी रेलवे प्रशासन और चिकित्सा टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना

19 जुलाई से लापता युवक का शव अठारहवें दिन कुएं से बरामद किया गया.

मितौली
बीती 19 जुलाई से लापता 20 वर्षीय युवक का शव बुधवार सुबह गांव के पास अठारहवें दिन खेतों में बने एक कुएं में तैरता हुआ मिला। शव मिलने से परिजनों में कोहराम मच गया और क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
मितौली थाना क्षेत्र की कस्ता चौकी के ग्राम भिखनापुर के रहने वाले प्यारे लाल राठौर का 20 वर्षीय पुत्र गोविंद 19 जुलाई को अचानक घर से गायब हो गया था। काफी खोजबीन के बाद परिजनों ने 21 जुलाई को मितौली थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पीड़ित पिता ने लखनऊ और नीमसार तीर्थ तक जाकर फोटो-पोस्टर लगवाने सहित काफी जगहों पर जा-जाकर पता किया,लेकिन गोविंद का कोई सुराग नहीं लगा।बुधवार सुबह गांव के निवासी जिलेदार के खेत में कुएं के पास चप्पलें रखी देख जब उन्होंने अंदर झांका, तो युवक का शव उतराता हुआ दिखाई दिया, जिसकी जानकारी परिजनों को दी।कस्ता चौकी प्रभारी जयकृष्ण तिवारी, दीवान राजेश मिश्रा, सिपाही अंकित हुड्डा व विशाल की पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कुएं से बाहर निकलवाया। शव पूरी तरह सड़ा-गला था, जिसकी पहचान गोविंद के रूप में हुई। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

मिड-डे मील में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, प्रधानाध्यापिका तत्काल प्रभाव से निलंबित

सीतापुर, 5 अगस्त 2026:उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्कूली बच्चों के भोजन और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के मामले में शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। विकास खंड महमूदाबाद के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय छँगापुर की प्रधानाध्यापिका श्रीमती कल्पना वर्मा को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
खंड शिक्षा अधिकारी महमूदाबाद द्वारा 5 अगस्त 2026 को सौंपे गए औचक निरीक्षण और जांच रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की गई है। जांच में पाया गया कि विद्यालय में:मध्याह्न भोजन में परोसी जाने वाली सब्जी की गुणवत्ता अक्सर खराब रहती थी।छात्रों को मैन्यू के अनुसार निर्धारित पूरी मात्रा में दूध का वितरण नहीं किया जा रहा था।बच्चों को व्यवस्थित तरीके से बैठाकर भोजन ग्रहण कराने में लापरवाही बरती जा रही थी।
सरकारी आदेश के अनुसार, प्रधानाध्यापिका कल्पना वर्मा को अपने शासकीय दायित्वों का ठीक से निर्वहन न करने, विभागीय आदेशों व निर्देशों की अवहेलना करने, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। यह कार्रवाई ‘उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद कर्मचारी वर्ग नियमावली 1999’ के तहत की गई है।इस पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी (पहला)पुष्पराज सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे आरोपी कर्मचारी को आरोप पत्र जारी कर, साक्ष्यों के साथ 1 माह के भीतर स्पष्ट और तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट कार्यालय को सौंपें।
निलंबन के दौरान श्रीमती कल्पना वर्मा को वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियमों के तहत केवल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।इस अवधि के दौरान उनका संबद्धीकरण प्राथमिक विद्यालय नदवा, विकास खंड महमूदाबाद तय किया गया है, जहां उन्हें अपनी दैनिक उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

किशोरियों के एचपीवी टीकाकरण को लेकर कॉलेजों में जागरूकता, प्रधानाचार्यों से की गई चर्चा

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए सीएचसी व पीएचसी में निशुल्क लगवाएं एचपीवी टीका

लखीमपुर-खीरी। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के उद्देश्य से मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ संतोष गुप्ता के दिशा-निर्देश मे चलाए जा रहे एचपीवी टीकाकरण अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विभिन्न इंटर कॉलेजों में पहुंचकर प्रधानाचार्यों से परिचर्चा की। इसी क्रम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटर कॉलेज तथा किसान समाज इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्यों के साथ एचपीवी टीकाकरण को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की गई।
बैठक के दौरान सीएचसी अधीक्षक डॉ अमित बाजपेई व स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। किशोरियों को समय पर एचपीवी का टीका लगवाने से भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विद्यालय प्रबंधन से कहा कि छात्राओं के अभिभावकों को भी एचपीवी टीकाकरण के प्रति जागरूक किया जाए। इस दौरान सहमति पत्र भी वितरित किए गए तथा अभिभावकों से अपने बच्चों को टीका लगवाना अथवा नही लगवाने के संबंध में सहमति देने के लिए कहा गया बताया गया कि 14 से 15 वर्ष की उम्र की किशोरियों को यह टीका निःशुल्क लगाया जा रहा है। टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित केंद्रों एवं टीकाकरण सत्रों पर व्यवस्था की गई है।
इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरधान के अधीक्षक डॉ. अमित बाजपेई सहित स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की कि सभी अभिभावक यू-विन पोर्टल पर पंजीकरण कर डिजिटल सहमति दे सकते हैं। इंटरनेट की उपलब्धता न होने पर लिखित सहमति ली जाएगी, जिसे बाद में पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। आयु सत्यापन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड अथवा स्कूल आईडी कार्ड मान्य होंगे। टीकाकरण प्रमाणपत्र भी यू-विन पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा।

« Newer PostsOlder Posts »