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भोजशाला : जब इतिहास की राख से फिर उठी सभ्यता बोल उठी

May 17, 2026

भोजशाला : जब इतिहास की राख से फिर उठी सभ्यता बोल उठी

प्रणय विक्रम सिंह

सभ्यताएं केवल पत्थरों, प्राचीरों और पुरातात्विक अवशेषों से नहीं बनतीं। वे स्मृतियों, श्रद्धा, ज्ञान और आत्मा के उन अदृश्य सूत्रों से निर्मित होती हैं, जिन्हें तलवारें काट नहीं सकतीं, फरमान मिटा नहीं सकते और आक्रमण पराजित नहीं कर सकते।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला-कमाल मौला कॉम्प्लेक्स की धार्मिक प्रकृति को भगवती वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर माना है। यह राजा भोज (परमार वंश) द्वारा स्थापित संस्कृत शिक्षा केंद्र था।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर की धार्मिक प्रकृति को भगवती वाग्देवी (माँ सरस्वती) का मंदिर मानना केवल एक न्यायिक निर्णय नहीं, बल्कि उस सभ्यतागत सत्य की पुनर्पुष्टि है, जिसे सदियों तक धूल, ध्वंस और दमन के नीचे दबाने का प्रयास किया गया, किन्तु जिसे मिटाया नहीं जा सका।

यह वही भोजशाला है, जिसे परमार वंश के महान प्रतापी राजा भोज ने ज्ञान, संस्कृत और माँ वाग्देवी की आराधना के केंद्र के रूप में स्थापित किया था। यहां केवल पूजा नहीं होती थी, यहां भारत की वैदिक चेतना श्वास लेती थी। यहां शब्द साधना थी, शास्त्रार्थ था, संस्कृत की स्वर लहरियां थीं, और ज्ञान को ईश्वर मानने वाली भारतीय सभ्यता का आलोक था। यह केवल मंदिर नहीं था, यह भारतीय बौद्धिकता, भारतीय ज्ञान और भारतीय अध्यात्म का समन्वित विश्वविद्यालय था। किंतु भारत के इतिहास का एक लंबा कालखंड ऐसा भी रहा, जब बाहरी आक्रमणकारियों ने इस भूमि की आत्मा को तोड़ने का प्रयास किया। मंदिरों को केवल पत्थरों का ढांचा नहीं समझा गया, उन्हें भारतीय समाज की सांस्कृतिक रीढ़ मानकर लक्ष्य बनाया गया। क्योंकि आक्रमणकारी जानते थे कि यदि किसी सभ्यता की स्मृतियों, प्रतीकों और आस्था केंद्रों को ध्वस्त कर दिया जाए, तो उसके आत्मविश्वास को घायल किया जा सकता है।

सोमनाथ से काशी तक, मथुरा से मार्तंड तक और भोजशाला से नालंदा तक इतिहास के पन्नों पर ऐसे असंख्य रक्तरंजित अध्याय अंकित हैं, जहां केवल इमारतें नहीं टूटीं, बल्कि भारतीय अस्मिता को अपमानित करने का सुनियोजित प्रयास हुआ। आक्रमण केवल भूभाग पर नहीं, भारत की स्मृति पर था।

पुस्तकालय जलाए गए, विद्यापीठ ध्वस्त किए गए, मूर्तियों को खंडित किया गया, और सभ्यता की स्मृतियों पर पराये प्रतीकों का आवरण चढ़ाने का प्रयास किया गया। भोजशाला भी उसी पीड़ा की साक्षी बनी। जहां कभी सरस्वती वंदना गूंजती थी, वहां इतिहास को बदलने के प्रयास हुए। जहां ज्ञान का दीप प्रज्वलित था, वहां पहचान का अंधकार थोपा गया। किन्तु सनातन की विशेषता यही है कि वह पराजित नहीं होता। वह प्रतीक्षा करता है। वह सहता है। वह समय के गर्भ में सत्य को सुरक्षित रखता है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों, सतत उपासना परंपरा और वैज्ञानिक जांच के आधार पर यह स्पष्ट किया कि भोजशाला माँ वाग्देवी का प्राचीन मंदिर एवं संस्कृत शिक्षा का केंद्र थी। यह निर्णय किसी भावनात्मक आवेग का परिणाम नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया, पुरातात्विक परीक्षण और न्यायिक विवेक की कसौटी पर आया हुआ निर्णय है।

यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि न्यायालय ने ASI जैसी विशेषज्ञ संस्था की जांच, दोनों पक्षों की दलीलों, ऐतिहासिक प्रमाणों और प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद यह निर्णय दिया। यह बताता है कि भारत का संविधान और न्यायपालिका सत्य तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं, यदि धैर्य और विश्वास बनाए रखा जाए।

यह निर्णय सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक भारत में ऐतिहासिक सत्य पर चर्चा को ही विवाद बना दिया गया। सभ्यतागत पीड़ा की अभिव्यक्ति को सांप्रदायिकता कहकर दबाने का प्रयास हुआ। मंदिर विध्वंसों की स्मृतियों को ‘अतीत भूल जाओ’ कहकर ढंकने का प्रयास किया गया। लेकिन कोई भी समाज अपने घावों को स्वीकार किए बिना स्वस्थ नहीं हो सकता।

भोजशाला का निर्णय इस बात का संकेत है कि आधुनिक भारत अब अपनी सभ्यता के इतिहास से आंखें चुराने के बजाय उसका संतुलित और तथ्याधारित पुनर्पाठ करने को तैयार है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह निर्णय भारत की बदलती चेतना का प्रतीक है। यह उस ‘नए भारत’ का संकेत है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों को लेकर संकोचग्रस्त नहीं है। जो यह मानता है कि विकास और विरासत साथ-साथ चल सकते हैं। जो मंदिरों को केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्मृति और सभ्यतागत पहचान के केंद्र के रूप में देखता है।

यह निर्णय उन करोड़ों भारतीयों के मन में विश्वास भी जगाता है, जिन्होंने दशकों तक यह अनुभव किया कि उनकी आस्था, उनकी पीड़ा और उनकी सांस्कृतिक स्मृतियां सार्वजनिक विमर्श में उपेक्षित रहीं। भोजशाला का निर्णय उन्हें यह आश्वासन देता है कि संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के भीतर रहते हुए भी ऐतिहासिक न्याय संभव है।

इस निर्णय का सबसे बड़ा संदेश यह है कि सनातन केवल पूजा पद्धति नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है। उसे तलवारों से घायल किया जा सकता है, लेकिन समाप्त नहीं किया जा सकता।

आज भोजशाला का प्रश्न केवल एक मंदिर का प्रश्न नहीं है। यह भारत की उस ज्ञान परंपरा का प्रश्न है, जिसने विश्व को व्याकरण दिया, दर्शन दिया, गणित दिया, अध्यात्म दिया। यह उस सांस्कृतिक अस्मिता का प्रश्न है, जिसे बार-बार मिटाने का प्रयास हुआ, लेकिन जो हर बार और अधिक तेजस्विता के साथ पुनः खड़ी हो गई।

न्यायालय द्वारा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में स्थापित मां सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने की दिशा में विचार करने संबंधी टिप्पणी भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह प्रतिमा केवल मूर्ति नहीं है, वह भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उसका पुनः भोजशाला में स्थापित होना वस्तुतः इतिहास की टूटी हुई कड़ी का पुनर्संयोजन होगा। वह केवल प्रतिमा की वापसी नहीं होगी, वह भारतीय आत्मा की घर-वापसी होगी।

किन्तु इस निर्णय को प्रतिशोध या पराजय के भाव से नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसी समुदाय की हार नहीं है। यह ऐतिहासिक सत्य की स्वीकृति है।

अब आवश्यकता भोजशाला को पुनः ज्ञान और संस्कृत साधना के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की है। वहां पुनः वेदों की ऋचाएं गूंजें। वहां पुनः संस्कृत का अध्ययन हो। वहां पुनः भारत की ज्ञान परंपरा विश्व को दिशा दे। वहां पुनः यह सिद्ध हो कि यह भूमि केवल आस्था की नहीं, ज्ञान की भी जननी है। तभी यह निर्णय अपने पूर्ण अर्थ को प्राप्त करेगा।

भोजशाला हमें याद दिलाती है कि इतिहास का सत्य देर से लौट सकता है, लेकिन लौटता अवश्य है। और जब सत्य लौटता है, तब केवल एक भवन नहीं जीतता… सभ्यता मुस्कुराती है, इतिहास की राख से फिर सरस्वती उठ खड़ी होती हैं।

हाथरस में ₹10 के पोस्टल ऑर्डर गायब, RTI कानून को पंगु बनाने की साजिश का आरोप

RTI कार्यकर्ता एसोसिएशन ने डाक विभाग को दी 7 दिन की चेतावनी, आंदोलन और हाईकोर्ट जाने की कही बात

हाथरस। हाथरस जिले के मुख्य डाकघर सहित सभी उप-डाकघरों में ₹10 के भारतीय पोस्टल ऑर्डर (IPO) की लगातार कमी को लेकर सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन ने डाक विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने इसे सामान्य प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सूचना का अधिकार (RTI) कानून को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश करार दिया है। इस संबंध में प्रवर अधीक्षक डाकघर अलीगढ़ मंडल और पोस्टमास्टर जनरल आगरा क्षेत्र को सख्त चेतावनी पत्र भेजा गया है।एसोसिएशन का कहना है कि आरटीआई आवेदन शुल्क जमा करने के लिए ₹10 का पोस्टल ऑर्डर अनिवार्य होता है, लेकिन हाथरस जिले के डाकघरों में महीनों से इसका स्टॉक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। हर बार “स्टॉक खत्म है” कहकर नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं को वापस भेज दिया जाता है। आरोप लगाया गया कि इससे आम नागरिक सरकारी विभागों से जानकारी मांगने और भ्रष्टाचार उजागर करने से वंचित हो रहे हैं।सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि ₹10 के पोस्टल ऑर्डर की कृत्रिम कमी भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का माध्यम बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट तत्वों की मिलीभगत से आरटीआई व्यवस्था को बाधित किया जा रहा है। वहीं जिला महामंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय ने कहा कि जनता को ₹10 के स्थान पर ₹20 और ₹50 के पोस्टल ऑर्डर खरीदने के लिए मजबूर करना आर्थिक शोषण है।एसोसिएशन ने मांग की है कि आगामी तीन कार्य दिवसों के भीतर हाथरस जिले के सभी डाकघरों में ₹10 के पोस्टल ऑर्डर का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए तथा कृत्रिम कमी पैदा करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो अलीगढ़ मंडल कार्यालय पर तालाबंदी और उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही महानिदेशक डाक विभाग, केंद्रीय सूचना आयोग और उच्च न्यायालय में शिकायत एवं याचिका दायर की जाएगी।

यातायात पुलिस का सख्त चेकिंग अभियान, 85 वाहनों के चालान

मैनपुरी, 17 मई उप्रससे। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने एवं यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से शनिवार को जनपद में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक नगर/यातायात अरुण कुमार सिंह, पुलिस उपाधीक्षक यातायात सुश्री दीपशिखा सिंह तथा यातायात प्रभारी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में संचालित किया गया।
अभियान के दौरान यातायात पुलिस द्वारा वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करते हुए हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की गई। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी की गई। चेकिंग अभियान में कुल 85 वाहनों के चालान किए गए, जबकि एक वाहन को सीज किया गया। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का नकद समन शुल्क व लगभग 51 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा को लेकर इस प्रकार के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे, ताकि दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। निरोधात्मक कार्यवाई में 6 गाड़ी सीज ड्रिंक एंड ड्राइवकी गई।

हेग से प्रधानमंत्री का संदेश

Narendra Modi Prime Minister

सम्पादकीय 17.05.2026 by Sarvesh Kumar Singh, Editor, UP Web News

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी छह दिनी विदेश यात्रा के दूसरे दिन नीदरलैंड के हेग में भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया। यहां उन्होंने विश्व परिदृश्य और आसन्न चुनौतियों को न केवल रेखांकित किया, बल्कि भारतवासियों को आगाह भी किया। उनकी बातों में स्पष्ट रूप से उन्नत भारत के भविष्य की लालसा और विकसित भारत का सपना समाया हुआ है। हेग का संदेश केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि समुची दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। आज जो ऊर्जा संकट खडा हुआ है उससे केवल भारत ही नहीं समूची दुनिया को प्रभावित होना है। इसका समाधान भी खोजना है और अपनी जरूरतों को भी पूरा करना है।

पीएम मोदी ने हेग में कहा कि यह दशक आपदाओं के लिए जाना जा रहा है। पहले कोराना का दंश, फिर युद्धों का सिलसिला इससे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। श्री मोदी ने भारत की प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि यदि हम अभी नहीं चेते और उपायों को नहीं अपनाया गया तो कई दशक के प्रगति के प्रयासों पर पानी फिर जाएगा और दुनिया की एक बडी आबादी फिर से गरीबी की ओर लौट जाएगी। उनका इशारा साफ था। ईरान-अमेरिका के युद्ध ने जो गंभीर ऊर्जा संकट खडा किया है। उससे विश्व के सामने गतिशील विकास को बनाये रखना निश्चित रूप से मुश्किल हो रहा है।

विदेश यात्रा पर जाने से पहले प्रधानमंत्री ने हैदराबाद और दिल्ली के कार्यक्रमों में देशवासियों से संयमित ऊर्जा के उपभोग का आग्रह किया था। उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों का कम से कम उयोग करने के लिए कोराना काल जैसी व्यवस्थाएं अपनाने की अपील की थी। इसमें कारों का कम प्रयोग, वर्क फ्राम होम, डिजिटल माध्यमों से मीटिंगें। कार्यालयों में दो दिन का वर्क फ्राम होम, एक दिन नो वेहिकल डे मानने के साथ साथ, एक साल तक सोना नहीं खरीदने, किसानों से कम उर्वरकों का उपयोग करने की अपील भी शामिल है। इस मुहिम का व्यापक असर हुआ है। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पीएम की अपील के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी शुरु कर दी हैं।

प्रधानमंत्री का हेग का संदेश महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह जहां भारत के स्पष्ट सपनों को उजागर करता है वहीं बाधाओं को रेखांकित करता है और समाधान भी बताता है। इस दौरे में प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड सरकार के साथ कई समझौते किये हैं। ये समझौते भारत के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।

Moradabad स्टेशन पर छात्रा का पैर फिसला,ट्रेन मैनेजर ने जान बचाई

टला हादसा —
अलीगढ़-गजरौला पैसेंजर ट्रेन का मामला,राजा का सहसपुर की घटना

Post on 17.5.26
Sunday , Time 7.00.PM
Moradabad , Rajesh Bhatia

मुरादाबाद,उप्र समाचार सेवा।

अलीगढ़ गजरौला पैसेंजर ट्रेन में चढ़ने के दौरान एक छात्रा का पैर फिसल गया। ट्रेन के चलने के दौरान फंसी छात्रा भी घिसटने लगीं।ट्रेन मैनेजर ने नजारा देखा तो गाड़ी रुकवा लीं।ट्रेन व प्ले टफार्म के बीच फंसी यात्रा को निकाल लिया गया। मामला चंदौसी रेलमार्ग पर राजा का सहसपुर स्टे़शन का है।अलीगढ़ से गजरौला जा रही पैसेंजर ट्रेन स्टेशन पर पहुंची।इस दौरान छात्रा ने ट्रेन में चढ़ना चाहा मगर पैर का संतुलन बिगड़ने से प्लेटफार्म के नीचे गिरने लगी।इस दौरान फंसी छात्रा ट्रेन के साथ ही फिसलने लगी। गनीमत रहीं कि
छात्रा ट्रेन का हैंडल पकड़े रहें। इस दौरान छात्रा गाड़ी के साथ भी घिसटने लगीं। छात्रा को ट्रेन के साथ फिसलता देखकर ट्रेन मैनेजर ओमकार सिंह सेकंड ने हालात देख प्रेशर लगाकर गाड़ी को रोक लिया। गाड़ी रुकी और फंसी छात्रा को सुरक्षि‍त निकाल लिया गया।इससे छात्रा की जान बच गई।

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