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एटा में जमीन विवाद में युवक को पीट-पीटकर किया अधमरा, पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़कर भेजा जेल

September 18, 2026

एटा में जमीन विवाद में युवक को पीट-पीटकर किया अधमरा, पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़कर भेजा जेल

एटा 18 सितंबर उप्रससे। जनपद में पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के आरोप में तीन आरोपी मुकेश पुत्र ब्रजबासी, हीरालाल पुत्र तेज सिंह और योगेश पुत्र खेमकरण उर्फ झंडू को गिरफ्तार किया है। इन सभी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

दरअसल, 30 अगस्त को कमलेंद्र पुत्र महाराज सिंह ने कोतवाली देहात में लिखित शिकायत दी थी कि वह और उसके परिजन घर पर बैठे थे, तभी आरोपियों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियार से हमला कर दिया था. इस मारपीट की घटना में दोनों पक्षों के 8 लोग घायल हुए थे।
इस मारपीट में श्यामपाल (36) की मौत हो गई थी. पुलिस ने तीनों आरोपियों को ककेहरा बाईपास पुल के पास से गिरफ्तार किया है। पुलिस एक आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी. तभी से आरोपी फरार चल रहे थे। अब पुलिस ने इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

कानून-व्यवस्था को लेकर धौरहरा इंस्पेक्टर लाइन हाजिर

अवनीश सिंह को कमान बृजेश मिश्रा बने थाना खीरी के नए प्रभारी

उ प्र समाचार सेवा
लखीमपुर-खीरी: जनपद खीरी में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने और अनुशासन के मद्देनजर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग ने शुक्रवार को पुलिस निरीक्षकों के तबादले की बड़ी कार्रवाई की है। मीडिया सेल द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, दो प्रमुख थानों में नए प्रभारियों की तैनाती की गई है।थाना धौरहरा क्षेत्र के ग्राम सिसैया खुर्द में बीती 14 सितंबर को हुई गंभीर घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए धौरहरा के प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार शर्मा को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन्स स्थानांतरित (लाइन हाजिर) कर दिया गया है।इस घटना के संबंध में पुलिस ने मु0अ0सं0 433/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 352, 351(2) और 333 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है, जिसमें आगे की कानूनी और विवेचनात्मक कार्रवाई जारी है।
अवनीश सिंह को धौरहरा और बृजेश मिश्रा को थाना खीरी की कमान
धौरहरा में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए निरीक्षक अवनीश कुमार सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। श्री सिंह इससे पहले प्रभारी निरीक्षक थाना खीरी के पद पर तैनात थे, जिन्हें अब प्रभारी निरीक्षक थाना धौरहरा बनाया गया है।वहीं, थाना कोतवाली सदर में अपराध निरीक्षक के पद पर तैनात निरीक्षक बृजेश कुमार मिश्रा की कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें प्रभारी निरीक्षक थाना खीरी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। एसएसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने स्पष्ट किया है कि पुलिस प्रशासन में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आगे भी ऐसी कार्रवाई की जा सकती है।

यूजीसी के विरोध में सड़क पर उतरे हजारों युवा, ट्रैक्टर मार्च रोकने पर पुलिस से भिड़ंत

आगरा। यूजीसी की नई व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को आगरा में विरोध-प्रदर्शन का माहौल रहा। एत्मादपुर क्षेत्र के संवई गांव में प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च को लेकर सुबह से ही पुलिस-प्रशासन अलर्ट रहा। गांव से करीब 200 मीटर आगे बढ़े करीब एक हजार युवाओं को पुलिस और पीएसी ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

कलेक्ट्रेट जाने की जिद पर अड़े प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पहले नोकझोंक हुई और देखते ही देखते धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गांव की तरफ खदेड़ दिया। दोपहर तक मौके पर दोनों पक्ष आमने-सामने डटे रहे।

दरअसल, सिस्टम सुधर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशुमान ठाकुर के नेतृत्व में संवई से आगरा कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च का ऐलान किया गया था। आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन भानु समेत क्षत्रिय समाज के कुछ पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों का समर्थन मिला था। हालांकि गुरुवार को कई समर्थकों ने युवाओं के भविष्य और पूर्व आंदोलनों में दर्ज मुकदमों का हवाला देते हुए आंदोलन से अपना समर्थन वापस लेने और युवाओं से इसमें शामिल नहीं होने की अपील की थी। भारतीय किसान यूनियन भानु ने भी कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की थी।

इसके बावजूद अंशुमान ठाकुर ने देर रात आंदोलन जारी रखने और ट्रैक्टर मार्च निकालने की बात कही। इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने किसी भी तरह के टकराव को रोकने के लिए रात से ही तैयारी शुरू कर दी। पुलिस टीमों ने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया। बुजुर्गों और युवाओं से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की गई। शुक्रवार तड़के करीब चार बजे से ही पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई थी।

शुक्रवार सुबह संवई गांव से बड़ी संख्या में युवा ट्रैक्टरों के साथ आगरा की ओर निकल पड़े। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर वे करीब 200 मीटर ही आगे बढ़ पाए थे कि पहले से तैनात पुलिस और PAC ने बैरियर लगाकर रास्ता रोक दिया। रास्ते में बैरिकेडिंग के साथ क्रेन भी लगाई गई थी, ताकि ट्रैक्टर आगे न बढ़ सकें। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट जाने की मांग की। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। कुछ देर बाद स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। फोर्स के सक्रिय होते ही पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को पीछे की ओर खदेड़ दिया। काफी दूर तक पीछा करने के बाद पुलिसकर्मी वापस बैरियर पर लौट आए। इसके बाद प्रदर्शनकारी भी दोबारा एकजुट होने लगे। सड़क किनारे बड़ी संख्या में ट्रैक्टर खड़े रहे और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए रही।

—-एत्मादपुर से कलेक्ट्रेट तक बैरिकेडिंग

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने आगरा की ओर आने वाले कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी। आंवलखेड़ा और बरहन की तरफ से आने वाले रास्तों को भी रोका गया। एत्मादपुर, कुबेरपुर और रामबाग समेत प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया। संवेदनशील स्थानों पर पीएसी की भी तैनाती रही। सुरक्षा व्यवस्था के तहत ड्रोन से भी निगरानी की गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति का जायजा लेती रहीं। डीसीपी बेस्ट आदित्य कुमार भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। पुलिस की ओर से एहतियात के तौर पर कुछ किसान नेताओं को घरों में ही नजरबंद किए जाने की बात सामने आई। अधिकारियों का जोर इस बात पर रहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।

ट्रैक्टर मार्च से एक दिन पहले गुरुवार को फतेहाबाद रोड पर क्षत्रिय समाज और युवाओं के भविष्य को लेकर बैठक भी हुई थी। इसमें वक्ताओं ने पूर्व के आंदोलनों में युवाओं पर दर्ज मुकदमों का हवाला देते हुए नए आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके परिणामों और नेतृत्व की जवाबदेही पर विचार करने की अपील की। क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गौरी शंकर सिकरवार ने कहा कि समाज और नौजवानों के भविष्य को सुरक्षित रखना जरूरी है।

इधर, आगरा के कालिंदी विहार क्षेत्र में भी शुक्रवार सुबह UGC की नई व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन हुआ। CNG पंप के पीछे करीब 10:30 बजे करणी सेना के प्रदेश महामंत्री दिनेश जादौन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए।

करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान सड़क पर जाम की स्थिति बन गई और वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।

September 16, 2026

कोसीकलां में 12 करोड़ की चोरी का खुलासा, चार गिरफ्तार

ज्वेलर्स के घर से 7.05 किलो सोना और 11 लाख रुपये बरामद, दो महिलाएं भी वारदात में शामिल
मथुरा। कोसीकलां में ज्वेलर्स के मकान से करीब 12 करोड़ रुपये की चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने वारदात में शामिल दो पुरुषों और दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 7.05 किलोग्राम सोना और 11 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने चोरी में इस्तेमाल गैस कटर, वायर कटर, झोला और अन्य सामान भी बरामद किया है।
मंगलवार को पुलिस लाइन सभागार में अपर पुलिस महानिदेशक एसके भगत, उपमहानिरीक्षक शैलेश कुमार पांडेय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने प्रेसवार्ता कर चोरी के खुलासे की जानकारी दी।
रात में दिया था वारदात को अंजाम
पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर की रात करीब 7:30 बजे से 14 सितंबर की सुबह 10 बजे के बीच कोसीकलां क्षेत्र में ज्वेलर्स के मकान को निशाना बनाया गया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और आरोपियों की तलाश में कई टीमें गठित कीं।
सीसीटीवी और सर्विलांस से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
15 सितंबर को दोपहर करीब 12:59 बजे पुलिस टीम ने गोपालबाग क्षेत्र से विष्णु उर्फ पप्पू सोनी (27) और मोहन सोनी (22) को गिरफ्तार किया। इनके साथ दो महिला सह-अभियुक्तों को भी पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी का सोना और नकदी बरामद की।
पुलिस के अनुसार, बरामद सामान में 7.05 किलो सोना, 11 लाख रुपये नकद, डीवीआर, लॉकर की चाबी, घटना के समय पहने गए कपड़े, झोला, गैस कटर और वायर कटर शामिल हैं।
एसओजी-सर्विलांस समेत कई टीमें लगी थीं
घटना के खुलासे के लिए एसओजी, सर्विलांस और थाना पुलिस की संयुक्त टीमों ने काम किया। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों से मिले सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। मामले में मु0अ0सं0 619/2026, धारा 331(4)/305 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज है।
कार्रवाई में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत, एएसटीएफ आगरा इकाई के अपर पुलिस अधीक्षक राकेश यादव, क्षेत्राधिकारी छाता भूषण वर्मा समेत कोसीकलां और आसपास के थानों की पुलिस टीमें शामिल रहीं।

मोदी होना आसान नहीं

नरेंद्र मोदी
जन्मदिन पर विशेष
सुरेश हिंदुस्तानी
कोई भी व्यक्ति जन्म से महान नहीं बनता, उसके द्वारा किए गए कर्म ही उसकी छवि बनाते हैं। भाग्य कुछ नहीं होता, कर्म से सब प्राप्त किया जा सकता है। गुजरात के निर्धन परिवार में जन्म लेने वाले नरेंद्र मोदी के व्यापक विस्तार की कहानी भी ऐसी ही है। मोदी ने अपने और अपने परिवार के बारे में कभी नहीं सोचा। उनके चिंतन के केंद्र में आम आदमी प्रमुखता से है। संभवतः वे पंडित दीनदयाल जी की उस उक्ति को धरती पर लाने का उपक्रम कर रहे हैं, जिसमें अंतिम छोर पर निवास करने वाले व्यक्ति का उत्थान छुपा हुआ है। तभी तो नरेंद्र मोदी कहते हैं कि 140 करोड़ देशवासी उनका परिवार है। इतना ही नहीं, वे अपने आपको प्रधान सेवक मानने में गौरव का अनुभव करते हैं। उन्होंने जनता के साथ जुड़ाव बनाने वाला यह कथन अपने जीवन में समाहित कर लिया है। ऐसा जीवन व्यतीत करने वाला व्यक्ति सामान्य नहीं हो सकता। इसलिए कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी होना आसान नहीं है।
किसी व्यक्ति के जीवन में प्राप्त होने वाला पद बड़ा हो सकता है, लेकिन पद से बड़ा होता है उसका व्यक्तित्व। कुर्सी शक्ति दे सकती है, किंतु उस शक्ति को धैर्य, संयम और संकल्प के साथ साधना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। भारत की राजनीति में नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व इसी कारण अलग दिखाई देता है। उनके समर्थकों के लिए वे संघर्ष से निकली उस यात्रा के प्रतीक हैं, जिसमें अभावों से उठकर व्यक्ति देश के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचता है। सच कहें तो मोदी होना आसान नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने वर्तमान राजनीतिक चुनौतियां नई नहीं हैं। सत्ता के गलियारों में जितनी प्रशंसा मिलती है, उतनी ही तीखी आलोचना भी उनका पीछा करती है। राजनीतिक प्रहारों की निरंतरता किसी भी व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा ले सकती है। लेकिन मोदी की राजनीतिक शैली की एक प्रमुख विशेषता यह रही है कि वे अपने समर्थकों की अपेक्षाओं और विरोधियों के आक्रोश के बीच अपना संतुलन बनाए रखने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। राजनीति में विरोध आवश्यक है। लोकतंत्र में सत्ता से प्रश्न पूछे जाने चाहिए। नीतियों की सकारात्मक आलोचना होनी चाहिए। लेकिन राजनीतिक असहमति जब व्यक्तिगत कटुता का रूप लेती है, तब लोकतंत्र की गरिमा प्रभावित होती है। ऐसे वातावरण में भी स्वयं को संयमित रखना किसी नेता के लिए सामान्य बात नहीं। आज की राजनीति केवल मोदी का समर्थन या विरोध पर ही केंद्रित हो गई है। इसे इस रूप में भी कहा जा सकता है कि मोदी का प्रचार विपक्षी दलों ने अधिक किया है।
मोदी की राजनीतिक यात्रा का सबसे प्रेरक पक्ष उनका संघर्ष है। एक सामान्य परिवार से निकलकर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने की कहानी भारतीय लोकतंत्र की उस शक्ति को रेखांकित करती है, जिसमें किसी व्यक्ति की सामाजिक पृष्ठभूमि उसकी अंतिम सीमा तय नहीं करती। अभावों में पला व्यक्ति भी अपने परिश्रम, अनुशासन और संकल्प के बल पर राष्ट्र के नेतृत्व तक पहुंच सकता है। यही मोदी की कहानी का सबसे बड़ा संदेश है।
संघर्ष व्यक्ति को तोड़ता नहीं, यदि उसके भीतर संकल्प जीवित हो तो वही संघर्ष उसे गढ़ता है।
मोदी के व्यक्तित्व की चर्चा करते समय उनके परिवार और व्यक्तिगत जीवन का पक्ष भी सामने आता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनका परिवार सत्ता के केंद्र में दिखाई नहीं देता। सत्ता के शीर्ष पर रहते हुए पारिवारिक जीवन को राजनीतिक लाभ से दूर रखने की उनकी छवि उनके समर्थकों के लिए विशेष महत्व रखती है। भारतीय राजनीति में जहां परिवारवाद लंबे समय से बहस का विषय रहा है, वहां मोदी की व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करती है।
मोदी की कहानी केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है। आज विश्व मंच पर भारत की उपस्थिति पहले से अधिक प्रभावशाली दिखाई देती है। अनेक देशों के साथ भारत के संबंधों का विस्तार हुआ है। वैश्विक मंचों पर भारत की शक्तिशाली भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की आवाज को गंभीरता से सुना जाना उस बदलते भारत का संकेत है, जो अपनी क्षमता, अपने हितों और अपनी सभ्यता की पहचान के साथ विश्व समुदाय के सामने खड़ा होना चाहते हैं। वे जब विदेश दौरा करते हैं, तब वे भारतीय मूल के नागरिकों से अवश्य मिलते हैं। इस दौरान भारतीय मूल के व्यक्तियों के चेहरे बहुत ही प्रफुल्लित दिखाई देते हैं। वे सभी मोदी को एक सफल नायक की श्रेणी में देखते हैं। अपनेपन का यह भाव मोदी के स्वभाव का ही परिणाम है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए विदेश यात्राओं या कूटनीतिक मुलाकातों का विषय नहीं है। यह उस आत्मविश्वास का विषय है, जिसके साथ भारत आज विश्व समुदाय से संवाद कर रहा है।
एक समय था जब दुनिया के अनेक शक्तिशाली देश भारत को मुख्यतः एक विकासशील राष्ट्र के रूप में देखते थे। आज भारत की अर्थव्यवस्था, उसकी युवा शक्ति, उसकी तकनीकी क्षमता, उसका विशाल बाजार और उसकी सामरिक भूमिका विश्व की चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस परिवर्तन का पूरा श्रेय किसी एक व्यक्ति को देना उचित नहीं होगा, लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने भारत की इस वैश्विक प्रस्तुति को निश्चित रूप से एक विशिष्ट राजनीतिक दिशा दी है। और यही मोदी की विशेषता का एक महत्वपूर्ण आयाम है। वे भारत को केवल वर्तमान के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व जितना मुखर है, उतना ही व्यक्तिगत जीवन में सादगी और अनुशासन की छवि से जुड़ा हुआ भी है। सार्वजनिक जीवन में निरंतर सक्रियता, दैनिक रूप से लंबे कार्य घंटे, देश-विदेश की यात्राएं और करोड़ों लोगों की अपेक्षाओं का भार, प्रधानमंत्री का जीवन किसी सामान्य नौकरी की तरह नहीं होता। प्रत्येक निर्णय के पीछे राजनीतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय परिणाम जुड़े होते हैं।
और इसीलिए प्रधानमंत्री होना केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं है। यह हर दिन स्वयं को कटघरे में खड़ा करना भी है। एक ओर समर्थकों की अपेक्षाएं, दूसरी ओर विरोधियों के सवाल। एक ओर देश की आकांक्षाएं, दूसरी ओर विश्व की निगाहें। एक ओर वर्तमान की चुनौतियां, दूसरी ओर भविष्य के भारत की जिम्मेदारी। इन सबके बीच संतुलन बनाना ही नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा है।
नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनके जीवन को देखने का सबसे सार्थक तरीका यही है कि हम उनके संघर्ष, संकल्प और नेतृत्व की यात्रा को समझें। मतभेद लोकतंत्र की सुंदरता हैं। उनके भीतर एक ऐसा नेतृत्व दिखाई देता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होता। उनके आलोचक चाहे उनके निर्णयों से सहमत हों या नहीं, लेकिन यह भी एक तथ्य है कि नरेंद्र मोदी आज भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और चर्चित चेहरों में से एक हैं। उनकी यात्रा हमें एक महत्वपूर्ण बात सिखाती है कि ऊंचाई पर पहुंचना कठिन है, लेकिन उस ऊंचाई पर टिके रहकर निरंतर आगे बढ़ते रहना उससे भी कठिन है।
मोदी होना इसलिए आसान नहीं है। मोदी होने के निहितार्थ यही हैं संघर्ष को शक्ति में बदलना। आलोचना को सहने का धैर्य रखना। सफलता के बीच जमीन से जुड़े रहना। भारत की आकांक्षाओं को विश्व के सामने आत्मविश्वास से रखना। और सबसे बढ़कर, स्वयं से बड़ी किसी राष्ट्रीय आकांक्षा के लिए निरंतर काम करते रहना।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उन्हें देखने का एक दृष्टिकोण यह भी है कि एक साधारण पृष्ठभूमि से निकला व्यक्ति किस प्रकार भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में असाधारण राजनीतिक पहचान बना सकता है। राजनीति के निर्णयों का मूल्यांकन इतिहास करेगा। नीतियों की समीक्षा समय करेगा। उपलब्धियों और कमियों का आकलन आने वाली पीढ़ियां करेंगी। लेकिन संघर्ष की कहानी अपनी जगह रहती है। और नरेंद्र मोदी की कहानी का यही सबसे बड़ा भाव है, एक साधारण शुरुआत से असाधारण शिखर तक की यात्रा। इसलिए जन्मदिन के इस अवसर पर एक वाक्य सहज ही मन में उभरता है कि मोदी होना आसान नहीं।
Suresh Hindustani Journalist

सुरेश हिन्दुस्तानी वरिष्ठ पत्रकार

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