शाहजहाँपुर।( संजीव गुप्त) आयुर्वेद दिवस की इस वर्ष की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय प्रांगण स्थित इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष एवं इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी शाखा शाहजहाँपुर के सचिव डॉ. विजय जौहरी पूर्व शिक्षक बुंदेलखंड राजकीय आयूर्वेस मेडिकल कॉलेज झाँसी ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, स्वस्थ जीवनशैली और स्वस्थ राष्ट्र की भारतीय सोच का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि 23 सितंबर को प्रतीकात्मक रूप से देखें तो 3 को आयुर्वेद के त्रिदोष—वात, पित्त और कफ तथा 2 को समता एवं संतुलन के भाव से जोड़ा जा सकता है। 2 और 3 मिलकर 5 होते हैं, जो पंचमहाभूत की अवधारणा की ओर संकेत करते हैं। इसी क्रम में 7 को सप्तधातु और 8 को आयुर्वेद के अष्टांग से प्रतीकात्मक रूप से समझा जा सकता है।
डॉ. जौहरी ने कहा कि तिरंगा राष्ट्रभावना और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उसके तीन रंगों को आयुर्वेद की दृष्टि से प्रतीकात्मक रूप में त्रिदोष—वात, पित्त और कफ से जोड़कर देखा जा सकता है। जिस प्रकार त्रिदोषों का संतुलन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना गया है, उसी प्रकार राष्ट्र के विभिन्न वर्गों और समुदायों में समन्वय एवं संतुलन राष्ट्र की शक्ति को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि तिरंगे के मध्य स्थित अशोक चक्र की 24 तीलियां भी भारतीय ज्ञान-परंपरा की दृष्टि से विशेष आकर्षण रखती हैं। भारतीय तत्त्वचिंतन में 24 तत्त्वों की अवधारणा मिलती है। आयुर्वेद के संदर्भ में इसे प्रकृति, शरीर और जीवन की संरचना को समझने वाली भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रतीकात्मक संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है।
डॉ. जौहरी ने कहा कि यह तुलना किसी एक शास्त्रीय सिद्धांत को सिद्ध करने के लिए नहीं, बल्कि अच्छे कार्य के लिए अच्छे प्रतीकों से प्रेरणा लेने का प्रयास है। तिरंगा जहां राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रधर्म की भावना जगाता है, वहीं आयुर्वेद स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश देता है। दोनों भावनाओं को साथ लेकर चलना राष्ट्रस्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक प्रयास है।
उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, संस्थानों और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों का दायित्व है कि वे इसकी प्रमाणित एवं उपयोगी स्वास्थ्य अवधारणाओं को जन-जन तक पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि जहां भी जनस्वास्थ्य की बात होगी, वहां आयुर्वेद की स्वस्थ जीवनशैली की बात होगी; और जहां राष्ट्रस्वास्थ्य की बात होगी, वहां स्वस्थ नागरिक की भूमिका भी सामने आएगी। आहार, दिनचर्या, योग, व्यायाम, स्वच्छता और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली को अपनाकर स्वस्थ भारत के निर्माण में प्रत्येक नागरिक योगदान दे सकता है।
डॉ. जौहरी ने कहा कि आयुर्वेद दिवस का संकल्प केवल आयुर्वेद के प्रचार तक सीमित न रहकर “स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र” की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान बनना चाहिए।उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने मार्च 2025 में राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से 23 सितंबर को प्रत्येक वर्ष आयुर्वेद दिवस मनाने के लिए निश्चित तिथि घोषित की। इससे पहले आयुर्वेद दिवस धनतेरस अर्थात भगवान धन्वंतरि जयंती के अवसर पर मनाया जाता था, जिसकी तिथि प्रतिवर्ष बदलती रहती थी।
बैठक में डॉ. एस.पी. कौशल, डॉ. हितेश गुप्ता, डॉ. रवि सक्सेना, जिला चिकित्सालय के आयुष विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र कुशवाहा ने योग एवं आयुर्वेद पर आधारित एक पत्रिका डॉक्टर विजय जोहरी को भेंट की इस अवसर पर ओम दिव्यांग कल्याण समिति के बालकृष्ण पांडेय, बृजेश गुप्ता, रवि वर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 23 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाते हुए आयुर्वेद की संतुलित जीवनशैली, रोग-निवारण, आहार-विहार, योग एवं जनस्वास्थ्य में भूमिका के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।