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UP Election 2027 से पहले हाथरस की जमीनी हकीकत पर घिरती सत्तारूढ़ पार्टी

April 28, 2026

UP Election 2027 से पहले हाथरस की जमीनी हकीकत पर घिरती सत्तारूढ़ पार्टी

Posted on 28.04.2026 Time 10.58, Tuesday, UP Vidhan Sabha Election 2027, Neeraj Chakrapani  Hathras

हाथरस में अफसर-नेता गठजोड़ पर उठे सवाल, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

हाथरस, आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। राज्य की सत्ता में वापसी की चुनौती के बीच सत्तारूढ़ दल के सामने जमीनी स्तर पर संगठन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। खासतौर पर ब्रज क्षेत्र के हाथरस जनपद को लेकर उठ रही चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों वाले इस जनपद में फिलहाल दो सीटों पर भाजपा और एक पर सहयोगी दल का कब्जा है। जिला पंचायत से लेकर नगर निकायों तक सत्ता पक्ष की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर असंतोष की स्थिति सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि जिले में प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल जनहित के बजाय निजी हितों की पूर्ति की ओर झुका हुआ है। आरोप हैं कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही, जिससे भूमाफिया सक्रिय बने हुए हैं। कई मामलों में सांठगांठ की आशंका भी जताई जा रही है।
विकास कार्यों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। लंबे समय से लंबित यातायात सुधार, मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और ट्रांसपोर्ट नगर जैसी परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। जनसुविधाओं की कमी और अव्यवस्था को लेकर आम नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ विभागों जैसे लोक निर्माण, बिजली, जल निगम,वन विभाग ,समाज कल्याण , स्वास्थ्य सेवाएं, उप निबंधन कार्यालय,जिला उद्योग  और परिवहन विभाग सहित आदि में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन विभागों में कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश से मिले संकेतों के बाद सत्तारूढ़ दल के लिए आगामी विधानसभा चुनाव आसान नहीं होंगे। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर संगठन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
विपक्षी दल भी इन मुद्दों को लेकर सक्रिय हो गए हैं और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में चुनावी माहौल और तेज होने के साथ ही हाथरस जैसे जनपदों की स्थिति प्रदेश की व्यापक राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।फिलहाल नजर इस बात पर है कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर उठ रहे आरोपों और जन असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है।

बच्चों के झगड़े से भड़की जातीय हिंसा, कई घायल

मैनपुरी।  एलाऊ थाना क्षेत्र के ग्राम मंछना में बच्चों के विवाद ने कथित तौर पर जातीय हिंसा का रूप ले लिया। गांव के एक विकलांग युवक महेंद्र सिंह जाटव ने थाने में दी तहरीर में आरोप लगाया है कि बच्चों के खेल के दौरान हुए मामूली झगड़े के बाद गांव के दबंगों ने संगठित होकर हमला कर दिया।
पीड़ित के मुताबिक, शाम करीब साढ़े पांच बजे 10 नामजद और 5 अज्ञात लोग लाठी-डंडे, सरिया और फावड़े के बेंट लेकर पहुंचे और जातिसूचक गालियां देते हुए हमला बोल दिया। आरोप है कि महेंद्र सिंह, उनकी नानी रेशमा देवी, मामी संगीता देवी और ममेरे भाइयों अमित कुमार व रामू के साथ मारपीट की गई, जिससे सभी घायल हो गए। तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि हमलावरों ने घर के बाहर खड़ी स्विफ्ट डिजायर कार में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया। शोर सुनकर जब मोहल्ले के अन्य लोग बचाव में पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई। जितेंद्र और राकेश के घर में घुसकर हमला करने तथा बचाने आई महिलाओं और बेटियों बसंती, संध्या और काजल को भी पीटने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित का कहना है कि हमलावर जातिसूचक टिप्पणी करते हुए गांव छोड़ने और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि आरोपी प्रभावशाली और दबंग प्रवृत्ति के हैं, जिससे परिवार में दहशत का माहौल है।
घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने थाना एलाऊ में तहरीर देकर नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। मामले में जातीय उत्पीड़न, मारपीट, तोड़फोड़ और धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। तहरीर के आधार पर आरोपों की पड़ताल की जा रही है और पुलिस का कहना है कि जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस की नजर बनी हुई है।

जिलाधिकारी ने फार्मर रजिस्ट्री की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी 

मैनपुरी।  जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने त्रिलोकपुर, कुचेला में फार्मर रजिस्ट्री के कार्य का स्थलीय निरीक्षण करते हुए फॉर्मर रजिस्ट्री की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उप कृषि निदेशक को आदेशित किया कि फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति सुधारने के लिए सम्मिलित प्रयास करें, लेखपाल, पंचायत सचिव, पंचायत सहायक, ए.टी.एम., बी.टी.एम. सहित अन्य ग्राम स्तरीय कार्मिकों से सुबह-शाम फॉर्मर रजिस्ट्री का कार्य करायें, अभी त्रिलोकपुर में 1771 एंव कुचेला में 1132 किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री होना शेष है। उन्होने ग्राम पंचायत कुचेला के लेखपाल अवध बिहारी को आदेशित करते हुए कहा कि अवशेष किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री तत्काल कराना सुनिश्चित करें, निरीक्षण के दौरान मुख्य मार्ग से पंचायत घर तक का सम्पर्क मार्ग क्षतिग्रस्त पाये जाने, नालियों में गंदगी व्याप्त होने, पंचायत घर परिसर में घास, गदंगी पाये जाने, विकास कार्यों में लापरवाही बरतने, खराब हैंडपंपों को ठीक न कराने पर सचिव प्रबल प्रताप को प्रतिकूल प्रविष्टि एवं सफाईकर्मी संजू को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर नये सफाईकर्मी की तैनाती किये जाने के निर्देश जिला पंचायत राज अधिकारी को देते हुए कहा कि गांव में जो भी हैडपंप खराब हैं उन्हें प्राथमिकता पर ठीक कराया जाये ताकि ग्रामवासियों को भीषण गर्मी में पानी की समस्या का सामना न करना पड़े।
              श्री त्रिपाठी ने निरीक्षण के दौरान पाया कि गांव मंे जल जीवन मिशन के तहत ओवरहेड टैंक, ट्यूवेल, पाइप लाइन का कार्य कराया गया है, घरों में नल कनेक्शन भी लगाये गये हैं लेकिन ग्रामवासियों ने बताया कि जलापूर्ति नहीं की जा रही है, जिस पर उन्होने अधिशाषी अभियंता जल निगम को गांव का भ्रमण कर हर घर नल के माध्यम से स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित कराये जाने हेतु निर्देशित किया। उन्होने जिला पंचायत राज अधिकारी से कहा कि गांव में बने पंचायत घर तक जाने वाले मार्ग पर अगले 10 दिन में सी.सी. कराकर फोटोग्राफ्स उपलब्ध करायें। निरीक्षण के दौरान उप कृषि निदेशक नरेन्द्र कुमार त्रिपाठी, तहसीलदार हरेंश कर्दम, ग्राम प्रधान विमल चन्द्र, अनिल सक्सैना आदि उपस्थित रहे।

मैनपुरी में स्मार्ट मीटर के खिलाफ भाकियू का हल्लाबोल, बिजली विभाग का पुतला फूंका

मैनपुरी , 27 अप्रैल 2026, स्मार्ट मीटर और बिजली विभाग की कथित मनमानी के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (महाशक्ति) ने मैनपुरी में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों कार्यकर्ता मदार दरवाजे पर एकजुट हुए और बिजली विभाग का पुतला फूंककर विरोध जताया।
प्रदर्शन के दौरान ‘स्मार्ट मीटर हटाओ’ और ‘विद्युत विभाग मुर्दाबाद’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। भाकियू (महाशक्ति) के नेताओं ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं की सहमति के बिना जबरन स्मार्ट मीटर लगा रहा है। संगठन का कहना है कि महज 100 रुपये के बकाये पर भी कनेक्शन काट दिए जा रहे हैं, जिससे किसान और आम उपभोक्ता परेशान हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्मार्ट मीटर से बिजली बिल अधिक आ रहे हैं और चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। भाकियू ने बिजली विभाग को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई कि अगर इस अवधि में स्मार्ट मीटर नहीं हटाए गए और व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो संगठन सड़क पर उतरकर और भी भव्य आंदोलन करेगा। गौरतलब है कि मैनपुरी के करहल क्षेत्र में पहले भी स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध हो चुका है। ग्रामीणों और किसान संगठनों का आरोप है कि विभाग कर्मचारी घरों में घुसकर दबंगई दिखाते हैं और विरोध करने पर अभद्र व्यवहार करते हैं। वहीं बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर से गलत बिल की समस्या खत्म होगी और उपभोक्ता मोबाइल ऐप से खपत देख सकेंगे। फिलहाल बिजली विभाग के अधिकारी इस प्रदर्शन पर कोई प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।

Farmer Suicides : फसल में नुकसान और बैंक कर्ज से परेशान दंपत्ति ने की आत्महत्या

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मैनपुरी, 27 अप्रैल 26, थाना बरनाहल क्षेत्र के गांव अढूपुर निवासी वृद्ध दंपती संतोष कुमार और राधा देवी सोडरा गांव के पास अचेत अवस्था में मिले। ग्रामीणों ने जब उन्हें देखा तो इसकी सूचना परिजन को दी। परिजन दंपती को सैफई अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने दंपती को मृत घोषित कर दिया।

 घटना की सूचना मिलते ही दंपती का एक बेटा दिलीप जो फौज में तैनात है, वह घर पर आ गया। वहीं दूसरा बेटा खेती करता है जो पहले से ही घर पर मौजूद था। घटना की सूचना मिलने के बाद एसपी ग्रामीण अभिषेक तिवारी SP Rural Abhishek Tiwari भी क्षेत्राधिकारी करहल और थाना प्रभारी के साथ मौके पर पहुंच गए। एसपी ग्रामीण अभिषेक तिवारी ने बताया कि दंपती के जहर खाकर आत्महत्या की सूचना प्राप्त हुई थी, जिसके बाद उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत के स्पष्ट कारणों के लिए अभी जांच की जा रही है। मौके पर पुलिस बल तैनात है वहीं ग्रामीणों की मानें तो मृतक किसान के ऊपर बैंक का कर्ज था। वह आलू में घाटे की वजह से परेशान भी थे। कई बार किसान ने कहा था कि कर्ज खत्म करने के लिए चाहे मुझे अपने खेत को बेचना पड़े मैं बेच दूंगा।
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