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बागपत में श्रद्धालुओं से भरी पिकअप से मौत का आंकड़ा बढ़कर 13 हुआ

September 7, 2026

बागपत में श्रद्धालुओं से भरी पिकअप से मौत का आंकड़ा बढ़कर 13 हुआ

बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर रविवार देर रात करीब एक बजे भीषण सड़क हादसा हो गया। बागड़ धाम (गोगामेड़ी) से बदायूं लौट रही श्रद्धालुओं से भरी पिकअप को तेज रफ्तार कैंटर ने टक्कर मार दी। टक्कर के बाद पिकअप डिवाइडर से टकराकर बेकाबू हो गई और सड़क के बीचों-बीच पलट गई। हादसे में छह लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी, लेकिन दोपहर 3.00 बजे तक मौत का यह आंकड़ा बढ़कर 13 हो गई, जिनमें सात पुरुष, तीन महिलाएं और तीन बच्चे शामिल हैं। 19 से अधिक लोग घायल हुए हैं। पिकअप में 32 श्रद्धालु सवार थे। हादसे में शव करीब 30 मीटर तक बिखर गए। पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया।

स्वयंसेवक मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय हैं: डॉ. मोहन भागवत

लंदन, 7 सितम्बर 2026, न्यूयॉर्क, अमेरिका में 29 अगस्त तथा टोरंटो, कनाडा में 31 अगस्त को संबोधन के पश्चात्, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 6 सितम्बर को यूनाइटेड किंगडम के लंदन में आयोजित ‘Celebration of Oneness’ (एकात्मता का उत्सव) कार्यक्रम के दौरान संघ की 100 वर्षों की यात्रा से संबंधित विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देते हुए संघ की दृष्टि को रेखांकित किया। “संघ का ऐसा कौन-सा एक तत्व है, जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है’ इस प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, “यदि मुझे एक ही सिद्धांत का उल्लेख करना हो, तो मैं ‘अपनापन’ कहूंगा, जिसका अर्थ है सभी के प्रति शुद्ध, सात्त्विक प्रेम। व्यक्ति, समुदाय, समाज और समूची मानवता के प्रति प्रेम- यही हिन्दू का पारंपरिक स्वभाव है। हिन्दू विश्व को संतुलित दृष्टि प्रदान कर सकते हैं।”

संघ की सेवा गतिविधियों के संबंध में डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा,“स्वयंसेवक मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय हैं, इसलिए उनके कार्य के पूरे विस्तार का सार प्रस्तुत करना कठिन है। राजनीतिक कारणों से हमारा विरोध करने वाले लोग भी हमारे कार्य तथा स्वयंसेवकों के गुणों और योगदान को स्वीकार करते हैं। समय-समय पर वे महत्वपूर्ण विषयों पर हम से सहयोग की अपेक्षा करते हैं और हमसे संवाद भी करते हैं। यह समाज के विभिन्न वर्गों में हमारे कार्य की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। जहां कोई कुछ नहीं कर रहा होता, वहां संघ सेवा कर रहा होता है – लद्दाख से लेकर कन्याकुमारी तक।”
अगले 100 वर्षों के लिए संघ के लिए एक प्रमुख संदेश के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि संघ को अगले सौ वर्षों तक भी वही कार्य निरंतर आगे बढ़ाना होगा, जो उसने अब तक किया है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले मेरे मन में यह बात आती है कि सारे कार्यों को पूरा करने में इतना समय नहीं लगना चाहिए। अभी मेरी तीसरी पीढ़ी कार्य कर रही है। संघ में अब दो पीढ़ियां और भी साथ काम कर रही हैं। इस प्रकार पांच पीढ़ियां साथ काम कर रही हैं। सातवीं पीढ़ी आने से पहले हिन्दू समाज के संगठन का कार्य पूरा हो जाना चाहिए।”

‘विश्व के लिए हिन्दू सभ्यता का ऐसा क्या योगदान है, जिसकी विशेष आवश्यकता है” – इस प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, “सभी हिन्दू विचार इसी एक सूत्र पर आधारित रहे हैं कि प्रत्येक कर्म के पीछे कोई कारण है। अस्तित्व वास्तव में एक है, यद्यपि वह विविध दिखाई देता है। विविधता हमारा स्वभाव है। इसलिए हमें उसे स्वीकार करना है और उसका सम्मान करना है। लेकिन विविधताओं के साथ इस बात को ध्यान में रखते हुए व्यवहार करना होगा कि ये अस्तित्व की एकता के विभिन्न शृंगार हैं। एक ही अनेक हुआ है, इसलिए अनेक का सम्मान किया जाता है। सब एक हैं। इसी आधार पर हम हर विषय को देखते और उससे व्यवहार करते हैं।”

उन्होंने कहा, “हिन्दू’ शब्द को हम किसी धार्मिक आचरण या जीवन-शैली के आधार पर नहीं समझ सकते। हिन्दू एक प्रकृति है। समाज को ऐसी प्रकृति की आवश्यकता है, जो सभी विविधताओं को स्वीकार करे और उनका सम्मान करे, क्योंकि उसका विश्वास है कि सभी मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं। सभी विविधताएं एकता की ही विविध अभिव्यक्तियां हैं। इसलिए जब हम उस एकता को देखते हैं, तब सभी विविधताओं का सम्मान और स्वीकार करना संभव होता है। यही हिन्दू विचार है, यही हिन्दू प्रकृति है। हिन्दू समाज और भारत के इतिहास में यही दिखाई देता है। इसलिए जब हम हिन्दू कहते हैं, तो यह कोई धर्म नहीं है। यह केवल एक शब्द भी नहीं है। हिन्दू धर्म की विभिन्न परंपराएं अपनी विशिष्ट दर्शन-पद्धतियों और आचरण के साथ इस व्यापक हिन्दू सभ्यतागत परिवेश के भीतर अस्तित्व में रह सकती हैं।” उन्होंने यह बात ‘हिन्दू राष्ट्र’ और ‘हिंदुत्व’ की अवधारणा से संबंधित प्रश्न के उत्तर में कही।
भविष्य की पीढ़ी की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें नई पीढ़ी पर अधिक विश्वास है। उनमें दुनिया को बेहतर बनाने की तीव्र आकांक्षा है और इस उद्देश्य के लिए वे विभिन्न प्रकार के छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठने को तैयार हैं। “वे अधिक ईमानदार होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ स्वाभाविक रूप से ऐसा होता है कि हम अनेक अनुभवों से गुजरते हैं और इसलिए अधिक सतर्क हो जाते हैं। हम हर समय खुलकर नहीं बोलते। हम यह सोचते रहते हैं कि आगे क्या होगा, क्योंकि हमें पता होता है कि क्या-क्या हो सकता है। युवा पीढ़ी के पास ऐसे अनुभव नहीं होते। यदि उन्हें कुछ सही लगता है, तो वे उसे सहज रूप से स्वीकार कर लेते हैं और उसी के अनुसार कार्य करते हैं। वे परिणामों को लेकर चिंतित नहीं होते, क्योंकि वे युवा हैं। इसलिए यदि हम उन्हें यह उद्देश्य दें और अपने अनुभव से प्राप्त आवश्यक ज्ञान तथा दृष्टि प्रदान करें, बिना उसे उन पर थोपे, तो हमें उन्हें अपना मार्ग स्वयं खोजने देना चाहिए।”
भारत के सामने भविष्य की चुनौतियों से निपटने में युवा हिन्दुओं की भूमिका के संबंध में सरसंघचालक जी ने कहा कि युवा पीढ़ी का दायित्व अपने मूल्यों के अनुसार जीवन जीना है। इसलिए सेवा के क्षेत्र में भी उन्हें यही भाव रखना होगा। “सेवा निःस्वार्थ भाव से होनी चाहिए। सेवा ऐसा कोई कार्य नहीं है, जिससे आप महान बनते हैं। यह उपकार नहीं है और न ही यह ऐसा कुछ है जो आप मानवता पर किसी करुणा के रूप में कर रहे हैं। हम कहते हैं कि सेवा ईश्वर के निकट जाने का आपका अवसर है। आप जिनकी सेवा कर रहे हैं, उन पर कोई उपकार नहीं कर रहे। वे आपको सेवा का अवसर देकर आपके ऊपर बहुत बड़ा उपकार कर रहे हैं। इसलिए सेवा इसी भाव के साथ की जानी चाहिए।”

ब्रिटिश हिन्दुओं की निष्ठा को लेकर यूनाइटेड किंगडम में उठाए जाने वाले प्रश्न तथा एक ब्रिटिश स्वयंसेवक से संघ की अपेक्षाओं के संबंध में अंतिम प्रश्न पूछा गया। इसका उत्तर देते हुए सरसंघचालक जी ने कहा, “कोई संघर्ष नहीं है। यदि ब्रिटिश हिन्दू अच्छे, पक्के और सच्चे हिन्दू हैं, तो ब्रिटेन और भारत के हितों के बीच कभी कोई संघर्ष नहीं होगा। यदि कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो स्वाभाविक रूप से ब्रिटिश हिन्दू ब्रिटेन के साथ जाएंगे। अपवाद हो सकते हैं, लेकिन हिन्दुत्व इस विषय पर स्पष्ट है। आपकी कर्मभूमि ही वह स्थान है, जहां आपकी निष्ठा होती है। आपकी जन्मभूमि – अर्थात आपकी उत्पत्ति या जन्म का स्थान – और आपकी पुण्यभूमि वह स्थान है, जहां से आपको अपने मूल्य प्राप्त होते हैं। आपको उन्हीं मूल्यों को अपनी कर्मभूमि में जीना है और जिस भूमि पर आप रहते हैं, उसकी सेवा करनी है।”
हिन्दुओं के एकजुट न होने की धारणा तथा एकता के सार के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरसंघचालक जी ने कहा, “यदि आप श्रोताओं को देखें या सामान्य रूप से समाज को देखें, तो मानव समाज में विविधता है और यह स्वाभाविक है। हमें इसके साथ चलना है। लेकिन अपना जोर इस बात पर होना चाहिए कि हमें क्या जोड़ता है, न कि इस बात पर कि हमें क्या विभाजित करता है। यदि हम ऐसा करेंगे, तो हमारे समुदाय, हमारा समाज समृद्ध होगा और दुनिया एक बेहतर स्थान बनेगी। हमें यही करना होगा।”
इस संवाद का संचालन यूनाइटेड किंगडम निवासी वेलनेस विशेषज्ञ ममता सुब्रह्मण्यम ने किया। हिन्दू स्वयंसेवक संघ, यूनाइटेड किंगडम (HSS UK) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 600 लोग उपस्थित रहे, उन्होंने 326 संगठनों का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य, सांसद (हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य), मेयर, काउंसिलर्स तथा यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त पेरियासामी कुमारन, उप उच्चायुक्त कार्तिक पांडे सहित समुदाय के अन्य प्रमुख नेता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत नेपाल में आई बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले लोगों तथा विस्थापित परिवारों की स्मृति में मौन रखकर हुई। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि Sewa UK ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए अंश दान के माध्यम से 1,00,000 पाउंड जुटाए हैं।

सरसंघचालक जी की यह यात्रा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के तहत सेवा, सामाजिक समरसता और साझा मूल्यों पर केंद्रित सभ्यतागत संवाद कार्यक्रम का हिस्सा है। लंदन प्रवास के दौरान सरसंघचालक जी ने विभिन्न धर्मों के प्रमुख नेताओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा अन्य सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों से मुलाकात की। अंतरधार्मिक संवाद के अंतर्गत उन्होंने श्री स्वामीनारायण मंदिर, विल्सडन, खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा तथा लंदन के अन्य धार्मिक स्थलों का भी दौरा किया। यूके में हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों और भाषायी विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले 11 भाषा-समुदायों ने भी इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

September 5, 2026

पत्रकार समाज के मार्गदर्शक: ओंकार सिंह 

UP Association of Journalists UPAJ Meeting Lucknow

Posted on 05.09.2026 Saturday, Lucknow, UPAJ, Uttar Pradesh Association of Journalists

लखनऊ, 05 सितंबर 2026, जनता दल (सेकुलर) के प्रदेश अध्यक्ष ओंकार सिंह ने कहा है कि पत्रकारिता लोकतन्त्र के तीनों स्तंभ की मार्गदर्शक है। श्री सिंह उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज) द्वारा आयोजित स्व  राधेश्याम लाल कर्ण स्मृति पर्यावरण सम्मान समारोह और प्रदेश कार्यकारिणी बैठक के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि पद से विचार व्यक्त कर रहे थे।

विधायक निवास 2, दारुलशफा के कॉमन हाल में आयोजित समारोह में श्री सिंह ने आगे कहा कि मीडिया नेताओं, अधिकारियों और समाज को सही राह दिखाता है। सीख भी देता है और चेतावनी भी देता है। आवश्यकता पर आलोचना भी करता है। उन्होंने कहा ऐतिहासिक राजनीतिक क्रांति करने वाले लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने भी दो अखबार निकाले थे।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता एपीएन न्यूज चैनल के प्रधान संपादक डॉ प्रसून शुक्ल ने कहा कि पत्रकार पेंशन की मांग कर रहे हैं। इसे पूरा किया जाना चाहिए। ये कोई दान नहीं है अधिकार है। वरिष्ठ पत्रकार और राज्य मुख्यालय मान्यता। प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने कहा पत्रकार अपनी मांगें मनवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लंबित मांगों पर सरकार को तत्काल ध्यान देना चाहिए। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया (एनयूजेआई) के राष्ट्रीय महासचिव त्रियुग नारायण तिवारी ने कहा पत्रकारिता का परिदृश्य बदल रहा है। पत्रकारों को दायित्व बोध के साथ सत्य को उजागर करना चाहिए। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स एनयूजेआई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक मलिक ने कहा कि आज की आवश्यकता पत्रकार सुरक्षा कानून है। बिहार सरकार ने कानून बनाया है उत्तर प्रदेश सरकार को भी बनाना चाहिए। एनयूजे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ फ़लकुमार पंवार ने कहा कि सरकार पत्रकारों की मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। इसलिए संघर्ष का मार्ग अपनाना होगा। उपज के महामंत्री आनंद कर्ण ने अपने पिता और उपज के संस्थापक महामंत्री स्व राधेश्याम लाल कर्ण के जीवन पर प्रकाश डाला। पर्यावरण के प्रति उनके योगदान और समर्पण की जानकारी दी।

इसके पूर्व समारोह में उपज की चार जिला इकाइयों को स्व राधेश्याम लाल कर्ण स्मृति पर्यावरण सम्मान प्रदान किया गया। वाराणसी, भदोही, रायबरेली और अम्बेडकर नगर के पदाधिकारियों को मुख्य अतिथि ओंकार सिंह ने सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र भेंट किया। समारोह का संचालन उपज के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह ने किया।

कार्यकारिणी बैठक में 5 प्रस्ताव पारित

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें पत्रकार पेंशन, पत्रकार सुरक्षा कानून, स्वास्थ्य बीमा, राज्य संपत्ति विभाग की गेस्ट हाउस में समान दर की मांग, जिलों में स्थाई समिति गठन की मांग संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए।

September 2, 2026

गोविन्द देव गिरी बने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के नए महामंत्री

अयोध्या, 02 सितम्बर 2026 (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा ) श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज हुई बैठक मे तीन रिक्त पफोन पर नए ट्रस्टी की नियुक्ति की गई। इसके साथ ही अभी तक कोषाध्यक्ष का दायित्व सभाल रहे स्वामी गोविन्द देव गिरी को महामंत्री बनाया गया है।

नए कोषाध्यक्ष नाव चयनित ट्रस्टी महेश  भगचंदका को बनाया गया है। अन्य ट्रस्टी मे मदनमोहन पांडे, डॉ निर्मला यादव का चयन किया गया। पहली बार किसी महिला को ट्रस्टी बनाया गया है। अभी तक कार्यवाहक ट्रस्टी रहे कृष्णनमोहन अब साधारण ट्रस्टी रहेंगे।

एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्रा बने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी 

ट्रस्ट की असजद हुई बैठक मे रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्रा को पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारि नियुक्त किया गया।

रिटायर एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के CEO

अयोध्या : ऑपरेशन सिंदूर के समय वेस्टर्न एयर कमांड के चीफ रहे रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र , श्री राममंदिर के CEO

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