-मुरादाबाद में भी दो सौ कमर्शियल वाहनों की रफ्तार भी थमीं
दिल्ली-एनसीआर में दो दिन लगा रहा वाहनों का चक्का
मुरादाबाद,उप्र समाचार सेवा
दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी)में बढ़ोतरी के विरोध में वाहनों का चक्का जाम रहा। दो दिन तक वाहनों के पहिए थमने का असर जरुरी सामानों की आपूर्ति पर पड़ा। वाहनों की रफ़तार थमने से इस दौरान कारोबारी व ट्रांसपोर्टरों को करोड़ों का नुकसान हुआ। हालांकि अब समझौते के बाद ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल समाप्त होने से कारोबारियों ने राहत की सांस ली है।
दिल्ली सरकार द्वारा कामर्शियल वाहनों पर ग्रीन टैक्स लागू किए जाने का विरोध हुआ।ऑल इंडिया मोटर कार्पोरेशन कांग्रेस (एआईएमटीसी) 21 से 23 मई तक हड़ताल का ऐलान किया।एआईएमटीसी के आह़वान पर अन्य ट्रांसपोर्ट संगठन भी जुड़ गए। दो दिन की हड़ताल का व्यापक असर रहा। दिल्ली व एनसीआर की सीमा पर ही वाहनों का चक्का जाम हो गया।हड़ताल का असर दिल्ली जाने वाले वाहनों पर पड़ा। दिल्ली से अन्य जाने वाले वाहन बाहर नहीं आ सकें।लिहाजा हजारों वाहनों का रेला थम गया। गुरुवार की दोपहर से ही वाहनों के पहिए थमनेलगे।व्यवसायिक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश न करने से सीमा पर जाम लग गया।
मुरादाबाद में ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कोहली का कहना है कि दिल्लीं सरकार की ओर से कामर्शियल वाहनों के दिल्ली। व एनसीआर क्षेत्र में जाने पर ग्रीन टैक्स लगाया गया। व्यवसायी व ट्रांसपोर्ट संचालक पहले ही पेट्रोल- डीजली की बढ़ोतरी की मार झेल रहे है।यही नहीं जब गाडि़यां बीएस-छह की के कड़े प्रदूषण मानकों को पूरी तरह से पालन कर रही है।अब ऐसे में उनपर ग्रीन टैक्स लगाना का क्यात औचित्य।? वाहनों पर टैक्सह लगाकर दिल्लीस सरकार ने बोझ डाला है।दिल्ली व केन्र्वा सरकार व संगठन की संयुक्ति बातचीत में समझौता होने के बाद हड़ताल समाप्त हो गई। दो दिन चली हड़ताल से ट्रांसपेार्टर व कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ।



