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यूपी में नकली दवाओं के सिंडिकेट पर सर्जिकल स्ट्राइक, 58 लाइसेंस रद्द, 9 एफआईआर

July 12, 2026

यूपी में नकली दवाओं के सिंडिकेट पर सर्जिकल स्ट्राइक, 58 लाइसेंस रद्द, 9 एफआईआर

UP Web News

यूपी वेब न्यूज

News Posted on 12.07.2026 Time 07.34 PM, Lucknow, Agra, Madicine Market, Dr Roshan Jaicab IAS

  • एफएसडीए आयुक्त के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने 13 फर्मों पर मारे एक साथ छापे, अंतरराज्यीय नेटवर्क का हुआ खुलासा
  • बड़ी कार्रवाई के दौरान 14 संचालकों पर 3 नई एफआईआर, अब तक 58 थोक लाइसेंस निरस्त/निलंबित
  • सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, नकली दवाएं, फर्जी बिलिंग और री-लेबलिंग का संगठित नेटवर्क बेनकाब
  • अब तक हुई कार्रवाई में कुल 9 मुकदमे दर्ज और ₹3.63 करोड़ की दवाएं जब्त
  • एफएसडीए अब अवैध वसूली करने वालों पर भी कस रहा शिकंजा

लखनऊ/आगरा, 11 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ चल रहे प्रदेशव्यापी अभियान में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने आगरा में अब तक की सबसे बड़ी और सबसे निर्णायक कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के संगठित दवा सिंडिकेट की परतें खोल दी हैं।

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी कर नकली दवाओं, सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग, अवैध री-लेबलिंग, फिजीशियन सैंपलों की बिक्री और अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई के बाद 14 संचालकों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या 9 और निरस्त अथवा निलंबित थोक लाइसेंसों की संख्या 58 पहुंच गई है।

15 ड्रग इंस्पेक्टरों ने एक साथ मारे छापे
आयुक्त डॉ रोशन जैकब के नेतृत्व में गठित 15 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार (शू मार्केट), कृष्णा कॉम्प्लेक्स, नवबिया मार्केट और कोतवाली क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई की। जिन 13 फर्मों पर छापेमारी हुई उनमें मोहन ट्रेडर्स (कम्बूटोला), मनी मेडिकल (मुबारक महल), नीलकंठ (कृष्णा कॉम्प्लेक्स), वंश फार्मा (कम्बूटोला), प्रशांत मेडिकल (कम्बूटोला), पोरवाल मेडकेयर (शू मार्केट), एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस (मुबारक महल), डॉली ड्रग हाउस (कम्बूटोला), मनु फार्मा (कोतवाली के सामने), आरडीएम फार्मास्युटिकल्स (नवबिया मार्केट), इनाया फार्मा (कम्बूटोला) और नूर फार्मा (कम्बूटोला) शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान मोहन ट्रेडर्स और मनी मेडिकल के परिसरों को पूरी तरह सील कर दिया गया, जबकि नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्स स्थित प्रतिष्ठान और मनु फार्मा पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 22(1)(d) के तहत रोक लगा दी गई। टीम ने मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए।

विभोर मेडिकल एजेंसी से खुला नकली दवाओं का अंतरराज्यीय नेटवर्क

एफएसडीए की ताजा जांच टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की Chymoral Forte और Shelcal के नकली होने संबंधी शिकायत से शुरू हुई। 7 नवंबर 2025 को अंशिका फार्मा के मालिक मनोज गुप्ता की जांच में पता चला कि उन्होंने Chymoral Forte की खेप विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदकर पाल ब्रदर्स (कोलकाता) को बेची थी। विभोर मेडिकल एजेंसी के प्रो. संजीव कुमार गुप्ता के यहां जांच में खरीद के बिल फर्जी मिले। उन्होंने दवाएं गुप्ता मेडिकल एजेंसी (गोरखपुर) और हर्षित ट्रेडर्स (आगरा) से खरीदने का दावा किया, लेकिन दोनों फर्मों ने इससे इनकार कर दिया।

वहीं वरदान मेडिकल एजेंसी में “ESI SUPPLY NOT FOR SALE” अंकित दवाएं मिलीं और लैब जांच में Chymoral Forte अधोमानक तथा ACILOC नकली पाई गई, जिसकी टोरेंट फार्मा ने भी पुष्टि की। पूछताछ में अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उसने नकली दवाएं संजीव कुमार गुप्ता से बिना वैध बिल के खरीदी थीं। जांच में विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और पाल ब्रदर्स का अंतरराज्यीय सिंडिकेट सामने आने पर संजीव कुमार गुप्ता, अंकुर अग्रवाल, प्रियंका बंसल, अरुण कुमार गुप्ता और पाल ब्रदर्स के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 276, 277, 278, 316 और 318 में एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

अस्पताल की दवाओं की री-लेबलिंग से लेकर फर्जी बिलिंग तक, कई परतों में खुला सिंडिकेट

एफएसडीए की जांच में अस्पताल और सरकारी आपूर्ति की जीवनरक्षक दवाओं की री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ। 21 मई को युग फार्मा के प्रो. सचिन गुप्ता के यहां बिना कोल्ड-चेन रखे इंसुलिन इंजेक्शन और री-लेबलिंग मिली। पूछताछ में दवाओं की सप्लाई शारदा फार्मा के शिवम गुप्ता और आरएमडी फार्मा के राजेश गुप्ता तक पहुंची, जिसके बाद तीनों फर्में सील कर दी गईं। बाद में शारदा फार्मा के सीसीटीवी में नबील खान और सोनू बघेल संदिग्ध दवाएं हटाते दिखे। एसटीएफ गाजियाबाद की पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे मोहित गुप्ता (महादेव फार्मा) से अस्पताल व सरकारी आपूर्ति की दवाएं बिना बिल खरीदकर उन पर लगी ‘Not for Sale’ पहचान हटाकर फर्जी लेबल और नई एमआरपी के साथ बाजार में बेचते थे। इस मामले में सचिन गुप्ता, शिवम गुप्ता, नितिन गुप्ता, राजेश गुप्ता, मोहित गुप्ता और हितेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई। वहीं 1 से 3 जुलाई की जांच में वी.ए. मेडिकोज में Jardiance, Telma-H, Thyrox और Gluconorm PG-2 जैसी दवाओं की री-लेबलिंग, नकली Telma-H और फर्जी खरीद बिल मिले। शोभित अग्रवाल ने दवाएं लाइसेंस निरस्त हो चुके हर्षित ट्रेडर्स से लेने की बात स्वीकार की, जबकि जांच में वरदान मेडिकल एजेंसी के पुराने बिलों से करीब ₹1.88 करोड़ की फर्जी बिलिंग, अंकुर अग्रवाल द्वारा संजीव गुप्ता (विभोर मेडिकल एजेंसी) से बिना बिल नकली दवाएं खरीदने और सबूत मिटाने के प्रयास का खुलासा हुआ। साथ ही मोहित बंसल (रुद्रा एंटरप्राइजेज) और प्रवीण अग्रवाल (श्री भगवती मेडिकल एजेंसी, मथुरा) द्वारा फर्जी बिल, UP-80 EL-0069 वाहन व ऑटो-रिक्शा के जरिए नकली दवाओं को वैध दिखाने का खेल सामने आया। इसके आधार पर वी.ए. मेडिकोज, शोभित अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, संजीव गुप्ता, मोहित बंसल और प्रवीण अग्रवाल समेत संबंधित आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

₹3.63 करोड़ की अवैध दवाएं जब्त, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की परतें खुलीं

एफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आगरा में नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ मई 2026 से लगातार चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की नकली, अवैध तथा सरकारी और डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। यह अभियान केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिंडिकेट की आर्थिक और आपराधिक श्रृंखला को तोड़ने पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि पूरे अभियान के दौरान अनियमितताओं और अवैध कारोबार में संलिप्तता पाए जाने पर अब तक 58 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त अथवा निलंबित किए जा चुके हैं। इस सिंडिकेट के खिलाफ पहले ही 6 नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं। अब 10 जुलाई की कार्रवाई के आधार पर तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए आगरा के कोतवाली फव्वारा थाने में तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़कर 9 हो जाएगी।

आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नकली दवाओं, अवैध री-लेबलिंग, फिजिशियन सैंपलों की कालाबाजारी और अंतरजनपदीय मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जाए। इसके अलावा विभाग को ड्रग एसोसिएशनों द्वारा कुछ दवा व्यापारियों से कथित अवैध वसूली की शिकायतें भी मिली हैं। आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में किसी व्यापारी के आर्थिक शोषण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एक्सटॉर्शन का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Ballia: ग्राम प्रधान की धांधली, पंप मालिक समेत कई रसूखधारीयो को पट्टे

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गांव में 92 लोगों का हुआ पट्टा,सबसे ज्यादा एक समाज के लोगों को मिला पट्टा, तीन पेट्रोल पंप मालिक को, ज्यादा जमीन और बिल्डिंग वाले को पट्टा देने का ग्राम प्रधान पर ग्रामीणों ने लगाया आरोप।
रिपोर्ट – संजय कुमार तिवारी
स्थान – 12/07/2026, Time 07.04 PM, Report Sanjay Kumar Tiwari, Ballia 

बलिया, 12 जुलाई 2026, भूडाडीह गांव में ग्रामीणों के द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि ग्राम प्रधान के द्वारा गांव की सभी सरकारी जमीन को अपने पिछले ही प्रधानी में पट्टा कर दिया है। और इस बार ग्राम प्रधान और लेखपाल मिलकर पैसे पर पट्टा धारकों को कब्जा दिला रहे है। इतना ही नहीं बल्कि एक समुदाय के लोगो को सबसे ज्यादा पट्टा ग्राम प्रधान मुमताज के द्वारा किया गया है ऐसे धनाढय व्यक्तियों को पट्टा हुआ है जिसके पास तीन तीन पेट्रोल पंप है जिसके पास बड़ी बिल्डिंग है और जिसके पास ज्यादा जमीन है वैसे लोगों को पट्टा किया गया है।

वही ग्रामीण धीरेंद्र प्रसाद के द्वारा आरोप लगाया गया है कि ग्राम प्रधान के द्वारा ग्राम सभा की सरकारी जमीन को 92 लोगो को पट्टा कर दिया गया है। हमारे गांव में छठ पूजा करने के लिए कोई छठ घाट तक नही है जिसपर हम गांव के लोग पूजा पाठ कर सकें। बहेरा नाले के पास बीस से पच्चीस फूट गड्ढा है हम लोग सोचे थे कि गांव की जमीन है तो उसपर तालाब बन जायेगा और गांव के जो जानवर है गर्मी के मौसम में पानी पीने के हो जायेगा और छठ घाट भी हो जाता। हमने अधिकारियों के पास शिकायत की, कि उस जमीन पर मुकदमा चल रहा था और उसको एस डी एम ने खारिज कर दिया।  ऐसे बहुत से लोग है जिसके पास पैंतीस बीघा जमीन है दो तोला बिल्डिंग है ऐसे ऐसे लोगो को पट्टा हुआ है ग्राम प्रधान मुमताज है हमारे गांव में नही लग रहा है कि कोई सरकारी जमीन बची होगी बानबे लोगों का पट्टा हुआ है।

वही गांव के सुदर्शन गोंड ने बताया कि हम लोग जाति के गोड है और एक धुर जमीन हम लोगों के पास नही है कई बार ग्राम प्रधान से कहा गया कि हमे भी पट्टा दे दीजिए क्योंकि हमारे पर कोई जमीन नही है जिससे खेती कर सकें। बानबे लोगों को प्रधान ने पट्टा कर दिया है सभी पैसे वाला है हम किसको कहे कि यह गरीब है सभी पैसे वाला है सभी खेती वाला व्यक्ति है धनी व्यक्ति को ही पट्टा दिया गया है शिकायत हम लोगों ने की थी।

वही ग्रामीण ने बताया कि गांव में सरकारी बंजर की जमीन को लेकर मामला चल रहा है कि हमारा हरियाली पट्टा हुआ था लेकिन वर्तमान ग्राम प्रधान मुमताज के द्वारा पट्टे पर पट्टा कर दिया गया है उस जमीन पर मुकदमा चल रहा था तभी भी ग्राम प्रधान के द्वारा पट्टा कर दिया गया जिसमे सभी पांच ग्राम प्रधान के समुदाय के हैं।

वही ग्राम प्रधान मुमताज खां ने बताया कि हमारे विरोधी जो है वह कुछ भी कह सकते है। किसी के मुंह पर कोई ताला नही है जो आरोप लगाया जा रहा है उसका भागीदार मैं नही हूं। यह पट्टा 2005 का है और 92 लोगो को पट्टा दिया गया है जो लोग पहले से बसे थे उनको दे दिया गया है ।

July 11, 2026

एटा में प्राइवेट अस्पताल में प्रसूता की मौत, गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप

Posted on 11.07.2026 Time 01.53 PM

परिजनों ने हंगामा काटते हुए एंबुलेंस चालक से की मारपीट

एटा 11 जुलाई उप्रससे। जनपद में डिलीवरी के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई। परिजनों ने शहर के न्यू लाइफ हॉस्पिटल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर पहुंची कोतवाली नगर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी है।

फिरोजाबाद के थाना एका क्षेत्र के नगला जैया निवासी माधुरी (21) पत्नी रोहित को शुक्रवार को न्यू लाइफ हॉस्पिटल में प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। देर रात करीब 12 बजे उसने जुड़वा बच्चों एक बेटी और एक बेटे को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के बाद अस्पताल में लगाए गए एक इंजेक्शन के बाद माधुरी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे आगरा रेफर कर दिया।
अस्पताल के चिकित्सक उसे आगरा लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतका के पति रोहित ने आरोप लगाया कि अस्पताल संचालिका ने एक्सपायर इंजेक्शन लगाया, जिससे उनकी पत्नी की जान चली गई।
शनिवार को परिजन शव को वापस एटा ले आए और अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और लोगों ने एक एंबुलेंस चालक के साथ मारपीट भी की। घटना का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की प्रक्रिया पूर्ण कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मृतका माधुरी की शादी हाल ही में 30 अप्रैल को हुई थी। उनके पति रोहित इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। पहली बार मां बनी माधुरी की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है, जबकि नवजात जुड़वा बच्चों के सिर से जन्म लेते ही मां का साया उठ गया।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों की भी गंभीरता से जांच की जा रही है।

Shri Ram Mandir: विश्वास, समर्पण और सार्वजनिक जीवन में सावधानी की सीख

Champatrai General Secretary Shri Ram Janmbhumi Teerth Kshetra Trust

अखिलेश शर्मा

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें उन लोगों का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा जिन्होंने दशकों तक बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। ऐसे ही व्यक्तित्वों में विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम प्रमुखता से आता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। संगठन, संघर्ष और सेवा के कारण वे करोड़ों रामभक्तों के बीच सम्मानित हैं।
हाल के दिनों में चंपत राय एक ऐसे विवाद के केंद्र में आ गए, जिसने यह संदेश दिया कि सार्वजनिक जीवन में केवल ईमानदारी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि हर कदम पर सतर्कता भी आवश्यक होती है। चर्चा इस बात की रही कि वे अपने निकट के लोगों पर अत्यधिक विश्वास कर बैठे और इसी अति विश्वास ने उन्हें अनावश्यक विवादों में ला खड़ा किया। राजनीति, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं में यह एक पुरानी कहावत है कि “विश्वास आवश्यक है, लेकिन सत्यापन उससे भी अधिक आवश्यक है।”
चंपत राय का व्यक्तित्व सदैव सादगी, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण का रहा है। उन्होंने कभी व्यक्तिगत प्रचार को महत्व नहीं दिया और हमेशा स्वयं को रामकाज का एक साधारण कार्यकर्ता बताया। यही कारण है कि उनके समर्थकों का मानना है कि यदि उनसे कोई चूक हुई भी है तो वह किसी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने सहयोगियों पर अधिक भरोसा करने के कारण हुई।
सार्वजनिक जीवन में कार्य करने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वे अपने आसपास ऐसे लोगों का चयन करें जो उनके विश्वास पर खरे उतरें। कई बार प्रतिष्ठित व्यक्तियों की वर्षों की कमाई हुई साख कुछ लोगों की लापरवाही या गलत आचरण के कारण प्रभावित हो जाती है। इसलिए किसी भी संस्था की मजबूती के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और समय-समय पर तथ्यों का परीक्षण आवश्यक माना जाता है।
राम मंदिर आंदोलन करोड़ों लोगों की आस्था का विषय रहा है। मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद भी ट्रस्ट और उससे जुड़े प्रत्येक पदाधिकारी पर समाज की निगाह रहती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का विवाद स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है। यही कारण है कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों से सामान्य से भी अधिक सावधानी और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है।
चंपत राय के समर्थकों का कहना है कि उनके दशकों के योगदान को किसी एक विवाद की कसौटी पर नहीं परखा जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही की मांग करने वाले लोगों का मानना है कि जितना बड़ा पद, उतनी ही अधिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व भी आवश्यक है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही स्वस्थ परंपरा मानी जाती है।
यह पूरा घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि समर्पण और निष्ठा जितने आवश्यक हैं, उतनी ही आवश्यक विवेकपूर्ण सतर्कता भी है। किसी भी बड़े संगठन में व्यक्तिगत विश्वास के साथ-साथ संस्थागत व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की भ्रांति या विवाद की संभावना कम हो।
भगवान श्रीराम के आदर्श भी यही सिखाते हैं कि धर्म, मर्यादा, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलते हुए प्रत्येक निर्णय पूरी सावधानी और निष्पक्षता के साथ लिया जाए। यदि इस घटना से कोई सीख निकलती है तो वह यही है कि सार्वजनिक जीवन में विश्वास और पारदर्शिता दोनों का संतुलन ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी होता है।

July 10, 2026

Breaking: जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगे प्रशासक

लखनऊ, 10 जुलाई 2026, (उप्र समाचार सेवा)। शासन ने जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया। निर्वाचित अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पूर्व पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने आदेश जारी कर दिया है।

आदेश के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष ही कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक होंगे। यह अवधि 6 माह अथवा नया चुनाव होने तक जो भी पहले हो, तक रहेगी। किंतु प्रशासक कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। वे केवल सामान्य कार्य ही करेंगे। आवश्यक होने पर नीतिगत प्रस्ताव का अनुमोदन जिलाधिकारी से लेना होगा ।

ज्ञातव्य है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण निर्धारण में विलंब के कारण पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सके हैं। इसी कारण पहले ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया था। अब जिला पंचायत अध्यक्षों को भी प्रशासक बना दिया गया है। अनुमान है कि क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर ब्लाक प्रमुखों को भी प्रशासक बना दिया जाएगा

हालांकि ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।

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