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खोजी ए आईः वायरस बनाम बैक्टीरिया

August 8, 2026

खोजी ए आईः वायरस बनाम बैक्टीरिया

Editorial 08.08.2026 BY SARVESH KUMAR SINGH

Editorial

सर्वेश कुमार सिंह

ए आई अब केवल सूचना देने, आपके प्रश्नों के उत्तर देने या किसी समाधान का रास्ता बताने तक का सीमित साधन नहीं रहा है, बल्कि इससे आगे यह मानव जीवन को प्रभावित करने वाला खोजी टूल बन गया है। खोज भी ऐसी जो भौतिक विज्ञान से आगे रसायन और जैव विज्ञान के क्षेत्र में है। यह केवल निर्जीव वस्तुओं की खोज नहीं है, बल्कि जैविक खोज तक पहुंच गई है। जो मानव जीवन को प्रभावित करने की क्षमता रखती है, दोनों तरह से सकारात्मक भी और नकारात्मक भी। यानि कि यह लाभ भी पहुंचाएगी और कभी गलत हाथों में गई तो भारी हानि भी करेगी।

ऐसी ही खोज हाल ही में अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और कैलीफोर्निया के आर्क इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ए आई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से एक वायरस को तैयार किया है। यह वायरस ए आई द्वारा कृत्रिम जीनोम (जैनेटिक कोड) तैयार करने के बाद लैब में सिंथेटिक्स वायरस के रूप में बनाया गया। वायरस को इस प्रकार ट्रेंड किया गया कि वह रोग के कारण बैक्टीरिया पर हमला कर सके और उसे नष्ट कर दे। इस प्रयोग में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है। इसे बैक्टीरियोफेज नाम दिया गया है। यह खतरनाक बैक्टारिया को खोजने और मारने में सक्षम है।

शोधकर्ताओं ने जेनरेटिव ए आई माडल ( ईवो-1 और ईवो-2) का इस्तेमाल करके 16 ऐसे नये सिंथेटिक वायरस बनाये हैं जो प्रकृति में पहले से मौजूद नहीं हैं। प्रयोग में ये ई कोलाई बैक्टीरिया को नष्ट करने में पूरी तरह सफल रहे। भविष्य में इस तकनीक के प्रयोग से दवाएं और खासकर ऐसी दवाएं जो एंटीबायोटिक हैं और बेसर हो चुकी हैं, उनको फिर से कारगर करने या बनाने में प्रयोग किया जाएगा।

आम नागरिकों की जिज्ञासा यह है कि यह वायरस कम्यूटर ने कैसे तैयार कर लिया। इस बारे में गहराई से अध्ययन करने से पता चला कि कम्यूटर ने ए आई के माध्यम से सिर्फ जीनोम कोड तैयार किया। यह बहुत सारे पहले से मौजूद कोडों के अध्ययन के  बाद ए आई ने तैयार किया। ए आई ने एक नये वायरस का डीएनए कोड (ब्लू प्रिंट) तैयार किया। वैज्ञानिकों ने पहले ईवो नाम के ए आई माडल को लाखों जीवों के डीएनए कोड और आरएनए कोड की भाषा सिखायी। इससे ए आई ने यह समझ लिया कि एक वायरस को जीवित रहने और बैक्टीरिया पर हमला करने के लिए किस प्रकार के जैनेटिक कोड की जरूरत होती है। फिर ए आई ने खुद से 16 वायरस का जीनोम (जैनेटिक कोड) तैयार कर दिया। यह कोड एकदम नया था। फिर इस डिजिटल कोड को असली में बदला गया। इसके लिए प्रयोगशाला (लैब) का इस्तेमाल किया गया। यह कार्य मानवीकृत रूप से सम्पन्न हुआ। वैज्ञानिकों ने डिजीटल कोड को रसायनों के माध्यम से इसे जैविक और असली डीएनए में बदल दिया। इस कृत्रिम डीएनए को एक वायरस के खाली खोल (सेल) में डाल दिया गया। इसके बाद यह एक जीवित बैक्टीरियोफेज के रूप में काम करने लगा। प्रयोग के लिए इस बैक्टीरियोफेज को एक डिश में रखकर ई-कोलाई बैक्टीरिया के साथ छोड़ा गया तो इसने खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान कर ली और यह उसकी दीवार को भेदकर उसके अंदर प्रवेश कर गया, यानि अपना डीएनए वहीं छोड दिया। यहां उसने लाखों वायरस के रूप में खुद को परिवर्तित किया । इसने अपने स्वरूप की लाखों की संख्या में बनी कापियों को एक साथ नष्ट किया जिससे बैक्टीरिया फट कर नष्ट हो गया।

ये तकनीक भविष्य की चिकित्सा सुविधाओं और चिकित्सा विज्ञान की दिशा बदल देगी। इसका सबसे बड़ा लाभ कैंसर चिकित्सा में हो सकता है। क्योंकि खराब कैंसर कोशिकाओं को ए आई की मदद से जन्मे बैक्टीरियोफेज आसानी से नष्ट कर सकते हैं। लेकिन, इस तकनीक और खोज के खतरे भी इतने ही बड़े हैं। यह तकनीक यदि आतंकवादियों और कुछ कमजोर राष्ट्रों के हाथों में पड़ गई तो जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। इससे जैविक युद्ध का नया खतरा जन्म ले रहा है। इसलिए सतर्कता जरूरी है। वर्ष 2019 में कोविड महामारी का एक महत्वपूर्ण कारक भी चीन की प्रयोगशाला में निर्मित कृत्रिम वायरस ही था। यह वायरस वैज्ञानिकों की असावधानी अथवा उनके द्वारा स्वयं ही लैब से बाहर निकाल दिया गया, यह अभी तक पता नहीं चला है। लेकिन, इस महामारी ने पूरी दुनिया को हलकान कर दिया। कई लाख लोगों को इस महामारी से जान गंवानी पड़ी थी। इसलिए इस नई खोज का स्वागत करने के साथ-साथ इसकी सुरक्षा के उपायों पर भी गंभीरता से चिंतन और रणनीति बनाने की जरूरत है।

लेखक परिचयः स्वतंत्र पत्रकार, लखनऊ

August 7, 2026

जनपदभर में उर्वरक प्रतिष्ठानों पर संयुक्त छापेमारी, एक लाइसेंस निलंबित, कई विक्रेताओं को दिए नोटिस

एटा 07 अगस्त उप्रससे। जनपद में किसानों को उर्वरक निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध कराने तथा कालाबाजारी, जमाखोरी और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रमुख सचिव (कृषि), उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के निर्देशन में गठित संयुक्त प्रवर्तन टीमों ने शुक्रवार को जनपद की तीनों तहसीलों में एक साथ सघन औचक निरीक्षण अभियान चलाया। अभियान के दौरान सहकारी समितियों सहित थोक एवं फुटकर उर्वरक प्रतिष्ठानों की जांच कर उर्वरकों की उपलब्धता, गुणवत्ता, निर्धारित मूल्य पर बिक्री तथा अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया।

जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, टैगिंग अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जलेसर तहसील में एक लाइसेंस निलंबित

जलेसर तहसील में एसडीएम जलेसर, जिला कृषि अधिकारी एवं सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न उर्वरक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान बी-पैक्स शाखा नबीपुर, पौडरी उर्वरक विक्रेता, बेरनी (सादाबाद रोड, अवागढ़) तथा वसुंधरा प्रतिष्ठान से उर्वरकों के दो नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए लेकर प्रयोगशाला भेजे गए। दो प्रतिष्ठान बंद मिलने पर संबंधित विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जबकि एक प्रतिष्ठान पर अभिलेखों में अनियमितता पाए जाने पर उसका उर्वरक विक्रय लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

अलीगंज में दो विक्रेताओं को दिए नोटिस

अलीगंज तहसील में एसडीएम अलीगंज, उप कृषि निदेशक एवं सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता) की संयुक्त टीम ने निरीक्षण के दौरान दो विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए। एक उर्वरक का नमूना गुणवत्ता परीक्षण के लिए लिया गया। सभी विक्रेताओं को शासन द्वारा निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरकों की बिक्री करने और अभिलेख अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए।

सदर तहसील में कीटनाशकों के भी लिए गए नमूने

सदर तहसील में उपजिलाधिकारी सदर, अपर जिला कृषि अधिकारी एवं अपर जिला सहकारी अधिकारी की संयुक्त टीम ने निरीक्षण के दौरान एक प्रतिष्ठान पर अभिलेख व्यवस्थित न मिलने पर नोटिस जारी किया और अभिलेख तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त कीटनाशकों के दो नमूने भी गुणवत्ता परीक्षण के लिए संग्रहित किए गए।
संयुक्त प्रवर्तन टीमों ने सभी सहकारी समितियों एवं उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए कि उर्वरकों की बिक्री केवल पीओएस मशीन के माध्यम से, शासन द्वारा निर्धारित मूल्य पर और नियमानुसार की जाए। किसानों को फार्मर आईडी एवं खतौनी के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा स्टॉक एवं बिक्री संबंधी सभी अभिलेख नियमित रूप से अद्यतन रखे जाएं।

जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जनपद में यूरिया, डीएपी एवं अन्य उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। किसानों से अपील की गई कि वे आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें और खरीदते समय रसीद अवश्य प्राप्त करें।

जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं। जनपद में उर्वरकों की उपलब्धता, गुणवत्ता एवं पारदर्शी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त औचक निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

एटा में चार बेटों ने कंधों पर बैठाकर पिता को कराई कांवड़ यात्रा, दृश्य देख राहगीर हुए भावुक

एटा 07 अगस्त उप्रससे। जनपद में शुक्रवार को कांवड़ यात्रा के बीच आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र के नगला सबल निवासी गोदन सिंह की वर्षों पुरानी इच्छा थी कि वह भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करें। शारीरिक कमजोरी के कारण यह असंभव था।

उनके चार बेटों जयप्रकाश, किशन, टिंकू और बंटी ने पिता का सपना पूरा करने का संकल्प लिया। चारों भाइयों ने विशेष रूप से कांवड़ तैयार कर अपने पिता को उसमें बैठाया और बारी-बारी से कंधों पर उठाकर शिवधाम की ओर रवाना हुए। रतीभानपुर-भैसूली-जलेसर मार्ग पर यह दृश्य देखकर राहगीर भी भावुक हो उठे।
इसी दौरान कांवड़ यात्रा का निरीक्षण कर रहे जिलाधिकारी अरविंद सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन ने यात्रा रोककर परिवार से मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने चारों भाइयों के सेवा-भाव और संस्कारों की सराहना करते हुए उन्हें आधुनिक युग का “श्रवण कुमार” बताया।

माता-पिता की सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति और भारतीय संस्कृति की पहचान है

जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने कहा कि माता-पिता की सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति है और ऐसे उदाहरण भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। एसएसपी ने भी चारों भाइयों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए उनकी सुरक्षित और मंगलमय कांवड़ यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

चारों बेटों की यह अनूठी सेवा-भावना समाज के लिए प्रेरणा बन गई है। माता-पिता की खुशी से बढ़कर कोई पूजा नहीं होती।

एटा में सोते समय सांप ने युवक को डसा, इलाज के दौरान तोड़ा दम

एटा 07 अगस्त उप्रससे। जनपद में जलेसर तहसील क्षेत्र के लखमीपुर गांव में सांप के काटने से 22 वर्षीय युवक की मौत हो गई। गुरुवार की रात युवक को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को घर ले गए।

लखमीपुर गांव निवासी विक्रम (22) गुरुवार रात खाना खाने के बाद अपने घर में सो रहा था। रात लगभग एक बजे उसे सांप ने डस लिया। सांप के काटने का एहसास होने पर उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन तत्काल वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद जान नहीं बचाई जा सकी। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।

मृतक के भाई रामू ने बताया कि रात करीब एक बजे सांप ने विक्रम को काट लिया था, जिसके बाद उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और आवश्यक औपचारिकताओं के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए घर ले जा रहे हैं।

राजा भैया ने घटनास्थल का किया निरीक्षण, घायल से मिलकर जाना हालचाल

VIKAS GUPTA
PRATAPGARH UP

प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जर्जर मकान गिरने से एक ही परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत के बाद जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने शुक्रवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने हादसे में घायल बचे सदस्य अमन श्रीवास्तव से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। निरीक्षण के दौरान राजा भैया ने बताया कि यह मकान प्रमोद श्रीवास्तव का था। रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने कहा कुछ घटनाएं कुछ घटनाएं दुखद होती हैं कुछ अकल्पनीय होती हैं जो बच्चा अमन ईश्वर की कृपा से बच गया है किस मानसिक स्थिति में होगा ईश्वर उसे शक्ति दे पूरा प्रतापगढ़ जिला इस हादसे से दुखी है।

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