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आरएमएलआईएमएस रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के उत्साहजनक परिणाम

August 11, 2026

आरएमएलआईएमएस रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के उत्साहजनक परिणाम

75 मरीजों के मूल्यांकन में बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी, कम दर्द और उच्च मरीज संतुष्टि

लगभग 80% मरीज 48 घंटे में स्वतंत्र रूप से चलने लगे, जबकि 60% मरीज तीन दिनों के भीतर हुए डिस्चार्ज

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान , लखनऊ के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक सामने आए हैं। विभाग में रोबोटिक सर्जरी से उपचारित 75 मरीजों के पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी, जीवन की गुणवत्ता तथा मरीजों की संतुष्टि का मूल्यांकन किया गया। इस गुणवत्ता आकलन में मरीजों में तेज रिकवरी, कम दर्द, शीघ्र गतिशीलता और उपचार के प्रति उच्च स्तर की संतुष्टि देखने को मिली।

रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी आधुनिक शल्य चिकित्सा की एक उन्नत तकनीक है, जो सर्जन को ऑपरेशन के दौरान बेहतर सटीकता, नियंत्रण और सूक्ष्म गतिविधियों को करने में सहायता प्रदान करती है। छोटे चीरे, कम पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द, छोटे निशान, शीघ्र गतिशीलता तथा दैनिक गतिविधियों और काम पर अपेक्षाकृत जल्दी लौटना इसके प्रमुख संभावित लाभ हैं।

75 मरीजों के आकलन में सामने आए उत्साहजनक परिणाम

आरएमएलआईएमएस में किए गए गुणवत्ता एवं जीवन-गुणवत्ता आकलन में रोबोटिक सर्जरी के बाद मरीजों की रिकवरी के कई सकारात्मक संकेत सामने आए।

लगभग 80 प्रतिशत मरीजों ने ऑपरेशन के 48 घंटे के भीतर स्वतंत्र रूप से चलना-फिरना शुरू कर दिया। यह शीघ्र शारीरिक रिकवरी और सामान्य गतिविधियों की ओर तेजी से लौटने का महत्वपूर्ण संकेत है।

इसी प्रकार, 60 प्रतिशत मरीजों को रोबोटिक सर्जरी के तीन दिनों के भीतर सुरक्षित रूप से अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कम अवधि में अस्पताल से डिस्चार्ज होने से मरीजों को अपने घर के परिचित वातावरण में जल्दी लौटने और सामान्य दिनचर्या की ओर तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है।

पोस्ट-ऑपरेटिव अवधि में मरीजों में दर्द भी प्रभावी रूप से नियंत्रित रहा। अधिकांश मरीजों में न्यूनतम दर्द निवारक दवाओं की आवश्यकता पड़ी और मरीजों में शीघ्र गतिशीलता एवं बेहतर रिकवरी देखी गई। आकलन में सर्जरी के बाद की जटिलताएं भी कम रहीं।

मरीजों की प्रतिक्रिया इस मूल्यांकन का सबसे उत्साहजनक पहलू रही। सर्वेक्षण में शामिल 100 प्रतिशत मरीजों ने भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर दोबारा रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी को चुनने की इच्छा व्यक्त की। यह मरीजों के उपचार अनुभव, आराम और संतुष्टि के उच्च स्तर को दर्शाता है।

सिर्फ सामान्य सर्जरी नहीं, जटिल कैंसर सर्जरी में भी रोबोटिक तकनीक का उपयोग

आरएमएलआईएमएस के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में रोबोटिक तकनीक का उपयोग विभिन्न प्रकार की जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी में किया जा रहा है। इनमें कैंसर संबंधी जटिल ऑपरेशन भी शामिल हैं।

मूल्यांकन किए गए मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा हेपेटोबिलियरी सर्जरी का रहा, जो लगभग 38.3 प्रतिशत था। इसके बाद 23.4 प्रतिशत मामले एडवांस्ड कोलोरेक्टल सर्जरी के थे। बेरियाट्रिक सर्जरी और इसोफैगो-गैस्ट्रिक सर्जरी के साथ जटिल हर्निया रिपेयर प्रत्येक लगभग 19.1 प्रतिशत मामलों में किए गए।

इस विविधता से यह स्पष्ट होता है कि रोबोटिक सर्जरी का उपयोग केवल अपेक्षाकृत सरल प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि चयनित मरीजों में जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और ऑन्कोलॉजिकल सर्जरी में भी किया जा रहा है।

विशेष रूप से जटिल कैंसर संबंधी प्रक्रियाओं में भी मरीजों में शीघ्र गतिशीलता, बेहतर शारीरिक रिकवरी और पोस्ट-ऑपरेटिव स्वास्थ्य लाभ की सकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई।

मरीजों की संतुष्टि ने बढ़ाया भरोसा

रोबोटिक सर्जरी की सफलता का आकलन केवल ऑपरेशन की तकनीकी सफलता से नहीं किया जाता, बल्कि मरीज के अनुभव, दर्द, गतिशीलता, अस्पताल में रहने की अवधि और जीवन की गुणवत्ता जैसे पहलुओं से भी किया जाता है।

आरएमएलआईएमएस में किए गए मूल्यांकन में इन सभी पहलुओं पर सकारात्मक संकेत प्राप्त हुए। मरीजों ने कम दर्द, जल्दी चलने-फिरने, अस्पताल में कम समय रहने और उपचार के समग्र अनुभव के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की।

विशेष रूप से 100 प्रतिशत मरीजों द्वारा आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में दोबारा रोबोटिक सर्जरी चुनने की इच्छा व्यक्त करना इस तकनीक के प्रति मरीजों के विश्वास और संतुष्टि का महत्वपूर्ण संकेत है।

आरएमएलआईएमएस के निदेशक डॉ. सी. एम. सिंह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक को मरीजों के लिए सुलभ और किफायती बनाना है।

उन्होंने कहा:

“आरएमएलआईएमएस में अत्याधुनिक रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराना संस्थान की मरीज-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक का लाभ मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और किफायती रूप में उपलब्ध कराया जाए। रोबोटिक सर्जरी के इन उत्साहजनक प्रारंभिक परिणामों से हमें इस दिशा में आगे बढ़ने का और प्रोत्साहन मिला है।”

आरएमएलआईएमएस में प्राप्त प्रारंभिक परिणाम यह दर्शाते हैं कि रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के माध्यम से उपयुक्त मरीजों में पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी को बेहतर बनाया जा सकता है।

विशेष रूप से शीघ्र स्वतंत्र गतिशीलता, कम अवधि में अस्पताल से छुट्टी, प्रभावी दर्द नियंत्रण और उच्च मरीज संतुष्टि इस प्रारंभिक गुणवत्ता आकलन के महत्वपूर्ण निष्कर्ष रहे हैं।

आरएमएलआईएमएस में रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की उपलब्धता संस्थान की उस व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और मरीज-केंद्रित देखभाल को एक साथ लाकर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क:- प्रो0 अंशुमन पांडे
फोन न0-8176007038
सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान , लखनऊ

रिकॉर्डेंट ने धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) के लिए समर्पित ऋण रजिस्ट्री की स्थापना की

लखनऊ, 11 अगस्त, 2026: अग्रणी क्रेडिट जोखिम एवं ऋण वसूली (कलेक्शंस) प्लेटफॉर्म रिकॉर्डेंट ने धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) के लिए एक समर्पित क्रेडिट रजिस्ट्री शुरू की है। इसका उद्देश्य ऋण संबंधी जानकारी की पारदर्शिता बढ़ाना तथा जोखिम मूल्यांकन को और अधिक सशक्त बनाना है।एमएफआई क्रेडिट रजिस्ट्री के माध्यम से भाग लेने वाले संस्थान एक साझा मंच पर उधारकर्ताओं के ऋण संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान कर सकेंगे और उन तक पहुंच प्राप्त कर सकेंगे। इससे ऋणदाता ऋण स्वीकृति (अंडरराइटिंग) प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकेंगे, उधारकर्ताओं के कुल ऋण भार की बेहतर निगरानी कर सकेंगे तथा अधिक सूचित और विवेकपूर्ण ऋण संबंधी निर्णय ले सकेंगे।यह पहल सूक्ष्म वित्त (माइक्रोफाइनेंस) क्षेत्र में ऋण संबंधी जानकारी के आदान-प्रदान को सुदृढ़ बनाने तथा जोखिम मूल्यांकन को अधिक प्रभावी करने के प्रयासों के तहत की गई है।वैश्विक डेटा एवं क्रेडिट एनालिटिक्स की अग्रणी कंपनी इक्विफैक्स की माइक्रोफाइनेंस इनसाइट्स रिपोर्ट (फरवरी 2026) के अनुसार, सूक्ष्म वित्त क्षेत्र का कुल बकाया ऋण पोर्टफोलियो 3.2 लाख करोड़ रुपये था, जो 10.5 करोड़ सक्रिय ऋण खातों में फैला हुआ है।यह क्रेडिट रजिस्ट्री विशेष रूप से गैर-लाभकारी (नॉट-फॉर-प्रॉफिट) सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) के लिए तैयार की गई है। यह एक साझा क्रेडिट सूचना अवसंरचना के रूप में कार्य करती है, जिसके माध्यम से भाग लेने वाले संस्थान उधारकर्ताओं से संबंधित आंकड़े अपलोड कर सकते हैं और उन तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, इन आंकड़ों को क्रेडिट ब्यूरो की जानकारियों के साथ एकीकृत कर एकीकृत क्रेडिट रिपोर्ट के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।यह प्लेटफॉर्म धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत एमएफआई के लिए क्रेडिट दृश्यता (क्रेडिट विज़िबिलिटी) से जुड़ी एक प्रमुख चुनौती का समाधान करेगा। इस पहल को स-धन (Sa-Dhan) के सदस्य संस्थानों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। स-धन के नेटवर्क में धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) की महत्वपूर्ण उपस्थिति को देखते हुए, इस क्रेडिट रजिस्ट्री में बड़ी संख्या में संस्थागत भागीदारी तथा पूरे उद्योग के स्तर पर व्यापक सहयोग मिलने की उम्मीद है।इस घोषणा पर टिप्पणी करते हुए, रिकॉर्डेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं सह-संस्थापक विनी पात्रो ने कहा, “एमएफआई क्रेडिट रजिस्ट्री को पूरे सूक्ष्म वित्त क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ) द्वारा संचालित एमएफआई को बेहतर डेटा उपलब्ध कराना, ऋण वितरण से जुड़े जोखिम को कम करना तथा जिम्मेदार वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है। इसकी सफलता सामूहिक भागीदारी पर निर्भर करती है। जितने अधिक संस्थान इसमें योगदान देंगे, उतना ही अधिक मजबूत, प्रभावी और विश्वसनीय यह संपूर्ण तंत्र (इकोसिस्टम) बनेगा।”

गोमतीनगर में होटल के कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला अधेड़ व्यक्ति का शव

कोई सुसाइड नोट नहीं म‍िला, पहचान पत्र मिलने से हुई शव की शिनाख्त

दइलाइट आईएनएन होटल में हुई घटना का मामला

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के होटलों में जान देने का सिलसिला थम नहीं रहा है। बीते कुछ दिनों पहले हुई घटना का मामला शांत भी नहीं पड़ा था कि अब गोमतीनगर थाना क्षेत्र के विवेक खंड चार स्थित THE ELITE होटल में गुजरात निवासी अमित शर्मा का शव मंगलवार को फांसी के फंदे से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची कमरे का दरवाजा तोड़वाकर कमरे में दाखिल हुई तो देखा कि उसका शव रस्सी के सहारे झूलता मिला। मृतक के पास से कोई सुसाइड नोट न मिलने से जान देने की वजह साफ नहीं हो सकी है। पुलिस को होटल के कमरे से एक मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक पेन, घटना में इस्तेमाल रस्सी, एक काला बैग व कपड़े मिले हैं। पुलिस के मुताबिक परिवार छत्तीसगढ़ में में रह रहा है उन्हें इसकी सूचना दे दी गई है।
इंस्पेक्टर गोमतीनगर ब्रजेश चन्द्र तिवारी के मुताबिक मंगलवार को सूचना मिली कि विवेक खंड चार स्थित होटल THE ELITE INN के कमरा नंबर 301 ठहरे एक व्यक्ति ने खुदकुशी कर ली है। इस सूचना पर इंस्पेक्टर गोमतीनगर ब्रजेश चन्द्र तिवारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और कमरे का दरवाजा तोड़वाकर अंदर दाखिल हुए तो देखा कि उक्त व्यक्ति का शव पंखे के कुंडे में रस्सी के सहारे लटक रहा था।
इंस्पेक्टर का कहना है मृतक की जेब से मिले आधार के जरिए शव की पहचान गुजरात राज्य के दिल्ली गेट ईश्वर भवन मानसरोवर रोड दुर्गा आफसेट के पास पालनपुर बनास कांठा निवासी अमित शर्मा पुत्र मदन गोपाल शर्मा के रूप में हुई।
पुलिस के मुताबिक जांच पड़ताल में सामने आया है कि मृतक की पत्नी बच्चों के साथ रायपुर छत्तीसगढ़ में रहती है, जिसे सूचना दे दी गई है।
इंस्पेक्टर गोमतीनगर ब्रजेश चन्द्र तिवारी ने बताया कि मामले की छानबीन कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि घरवालों के आने के बाद ही साफ होगा कि अमित शर्मा क्या कारोबार या फिर कौन-सी नौकरी करते थे।

ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस’ के अवसर पर टाटा पावर के माइक्रोग्रिड्स ने ग्रामीण भारत तक एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा समाधान पहुंचाए।

एकीकृत सौर माइक्रोग्रिड, ऊर्जा-कुशल तकनीकें और बायोगैस ऊर्जा समाधान ग्रामीण आजीविका, छोटे कारोबारों और सशक्त समुदायों को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
लखनऊ। 11 अगस्त, 2026: द टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड लिमिटेड (TPRMG) विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों के अपने एकीकृत पोर्टफोलियो के जरिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त ग्रामीण समुदायों के निर्माण की दिशा में अपने प्रयासों को और गति दे रही है।
TPRMG घरों, किसानों और गांव स्तर के उद्यमों को भरोसेमंद और स्वच्छ बिजली उपलब्ध करा रही है। इन समाधानों से कृषि की उत्पादकता बढ़ रही है, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घट रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका व स्थानीय उद्यमों के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
TPRMG का एकीकृत मॉडल सौर ऊर्जा आधारित माइक्रोग्रिड, सौर सिंचाई, ऊर्जा कुशल उपकरणों और आजीविका बढ़ाने वाले उपकरणों को एक साथ जोड़कर भारत के दूरदराज़ गांवों में बदलाव और विकास को नई दिशा दे रहा है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का सुनहरी चौराहा गांव इसका एक आदर्श उदाहरण बन चुका है। कृषि अवशेषों और जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन पर आधारित बायोएनर्जी समाधानों को भी उन क्षेत्रों में विकसित और लागू किया जा रहा है, जहां उनकी तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित है।
TPRMG के माइक्रोग्रिड ग्रामीण उद्यमों को डीजल आधारित बिजली से हरित और भरोसेमंद ऊर्जा की ओर बढ़ने में मदद कर रहे हैं। विभिन्न व्यवसायों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए ये समाधान डीजल की खपत में उल्लेखनीय कमी लाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को भी कम करते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता से ग्रामीण उद्यम अपनी कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। साथ ही, डीजल से चलने वाली मशीनों की जगह माइक्रोग्रिड से संचालित बिजली आधारित मशीनों का उपयोग करके परिचालन लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत भी कर सकते हैं।
भरोसेमंद बिजली उपलब्ध होने से दुकानों और अन्य ग्रामीण उद्यमों को अधिक समय तक और बिना रुकावट के संचालित किया जा सकता है। इससे ग्रामीण उद्यमियों को आधुनिक उपकरण अपनाने का अवसर भी मिलता है, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होता है और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलती हैं।
कृषि और डेयरी उद्यमों को मिल रहा है सहयोग
सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई समाधान किसानों को डीजल से चलने वाले पंपों का बेहतर विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं। इससे सिंचाई की लागत कम होती है और खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनती है।
TPRMG डेयरी उद्यमियों को बल्क मिल्क कूलर (Bulk Milk Coolers) और अन्य ऊर्जा कुशल दुग्ध प्रसंस्करण उपकरण जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भी सहयोग प्रदान कर रही है। ये समाधान दूध की गुणवत्ता बनाए रखने, ऊर्जा की खपत कम करने और ग्रामीण डेयरी क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
कंपनी का विकेन्द्रीकृत ऊर्जा तंत्र (Decentralised Energy Ecosystem) गांव स्तर पर कई तरह की गतिविधियों और व्यवसायों को सहयोग प्रदान कर सकता है। इनमें डेयरी मूल्य श्रृंखला से जुड़ी गतिविधियां—जैसे दूध संग्रह, दूध को ठंडा रखना और दुग्ध प्रसंस्करण—शामिल हैं। इसके अलावा, कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र में गुड़ निर्माण, मसाला प्रसंस्करण, तेल निकालने की इकाइयां (ऑयल एक्सपेलर), आटा चक्की जैसी गतिविधियों के साथ-साथ अन्य छोटे ग्रामीण व्यवसायों को भी यह ऊर्जा समाधान समर्थन प्रदान करता है।
ऊर्जा कुशल उपकरणों को मिल रहा है बढ़ावा
माइक्रोग्रिड के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली बिजली ऊर्जा कुशल तकनीकों को अपनाने को भी बढ़ावा देती है। इनमें BLDC पंखे, IE3 और IE4 मोटर, LED लाइटिंग, ऊर्जा कुशल रेफ्रिजरेशन सिस्टम, मोटर, पंप और आजीविका से जुड़े उपकरण शामिल हैं। इनका उपयोग करके उपभोक्ता बिजली की खपत कम कर सकते हैं, साथ ही अपनी कार्यक्षमता और उत्पादकता में भी सुधार कर सकते हैं।
योग्य ग्राहकों के लिए कंपनी चयनित ऊर्जा कुशल उपकरणों की खरीद हेतु आसान वित्तीय सुविधा और ईएमआई (EMI) विकल्प भी उपलब्ध कराती है। यह सुविधा आवश्यक दस्तावेजों, पात्रता और वित्तीय साझेदार की अंतिम स्वीकृति के अधीन होती है। इस पहल के माध्यम से ग्राहकों को ऊर्जा कुशल उपकरणों और पारंपरिक उपकरणों के बीच अंतर को समझने में मदद मिलती है। साथ ही, वे कम बिजली खपत, बेहतर प्रदर्शन और लंबे समय में होने वाली बचत जैसे लाभों को भी आसानी से समझ पाते हैं।
स्थानीय आजीविका को मिल रहा है बढ़ावा
TPRMG की स्वच्छ ऊर्जा पहलों से उत्तर प्रदेश में 18,000 से अधिक ग्राहकों और ग्रामीण उद्यमों को लाभ मिला है। कंपनी की गतिविधियों ने ग्रामीण स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका और रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए हैं।
सौर ऊर्जा और बायोएनर्जी पर आधारित TPRMG का एकीकृत मॉडल सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) की अवधारणा को भी बढ़ावा देता है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अवशेषों और जैविक कचरे को उपयोगी ऊर्जा में बदला जाता है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है और किसानों, ग्रामीण उद्यमियों तथा स्थानीय समुदायों के लिए आय और विकास के नए अवसर पैदा होते हैं।
इस अवसर पर टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) श्री मनोज कुमार गुप्ता ने कहा, “ऊर्जा स्वतंत्रता का अर्थ केवल बिजली उपलब्ध कराना नहीं है। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को कृषि उत्पादकता बढ़ाने, स्थानीय उद्यमों को ऊर्जा उपलब्ध कराने और टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित करने के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। सौर ऊर्जा, ऊर्जा कुशल तकनीकों, बायोएनर्जी समाधानों और स्थानीय उद्यमिता को एक साथ जोड़कर हमारा लक्ष्य मजबूत और आत्मनिर्भर ग्रामीण इकोसिस्टम तैयार करना है तथा स्वच्छ ऊर्जा को समावेशी विकास का एक प्रभावी माध्यम बनाना है।”
उत्तर प्रदेश में लगभग 4.5 मेगावाट क्षमता वाले माइक्रोग्रिड नेटवर्क के साथ TPRMG हर वर्ष 57.4 लाख से अधिक यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन कर रही है। कंपनी के वर्तमान प्रभाव आकलन (Impact Assessment) के अनुसार, इन परिचालनों से प्रतिवर्ष लगभग 23.6 लाख लीटर डीजल की खपत और लगभग 6,400 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के उत्सर्जन को रोका जा सका है।
स्थानीय स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े कौशल का विकास
TPRMG ने ‘RE Tech Mitra’ पहल भी शुरू की है, जो ग्रामीण उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देने वाला एक कार्यक्रम है। इसके तहत स्थानीय युवाओं को नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों तथा ऊर्जा कुशल मशीनों और उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इस तरह की पहलें स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक संचालन, बेहतर रखरखाव और प्रभावी कार्यक्षमता को भी मजबूत बनाती हैं।
अपने विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा तंत्र के माध्यम से TPRMG ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, उत्पादकता में सुधार लाने और भारत को अधिक स्वच्छ, समावेशी तथा ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर समुदायों की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
About Tata Power Renewable Energy Limited:

Tata Power Renewable Energy Limited (TPREL) is a subsidiary of The Tata Power Comp

महिला आरक्षण से भयभीत कांग्रेस

Editorial 11.08.2026 by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

Posted on 11.08.2026

संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को रोकने के लिए कांग्रेस और अन्य विपक्ष हर हथकंडा अपना रहा है। इस विधेयक को पारित कराने के लिए एनडीए सरकार पूरी कोशिश में है। इसके लिए का व्यवस्थित संचालन जरूरी है। लेकिन कांग्रेस लोकसभा और राज्यसभा दोनों को अव्यवस्थित बनाए रखना चाहती है। सदन सुचारू करने के लिए कांग्रेस ने मांग रखी कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर नीट पेपर लीक मामले में प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठी चार्ज पर बयान दें। जब सरकार इसके लिए सोमवार को तैयार हो गई तो कांग्रेस ने नई मांगें रख दी। अब कांग्रेस कह रही है कि लाठी चार्ज की जिम्मेदारी तय हो, पीएम मोदी माफी मांगें और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर चर्चा हो तब सदन चलने देंगे। इससे ऐसा लगता है कि कांग्रेस जानबूझकर ऐसे मुद्दे और मांगे रख रही है, जिन्हें सत्ता पक्ष स्वीकार नहीं करेगा। परिणाम गतिरोध बरकरार रहेगा और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं होगा। दरअसल कांग्रेस महिला आरक्षण की विरोधी है। वह शुरू से अड़ंगेबाजी करती रही है। इसलिए इस लोक महत्व का बिल को अटकाए रखना चाहती है। यह बिल दो तिहाई बहुमत से पारित होगा, जिसके लिए सरकार ने बहुमत जुटा लिया है। डीएमके, एनसीएपी, शिवसेना उद्धव गुट, टीएमसी का बागी गुट सरकार के साथ हैं। सरकार बिल आसानी से पास कर लेगी, इस बात को कांग्रेस अच्छी तरह जानती है। इसी लिए सदन को सुचारू नहीं होने दे रही, ताकि बिल अटका रहे। ये बिल अगर अभी पारित नहीं हुआ तो वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकेगा। महिला आरक्षण भारत की राजनीति में 30 वर्ष पुराना मुद्दा है। इसे समय समय पर भाजपा और कांग्रेस दोनों उठती रही हैं। लेकिन जब इसे क्रियान्वयन का समय आया तो विपक्षी दल कांग्रेस ने अपना महिला विरोधी रुख स्पष्ट दिखा दिया। खास बात यह है कि इस बिल के विरोध में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियां भी है। महिला आरक्षण का विरोध करके इन दलों को कुछ भी हासिल नहीं होगा बल्कि राजनीतिक नुकसान ही होगा। लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकार और राहुल गांधी के सलाहकार ये समझने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस अब भी रुख बदल ले तो वह संभावित नुकसान को टाल सकती है।

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