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अहमदाबाद की पटाखा फैक्टरी में विस्फोट, 8 की मृत्यु

July 18, 2026

अहमदाबाद की पटाखा फैक्टरी में विस्फोट, 8 की मृत्यु

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Posted on 18.07.2026 Time 08.29 PM Saturday, Ahmedabad Blast

अहमदाबाद, 18 July 2026, वस्त्राल में स्थित एक पटाखा फैक्टरी में भीषण धमाके के बाद लगी आग से 8 लोगों की मृत्यु हो गई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं।

दुर्घटना पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने दुख व्यक्त किया है।

सम्पूर्ण समाधान दिवस: गोवर्धन में डीएम-एसएसपी ने सुनीं फरियादें, अधिकारियों को दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश

मथुरा। जनसमस्याओं के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान के उद्देश्य से शनिवार को तहसील गोवर्धन के सभागार में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में सम्पूर्ण समाधान दिवस आयोजित किया गया। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने फरियादियों की शिकायतें सुनकर संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि विवाद अथवा अन्य जटिल मामलों में सभी पक्षों की मौजूदगी में मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच करते हुए समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक अपने कार्यालयों में उपस्थित रहकर आमजन की समस्याएं सुनें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि सम्पूर्ण समाधान दिवस का उद्देश्य केवल शिकायतें दर्ज करना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण समाधान करना है। उन्होंने कहा कि कोई भी फरियादी तहसील दिवस या किसी सरकारी कार्यालय से निराश होकर वापस नहीं जाना चाहिए।
समाधान दिवस के दौरान गोवर्धन तहसील में 45 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 5 का मौके पर निस्तारण किया गया। महावन तहसील में 41 शिकायतें आईं, जिनमें 2, सदर तहसील में 34 शिकायतों में से 5, छाता तहसील में 42 शिकायतों में से 4 तथा मांट तहसील में 47 शिकायतों में से 7 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को शेष शिकायतों का भी नियमानुसार शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मतदेय स्थलों की सूची को मिला अंतिम रूप, राजनीतिक दलों से नहीं मिली कोई आपत्ति

अतुल कुमार जिंदल
मथुरा। आगामी निर्वाचन की तैयारियों के तहत जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के साथ मतदेय स्थलों के आलेख्य प्रकाशन के उपरांत बैठक आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि 4 जुलाई को प्रकाशित मतदेय स्थलों की सूची पर 16 जुलाई तक किसी भी राजनीतिक दल की ओर से कोई शिकायत या सुझाव प्राप्त नहीं हुआ। ऐसे में इसी सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 1200 मतदाताओं के आधार पर मतदेय स्थलों का पुनर्संभाजन किया गया। इसके तहत 24 से 28 जून तक भौतिक सत्यापन, भवनों का निरीक्षण एवं नए मतदेय स्थलों के चिन्हांकन का कार्य पूरा किया गया। इसके बाद राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर प्रस्ताव तैयार किए गए और 4 जुलाई को आलेख्य सूची प्रकाशित की गई।
उन्होंने बताया कि 18 जुलाई को सूची का अंतिम अनुमोदन किया जाएगा। इसके बाद 25, 27 और 28 जुलाई को प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे जाएंगे, जबकि 31 जुलाई को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय आयोग के अनुमोदन के लिए प्रस्ताव प्रेषित करेगा।
जनपद में विधानसभावार मतदेय स्थलों की स्थिति
छाता: 416 मतदेय स्थल, 190 मतदान केंद्र
मांट: 458 मतदेय स्थल, 302 मतदान केंद्र
गोवर्धन: 397 मतदेय स्थल, 206 मतदान केंद्र
मथुरा: 495 मतदेय स्थल, 122 मतदान केंद्र
बल्देव (अजा): 481 मतदेय स्थल, 287 मतदान केंद्र
जनपद में कुल 2,247 मतदेय स्थल तथा 1,107 मतदान केंद्र निर्धारित किए गए हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि सत्यापन के दौरान जिले में 30 मतदेय स्थल जर्जर पाए गए हैं। इनमें छाता में 5, मांट में 8, गोवर्धन में 8 तथा बल्देव में 9 मतदेय स्थल शामिल हैं, जिनके संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में बल्देव विधायक पूरन प्रकाश, सांसद प्रतिनिधि हेमंत अग्रवाल सहित भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा एवं आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. पंकज कुमार वर्मा सहित विभिन्न उप जिलाधिकारी, तहसीलदार एवं निर्वाचन से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे।

एटा में स्ट्रीट लाइट लगाने को लेकर दो पक्षों में जमकर चले लाठी-डंडे चले, एक दर्जन घायल

एटा 18 जुलाई उप्रससे। जनपद में कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के नगला मदी गांव में सरकारी स्ट्रीट लाइट लगाने को लेकर दो पक्षों में जमकर मारपीट हुई। इस दौरान लाठी-डंडे चले, जिसमें दोनों पक्षों के लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों को एटा के वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है।

घटना आज शनिवार दोपहर की है। मारपीट के बाद खून से लथपथ दोनों पक्षों के लोग कोतवाली देहात पहुंचे। पुलिस ने तत्काल घायलों का मेडिकल परीक्षण करवाया और मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है।

घायलों में एक पक्ष से यादराम (56 वर्ष), उनके पुत्र अनुज (26 वर्ष), पुत्री सुमन (18 वर्ष) और बांकेलाल (25 वर्ष) शामिल हैं। दूसरे पक्ष से राजेश, प्रीती, माखन देवी (38 वर्ष), सुमन, मनीष और ओमपाल घायल हुए हैं। एक पक्ष के अनुज कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी छोटी बहन गोबर डालने गई थी, तभी दूसरे पक्ष के लव कुश, मनीष और विनोद ने गाली-गलौज शुरू कर दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें, उनके पिता और बहन के साथ मारपीट कर दी।

कोतवाली देहात थाना प्रभारी के. के. लोधी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों से कुल छह लोग घायल हुए हैं, जिनका मेडिकल परीक्षण करवाया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह विवाद गांव में स्ट्रीट लाइट लगाने को लेकर होना बताया गया है।

भारतीय रेलवे में नई हाइड्रोजन क्रांति


प्रधानमंत्री ने कई रेलवे स्टेशनों का भी दिया उपहार
मृत्युंजय दीक्षित
जुलाई 17, 2026 का दिन भारतीय रेलवे के लिए एक स्मरणीय दिन बन गया है क्योंकि इस दिन रेल यातायात में विकसित भारत के नये युग का सूत्रपात हुआऔर भा रत को हाइड्रोजन ट्रेन का उपहार मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेश्न से हरी झंडी दिखाकर इसका उद्घाटन किया। अब भारत उन चुनिन्दा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन हो रहा है।अभी तक जर्मनी, फ्रांस और चीन जैसे देश ही इस प्रकार की ट्रेनों का संचालन कर रहे थे ।
जींद-सोनीपत मार्ग पर चलने वाली यह ट्रेन शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली 10 कोच और 3,200 हार्स पावर क्षमता वाली दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों मे शामिल है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार की गई है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली इस ट्रेन में हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाती है जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प निकलती है इसलिए इससे शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है। यह ट्रेन डीजल ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण नहीं फैलाती, आवाज भी कम करती है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करती है। इसके लिए पारपंरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तरह मार्ग पर ओवरहेड बिजली लाईन की जरूरत भी नहीं होती क्योकि बिजली ट्रेन के भीतर ही तैयार होती है। ऐसी ट्रेनों के संचालन से कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम होगी।
यह 10 कोच वाली दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल है। यह अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ट्रेन है जो बाहर से देखने में तो साधारण ट्रेनों की तरह ही लगती है किन्तु जब यात्री ट्रेन के कोच में बैठकर यात्रा करते हैं तो उन्हें एक अलग प्रकार की सुखद अनुभूति होती है। ट्रेन में आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, हाइड्रोजन लीक डिटेक्शन सिस्टम और विशेष फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है। इस ट्रेन में यात्रियों के लिए टिकट का मूल्य 5 से 25 रुपए तक रखा गया है ताकि आम से खास तक सभी वर्ग के लोग इस पूर्ण रूप से स्वदेशी तथा प्रदूषण रहित ट्रेन की आरामदायक यात्रा का लाभ उठा सकें। भारतीय रेलवे की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा में जींद से सोनीपत के बीच 89 किमी प्रतिदिन दो राउंड ट्रिप यानी कुल 356 किमी का सफर तय करेगी। यह हाइड्रोजन ट्रेन जींद सिटी, गोहाना, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भंभेवा, इसापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराई, राबरा, लाथ, मोहाना और सोनीपत स्टेशन पर रुकेगी।
भारत की स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन अन्य देशों की तुलना में सबसे कम लागत मात्र 136 करोड़ रुपए में बनी है। ट्रेन की सामान्य ऑपरेशनल स्पीड 75 किमी प्रति घंटा होगी। ट्रायल रन के दौरान इसने 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार प्राप्त की थी। यह ट्रेन एक घंटे में 90 किमी का सफर तय कर सकती है। जबकि कई पुराने डीजल इंजन वाली ट्रेनों को इतनी दूरी तय करने में लगभग दो घंटे लग जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे में व्यापक बदलाव लाने का संकल्प लिया था जो अब धरातल पर उतरता दिख रहा है। भारतीय रेलवे आगामी वर्षों में और भी आधुनिक बनने की तैयारी कर रहा है। सरकार का लक्ष्य व संकल्प भारतीय रेलवे को अधिक सुरक्षित, तेज और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है यह हाइड्रोजन ट्रेन उसी लक्ष्य की दिशा में ले जाने वाली पहल है।
संक्षिप्त इतिहास – भारत में पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई के बोरीबंदर स्टेशन से ठाणे के बीच चलाई गई थी। यह ट्रेन 34 किमी की दूरी तय करती थी इसमें 14 डिब्बे थे1 960 में भारतीय रेलवे ने डीजल इंजनों को अपनाना शुरू किया। इन इंजनों की मदद से लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ी और रेलवे का विस्तार पहले की तुलना में तीव्रगति से हुआ। इसके पश्चात रेलवे में विद्युतीकरण का युग आया जिसमें बिजली से चलने वाले इंजन डीजल की तुलना में अधिक तीव्र ,कम प्रदूषण फैलाने वाले और ऊर्जा की दृष्टि से अधिक किफायती सिद्ध हुए। अब समय पूरी तरह से बदल चुका है। अब यात्रियों को सुविधाएं देने के लिए बेहतर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, वंदेभारत एक्सप्रेस जैसी हाईस्पीड ट्रेनों,आधुनिक कोच, आटोमेटिक सिग्नल सिस्टम, कवच सुरक्षा प्रणाली, डिजिटल टिकटिंग और बेहतर स्टेशन सुविधाएं रेलवे को नई पहचान दे रही हैं। आगामी समय में बुलेट ट्रेनों की रफ्तार भी भारतीय जनमानस देखने वाला है। केवल यात्रियों के लिए ही नहीं भारतीय रेल अब माल ढुलाई के लिए भी आधुनिक ट्रेनों का संचालन कर रही है।
हाइड्रोजन ट्रेन के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जींद और पंजाब के जालंधर से रेलवे की विकास व बदलाव की कहानी बताई और साथ ही कांग्रेस सहित समस्त विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए राजनैतिक संदेश भी दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जो काम आज हो रहे हैं वो काम तो 30 -40 वर्ष पहले ही हो जाने चाहिए थे लेकिन पहले की सरकारों में यह काम प्राथमिकता में थे ही नहीं। इस पर पहले की सरकारें चर्चा ही नहीं करती थी। 2014 के बाद भाजपा सरकार ने स्थितियों को बदलना शुरू किया। आज पूरे भारत में रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत 1300 स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है आज ऐसे ही 75 स्टेशनों का लोकार्पण हुआ है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अमृतसर -वाराणसी के बीच चलने वाली संत रविदास एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई।

प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं. – 9198571540

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