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एटा में मां के दूसरे रिश्ते से परेशान युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, कमरे में लटका मिला शव

September 16, 2026

एटा में मां के दूसरे रिश्ते से परेशान युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, कमरे में लटका मिला शव

एटा 16 सितंबर उप्रससे। जनपद के जसरथपुर थाना क्षेत्र में आज बुधवार दोपहर करीब 11:30 बजे युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। घटना की वजह पारिवारिक कलह मानी जा रही है।

पुलिस ने बताया अभय प्रताप सिंह (20) ने घर के पास फांसी लगाकर आत्महत्या की। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ पुलिस आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटा रही है।

जसरथपुर थाना प्रभारी सुबोध कुमार उपाध्याय ने बताया कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार अभय की मां करीब 14 साल पहले सराय अगहत निवासी बृजवीर सिंह से शादी के बाद राहुल बाबा के साथ रहने लगी थीं। राहुल बाबा अभय के जैविक पिता नहीं थे। पुलिस के मुताबिक, उसके जैविक पिता बृजवीर सिंह बताए गए हैं। राहुल बाबा के किसी अन्य महिला से संबंध होने की बात को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। इसी पारिवारिक कलह के कारण अभय तनाव में था। हालांकि पुलिस अभी घटना के पीछे की पूरी वजह की जांच कर रही है और परिवार के लोगों से भी जानकारी ली जा रही है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट और पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है। पुलिस आत्महत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

बलिया में बाढ़ से 64 विद्यालय हुए प्रभावित

रिपोर्ट – संजय कुमार तिवारी
स्थान – बलिया यूपी
डेट – 16/09/2026

एंकर – बलिया में गंगा और घाघरा नदी में आई बाढ़ से लगभग 87 गांव प्रभावित हो गए है जिसके चलते बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ गई।बाढ़ से शिक्षा विभाग के लगभग 64 विद्यालय प्रभावित है।जिसमे बैरिया तहसील क्षेत्र के मुरली छपरा ब्लॉक, बैरिया ब्लॉक,बेलहरी, दुबहड़ और बांसडीह तहसील क्षेत्र के बांसडीह ब्लॉक और रेवती ब्लॉक बाढ़ से प्रभावित हो गई है बाढ़ के चलते इन विद्यालयों को बंद करना पड़ा। विद्यालयों के बंद होने के बाद बच्चो की पढ़ाई बाधित हो गई है हालांकि बेसिक शिक्षाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में हमारे 64 विद्यालय घिरे हुए है जिसमे बैरिया,मुरली छपरा,बेलहरी, दुबहड़ ब्लॉक है वही बांसडीह तहसील के बांसडीह ब्लॉक और रेवती ब्लॉक शामिल है। हालांकि नदी अभी स्थिर है जल्द ही पानी उतर जायेगा और शीघ्र ही विद्यालय की सफाई कराकर स्वास्थ्य विभाग से समन्यवक बनाकर पठन पाठन शुरू किया जाएगा।बाढ़ में जो विद्यालय है हो सकता है कि एक दो विद्यालय जर्जर होंगे जो बाढ़ से प्रभावित होंगे। बाढ़ आई है लेकिन बच्चो का पठन पाठन बाधित नही हो रहा है बच्चों क्या ग्रुप बनाकर या दूसरे विद्यालय पर भेजकर पढ़ाई जाती है हम लोगों की कोशिश रहती है कि विद्यालय बंद होने से किसी भी बच्चो का पठन पाठन बाधित नही हों।

लोकरक्षक नरेन्द्र मोदीः पूरे किये संकल्प

Narendra Modi Prime Minister

Posted on 16.09.2026 Wednesday, PM Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस पर विशेष

सर्वेश कुमार सिंह

इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक का उत्तरार्ध और तीसरे दशक का भारतीय इतिहास नरेन्द्र मोदी के नाम है। इस इतिहास के निर्माता नरेन्द्र मोदी हैं। भारतीय राजनीति में कई नेता ऐसे हुए हैं जिनकी ख्याति किसी राज्य की सीमा में नहीं बंध सकी। देश की परिधि भी उनकी सीमा तय नहीं कर सकी। उसी कड़ी के नेता हैं नरेन्द्र मोदी। आज 17 सितम्बर उनका 76वां जन्म दिवस है।

नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में न केवल भारत का इतिहास रचा है, बल्कि उन्होंने अपने राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी के इतिहास को भी लिख दिया है। वे भारतीय जनता पार्टी के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला को मजबूती से स्थापित कर रहे हैं। ये नरेन्द्र मोदी ही हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में पूर्ववर्ती जनसंघ और अब उसके परिवर्तित नाम और स्वरूप में उपस्थित भारतीय जनता पार्टी के चिर-प्रतीक्षित एजेंडे को न केवल पूरा किया है, बल्कि उसे धरातल पर सफलता पूर्वक उतारा भी है। वहीं भारत के शासन प्रमुख होने के नाते देश की जनता के लिए कई ऐसे काम किये हैं जिन्हें करने का साहस और तरीका पहले के कई प्रधानमंत्री नहीं जुटा सके थे।

सबसे पहले बात करते हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से स्थापित जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी के सिद्धान्तों, वादों और लक्ष्यों को पूरा करने की। जनसंघ ने नारा दिया था “एक देश एक विधान एक निशान”। जनसंघ के संस्थापक डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी इसी सिद्धान्त पर अडिग रहकर कश्मीर की यात्रा पर गए थे। वहीं उनका स्वर्गवास हुआ। लेकिन, यह लक्ष्य बन गया। जनसंघ और फिर भाजपा की नीति बन गई। इसे पूरा किया नरेन्द्र मोदी ने। जब मोदी के निर्देशन में गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को संसद में विधेयक प्रस्तुत करके कश्मीर से धारा 370 हटा दी। कश्मीर का अलग विधान, अलग निशान समाप्त कर दिया गया। यह मोदी की उन उपलब्धियों में शामिल है जिसे इतिहास में प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा। यह सम्पूर्ण भारत की आकांक्षा थी।

वर्ष 1990 के दशक में श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति का आंदोलन उत्तर प्रदेश से आरंभ हुआ। यह आन्दोलन एक दशक में ही भारत के करोड़ो हिन्दुओं के स्वाभिमान से जुड़ गया। अयोध्या में श्रीराम जी की जन्मस्थली पर ही भव्य दिव्य मन्दिर के निर्माण का संकल्प भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में पूरा हुआ।। उनकी उपस्थिति मे ही 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा हुई। अयोध्या में श्रीराम मन्दिर निर्माण का वादा भी भारतीय जनता पार्टी ने किया था। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी ने 9 से 11 जून 1989 तक हिमाचाल प्रदेश के पालमपुर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में श्रीराम मन्दिर निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित किया था। प्रस्ताव तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आड़वाणी की उपस्थिति में पारित हुआ। इस तरह नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के दो संकल्प पूरे हुए हैं। पार्टी का तीसरा लक्ष्य समान नागरिक संहिता लागू करना है। इसके लिए श्री मोदी के नेतृत्व में प्रयास आरम्भ हो गए हैं। गत 14 सितम्बर को मुम्बई में गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित सभी 22 राज्यों में 2029 से पूर्व समान नागिरक संहिता (यूसीसी) लागू हो जाएगा। यानि कि नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में तीसरे कार्यकाल के पूर्ण होने से पहले ही समान नागरिक संहिता का वादा भी पूर्ण हो जाएगा। इस तरह भाजपा के तीनों सपने पूरे करने का श्रेय नरेन्द्र मोदी को है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह दायित्व संभालने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर कार्य किया। इस पद पर रहते हुए उनकी छवि विकास पुरुष और राज्य के उत्थान के लिए नवोन्मेषी राजनेता के रूप में बनी। इस छवि को और अधिक परिष्कृत किया उनके प्रधानमंत्री के रूप में किये गए कार्यों ने। श्री मोदी का तीसरा कार्यकाल पूरा होने में अभी लगभग ढाई साल बाकी हैं। लेकिन उन्होंने भारत की धीमी प्रगति को तेज दौड़ में शामिल करा दिया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है, आम आदमी की कठिनाइयों और दुश्वारियों से उसे निजात दिलाना। उन्होंने उन लक्ष्यों को निर्धारित किया जिन्हें कभी किसी पूर्ववर्ती राजनेता ने सोचा तक नहीं- जैसे हर घर शौचालय, हर घऱ बिजली, हर घर में नल से पानी। ये ऐसी योजनाएं और मूलभूत आवश्यकताएं हैं जिनके अभाव में ग्रामीण जनजीवन अभिशाप बना हुआ था। इन्हें समय सीमा में बांध कर उन्होंने पूरा किया। ग्रामीण महिलाओं को चूल्हे के धुंए से मुक्ति दिलाने के लिए उज्ज्जवला जैसी योजना की कल्पना की।

ये नरेन्द्र मोदी की है सोच और कल्पना की परिणति है कि आज पांच लाख रूपये तक कैशलैस इलाज के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना संचालित हो रही है। देश में कोई गरीब, असहाय, निर्बल व्यक्ति भूखा न रहे, इसके प्रधांनमंत्री ने “गरीब कल्याण अन्न वितरण योजना” आरम्भ की है। इसमें 80 करोड़ लोगों को निशुक्ल खाद्यान्न वितरित किया  जा रहा है। इस देश में अन्न दाता की पहचान हमेशा कर्जदार की रही। किसानों के लिए जो भी योजनाएं बनती थीं उनमें कर्ज ही शामिल होता था। किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार यह निर्णय किया कि किसान की आवश्यकता के लिए बगैर कर्ज, बगैर वापसी की मांग वाली सहायता प्रदान की  जाए। इसी सोच से प्रारम्भ हुई “प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना 2019”। इसमें किसान को प्रति चार महीने में दो हजार की सहायता प्रदान की जा रही है। यानि वर्ष में छह हजार रूपये मिल रहे हैं। इस पैसे को वापस नहीं करना होता है। योजना में लगभग 10 करोड़ किसान परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। जनधन खाता, नोट बंदी, जीएसटी और यूपीआई की क्रांति ऐसी योजनाएं हैं जिन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति में योगदान तो किया ही है। हम विश्व के सामने भी अपना मस्तक ऊंचा कर खड़े हैं कि हम अर्थ के क्षेत्र में विश्व के अन्य देशों से अच्छा सोच सकते हैं और उसे लागू करके सफल भी कर सकते हैं।

भारत की स्वतंत्रता के समय सबसे बड़ा त्याग करने वाले समाज को न्याय दिलाने का काम भी नरेन्द्र मोदी ने ही किया है। जो हिन्दू, सिख, बौदध, जैन और ईसाई विभाजन के समय भारत आये थे, उनमें से बहुत से लोग ऐसे थे जिन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली थी। इसके अलावा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बंगलादेश में अनेक लोग नारकीय जीवन जी रहे थे। उन्हें भारत की नागिरकता देने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) भी मोदी जी ने किया। तीन तलाक को भी कानून बनाकर समाप्त किया। पडोसी देश को कड़ी जबाव देने के लिए भारत सरकार ने कठोर फैसले लिये और सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की। आपरेशन सिंदूर से सबक सिखाया। नारी शक्ति बंदन अधिनियम से देश की आधा आबादी को राजनीतिक अधिकार प्रदान करने शासन व्यवस्था में समान अवसर प्रदान करने की पहल भी नरेन्द्र मोदी के ऐतिहासिक फैसलों में शामिल है।

एक साधारण परिवार में जन्मे व्यक्ति की अद्भभुत और अकल्पनीय सफलताओं के पीछे की शक्ति कौन सी है। इसे जानने के लिए मोदी के आरंभिक जीवन को भी जानना होगा। उनका बचपन साधारण परिवार, साधारण व्यवसाय करने वाले पिता के साथ कार्य करना, संघ का प्रचारक होना और फिर संयास, आध्यात्म की उत्कृष्टता से परिचय करने के लिए हिमालय की यात्रा का संकल्प। इन्ही में छिपी है वह जिजीविषा जिसने बालक नरेद्र को लोकमान्य, लोकरक्षक नरेन्द्र मोदी बनाया है। प्रार्थना है कि ईश्वर की अपार अनुकंपा से वे ईशावास्योपनिषद् के इस दूसरे श्लोक को चरित्रार्थ करें- “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः”।

लेखक परिचयः सर्वेश कुमार सिंह

स्वतंत्र पत्रकार, लखनऊ

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

September 14, 2026

मुरादाबाद की फैक्ट्री में भीषण आग

मुरादाबाद, आज 14 सितंबर 2026, सोमवार को कटघर थाना क्षेत्र के रामपुर दोराहा पर स्थित आरएच इंटरनेशनल (RH International) नाम की एक Wooden हैंडीक्राफ्ट और लैंप बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लग गई है। दोपहर करीब 11:30 से 12:00 बजे के बीच अचानक उठी आग की लपटों ने देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है घटनास्थल: कटघर थाना क्षेत्र के रामपुर दोराहा स्थित निर्यातक मोहम्मद तसलीम की वुडेन हैंडीक्राफ्ट फर्नीचर में राहत और बचाव कार्य जारी। ‌‌‌ आग इतनी विकराल थी कि आसमान में धुएं का भारी गुबार छा गया। सूचना मिलते ही स्थानीय फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। आग की गंभीरता को देखते हुए मुरादाबाद जिले की सभी दमकल गाड़ियों के साथ-साथ पड़ोसी जिले रामपुर से भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मदद के लिए बुलाया गया है। दमकलकर्मी और राहत टीमें लगातार आग पर काबू पाने की मशक्कत में जुटी हुई हैं। फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है और जांच की जा रही है।

मातृभाषा का सम्मान सर्वोपरि- संजीव त्यागी

14 सितम्बर ऊप्रससे
बस्ती।हिन्दी दिवस के अवसर पर पूर्वांचल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विकास संस्थान के तत्वावधान में सोमवार को प्रेस क्लब बस्ती के सभागार में विचार गोष्ठी एवं सारस्वत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक बस्ती परिक्षेत्र संजीव त्यागी रहे। वरिष्ठ पत्रकार जयंत मिश्रा, अनुराग श्रीवास्तव एवं महेन्द्र तिवारी ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीआईजी संजीव त्यागी ने वर्तमान परिवेश में हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मातृभाषा अपनी अंतरात्मा की अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत में करोड़ों लोग हिन्दी बोलते और समझते हैं, जिससे हिन्दी एक बड़े जनसमूह की भाषा बन चुकी है। हिन्दी पूरे देश में व्यापक रूप से बोली, समझी और जानी जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी हिन्दी को स्थान मिल रहा है, जो इसके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मातृभाषा का सम्मान सदैव सर्वोपरि रहना चाहिए।
भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र ने हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मातृभाषा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करने और समाज में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के हिन्दी साहित्य में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न दौर में अंग्रेजी को बढ़ावा मिला, लेकिन हिन्दी की विकास यात्रा कभी रुकी नहीं। उन्होंने कहा कि हिन्दी के विकास की यात्रा को रोक पाना असंभव है। यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहनी चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सत्यव्रत एवं मजहर आजाद ने हिन्दी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हिन्दी का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने बस्ती जनपद की हिन्दी साहित्यिक परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्ती की धरती साहित्यकारों से समृद्ध रही है। यहां के अनेक साहित्यकारों ने हिन्दी के विकास और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वरिष्ठ पत्रकार जयंत मिश्रा ने कहा कि मातृभाषा के माध्यम से व्यक्ति अपनी भावनाओं और विचारों को सहजता से व्यक्त कर सकता है। हिन्दी से जुड़े करोड़ों लोग अपने दैनिक बोलचाल और कार्यव्यवहार में इसका प्रयोग करते हैं। हिन्दी की विकास यात्रा को और गति देने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप चन्द्र पाण्डेय ने कहा कि प्रत्येक भाषा का अपना महत्व है। जिस प्रकार प्रत्येक नदी का अपना स्वरूप और विशेषता होती है, उसी प्रकार हिन्दी की अपनी विशिष्ट पहचान है। हिन्दी हमारी मातृभाषा है और इसे जन-जन की भाषा बनाने के लिए व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिन्दी दिवस केवल औपचारिक आयोजन का अवसर नहीं, बल्कि हिन्दी के प्रति सम्मान और संकल्प का उत्सव है।
कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार आलोक त्रिपाठी, राजेश चित्रगुप्त, अंजुम परवीन, बीएन शुक्ला सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। संस्थान के अध्यक्ष महेन्द्र तिवारी ने कहा कि हिन्दी निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। इसे और समृद्ध एवं व्यापक बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
कार्यक्रम का संचालन प्रेस क्लब अध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय ने किया। उन्होंने बस्ती जनपद के हिन्दी साहित्य की समृद्ध परम्परा का परिचय कराते हुए हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाने और दैनिक जीवन में अधिकाधिक अपनाने का आह्वान किया।
प्रसिद्ध शायर एवं कवि सलीम बस्तवी ने अपनी रचना ‘इस देश की सरहद की निगहबान है हिन्दी’ प्रस्तुत कर हिन्दी और राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना को और प्रबल किया। कवि अजीत श्रीवास्तव ‘राज’, राजेन्द्र सिंह ‘राही’, तेज प्रकाश शुक्ला, श्रीमती अंजू वर्मा सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। डॉ. वीके वर्मा ने हिन्दी पर आधारित अपनी रचना सुनाते हुए लोगों से हिन्दी को अधिकाधिक अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि कृष्णदेव मिश्र ने की। उन्होंने कहा कि हिन्दी के विकास एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और साहित्यकारों व समाज के सभी वर्गों को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
समारोह में वरिष्ठ पत्रकार केडी मिश्र, आलोक त्रिपाठी, कवि दीपक सिंह ‘प्रेमी’, तेजप्रकाश शुक्ला, राजेन्द्र सिंह ‘राही’, सलीम बस्तवी ‘अजीजी’, अजीत श्रीवास्तव ‘राज’, डॉ. वीके वर्मा, बाल कवि गरिमा श्रीवास्तव, श्रीमती अंजु वर्मा (हिन्दी प्रवक्ता, जीजीआईसी) तथा अंजुम परवीन (हिन्दी प्रवक्ता, बेगम खैर गर्ल्स इंटर कॉलेज) को प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर पत्रकार अनिल कुमार श्रीवास्तव, गोकरन नारायण पाण्डेय, सर्वेश श्रीवास्तव, राकेश चन्द्र श्रीवास्तव ‘बिन्नू’, सुनील सोनी, प्रमोद श्रीवास्तव, मो. कलीम, विपिन मिश्रा, सुनील मिश्र, पारसनाथ मौर्य, गणेश प्रसाद, ब्रह्मसेवक पाण्डेय, रमेश मिश्र, अमित सिंह, संतोष तिवारी, राजेश कुमार ओझा, विश्राम प्रसाद, रत्नेन्द्र पाण्डेय, विकास चौधरी, अजय पाल सिंह, रामसजन, कमीश मिश्र, इन्द्रभूषण चौबे, दिनेश कुमार पाण्डेय, हनुमान प्रसाद, दिलीप सिंह, शैलेन्द्र कुमार, राधेकृष्ण द्विवेदी, देवानन्द पाण्डेय, केशवराम पाण्डेय, संध्या दीक्षित, रामअधार पाल, चन्द्रभूषण श्रीवास्तव, मनोज यादव, अर्जुन उपाध्याय, रत्नेश कुमार श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार पाण्डेय, दिनेश सिंह, लालू प्रसाद यादव, अरुण कुमार, कर्मचन्द्र यादव, वीर कुमार तिवारी, डॉ. नवीन सिंह, प्रमोद श्रीवास्तव, तवरेज आलम, राजकुमार श्रीवास्तव, चन्द्रप्रकाश शर्मा, अमरेश पाण्डेय, वरुण सिंह, विजय कुमार श्रीवास्तव, देवेन्द्र पाण्डेय, गणेश सोनी, संतोष पाल, अनिल सिंह, आनन्द कुमार गुप्ता, कृष्ण कुमार उपाध्याय, अभिनय कुमार दूबे, लवकुश यादव, दिलीप कुमार पाण्डेय, राजेन्द्र उपाध्याय, लवकुश सिंह, रजनीश त्रिपाठी, अश्वनी कुमार शुक्ल, कृष्ण चन्द्र शुक्ल, शहनशाह आलम, बृजवासी लाल शुक्ला, बृजमोहन शुक्ल, शिवप्रकाश गौड़, शिवराज सिंह, अनिल कुमार द्विवेदी, राहुल त्रिपाठी, हरिओम प्रकाश ‘लल्ला’, श्रीप्रकाश गुप्ता, राकेश सिंह, राजन कन्नौजिया, रितेश कन्नौजिया, इमरान अहमद अंसारी, आशुतोष नारायण मिश्र, जयप्रकाश उपाध्याय, वशिष्ठ पाण्डेय, अजय कुमार श्रीवास्तव, विकास कुमार पाठक, लालजी चौधरी, सुमित कुमार, महेश तिवारी, राजेश मिश्र, संतोष श्रीवास्तव, पंकज सिंह, अतुल कुमार सोनी, राहिल पाण्डेय, विवेक श्रीवास्तव, जयप्रकाश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
संवाददाता जयंत कुमार मिश्रा

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