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लोकतंत्र की धरोहर बन जाएगी रामनाथ कोविंद की आत्मकथा: मोदी

August 12, 2026

लोकतंत्र की धरोहर बन जाएगी रामनाथ कोविंद की आत्मकथा: मोदी

नई दिल्ली, 12 अगस्त 26, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “ट्रायम्‍फ ऑफ इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्‍ट्रगल्‍स” का विमोचन किया। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमें श्री राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा का विमोचन करने का अवसर मिला है और मुझे प्रसन्‍नता है कि मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सका।”

प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपने गहरे व्यक्तिगत संबंध का समरण करते हुए कोविंद जी के मार्गदर्शन और वर्षों से उनके स्नेह के प्रति अपने गहरे सम्मान को रेखांकित किया। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी के साथ मेरा लंबा परिचय, उन्हें निकटता से जानने का सौभाग्य, राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और सबसे बढ़कर, मेरे प्रति उनका विशेष स्नेह और आत्मीयता, ये सब मेरे लिए सबसे बड़ी संपत्ति रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तित्व और क्षमताओं की गहराई की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह साहित्यिक कृति राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों का एक चिरस्थायी प्रमाण होगी। श्री मोदी ने कहा, “मैं पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूं कि राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा स्वयं भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बन जाएगी।”

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के प्रति कोविंद जी के आजीवन योगदान की विशालता की सराहना करते हुए और इस बारे में अधिक विवरण न देते हुए लोगों को स्वयं इस वृत्तांत को जानने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने कहा कि पुस्तक विमोचन में केवल एक परिचयात्मक प्रस्तुति ही होनी चाहिए और बेहतर यही है कि आप सभी पुस्तक को पढ़कर ही इसका पूरा लाभ उठाएं।

प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी के लिए इस संस्मरण के शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूर्व राष्ट्रपति के शब्दों से भावी पीढ़ियों को प्रेरणा लेने की इच्छा जताई। श्री मोदी ने कहा, “देश की नई पीढ़ी को भी उनके लेखन और अनुभवों को पढ़ना चाहिए, जिससे सभी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।”

पुस्तक के शीर्षक, “ट्रायम्‍फ ऑफ इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्‍ट्रगल्‍स” का विश्लेषण करते हुए, प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत कठिनाइयों और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक सफलता के संदर्भ में इसके दोहरे महत्व की व्याख्या की। श्री मोदी ने कहा, “जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के फलस्वरूप प्राप्त विजय भारत गणराज्य और उसके लोकतंत्र की है।”

प्रधानमंत्री ने आम मानवीय प्रवृत्तियों की तुलना पूर्व राष्ट्रपति की उदारता से करते हुए कहा कि जहां कई लोग अपनी कठिनाइयों के लिए समाज को दोषी ठहराते हैं, वहीं कोविंद जी का उदार हृदय, जो भारतीय मूल्यों में गहराई से निहित है, समाज को अपनी सफलता में समान भागीदार मानता है। श्री मोदी ने कहा, “जब हृदय उदार होता है और भारतीय मूल्य समाहित होते हैं, तो व्यक्ति समाज की कमियां ढूंढने में समय नष्‍ट नहीं करता, बल्कि उसके सकारात्मक पक्ष पर ध्यान केंद्रित करता है।”

प्रधानमंत्री ने आत्मकथा से बचपन की एक अत्‍यंत दुखद घटना का उल्‍लेख करते हुए, जब कानपुर देहात में घर में लगी आग में कोविंद जी की मां घर के आवश्‍यक सामान को बचाने की कोशिश कर रही थीं, उनकी जान चली जाने का हृदयविदारक वृतांत सुनाया। श्री मोदी ने कहा, “आप कल्पना कीजिए कि इतनी कम उम्र में ऐसी घटना होना और मां को खो देना कितना कष्‍टदायक रहा होगा!”

इस त्रासदी से उपजी दृढ़ता को उजागर करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे एक पड़ोसी महिला ने मां की तरह कोविंद जी के पालन-पोषण में सहायता की, जिसने सामाजिक सद्भाव के प्रति उनकी समझ को गहराई से प्रभावित किया। श्री मोदी ने कहा, “इससे उन्होंने समाज की एकता और सद्भाव की शक्ति को समझा और उन कठिनाइयों ने कोविंद जी को और भी मजबूत बनाया।”

प्रधानमंत्री ने इस त्रासदी के बाद पिता की अहम भूमिका पर बल देते हुए बताया कि कोविंद जी के पिता ने परिवार का कुशलतापूर्वक मार्गदर्शन किया और बच्चों में अच्छे संस्कार डाले। श्री मोदी ने कहा, “जिस तरह उन्होंने परिवार को संभाला और बच्चों को अच्छे संस्कार दिए, उसी वजह से कोविंद जी अपने पिता को अपना आदर्श मानते हैं।”

प्रधानमंत्री ने अपने संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए कोविंद जी द्वारा शिक्षा पर की गई निर्भरता का उल्लेख करते हुए, देश के सर्वोच्च पद तक उनकी असाधारण यात्रा पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने कड़ी मेहनत की और संसाधनों की कमी को अपनी दुर्बलता नहीं बनने दिया, जिसके परिणामस्वरूप वे उस स्‍थान तक पहुंचे जिसकी उस समय लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी।”

प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति की अटूट विनम्रता की प्रशंसा करते हुए एक अत्यंत भावुक क्षण का स्‍मरण किया जब कोविंद जी ने अपने गांव परौंख लौटकर वहां की मिट्टी को प्रणाम किया और अपने पूर्व शिक्षकों के चरण स्पर्श किए। श्री मोदी ने कहा, “उनके आचरण ने भारत के मूल्यों की ऐसी छवि विश्व के समक्ष प्रस्तुत की जिस पर प्रत्येक भारतीय गर्व कर सकता है।”

प्रधानमंत्री ने सदियों की दासता से उत्‍पन्‍न ऐतिहासिक सामाजिक-आर्थिक आघातों पर विचार करते हुए, महात्मा गांधी, बाबासाहेब अंबेडकर और ज्योतिबा फुले जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के अथक संघर्षों और दूरदर्शी सपनों को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा, “कितने महान व्यक्तित्वों ने ऐसे भारत के पुनर्निर्माण का सपना देखा था, जहां सबसे निर्धन व्यक्ति को भी सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिल सके।”

प्रधानमंत्री ने इन ऐतिहासिक आकांक्षाओं को आधुनिक उपलब्धियों से जोड़ते हुए, कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों को समतावादी समाज के सदियों पुराने सपने को अथक परिश्रम से साकार करने का श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने परिश्रम और क्षमता से न केवल अपना जीवन बदला, बल्कि सदियों पुराने उस सपने को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित युवाओं की निरंतर आवश्यकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने ऐसी पीढ़ी का आह्वान किया जो बाधाओं से विचलित न हो और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की राह बनाने का साहस बनाए रखे। श्री मोदी ने कहा, “इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा।”

प्रधानमंत्री ने आत्मकथा को महत्वपूर्ण प्रेरक साधन बताते हुए सुझाव दिया कि कोविंद जी के जीवन का विस्तृत विवरण युवा शक्ति को आकार देने के लिए एक निर्णायक मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा। श्री मोदी ने कहा, ” कोविंद जी की यह आत्मकथा ऐसी युवा शक्ति के निर्माण के लिए आवश्यक प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।”

प्रधानमंत्री ने कोविंद जी के राजनीतिक उदय का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि कैसे मोरारजी देसाई के साथ काम करने से उनकी राष्ट्र सेवा की अंतर्निहित इच्छा को राजनीति में एक समर्पित करियर में परिवर्तित होने का अवसर मिला। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी के भीतर जो राष्ट्र सेवा की भावना थी, मोरारजी के साथ काम करके उन्हें उसके लिए एक मार्ग मिल गया।”

प्रधानमंत्री ने सेवा के निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए संसद में, राज्यपाल के रूप में और अंततः राष्ट्रपति के रूप में विभिन्न भूमिकाओं में कोविंद जी के अटूट समर्पण की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने सेवा को अपना लक्ष्य बनाकर कार्य किया और संसद में उनका कार्यकाल इसका साक्षी है।”

ग्रीन काॅरिडोरः बैकुण्ठ धाम ब्रिज पर नवम्बर 2026 से फर्राटा भरेंगे वाहन

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने परियोजना का निरीक्षण कर कार्य में तेजी लाने के दिये निर्देश

– *बैकुण्ठ धाम से क्रिकेट स्टेडियम तक बनेगा 2.3 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर, अगले माह से शुरू होगा कार्य*

ग्रीन काॅरिडोर परियोजना के अंतर्गत गोमती नदी पर निर्मित किये जा रहे बैकुण्ठ धाम ब्रिज पर जल्द ही वाहन फर्राटा भरेंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बुधवार को परियोजना का निरीक्षण करके नवम्बर, 2026 तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। इस ब्रिज के बनने से निशातगंज से डालीबाग व हजरतगंज के मध्य सफर काफी आसान हो जाएगा और बड़ी आबादी को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि बैकुण्ठ धाम के पास गोमती नदी पर लगभग 70 करोड़ रूपये की लागत से 330 मीटर लंबा 6-लेन ब्रिज निर्मित किया जा रहा है। इसके बनने से समतामूलक और 1090 चौराहे पर ट्रैफिक का लोड काफी कम हो जाएगा। निशातगंज से डालीबाग व हजरतगंज की ओर जाने वाले लोग ब्रिज के माध्यम से सीधे सफर तय कर सकेंगे। बुधवार को स्थल निरीक्षण करके कार्य की प्रगति की समीक्षा की गयी, जिसमें पाया गया कि लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि सम्बंधित अधिकारियों को कार्य की गति बढ़ाकर नवम्बर, 2026 तक ब्रिज तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। काम पूरा होते ही आवागमन के लिए ब्रिज खोल दिया जाएगा।

*1090 चौराहे पर बनेगा 2.3 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर*
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि ग्रीन काॅरिडोर परियोजना के अंतर्गत बैकुण्ठ धाम से रिवर फ्रंट, क्रिकेट स्टेडियम के मध्य लगभग 2.3 किलोमीटर लंबा 4-लेन फ्लाईओवर निर्मित किया जाना है। लगभग 293 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले इस फ्लाईओवर के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो गयी है। सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कार्यदायी संस्था से अनुबंध करके अगले माह से फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाए।

*बैकुण्ठ धाम से कनेक्ट होगा फ्लाईओवर*
उपाध्यक्ष ने बताया कि फ्लाईओवर का निर्माण कार्य बैकुण्ठ धाम ब्रिज के एप्रोच प्वाइंट से ही शुरू कराया जाएगा। भविष्य में फ्लाईओवर बनने पर इसे बैकुण्ठ धाम ब्रिज से सीधा कनेक्ट कर दिया जाएगा, जिससे कि ग्रीन काॅरिडोर पर ट्रैफिक को बिना अवरोध गति प्रदान की जा सकेगी। निरीक्षण में एलडीए के मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह, पीआईयू के प्रभारी ए0के0 सिंह सेंगर, अधिशासी अभियंता अजीत कुमार एवं मनोज सागर समेत अन्य अधिकारी व अभियंता उपस्थित रहे।

मुंबई में भू स्खलन से 7 लोगों की मृत्यु

मुंबई, 12 अगस्त 26, आज सुबह घाटकोपर पश्चिम के चिराग नगर स्थित एक चॉल में भूस्खलन होने से सात लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। यह घटना सुबह लगभग 3 बजकर 48 मिनट पर हुई, जब एक छोटी पहाड़ी से मिट्टी और मलबा चॉल के दो से तीन कमरों पर गिर गया।

भूस्खलन के बाद राहत और बचाव कार्य चलाया गया, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगम, दमकल विभाग, पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया के लगभग 50 कर्मी शामिल थे। घायलों का इलाज कुर्ला भाभा अस्पताल और राजावाड़ी अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने घटनास्थल का दौरा किया और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये और प्रत्येक घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि मानसून से पहले ही संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क किया गया था और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई थी।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित

संसद

नई दिल्ली, 12 अगस्त 26, संसद ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा ने आज इसे मंजूरी दे दी। लोकसभा पहले ही इस विधेयक को पारित कर चुकी है। सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने यह विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में और संशोधन करना है। यह विधेयक राज्य सरकारों को सहकारी विकास में लगी किसी भी संस्था को निगम से निधि प्रदान करने की भी अनुमति देता है। निगम किसी भी सहकारी समिति या सहकारी विकास में लगी संस्था को सीधे ऋण और अनुदान भी प्रदान कर सकता है।

चर्चा का उत्तर देते हुए श्री मोहोल ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से देश भर के करोड़ों किसानों के कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम- एन.सी.डी.सी की स्थापना देश में सहकारी क्षेत्र के संगठित और सतत विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। श्री मोहोल ने कहा कि 1963 में एन.सी.डी.सी की स्थापना से लेकर 2014 तक, पिछली सरकार ने केवल लगभग 45 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की थी। हालांकि, 2014 से लेकर पिछले 12 वर्षों में वित्तीय सहायता बढ़कर लगभग चार लाख करोड़ रुपये हो गई है।

श्री मोहोल ने कहा कि आज देश में आठ लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं, जिनसे लगभग 3 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि 80 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है और उन्हें लगभग 25 विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने में सक्षम बनाया गया है। श्री मोहोल ने बताया कि सहकारी क्षेत्र को प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन प्रदान करने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। श्री मोहोल ने कहा कि इस संस्थान के माध्यम से अगले पांच वर्षों में लगभग 17 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल पांच वर्षों में सहकारी क्षेत्र में 163 से अधिक प्रमुख पहलें की गई हैं।

भाजपा के डॉ. रामराव वाडकुटे ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने सहकारी समितियों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों का आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से सशक्त बनाया गया है।

विधेयक का समर्थन करते हुए, वाईएसआरसीपी के गोल्ला बाबूराव ने कहा कि एन.सी.डी.सी का विस्तार एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से डेयरी और मत्स्य पालन सहित कई क्षेत्रों को अधिक पूंजी और आधुनिक अवसंरचना मिलेगी।

जनता दल (यूनाइटेड) के संजय कुमार झा ने विधेयक का समर्थन किया। श्री झा ने कहा कि विधेयक से न केवल उत्पादों को बल्कि भंडारण और मूल्य श्रृंखला को भी समर्थन मिलेगा।

तेलुगु देशम पार्टी के विजय चिंतकयाला और शिवसेना की ज्योति वाघमारे ने भी विधेयक के समर्थन में बात की।

यूपी में रंग दे बसंती अभियान शुरू, छात्रों ने बनाए चित्र

लखनऊ, 12 अगस्त 26, स्वतंत्रता दिवस से पहले आज उत्तर प्रदेश में युवाओं की रचनात्मकता को अभिव्यक्ति देने के लिए ‘रंग दे बसंती’ अभियान शुरू किया गया। इसके अंतर्गत लखनऊ विश्वविद्यालय के पास भित्तिचित्र कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहर के कलाकारों ने माफिया मुक्त और बदलते उत्तर प्रदेश की थीम पर सार्वजनिक भित्तिचित्र बनाए। इन चित्रों के माध्यम से वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश और उसके बाद   हुए बदलावों को दर्शाया गया।

कलाकारों ने राज्य में कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और युवाओं के लिए अवसरों के संदर्भ में बदले हुए सकारात्मक वातावरण को चित्रित किया।

अभियान के अंतर्गत कल मुजफ्फरनगर में एक कॉमिक वितरण और संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित एक मौलिक कॉमिक वितरित की जाएगी। इसके साथ ही स्कूलों में युवाओं के साथ संवाद भी आयोजित किए जाएंगे। 14 अगस्त को ‘रंग दे बसंती’ अभियान का गीत ‘आज़ादी फ्रॉम फियर’ लॉन्च किया जाएगा।

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