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25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा का पर्याय बना टीएमयू

September 14, 2026

25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा का पर्याय बना टीएमयू

TMU

Teerthankar Mahaveer University Moradabad

एक कॉलेज से शुरू हुई यात्रा ने 16 हजार से अधिक स्टुडेंट्स वाली यूनिवर्सिटी का रूप लिया, 14 सितंबर को 26वें वर्ष में मंगल प्रवेश

वर्ष 2001 में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तीर्थंकर महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (टीएमआईएमटी) कॉलेज से शुरू हुई तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू), मुरादाबाद की शैक्षणिक यात्रा 14 सितंबर 2026 को अपने 25 वर्ष पूर्ण कर 26वें वर्ष में मंगल प्रवेश कर लिया है। ढाई दशक की यह यात्रा केवल संस्थागत विस्तार की कहानी नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, नवाचार, कौशल विकास, रोजगार, खेल, सामाजिक उत्तरदायित्व और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्र में निरंतर उपलब्धियों की यात्रा रही है। करीब 130 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विस्तृत हरे-भरे परिसर में आज देश के लगभग सभी प्रमुख राज्यों के साथ नेपाल और भूटान सहित विभिन्न क्षेत्रों के 16 हजार से अधिक स्टुडेंट्स शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के विभिन्न संस्थानों में 850 से अधिक अनुभवी शिक्षक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवम् रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने में जुटे हैं। जरूरतमंद, मेधावी और जैन स्टुडेंट्स के लिए आकर्षक छात्रवृत्ति योजनाएं भी संचालित हैं।

एक कॉलेज से यूनिवर्सिटी तक का सफर

वर्ष 2001 में कंप्यूटर, मैनेजमेंट, साइंस और तकनीकी पाठ्यक्रमों के साथ शुरू हुई यह यात्रा वर्ष 2005 में डेंटल कॉलेज और वर्ष 2008 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के साथ चिकित्सा शिक्षा तक पहुंची। इसी वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार से यूनिवर्सिटी की स्थापना को मंजूरी मिली। आज टीएमयू में डेंटल, मेडिकल, फार्मेसी, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, पैरामेडिकल साइंसेज, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, मैनेजमेंट, लॉ, फिजिकल एजुकेशन, एजुकेशन, फाइन आर्ट्स और एग्रीकल्चर सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षा उपलब्ध है। यूनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेजों के माध्यम से लगभग 150 स्नातक एवं परास्नातक व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और तकनीकी विकास को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रमों तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतर अपडेट किया जा रहा है।

रोजगारपरक शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर

टीएमयू की शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य स्टुडेंट्स को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार और उद्यमशीलता के लिए तैयार करना रहा है। तकनीकी ज्ञान, व्यक्तित्व विकास, अंग्रेजी भाषा में दक्षता और व्यावहारिक कौशल के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। वर्ष 2019 में स्टुडेंट्स के व्यावहारिक अंग्रेजी ज्ञान को और मजबूत करने के लिए परिसर में सीटीएलडी विभाग की स्थापना की गई। देश और दुनिया में उद्योगों की बदलती जरूरतों पर नजर रखते हुए स्टुडेंट्स को इंडस्ट्री एक्सपोजर, औद्योगिक भ्रमण, गेस्ट लेक्चर और प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। देश की प्रमुख कंपनियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि कैंपस में प्लेसमेंट के लिए पहुंचते हैं। टीएमयू के अनेक पूर्व स्टूडेंट्स देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।

शिक्षा के संग चिकित्सा सेवा भी बनी पहचान

टीएमयू की प्रमुख उपलब्धियों में शिक्षा के साथ चिकित्सा सेवा का विस्तार भी शामिल है। यूनिवर्सिटी से संबद्ध टीएमयू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर एवम् मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों के लिए निशुल्क उपचार, बेड और भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वर्ष 2008 से अब तक लाखों मरीजों का उपचार एवम् पंजीकरण किया जा चुका है और बड़ी संख्या में जांच एवम् ऑपरेशन किए गए हैं। टीएमयू मेडिकल कॉलेज में 250 एमबीबीएस सीटें हैं, जबकि सर्जरी सहित 13 विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को मान्यता प्राप्त है।

कोविड काल में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

कोविड-19 महामारी के दौरान टीएमयू अस्पताल को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लेवल-3 कोविड अस्पताल घोषित कर अधिग्रहित किया गया था। उस समय मुरादाबाद मंडल में टीएमयू मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त कोई अन्य लेवल-3 अस्पताल नहीं था। महामारी के दौरान टीएमयू अस्पताल द्वारा प्रदान की गई सेवाओं की प्रदेश स्तर पर सराहना हुई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भी यूनिवर्सिटी प्रबंधन एवम् चिकित्सा टीम के प्रयासों की प्रशंसा की गई।

नवाचार और उद्यमशीलता को संस्थागत आधार

टीएमयू ने स्टुडेंट्स में नवाचार और उद्यमशीलता की संस्कृति विकसित करने के लिए संस्थागत स्तर पर कई पहल की हैं। यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट इन्नोवेशन काउंसिल को शिक्षा मंत्रालय के इन्नोवेशन सेल की मेंटर-मेंटी योजना के अंतर्गत पांच प्रतिष्ठित संस्थानों को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए 2.25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली। बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर स्टुडेंट्स के नए विचारों को स्टार्टअप और वास्तविक उद्यम में बदलने के लिए मार्गदर्शन, संसाधन और वित्तीय सहयोग उपलब्ध करा रहा है। सेंटर को स्टार्टइन यूपी, एमएसएमई, डीएसटी-आईटीबीआई और एमईआईटीवाई से मान्यता प्राप्त है। यूनिवर्सिटी की उपलब्धियों में पेटेंट, शोध, प्लेसमेंट और नवाचार भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से साझेदारी

टीएमयू ने स्टुडेंट्स को वैश्विक अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विदेशी यूनिवर्सिटीज एवम् संस्थानों के साथ शैक्षणिक साझेदारियां स्थापित की हैं। ड्यूल डिग्री, ज्वाइंट डिग्री, क्रेडिट ट्रांसफर और स्टुडेंट एक्सचेंज जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्टुडेंट्स को अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर दिया जा रहा है। फिलीपींस, ब्राजील, फ्रांस और यूके के संस्थानों सहित विभिन्न विदेशी संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर आईआईटी इंदौर, दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन और आईआईटी चेन्नई-मेकर भवन फाउंडेशन सहित प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी सहयोग किया गया है।

खेलों और समग्र विकास का प्रमुख केंद्र

टीएमयू परिसर में स्टुडेंट्स के लिए राष्ट्रीय स्तर की इंडोर और आउटडोर खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं। यूनिवर्सिटी परिसर में रणजी ट्रॉफी, कूच बिहार ट्रॉफी, सीके नायडू ट्रॉफी, राष्ट्रीय पुरुष एवं महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप और राष्ट्रीय कैरम चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताएं आयोजित हो चुकी हैं। स्टुडेंट्स के समग्र विकास के लिए छात्रावास, भोजनालय, पुस्तकालय, वातानुकूलित ऑडिटोरियम, जिम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल मैदान, अंतर्राष्ट्रीय स्तर का इंडोर स्टेडियम और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। दिसंबर ,2022 में शुरू की गई लीडरशिप टॉक सीरीज के माध्यम से स्टुडेंट्स को देश-दुनिया के विशेषज्ञों एवम् प्रख्यात व्यक्तित्वों से सीधे संवाद का अवसर मिल रहा है।

संस्कार, संस्कृति और आध्यात्मिकता का समन्वय

आधुनिक एवम् तकनीकी शिक्षा के साथ टीएमयू ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों को भी महत्व दिया है। परिसर में जैन वाटिका और जिनालय के साथ पर्युषण पर्व जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्टुडेंट्स  में अनुशासन, आध्यात्मिकता, नैतिक मूल्यों और सामुदायिक एकता की भावना विकसित करने का प्रयास किया जाता है। जैन स्टुडेंट्स के लिए धार्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

देश की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने की यूनिवर्सिटी की सराहना

टीएमयू की विकास यात्रा में पूर्व राष्ट्रपति एवं मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, श्रीश्री रविशंकर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पद्म पुरस्कार प्राप्त विभूतियों, राज्यपालों, केंद्रीय एवम् राज्य मंत्रियों, फिल्मी सितारों, संगीतज्ञों, नृत्यांगनाओं, थिएटर कलाकारों और खिलाड़ियों की सहभागिता रही है। यूनिवर्सिटी के भव्य इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना करते हुए एएमयू के तत्कालीन कुलपति एवम् सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने एक अवसर पर कहा था, एएमयू ने 100 वर्षों में भी जितना इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं किया, उतना टीएमयू ने अपेक्षाकृत कम समय में हासिल कर लिया। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने टीएमयू के भव्य परिसर को देखकर इच्छा व्यक्त की थी कि काश वे भी टीएमयू के स्टुडेंट होते।

एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन यूनिवर्सिटी के भविष्य का ख़ाका खींचते हुए बताते हैं, टीएमयू एआई एजुकेशन, एआई टेक्नोलॉजीज, स्टार्टअप्स, इन्नोवेशन में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यूएनओ के सतत विकास लक्ष्य के 17 बिंदुओं को आत्मसात करने को यूनिवर्सिटी संकल्पित है। क्वालिटी एजुकेशन के प्रति प्रतिबद्ध है। इन उपलब्धियों के बूते यूनिवर्सिटी विश्व की टॉप 100 रैंकिंग में स्थान पाने के लिए लक्षित है। टाइम्स रैंकिंग में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है। यूनिवर्सिटी भविष्य में क्यूएस रैंकिंग में भी अपना स्थान बनाना चाहती है।

कुलाधिपति श्री सुरेश जैनः रोजगारपरक शिक्षा हमारी सफलता का मूलमंत्र

कुलाधिपति सुरेश जैन ने कहा, टीएमयू की सफलता का मूलमंत्र विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा, यूनिवर्सिटी की स्थापना से ही यह सोच रही है, ऐसे पाठ्यक्रम संचालित किए जाएं, जिन्हें पूरा करने के बाद स्टुडेंट्स बेहतर रोजगार प्राप्त करने के साथ अपना कारोबार या स्टार्टअप भी शुरू कर सकें। उच्च शिक्षित एवं अनुभवी शिक्षक छोटे कस्बों से लेकर महानगरों तक के स्टुडेंट्स को आधुनिक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान, व्यक्तित्व विकास और अंग्रेजी भाषा में दक्षता के साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है।

ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैनः टीएमयू एक संकल्प है

ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन ने कहा, टीएमयू एक संकल्प है और सिद्धांतों की आधारशिला है। इसी विचार के साथ टीएमयू ने अपनी स्थापना से अब तक की यात्रा सभी के सहयोग और स्नेह से पूरी की है। आने वाले समय में भी हम सब साथ मिलकर इस सफलता की यात्रा के नए अध्यायों के साक्षी बनेंगे।

एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैनः शैक्षणिक गुणवत्ता हमारी सबसे बड़ी पूंजी

एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने कहा, युवाओं को बदलते समय की तकनीक के साथ आत्मनिर्भर बनाना टीएमयू की प्राथमिकता है। यूनिवर्सिटी में नवाचार और कौशल विकास को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, एआई, रोबोटिक्स और उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं पर यूनिवर्सिटी की लगातार नजर है। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय एवम् अंतर्राष्ट्रीय एमओयू, रैंकिंग, पेटेंट, प्लेसमेंट और इंडस्ट्री कनेक्ट के क्षेत्र में यूनिवर्सिटी ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उद्योग जगत के विशेषज्ञ समय-समय पर गेस्ट लेक्चर के लिए यूनिवर्सिटी आते हैं और स्टुडेंट्स को इंडस्ट्री एक्सपोजर प्रदान करने के लिए नियमित औद्योगिक भ्रमण भी कराए जाते हैं। श्री जैन ने कहा कि शैक्षणिक गुणवत्ता ही तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी पूंजी है।

26वें वर्ष में नई उड़ान

14 सितंबर 2026 को 25 वर्ष पूर्ण कर 26वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी टीएमयू अब अपनी विकास यात्रा के अगले चरण की ओर बढ़ रही है। गुणवत्तापूर्ण एवम् रोजगारपरक शिक्षा, चिकित्सा सेवा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमशीलता, वैश्विक सहयोग, खेल और संस्कारों के समन्वय के संग यूनिवर्सिटी का लक्ष्य स्टुडेंट्स को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना और उन्हें राष्ट्रीय एवम् वैश्विक स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितंबर को जनपदभर में होंगे विविध कार्यक्रम

 49 हजार से अधिक दीप जलाने का लक्ष्य

हाथरस, 13 सितंबर। जनपद में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। अभियान के पहले दिन ‘सेवा दिवस-आशीर्वाद का दिया’ थीम पर जिला, तहसील, विकासखंड, नगर निकाय और ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिलाधिकारी ने कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

अभियान के तहत जिला अस्पताल, सीएचसी सादाबाद, सासनी और सिकंदराराऊ में रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे तथा मरीजों को फल वितरित किए जाएंगे। तहसील स्तर पर विश्वकर्मा टूलकिट वितरण कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। सायंकाल ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे जनपद में 49,509 दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कलेक्ट्रेट, विकास भवन, पुलिस लाइन, श्री दाऊजी महाराज मंदिर, शहीद स्मारक, गांधी पार्क, ग्राम पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों, अमृत सरोवर, विद्यालयों, अस्पतालों तथा विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर दीप जलाए जाएंगे। जिलाधिकारी ने अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करने और कार्यक्रमों के फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के निर्देश दिए हैं।

हिंदी दिवस पर डॉ. मीनू शर्मा ने उठाई हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की मांग

हाथरस। हिंदी दिवस के अवसर पर गढ़ी तमना निवासी संस्कृत विषय में पीएचडी प्राप्त विदुषी डॉ. मीनू शर्मा ने हिंदी भाषा के गौरव और महत्व पर प्रकाश डालते हुए केंद्र सरकार से हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और भावनाओं की आत्मा है, जो देश की विविधता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि विश्व के करोड़ों लोग हिंदी बोलते और समझते हैं, जिससे यह दुनिया की प्रमुख भाषाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया था, जो भारतीय भाषाई विरासत के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने साहित्यकारों, कवियों और हिंदी प्रेमियों से आह्वान किया कि वे हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग का संकल्प लें और इसे अपनी अस्मिता एवं स्वाभिमान का प्रतीक मानकर सम्मान दें।

शिक्षा सुधार के लिए एसबीआई ने दी 25 लाख की सहायता

लखनऊ,14 सितंबर, 2026 को भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक ने सीएसआर के तहत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, लखनऊ को रु 25.00 लाख का चेक भेंट किया।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के प्रबंध निदेशक श्री रवि रंजन ने दिनांक 14 सितंबर, 2026 को लखनऊ मण्डल की अपनी यात्रा के दौरान हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, लखनऊ को ₹25.00 लाख का चेक भेंट किया। यह योगदान बैंक की कॉर्पोरेट सामाजिक सेवा उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत किया गया।

इस वित्तीय सहायता का उपयोग लखनऊ में 10 प्राथमिक सरकारी स्कूलों के उन्नयन के लिए किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य जिले में शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और बच्चों के सीखने के लिए बेहतर माहौल प्रदान करना है।

इस अवसर पर, श्री रवि रंजन ने कहा, “यह योगदान शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने और बच्चों के समग्र विकास एवं उच्च साक्षरता दर को सुनिश्चित करने में उन्नत मार्ग प्रशस्त करेगा।

इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक श्री दिपेश राज, महाप्रबंधक श्री विमल किशोर, महाप्रबंधक-प्रथम, श्री राजीव कुमार, महाप्रबंधक द्वितीय- और श्री कौशलेंद्र कुमार, महाप्रबंधक – तृतीय, भारतीय स्टेट बैंक, लखनऊ मण्डल भी उपस्थित रहें।

हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, लखनऊ के संस्थापक और प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल एवं न्यासी डॉ रूपल अग्रवाल ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

सीएसआर की यह सार्थक पहल सामुदायिक कल्याण और सुलभ शिक्षा के प्रति एसबीआई की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

September 13, 2026

ब्रिक्स सिर्फ़ देशों का समूह नहीं है, बल्कि समाधानों का पारिस्थितिकीतंत्र है: मोदी

नई दिल्ली 13 सितम्बर 2026, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि ब्रिक्स सिर्फ़ देशों का समूह नहीं है, बल्कि समाधानों का पारिस्थितिकीतंत्र है और पिछले दो दिनो की चर्चाओं ने इस विश्वास को और मज़बूत किया है।

श्री मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर सत्र में आशा प्रकट की कि ब्रिक्स सम्मेलन में स्वीकार किया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ साझा विज़न और भविष्य के सहयोग के लिए स्पष्ट दिशा देगा। उन्होंने सभी परिणामों को समय-सीमा के भीतर ऐसे कार्यों में बदलने की ज़रूरत पर बल दिया जिनका ज़मीनी स्तर पर असर दिखाई दे। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि ब्रिक्स का ढांचा कागज़ी कार्रवाई से आगे बढ़कर असल ज़िंदगी में ठोस असर डाले।

श्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। दुनिया अब इस समूह से ठोस परिणामों की आशा करती है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सामूहिक प्रयासों से निश्चित रूप से इन उम्मीदों पर खरा उतरेगा। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के अगले अध्यक्ष के तौर पर चीन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नई दिल्ली सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी ब्रिक्स देशों, सहयोगी देशों और उनकी टीमों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने नेताओं की सक्रिय भागीदारी और बहुमूल्य योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि नेताओं के महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने सहयोग को व्यापक और प्रगाढ बनाया है। उन्‍होंने कहा कि उनकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती अहमियत, खुलेपन और समावेशिता का प्रमाण है।

इससे पहले सम्मेलन के खुले सत्र में श्री मोदी ने कहा कि महामारियों, जलवायु संबंधी आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं ने यह दिखा दिया है कि परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने कहा कि इसीलिए ब्रिक्स देशों ने इस समूह के भीतर लचीलापन और संकटों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ विषय पर आयोजित सत्र में प्रधानमंत्री ने चुनौतियों की समय पर पहचान, पहले से तैयारी और तत्काल कदम उठाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ‘ब्रिक्स एकीकृत पूर्व चेतावनी प्रणाली’  पर आम सहमति बन गई है। श्री मोदी ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए भी ‘पूर्व चेतावनी डेटा एकीकरण दिशानिर्देश’ तैयार कर लिए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने आगाह किया है कि प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियार की तरह प्रयोग प्रगति के मार्ग में बड़ी बाधा बन सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों ने नई तकनीकों को अपनाने में समावेशिता पर विशेष जोर दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे उद्यमों को ज्ञान, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के लिए ‘ब्रिक्स-एम.एस.एम.ई. सहयोग पोर्टल’ स्थापित करने की पहल का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, शहरों के बीच बेहतर तौर-तरीकों को साझा करने की सुविधा के लिए ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ का गठन किया गया है। श्री मोदी ने बताया कि स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ‘ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र’ की स्थापना की गई है, जो स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को अधिक विश्वसनीय, कुशल और सुलभ बनाने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स के भीतर विकसित समाधानों के लाभों को ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुसार ढाला और उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ‘ब्रिक्स रसद आपूर्ति श्रृंखला सहयोग प्रारूप’ आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विश्वसनीय और सुदृढ़ बनाने में मदद करेगा। नवाचार के तहत, ‘ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क’ स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को आपस में जोड़ेगा। उन्होंने बताया कि भारत ने नए और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधानों को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स स्टार्टअप नवाचार कोष’ का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही, ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर’ से किसानों के लिए नए अवसर सृजित होंगे, जिसके जरिए एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल बनाया जाएगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स सहयोगी देशों के नेताओं का स्वागत किया। इन नेताओं में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग, सऊदी अरब के विदेश मंत्री युवराज फैसल बिन फरहान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतरश शामिल हैं। सामूहिक फोटो सत्र के बाद, सभी नेता इस समय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार’ विषय पर आधारित मुख्य सत्र में भाग ले रहे हैं।

ब्रिक्स के दस सहयोगी देशों में बेलारूस, बोलिविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। सत्र के समापन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कजाखस्तान, फिलीपींस, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका और बुरुंडी के राष्ट्रपतियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इसके अलावा, वह नाइजीरिया और युगांडा के उपराष्ट्रपतियों के साथ भी बैठकें करेंगे। यह शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्य विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है।

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन से अलग मिस्र के राष्ट्रपति अबदुल फत्ताह अस्सीसी के साथ बैठक की।श्री मोदी कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोक़ायेफ, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और बुरुंडी के राष्ट्रपति एवारिस्ते इंदायिशिमिये के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करने वाले हैं। इसके अलावा, वे नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टिमा और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो के साथ भी बैठकें करेंगे।

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