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Kanpur Dehat: रक्षाबंधन पर दर्दनाक हादसा: दो बाइकों की भिड़ंत में 3 की मौत, 2 गंभीर

August 29, 2026

Kanpur Dehat: रक्षाबंधन पर दर्दनाक हादसा: दो बाइकों की भिड़ंत में 3 की मौत, 2 गंभीर

ACCIDENT

कानपुर देहात। सिकंदरा थाना क्षेत्र में रक्षाबंधन के दिन दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने भिड़ंत में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इटखुदा मोड़ के पास राजपुर मार्ग पर दोपहर करीब 2 बजे हुआ। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुणे विमर्श, राहुल भारत को भी इटली बना देना चाहते हैं!

(राहुल गांधी के भाषण में परिलक्षित इतालवी माचिस्मो, पाश्चात्य अति-व्यक्तिवाद और सांस्कृतिक विखंडन)

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी

अभी इसी माह 22 अगस्त को पुणे, महाराष्ट्र में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा जनरेशन-जेड की छात्राओं और युवतियों के बीच जिस आक्रामक शैली में “पितृसत्ता को ध्वस्त करने” और महिलाओं को “किसी की संपत्ति न होने” का आह्वान किया, वह पहली नजर में महिलाओं के अधिकारों के प्रति एक प्रगतिशील झुकाव लगता है, परंतु, यदि इस भाषण की वैचारिक परतों, प्रयुक्त शब्दावलियों और इसके पीछे छिपे आर्थिक-सांस्कृतिक दर्शन का गहनता से अध्‍ययन किया जाए, तो इसमें एक गहरा अंतर्विरोध और खतरनाक प्रतिमान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसका उद्देश्‍य भारत की समाज व्‍यवस्‍था को तोड़ना है।

इसे लेकर आप यह भी कह सकते हैं कि राहुल गांधी का यह भाषण वास्तव में भारत की गौरवशाली और सुरक्षात्मक परिवार व्यवस्था पर पाश्चात्य ‘हाइपर-इंडिविजुअलिज्म’ (अति-व्यक्तिवाद) और ‘बाजारवादी नारीवाद’ को थोपने का एक सुनियोजित प्रयास है। यह विचारधारा स्त्री को उसकी सांस्कृतिक जड़ों, पारिवारिक बंधनों और सामूहिक मर्यादाओं से पूरी तरह काटकर उसे बाजार के लिए एक स्वतंत्र, अकेली और असुरक्षित आर्थिक इकाई में तब्दील करना चाहती है। इसलिए वे भारतीय परिवारों के परस्पर पूरकता के सिद्धांत को ‘शोषक व्यवस्था’ बता रहे हैं।

पुणे में राहुल गांधी ने छात्राओं से कहा कि वे समाज द्वारा तय किए गए बंधनों के खिलाफ “मुखर और निडर” बनें। इस बयान की अंतर्निहित भावना सीधे तौर पर पश्चिमी ‘कल्चरल मार्क्सवाद’ से प्रेरित है। पारंपरिक मार्क्सवादी दर्शन जहाँ समाज को अमीर और गरीब के आर्थिक संघर्ष में बांटता था, वहीं ‘कल्चरल मार्क्सवाद’ इसी वर्ग-संघर्ष को परिवार के भीतर पति-पत्नी, पिता-पुत्री और भाई-बहन के पवित्र संबंधों पर लागू कर देता है।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में इसी सिद्धांत को हवा दी है, जहाँ उन्होंने परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा दिए जाने वाले पारंपरिक स्नेह और ‘संरक्षण’ को एक ‘दमनकारी सत्ता’ या ‘अधीनता’ के रूप में चित्रित किया। जबकि भारतीय दर्शन के अनुसार, परिवार एक ऐसी जैविक इकाई है जहाँ पुरुष और महिला एक-दूसरे के ‘पूरक’ हैं। पुणे का भाषण इस पूरकता के सिद्धांत पर आघात करता है और युवतियों के मन में यह धारणा पैदा करने की कोशिश करता है कि उनके अपने माता-पिता या परिवार द्वारा लगाई गई नैतिक मर्यादाएं उनके विकास में बाधा हैं। यह सोच अंततः परिवार के भीतर अविश्वास और विखंडन का बीज बोती है।

वस्‍तुत: जब पाश्चात्य ‘कल्चरल मार्क्सवाद’ के चश्मे से परिवार के स्नेहपूर्ण संरक्षण और नैतिक सीमाओं को ‘बंधक’ या ‘शोषण’ मान लिया जाता है, तो परिवार के भीतर अविश्वास जन्म लेता है। स्वतंत्रता की इस अति-आक्रामक परिभाषा से प्रेरित होकर युवतियां अनजाने में अपने ही माता-पिता, पति या पारिवारिक मूल्यों से विच्छेद (अलग) होने लगती है। इसका तात्कालिक परिणाम यह होता है कि महिलाओं को समाज में सुरक्षा देने वाला सदियों पुराना पारिवारिक ढांचा कमजोर हो जाता है।

भारतीय संस्कृति का विकृतिकरण और बाजार का एजेंडा

राहुल गांधी ने पुणे में जोर देकर कहा, “आप अपने अलावा किसी और की नहीं हैं। आप किसी की संपत्ति नहीं हैं।” यह वाक्य सुनने में आकर्षक लगता है, परंतु यह भारतीय सामाजिक परंपराओं का एक घोर विकृतिकरण है। क्‍योंकि पारंपरिक बंधन में स्त्री को परिवार की धुरी माना गया है। लेकिन जब कोई स्‍त्री परिवार के संबंधों को बंधन मान कर तोड़ देती है ओर अपने परिवार से विच्‍छेद करती है तब वह फिर बाजार के हाथों में खेलने लगती है।

बाजार चाहता है कि स्त्री परिवार की धुरी न रहे, वह बच्चों की परवरिश और घर के बुजुर्गों की देखभाल जैसी “बिना भुगतान वाली” भूमिकाओं को छोड़कर 12 घंटे कॉर्पोरेट दफ्तरों में श्रम करे। इस प्रकार, परिवार से कटी हुई महिला बाजार के लिए एक ‘सस्ती श्रमिक’ और कॉस्मेटिक्स, फैशन व उपभोक्ता वस्तुओं की एक ‘बड़ी खरीदार’ बन जाती है। यह स्त्री की मुक्ति कैसे हो सकती है, यह तो उसका बाजारवादी कहीं दोहन तो कहीं शोषण है!

दूसरी ओर भारतीय संस्कृति है, जिसमें कभी भी स्त्री को ‘पुरुष की कानूनी संपत्ति’ नहीं माना गया। सनातन परंपरा में स्त्री को ‘गृहलक्ष्मी’, ‘अर्धांगिनी’ और ‘शक्ति’ का सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जब राहुल गांधी इस व्यवस्था को ‘संपत्ति की मानसिकता’ कहते हैं, तो वे वास्तव में पाश्चात्य और मध्यकालीन यूरोपीय इतिहास की बुराइयों को भारतीय समाज पर थोप रहे होते हैं, क्योंकि यूरोप के रोमन कानून में महिलाओं को सचमुच पुरुष की कानूनी संपत्ति माना जाता था और बहुत हद तक आज भी माना जाता है, (कैथोलिक इटली, जहां से इनकी मां हैं आज भी आसानी से देखा जा सकता है)

सोनिया गांधी की इतालवी विरासत: ‘माचिस्मो’ का अहंकार और दोहरा मापदंड

यह अत्यंत विचारणीय तथ्य है कि राहुल गांधी भारत की जिस पितृसत्ता को ध्वस्त करने की बात पुणे के मंच से कर रहे थे, उसका वास्तविक और कठोर रूप उनकी अपनी माता सोनिया गांधी के मूल देश इटली में आज भी सांख्यिकीय रूप से मौजूद है। परंतु, राहुल गांधी ने कभी भी इतालवी समाज या कैथोलिक ईसाई पंथ के भीतर मौजूद महिला दमन पर कोई टिप्पणी नहीं की, जो उनके पुरुष अहंकार और राजनीतिक चयनात्मकता को उजागर करता है।

इतालवी सांख्यिकी संस्थान (आईएसटीएटी) और यूरोपीय संघ के वर्ष 2025-2026 के आंकड़ों के अनुसार, इटली में आज भी 43 फीसद महिलाएँ कार्यबल से पूरी तरह बाहर हैं, इटली में जेंडर पे गैप 17.4 प्रतिशत तक है, जहाँ एक ही पद पर काम करने के बावजूद महिलाओं को पुरुषों से कम वेतन मिलता है। इटली में तलाक की दर लगभग 48.3 फीसद है, जो यह दर्शाती है कि जिस पाश्चात्य ‘बाजारवादी मुक्ति’ और अति-व्यक्तिवाद का मॉडल राहुल गांधी भारत में लाना चाहते हैं, उसने इटली के पारिवारिक ताने-बाने को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। क्या राहुल गांधी पुणे की युवतियों को ऐसा समाज देना चाहते हैं जहाँ हर दूसरा परिवार टूटा हुआ हो और महिलाएँ अकेलेपन व मानसिक तनाव से जूझ रही हों?

भारत बनाम इटली में महिला सुरक्षा का यथार्थ

पुणे के भाषण में राहुल गांधी ने भारत की सामाजिक व्यवस्था को महिलाओं के लिए एक दमनकारी संरचना के रूप में पेश किया। परंतु, यदि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या के अनुपात (प्रति लाख आबादी पर दर) के आधार पर भारत और इटली की तुलना करें, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि पश्चिमी देशों का सामाजिक ढांचा महिलाओं के लिए कहीं अधिक असुरक्षित और हिंसक है।

विश्‍व सांख्यिकी (जैसे संयुक्त राष्ट्र यूएनओडीसी, यूरोपीय संघ की एफआरए 2026 रिपोर्ट और भारत की एनसीआरबी 2024–2026 रिपोर्ट) के अनुसार भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध की राष्ट्रीय दर 64.6 मामले प्रति एक लाख महिला जनसंख्‍या पर हैं। दूसरी ओर यूरोपीय संघ (ईयू) के देशों में जनसंख्या के अनुपात में वार्षिक दर्ज अपराधों की औसत दर लगभग 125 मामले प्रति एक लाख महिला जनसंख्‍या है। यह दर भारत से कहीं अधिक है। यानी यौन हिंसा, अन्‍य जितने भी महिला उत्‍पीड़न एवं हिंसा के प्रकार हो सकते हैं, युरोप उन सभी अपराध मामलों में भारत से कई गुना आगे है। पाश्चात्य समाज में महिलाओं के खिलाफ घरेलू और यौन हिंसा का प्रतिशत अधिक है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत की पारंपरिक परिवार व्यवस्था, जिसे राहुल गांधी पुणे में कोस रहे थे, वास्तव में महिलाओं को एक अत्यंत मजबूत सुरक्षात्मक कवच प्रदान करती है।

राहुल गांधी का वैचारिक खोखलापन

पुणे के भाषण में राहुल गांधी ने एक बार फिर पारंपरिक हिंदू व्यवस्था और प्राचीन ग्रंथों को निशाने पर लिया, परन्‍तु वे भारत और दुनिया भर में इस्लाम और ईसाइयत के भीतर मौजूद संस्थागत महिला दमन पर पूरी तरह मौन रहे। यह चुप्पी सिद्ध करती है कि उनका यह विमर्श सिर्फ राजनैतिक ध्रुवीकरण के लिए था।

यदि राहुल गांधी महिलाओं की पूर्ण स्वतंत्रता के इतने ही बड़े पक्षधर हैं, तो वे मुस्लिम महिलाओं को शरिया कानून के तहत पैतृक संपत्ति में मिलने वाले असमान अधिकारों और बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं पर पुणे में क्यों नहीं बोले? जब भारत की संसद ने मुस्लिम महिलाओं को नारकीय जीवन से मुक्ति दिलाने के लिए ‘तीन तलाक’ के खिलाफ कानून बनाया, तो राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने उसके खिलाफ मतदान क्‍यों किया । अरे, इतिहास में जाएं तो उनके पिता राजीव गांधी ने भी शाहबानों प्रकरण में यही किया था!

इसी तरह, वेटिकन और कैथोलिक चर्च के वे नियम जो महिलाओं को आज भी पादरी बनने के अधिकार से वंचित करते हैं और गर्भपात जैसी आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों पर पूर्ण रिलीजियस प्रतिबंध लगाते हैं, सच कहें तो उन पर राहुल गांधी की चुप्पी उनके वैचारिक दोहरे मापदंड को उजागर करती है। यह चयनात्मकता दर्शाती है कि वे सिर्फ और सिर्फ हिंदू महिलाओं को उनकी सामाजिक परंपराओं से अलग करना चाहते हैं।

ऐसे में कहना यही होगा कि पुणे में राहुल गांधी द्वारा दिया गया भाषण भारतीय सामाजिक मूल्यों को नष्ट करके एक विघटनकारी पाश्चात्य बाजारवादी मॉडल को स्थापित करने का प्रयास है। स्त्री को उसके परिवार से पूरी तरह मुक्त कर देने का नारा सुनने में तो आकर्षक हो सकता है, पर इसका अंतिम परिणाम समाज का विखंडन, अकेलेपन का संकट और महिलाओं की सुरक्षात्मक प्रणाली का ध्वस्त होना है, जैसा कि इटली और अन्य यूरोपीय देशों के आंकड़े साबित करते हैं। लगता भी यही है कि राहुल गांधी भारत को भी अपनी मां के देश इटली जैसा बना देना चाहते हैं, जिसमें स्‍त्री हिंसा और दमन अपने चरम पर है।

रक्षाबन्धन के दृष्टिगत रानी लक्ष्मीबाई महिला विंग एवं यातायात पुलिस द्वारा 50 हेल्मेट वितरित

शाहजहांपुर—( संजीव गुप्त)

आज क्षेत्राधिकारी यातायात एवं टीएसआई द्वारा खिरनीबाग चौराहा, शाहजहाँपुर पर रानी लक्ष्मीबाई महिला विंग शाहजहाँपुर के सौजन्य से सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता के दृष्टिगत हेल्मेट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बिना हेल्मेट दोपहिया वाहन चलाने वाले 50 वाहन चालकों को हेल्मेट वितरित कर हेल्मेट धारण करने एवं यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया गया। क्षेत्राधिकारी यातायात रनवीर सिंह ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेल्मेट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें तथा स्वयं के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी शाहजहाँपुर के आदेशानुसार आगामी 29 अगस्त 2026 से वृहद हेल्मेट चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। अतः सभी दोपहिया वाहन चालक हेल्मेट धारण कर ही वाहन चलाएं तथा यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करें। रानी लक्ष्मीबाई महिला विंग शाहजहाँपुर की संस्थापिका श्रीमती नमिता सिंह ने रक्षाबन्धन के अवसर पर आमजन से अपील की कि जिस प्रकार भाई-बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं, उसी प्रकार हेल्मेट धारण कर स्वयं की सुरक्षा का भी संकल्प लें। प्रेसिडेंट स्तुति गुप्ता ने कहा कि हेल्मेट वितरण कार्यक्रम को रक्षाबन्धन पर्व के दृष्टिगत आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य आमजन को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने सभी से यातायात नियमों का पालन करने तथा अपने परिजनों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।

60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को आजीवन निःशुल्क बस यात्रा का तोहफा

रक्षाबंधन पर माताओं-बहनों-बेटियों को सहयात्री सहित 27 से 29 अगस्त तक मुफ्त बस यात्रा

शाहजहांपुर, 26 अगस्त।( संजीव गुप्त) मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ स्थित जुपिटर हॉल, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 60 वर्ष एवं उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की साधारण बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान करने वाली ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विशेष बसों को फ्लैग ऑफ किया गया। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण शाहजहांपुर के गांधी भवन सभागार में देखा गया।

जनपद में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के माननीय वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना जी रहे। इस दौरान लोकसभा सांसद अरुण कुमार सागर, एमएलसी डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता, ददरौल विधायक अरविंद कुमार सिंह, महापौर अर्चना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष ममता यादव, महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि रक्षाबंधन से पूर्व प्रदेश की माताओं और बहनों को माननीय मुख्यमंत्री जी ने बड़ा उपहार दिया है। ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना’ के तहत प्रदेश की 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को परिवहन निगम की साधारण बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। प्रदेश की एक करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना से लाभान्वित हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि अब बुजुर्ग माताएं बिना यात्रा व्यय की चिंता के तीर्थाटन करने और अपने परिजनों से मिलने के लिए निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी।

उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर प्रदेश की माताओं, बहनों एवं बेटियों को एक सहयात्री सहित परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी दी जा रही है। यह सुविधा 27 अगस्त को प्रातः 6 बजे से 29 अगस्त की रात्रि 12 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत छह चरणों में 25 हजार रुपये दिए जा रहे हैं और अब तक करीब 27 से 28 लाख बेटियां लाभान्वित हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ ही सब्सिडी, अनुदान और ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से अब तक पांच लाख से अधिक बेटियों का विवाह कराया जा चुका है। सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति अभियान भी संचालित किया जा रहा है।

लोकसभा सांसद अरुण कुमार सागर ने कहा कि 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी महिलाओं को आजीवन निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देना मुख्यमंत्री का सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार माताओं और बहनों के हित में योजनाएं संचालित कर उन्हें लाभ पहुंचाने का कार्य कर रही है। बेटियों की शिक्षा से लेकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और विवाह तक सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रही है।

ददरौल विधायक अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु की माताओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि सामान्य परिवारों की बुजुर्ग महिलाओं को यात्रा के दौरान आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब वे बिना किसी खर्च की चिंता के यात्रा कर सकेंगी। सरकार महिलाओं की हर क्षेत्र में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है।

महापौर अर्चना वर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को सहयात्री सहित निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलने से बहनों को अपने भाइयों के घर जाने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को आजीवन निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलना महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्य अतिथि द्वारा महिलाओं को मिष्ठान एवं साड़ी उपहार में भेंट की गई।

इस अवसर पर जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन रजनीश कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जयशंकर श्रीवास्तव, एआरटीओ प्रशासन सर्वेश कुमार सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन हरिओम, पीटीओ आरपी गौतम, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अरुण कुमार सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

 

August 28, 2026

नेपाल बाढ़ में मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भी लापता, 300 भारतीयों से संपर्क टूटा

कोलकाता: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड की त्रासदी के बीच पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय की बहू और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सुभ्रांशु रॉय की पत्नी शर्मिष्ठा भौमिक रॉय भी लापता हैं। वह कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गई थीं।
शर्मिष्ठा 32 सदस्यीय उस पर्यटक दल का हिस्सा थीं, जो 21 अगस्त को कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुआ था। बाढ़ की चपेट में आने के बाद इस दल के 31 सदस्यों से संपर्क नहीं हो पाया। एक यात्री को सुरक्षित बचा लिया गया है।
परिवार के मुताबिक, शर्मिष्ठा से आखिरी बार 25 अगस्त की रात संपर्क हुआ था। उस समय वह आपदा प्रभावित क्षेत्र से करीब 10 किलोमीटर दूर थीं। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया और परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो सका। सुभ्रांशु रॉय ने बताया कि वह प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं और उनकी पत्नी की तलाश की जा रही है।
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद करीब 300 भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की है। भारतीय अधिकारियों की ओर से राहत और बचाव एजेंसियों के साथ समन्वय कर लापता लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

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