Web News

www.upwebnews.com

पहले चंपतराय को जाने

June 18, 2026

पहले चंपतराय को जाने

Posted on 18.06.2026, Thursday, Champatray Vishva Hindu Parishad, aSecretary General Shri Ram Janmbhumi Teerth Kshetra Trust Ayodhya
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे को लेकर चर्चा है। सच क्या है एसआईटी जांच रिपोर्ट में पता चलेगा। लेकिन मीडिया, सोशल मीडिया में कई नामों को आरोपित किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने ट्रस्ट, संघ और भाजपा को निशाना बनाया है। ये उनकी भविष्य की रणनीति है। संदेह पैदा हुआ है तो सच सामने आना चाहिए।
मुझे सिर्फ चंपत जी के बारे में बात करनी है। वह भी इसलिए कि बगैर किसी आधार, तथ्य और प्रमाण के उन पर आरोप लगाए जा रहे है। आज अखिलेश यादव ने एक वीडियो शेयर किया है,जिसमें आल्हा की तर्ज पर इस प्रकरण को किसी गायक से तैयार कराया गया है। इसमें सीधे चंपत जी को आरोपित करके उनकी मानहानि की गई है। इस गायक और शेयर करने वालों को एसआईटी जांच रिपोर्ट के बाद अपनी गलती का अहसास होगा।
मैं चंपत जी को केवल पत्रकार के रूप में नहीं एक विद्यार्थी और शिक्षार्थी के रूप में 49 साल से जानता हूं। यानी कि 1977 से जब मैं 11वीं का छात्र था। उस समय चंपत जी संघ में थे, लेकिन प्रचारक नहीं थे। वे धामपुर (बिजनौर) के आरएसएम डिग्री कॉलेज में फिजिक्स के प्रवक्ता था। यानी डिग्री कॉलेज में वेतनभोगी। उन्होंने 1980 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन विभाग प्रचारक (मुरादाबाद) ओमप्रकाश जी की प्रेरणा से प्रचारक जीवन स्वीकार किया। जिस दिन ओमप्रकाश जी ने उनसे कहा नौकरी छोड़ दो उसी दिन उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। प्रचारक बन गए। संघ ने परंपरा के विपरीत उन्हें सीधे देहरादून का जिला प्रचारक बनाया। संघ में आमतौर पर कोई सीधे जिला प्रचारक नहीं बनता है। वे नगीना के बेहद सामान्य परिवार से है, परिवार में उनके बड़े भाई इंजीनियर से सेवानिवृत्त हुए है। अगर चंपत जी को धन की लालसा होती तो वे नौकरी में रहते। आज डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल से सेवानिवृत्त होते।
1977 से मेरा चंपत जी से परिचय आरम्भ हुआ और आज तक यथावत है। मैने उन्हें जिस सादगी में 1977 के एक प्रशिक्षण में अमरोहा में जैसे देखा, वैसे ही आज भी है। कम लोग जानते है कि जब 1984 में दिल्ली की धर्म संसद के बाद श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को विश्व हिंदू परिषद ने अपने हाथ में लिया, तो संघ से अशोक सिंहल जी समेत कई प्रचारक विहिप में भेजे गए थे। उनमें चंपत जी भी थे। उन्हें पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रांत का संगठन मंत्री बनाया गया था। इस आंदोलन से प्रत्यक्ष रूप में अनेक नाम जुड़े है लेकिन पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाने, क्रियान्वित करने, मुकदमों की सिस्टेमेटिक पैरवी करने, तथ्य एकत्रित करने का काम चंपत जी ने किया। सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमे की हर तारीख से पहले वकीलों की दिल्ली में बैठके कराते थे। मैं उन दिनों दिल्ली में था।
विश्व हिन्दू परिषद पर 2017-18 में ऐतिहासिक संकट आया था। जब कार्यकारी अध्यक्ष डॉ प्रवीण तोगड़िया जी के साथ नेतृत्व का टकराव हुआ। उस संकट से विहिप को चंपत जी के नेतृत्व ने ही उबारा था। जिस दिन डा तोगड़िया जी ने आरके पुरम कार्यालय पहुंचने की घोषणा की थी। उस दिन में संयोग से वहीं था।
चंपत जी विहिप में उपाध्यक्ष भी है। वे अशोक जी के अध्यक्ष रहते उनके साथ संगठन महामंत्री और महामंत्री भी रहे। अशोक जी का उन पर अटूट विश्वास था। उनके संघ और विहिप में प्रचारक जीवन पर कोई आरोप प्रत्यारोप कभी प्रमाणित नहीं हो सकता क्योंकि उनका लक्ष्य संगठन कार्य रहा है, धन कमाना होता तो शिक्षक की नौकरी का त्याग नहीं करते।
श्रीराम मंदिर निर्माण की नींव रखी जाने से लेकर उसकी पूर्णता और प्राण प्रतिष्ठा पूर्ण कराने तक उन्होंने जिस मनोयोग और विज्ञान के शिक्षक होने के नाते कौशल से कार्य पूर्ण कराया है उसके लिए उनका अभिनंदन किया जाना चाहिए। चंपत राय होना आसान नहीं है, एक जीवन होम करने के बाद कोई चंपतराय होता है।
मुझे अपने साथियों से भी आग्रह करना है। हमें सूचना देनी है और ये धर्म भी है और व्यवसायिक दायित्व भी। लेकिन तथ्यों के साथ ही। अतिशयोक्ति और सुनी हुई बातों को प्रकाशित करने से पहले जांच परख भी लेना चाहिए। मैं अपने निजी विश्वास से कह सकता हूं कोई भी जांच हो जाए, चंपत जी की निष्ठा और ईमानदारी निःसंदेह है।
सर्वेश कुमार सिंह, पत्रकार लखनऊ

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति से मुलाकात की

Posted Date:- Jun 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति महामहिम श्री डोनाल्ड जे. ट्रम्प से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रम्प के उन प्रयासों की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने और व्यापक क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बहाल करने पर एक सहमति बनी है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और अबाधित वाणिज्य को बनाए रखने के महत्व तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

दोनों नेताओं ने फरवरी 2025 में वाशिंगटन डी.सी. में हुई अपनी बैठक के बाद से भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट (कॉम्पैक्ट: कैटलाइजिंग अपॉर्चुनिटीज फॉर मिलिट्री पार्टनरशिप, एक्सेलरेटेड कॉमर्स एंड टेक्नोलॉजी) के तहत हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने रक्षा, रणनीतिक तकनीकों, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में हुई मुख्य प्रगति का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में वार्ता में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर विशेष संतोष व्यक्त किया और अपने अधिकारियों को जल्द-से-जल्द एक संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यावसायिक रूप से सार्थक समझौते की दिशा में काम करने का निर्देश दिया। इस सिलसिले में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, श्री जेमिसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा दोनों देशों एवं उनके नागरिकों के पारस्परिक लाभ के लिए सभी क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

जी 7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में “सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास की ओर बढ़ने” पर सत्र को संबोधित किया

Posted Date:- Jun 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में “सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास की ओर बढ़ने” पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।

शिखर सम्मेलन में साझा और टिकाऊ विकास पर विशेष रूप से ध्‍यान देने की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया अनिश्चितताओं से प्रभावित है, टिकाऊ विकास का संदेश दुनिया भर में सार्थक रूप से स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास का मतलब सिर्फ़ सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) या व्यापार के आंकड़े नहीं होने चाहिए, बल्कि लोगों के समावेश और भलाई पर इसका वास्तविक असर पड़ना चाहिए। इस संदर्भ में, उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के सिद्धांतों पर आधारित भारत की समावेशी विकास की गाथा पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने कहा कि समावेशी विकास का भारत का मंत्र उसकी अंतरराष्ट्रीय सहभागिताओं का भी मार्गदर्शन करता है, जिसका स्पष्ट प्रतिबिंब भारत की जी-20 अध्यक्षता में “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के आदर्श वाक्य के रूप में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार का दृष्टिकोण भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की परिकल्पना का भी आधार रहा है, जिसका उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना, निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करना तथा नवाचार को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि संकटों और संघर्षों का वैश्विक दक्षिण के देशों पर गंभीर और प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने इन देशों पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को ऐसे सहायता तंत्र विकसित करने चाहिए, जो विकासशील देशों को आर्थिक लचीलापन प्रदान कर सकें।

प्रधानमंत्री ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीपीय देशों को जोड़ने वाली संपर्क परियोजनाओं पर भी विचार करने का आग्रह किया, जो आईएमईसी की तर्ज पर विकसित की जा सकें। इस कल्‍पना को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री ने “सम्‍पर्क और व्यापार में तेजी लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय लामबंदी साझेदारी” या इम्‍पैक्‍ट के गठन का सुझाव रखा जिसमें जी-7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ के स्वामित्व को जोड़ा जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने स्थिर, विश्वसनीय और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि एकीकरण, साझेदारी और साझा प्रगति में भारत के विश्वास ने उसे जी-7 सदस्य देशों तथा अनेक अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते करने के लिए प्रेरित किया है।

ReleasePDF

Prime Minister’s Office

प्रधानमंत्री ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान, ‘इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित किया

Posted Date:- Jun 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में “इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के ‘मानव’ (MANAV) विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक देशों के पास ऐसी एआई मॉडल तक पहुँच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए। इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को ‘सेफ-बाय-डिजाइन’ (निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षित) होना चाहिए; एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए; डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों तक पहुँचना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।

हमारा संकल्प है कि गोमाता को कटने नहीं देंगे: योगी आदित्यनाथ

News Posted on 18.06.2026 Time 06.28 PM, Kanpur, Natural Farming , Yogi Adityanath, UP News Kanpur

कुछ लोग गाय का दूध पिएंगे और सड़क पर छोड़ देंगे, जब वह फसल का नुकसान करेगी तो दोष मुझे देंगे: सीएम योगी

कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ में गोसंरक्षण के लाभ बताए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया

मुख्यमंत्री ने कहा- देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होने देंगे

भारत में जन्मा हर व्यक्ति गोमाता की पूजा करता है और अपने परिवार का हिस्सा मानता है: सीएम योगी

कानपुर, 18 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग गाय का दूध पिएंगे, फिर उन्हें सड़कों पर बेसहारा छोड़ देंगे और जब ये गाय फसलों का नुकसान करेंगी तो दोष मुझे देंगे। हमारा संकल्प व संस्कार है कि गोमाता को कटने नहीं देंगे और देश की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने देंगे। उन्होंने सिख गुरुओं के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई आक्रांता या कसाई गोहत्या करता था, तो सिख वीर उसका वहीं काम तमाम कर देते थे। यह उस कालखंड की बात है, जब देश गुलाम था और लोग विदेशी आक्रांताओं के साये में जीवन व्यतीत कर रहे थे।

कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ को संबोधित करते हुए
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का कोई ऐसा सनातन धर्मावलंबी नहीं होगा, जो गोमाता की उपासना न करता हो, उसे अपने जीवन व परिवार का हिस्सा न मानता हो। गोमाता आधारित खेती न केवल कृषि को सशक्त बनाती है, बल्कि गोमाता की रक्षा भी करती है। साथ ही, यह हम सभी को पुण्य का भागीदार भी बनाती है।

*विदेशियों की नकल ने भारत को पीछे धकेला*
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से 2000 वर्ष पहले भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। मुगलों की लूटपाट के बावजूद भारत की ग्लोबल इकॉनमी में हिस्सेदारी 24 प्रतिशत तक थी। जब तक भारत किसानों, व्यापारियों, नौजवानों और आधी आबादी के सामर्थ्य पर विश्वास करता रहा, तब तक देश समृद्धि की ऊंचाइयों को प्राप्त करता रहा। लेकिन, जब हमने विदेशियों की नकल करना शुरू कर दिया तो वही भारत विपन्न होते-होते आजादी के समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में मात्र दो प्रतिशत हिस्सेदारी तक सिमट गया। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश ने नारी शक्ति, युवाओं, व्यापारियों और किसानों पर फिर से विश्वास किया। इसी का परिणाम है कि आज भारत पूरे विश्व में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

*ज्यादा लागत-कम आय से जूझ रहा था किसान*
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी-पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। अब भारत बीमारू नहीं, विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर देश है। यह विचार करने की आवश्यकता है कि वे कौन से कारण थे, जिन्होंने इतनी समृद्ध भूमि होने के बावजूद अन्नदाता किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। 2014 से पहले किसान आत्महत्या कर रहा था, क्योंकि लागत अधिक व उत्पादन कम था और उपज का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता था।

*मोदी सरकार ने दी डेढ़ गुना मूल्य देने की गारंटी*
सीएम योगी ने कहा कि आजाद भारत में किसानों को उनकी लागत का न्यूनतम डेढ़ गुना मूल्य देने की गारंटी किसी ने दी, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में लाखों किसानों ने आत्महत्या की, लेकिन 2014 के बाद इस पर विराम लग गया। पहली बार सॉइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से धरती माता के स्वास्थ्य का परीक्षण शुरू हुआ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए अन्नदाता किसानों को फसल सुरक्षा की गारंटी मिली। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से सिंचाई की सुविधा बढ़ी। किसानों के लिए प्रोक्योरमेंट सेंटर स्थापित हुए और किसान सम्मान निधि की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से मिलने वाले उर्वरक (फर्टिलाइजर) पर सरकार भारी सब्सिडी दे रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया बैग की कीमत करीब 4000 रुपये तक होती है, जबकि किसानों को एक चौथाई से भी कम कीमत पर इसे उपलब्ध कराया जाता है। किसान प्रति एकड़ रासायनिक उर्वरकों पर 10 से 12 हजार रुपये खर्च कर देता है। किसान की मेहनत को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो उसकी कुल लागत 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद सालभर की मेहनत के बाद उसे 10 हजार रुपये का शुद्ध लाभ भी नहीं मिल पाता।

*जहर मुक्त खेती ही बेहतर भविष्य का आधार*
मुख्यमंत्री ने कहा कि फर्टिलाइजर व पेस्टीसाइड के अत्यधिक उपयोग की वजह से कई बार हमारा उत्पादन दुनिया के बाजार में स्वीकार नहीं किया जाता, क्योंकि उसमें रासायनिक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इसका स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव होता है। आज से 30 वर्ष पहले किडनी खराब होने के इतने मामले नहीं होते थे। लोग हैंडपंप व तालाब का पानी पीते थे, मेहनत करते थे और सामान्य स्वस्थ जीवन जीते थे। आज लगभग हर मोहल्ले में दो-तीन किडनी रोगी मिल जाते हैं। लिवर सिरोसिस, ब्लडप्रेशर व डायबिटीज के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है।

सीएम ने कहा कि यह केवल व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का दोष है जो केमिकल फर्टिलाइजर व पेस्टीसाइड के उपयोग को बढ़ावा देती है। यदि किसान गो आधारित प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते हैं तो प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये की सीधी बचत रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च में ही हो जाएगी। स्वास्थ्य उत्तम होगा तो दवाओं पर भी खर्च बचेगा। आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से आर्थिक सहायता तो दी जाती है, लेकिन बीमारी से प्रभावित व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है। पूरा परिवार संकट में आ जाता है। लोग स्वस्थ रहेंगे तो अपनी ऊर्जा व प्रतिभा का उपयोग देश-समाज के विकास में कर सकेंगे।

*34 जिलों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रयास शुरू किए गए हैं। प्रदेश के 34 जिले प्राकृतिक खेती को तेजी से अपना रहे हैं। गंगा किनारे स्थित 27 जनपदों तथा बुंदेलखंड के सात जनपदों को प्राकृतिक खेती के लिए चिह्नित किया गया है। बुंदेलखंड के किसानों ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग व मार्केटिंग पर तेजी से कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि मंडियों में इसके लिए व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के बीज से लेकर फसल तैयार होने तक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया, शोरूम की स्थापना तथा उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कृषि विज्ञान केंद्रों को प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन का आधार बनाया है। अनेक किसान और संस्थाएं इस दिशा में अच्छा कार्य कर रही हैं। जहां कहीं भी कृषि प्रदर्शनी आयोजित हो, उसकी जिम्मेदारी किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को दी जानी चाहिए। एफपीओ बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। किसी ने मोटे अनाज (मिलेट्स), किसी ने दलहन तथा अन्य कृषि उत्पादों पर उत्कृष्ट कार्य किया है। ऐसे सफल किसानों और एफपीओ को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना चाहिए।

*14 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित*
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 7700 से अधिक गोशालाओं में 14 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित हैं, जिनकी राज्य सरकार देखभाल कर रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत एक गोवंश पालन पर 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। यदि चार गोवंश हैं तो 6000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख किसानों ने इस योजना के अंतर्गत गोवंश पालन अपनाया है। गाय का गोबर प्राकृतिक खेती के लिए काफी हद तक पर्याप्त हो सकता है। सीएम ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने इस दिशा में बहुत अच्छा कार्य किया है।

सीएम ने कहा कि प्राकृतिक खेती में बाजार से कुछ भी खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान के खेत में जो उपलब्ध होता है, उसी से पूरी प्रक्रिया संचालित की जा सकती है। गाय के गोबर, गुड़ व पानी आदि को मिलाकर जीवामृत तैयार किया जाता है। उसका छिड़काव करने से प्राकृतिक खेती की शुरुआत होती है। किसान जब पसीना बहाता है तो धरती माता से सोना प्राप्त होता है।

*विकसित भारत का आधार समृद्ध किसान-आत्मनिर्भर गांव*
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश वर्ष 2047 में आजादी का शताब्दी महोत्सव मनाएगा। स्वस्थ भारत ही विकसित भारत का संकल्प साकार करेगा। इसके लिए गो आधारित प्राकृतिक खेती को आधार बनाना होगा। भारत तब विकसित होगा, जब उत्तर प्रदेश विकसित होगा। उत्तर प्रदेश तब विकसित होगा, जब कानपुर विकसित होगा। कानपुर तब विकसित होगा, जब यहां का अन्नदाता किसान विकसित होगा, व्यापारी-कारीगर समृद्ध होंगे, हर चेहरे पर खुशी होगी और हर युवक के हाथ को काम मिलेगा।

*बायोगैस व एथेनॉल उत्पादन में योगदान दें किसान*
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एथेनॉल, बायो-कम्पोस्ट, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया है। किसानों को पराली जलाने के बजाय सीबीजी व एथेनॉल उत्पादन में योगदान देना चाहिए। इससे भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा। यही अन्नदाता किसानों की समृद्धि का आधार भी है।

*विपक्ष का काम सिर्फ चिल्लाना*
सीएम योगी ने कहा कि जब वैश्विक ऊर्जा संकट आया, दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही थी, लेकिन भारत मजबूती के साथ खड़ा था। भारत में महंगाई नियंत्रित रही। विपक्ष सिर्फ आलोचना करना जानता है, लेकिन भारत वैश्विक संकटों का सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। विपक्ष का काम सिर्फ चिल्लाना है और चिल्लाता ही रहेगा।

इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, खादी-ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला, सांसद रमेश अवस्थी, महापौर प्रमिला पांडेय, विधायक महेश त्रिवेदी, अभिजीत सिंह सांगा, सुरेंद्र मैथानी, नीलिमा कटियार, राहुल बच्चा सोनकर, सरोज कुरील, जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, विधान परिषद सदस्य सलिल विश्नोई, अरुण पाठक, राजबहादुर सिंह, अविनाश सिंह चौहान, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल आदि मौजूद रहे।

एटा में पुलिस ने ईंट ट्रैक्टर चालकों से रंगदारी टैक्स वसूली करने वाले युवक को गिरफ्तार कर भेजा जेल

एटा 18 जून उप्रससे। जनपद में ईंट ढोने वाले ट्रैक्टर चालकों से अवैध रूप से रंगदारी टैक्स वसूलने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया।

कोतवाली नगर पुलिस ने बीते दिन ईंटों से लदे ट्रैक्टर चालकों से कथित रूप से अवैध रंगदारी वसूलने वाले एक युवक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से वाहन चालकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है।

जानकारी के अनुसार एटा शिकोहाबाद रोड पर ईंट व मिट्टी लेकर शिकोहाबाद व फिरोजाबाद रोड पर आने-जाने वाले ट्रैक्टर चालकों से एक युवक द्वारा लंबे समय से अवैध वसूली किए जाने की शिकायत पुलिस को मिल रही थी। कि आरोपी प्रति ट्रैक्टर करीब दो हजार रुपये की रंगदारी मांगता था और भुगतान न करने पर अवैध दबाव बनाता था। इससे चालक वर्ग में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन जि. के कार्यवाही के आदेश पर कोतवाली नगर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक दबंग आरोपी आशुतोष चौहान को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ संबंधित चौथ वसूली की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

कार्यवाहक निरीक्षक कोतवाली नगर अजब सिंह ने बताया कि पुलिस को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं कि एक युवक शिकोहाबाद रोड की ओर जाने वाले ट्रैक्टरों से डरा धमका कर अवैध वसूली कर रहा है। पूछताछ में सामने आया कि वह कभी स्वयं को अधिकारी तो कभी आरटीओ विभाग से जुड़ा व्यक्ति बताकर चालकों को भ्रमित करता था। आरोपी नगद के साथ-साथ ऑनलाइन भुगतान भी स्वीकार करता था तथा कुछ वाहनों से मासिक आधार पर कथित “एंट्री” के नाम पर भी वसूली करता था।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि इस अवैध वसूली के नेटवर्क में कुछ अन्य अराजक तत्वों की भी संलिप्तता है। मामले की जांच जारी है।

एसएसपी डॉ. इलामारन ने कहा कि जनपद में किसी को भी रंगदारी, अवैध टैक्स या वसूली नहीं करने दी जाएगी। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले और आमजन को भयभीत कर अवैध लाभ कमाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

« Newer PostsOlder Posts »