दक्षिण कोरिया के 30 अभ्यासियों समेत विभिन्न देशों के साधकों ने की ध्यान साधना
शाहजहांपुर। ( संजीव गुप्त ) शाहजहांपुर की पावन धरा,
आध्यात्मिक चेतना की वह भूमि, जहां से सहज मार्ग की साधना पद्धति और हार्टफुलनेस मेडीटेशन ने प्रेम, ध्यान और आध्यात्म का संदेश विश्व तक पहुंचा, गुरुवार को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय साधकों की श्रद्धा और भावनाओं की साक्षी बनी।
श्री रामचन्द्र मिशन के संस्थापक महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (बाबूजी महाराज) की जन्मस्थली और कर्मस्थली पर दक्षिण कोरिया, बेलारुस, मलेशिया और फ्रांस सहित विभिन्न देशों से आए अभ्यासी गुरुसत्ता के प्रति श्रद्धा अर्पित करने यहां पहुंचे।
बुधवार देर रात मिश्रीपुर स्थिति रामचन्द्र मिशन आश्रम में दक्षिण कोरिया से आए करीब 30 अभ्यासियों का दल डा. मून के नेतृत्व में यहां पहुंचा ।
गुरुवार सुबह दक्षिण कोरिया के अभ्यासियों ने बाबूजी महाराज के निवास स्थान पहुंचकर वहां ध्यान साधना की। साधकों ने उस पावन भूमि को नमन किया, जहां महात्मा रामचन्द्र जी महाराज का जन्म हुआ और जहां से उनके जीवन, साधना और आध्यात्मिक चिंतन ने आगे चलकर विश्वभर में असंख्य साधकों के लिए आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त किया।
ध्यान के दौरान वातावरण तब भावपूर्ण हो गया जब बाबूजी महाराज की जन्मस्थली के दर्शन और वहां ध्यान करने का अनुभव कर कई कोरियाई अभ्यासी भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। किसी ने इसे गुरु के प्रति कृतज्ञता का क्षण बताया तो किसी ने अपने भीतर गहरी शांति और आत्मीयता का अनुभव किया।
अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और देशों से आए साधक यहां एक ही भाव में दिखाई दिए गुरु के प्रति श्रद्धा, ध्यान के प्रति समर्पण और मानवता के प्रति प्रेम।
बाबूजी महाराज के निवास स्थान से सभी अभ्यासी अजीजगंज स्थित सहज मार्ग जंक्शन पहुंचे। यहां उन्होंने महात्मा रामचन्द्र जी महाराज की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक नमन किया और कुछ समय ध्यान एवं मौन साधना में बिताया।
शाहजहांपुर की धरती पर जन्मे बाबूजी महाराज की साधना और उनका संदेश आज भौगोलिक सीमाओं से परे अनेक देशों के साधकों को जोड़ रहा है। दक्षिण कोरिया से आए अभ्यासी इसका जीवंत उदाहरण हैं जो हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर उस भूमि तक पहुंचे, जिसे वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखते हैं।
बाबूजी महाराज की जन्मभूमि पर दक्षिण कोरिया के लोगों में न भाषा का अंतर दिखाई दिया, न देश की सीमा ,सिर्फ श्रद्धा, साधना और गुरु के प्रति समर्पण का भाव दिखाई दिया।
इस दौरान प्रशिक्षक राजगोपाल अग्रवाल, आश्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार सिंह, ममता सिंह, सुयश सिन्हा, कृष्णा भारद्वाज, सुरेंद्र सिन्हा,अनूप कुमार, अशोक लोधी, आदि मौजूद रहे।
