मैनपुरी। कस्बा भोगांव के मोहल्ला ऊपर टीला स्थित एक प्लॉट पर चल रहे निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में दो प्राचीन जैन प्रतिमाएं तथा एक चरण पादुका प्राप्त हुई। खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में कौतूहल और श्रद्धा का माहौल बन गया है। बुधवार को जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक मोक्ष सप्तमी पर्व भी था। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस पावन मौके पर जैन धर्म की प्राचीनता और उसकी गहरी जड़ों का एक अद्भुत और अलौकिक दर्शन हुआ है।
नगर निवासी रघुवीर सलूजा ऊपर टीला स्थित अपने प्लाट पर नवीन घर का निर्माण कार्य करा रहे हैं। नींव की खुदाई के लिए मजदूर गहरे गड्ढे खोद रहे थे, इसी दौरान अचानक औजार किसी कठोर वस्तु से टकराए। जब सावधानी से मिट्टी हटाई गई, तो वहां से पाषाण की दो प्रतिमाएं प्राप्त हुईं । दोनों प्रतिमाए लंगभग 6 से 7 इंच की है। एक प्रतिमा पर तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का चिन्ह बना हुआ है जबकि दूसरी प्रतिमा पर चिन्ह मिटा हुआ है। प्रतिमा पर निर्ग्रन्थ दिगम्बर भगवंत भी बने हुए हैं। प्रतिमाओं के साथ एक पाषाण की चरण पादुका भी मिली है, जिस पर भगवान के पवित्र चरण उत्कीर्ण हैं। यह जैन परंपरा में अत्यंत पूजनीय मानी जाती है। जैन समाज ने प्रतिमाओं तथा चरण को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में विराजमान कराया है। स्थानीय समाज के डा. मनोज जैन का दावा है कि भोगांव जो पहले भूमिग्राम नाम से जाना जाता था जैन धर्म की प्राचीन नगरी रहा है। पूर्व में जैन राजा द्वारा स्थापित क़िले में जैन मंदिर भी था जो बाद में मुगल शासन में ध्वस्त कर दिया गया था । देर शाम जैन मंदिर में जिनेन्द्र भक्ति का आयोजन किया गया तथा प्रतिमाओं की अर्चना की गई। इस मौके पर नलिन कुमार जैन, राकेश जैन, डा. मयंक जैन, प्रवीण जैन, कुमोद जैन, मल्लू जैन, वैभव जैन, दिव्यांश जैन, शैंकी जैन, आदि मौजूद रहे।

