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ईरान और हिजबुल्ला समर्थित आतंकी नेटवर्क का खुलासा

March 20, 2026

ईरान और हिजबुल्ला समर्थित आतंकी नेटवर्क का खुलासा

Breaking News UP Web News
Posted on 20.03.2026, Friday Time 09.41 AM, Source PB News
दुबई, 20 मार्च 2026, संयुक्‍त अरब अमीरात ने ईरान समर्थित आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया है। नेटवर्क को लेबनान के हिजबुल्ला और ईरान से धन मिल रहा था। नेटवर्क के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। यह समूह एक फर्जी व्यापारिक संगठन बनाकर सक्रिय था।
अमीरात सरकार के अनुसार, यह नेटवर्क हिजबुल्ला और ईरान से जुड़े विदेशी संगठनों के साथ एक पूर्व नियोजित रणनीति के अनुसार काम कर रहा था। प्रशासन ने कहा कि अमीरात की सुरक्षा या स्थिरता को खतरे में डालने वाले किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

March 19, 2026

मुरादाबाद में पार्षद मनोनीत नेता पार्टी की शहर कार्यकारिणी में भी पा गए अहम पद

आपाधापी: नेताओं में आपसी समन्वय का असर।

*शहर कमेटी में उपाध्यक्ष बने नेताओं को ही संगठन ने निगम में पार्षद बना दिया*

–पार्टी में खल रही तालमेल में खामीं, हटाए जाएंगे पदाधिकारी

Post on 19.3.26
Thursday, Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
संगठन को चुस्त-दुरुस्त रखने में गंभीर भाजपा में आपसी समन्वय बड़ी खामी बनकर उभरा है। संस्तुति के बाद पार्टी नेतृत्व ने जिन्हें नगर निगम में पार्षद बनाया, उन्हें ही संगठन में अहम पद भी दे डाले। एक को ही दो-दो पद दिए जाना पार्टी हल्कों में चर्चा का कारण बना हुआ है।

दरसअल मुरादाबाद निगम में मनोनीत हुए पार्षदों को भाजपा शहर कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष बनाया गया है।अब संगठन अपनी गलती सुधारने की कोशिश में है। संभावना है कि नेताओं को एक पद की जिम्मेदारी मिलेगी।

2027 में होने वाले विस चुनाव की तैयारी कर रही भाजपा में आपसी खींचतान संगठन को कमजोर कर रहीं हैं।चुनाव से पहले जमीन की मजबूती के लिए संगठन व निकायों में जोड़ा जा रहा है। बूथों को दुरुस्त करने के लिए संगठन के नेताओं की संस्तुति पर आनन-फानन में शहर कार्यकारिणी और निकाय में मनोनयन का ऐलान हुआ। पर इस आपाधापी और समन्वय की कमी से एक कार्यकर्ता को दो दो जगहों पर एडजस्ट कर दिया।
शहर कार्यकारिणी छह साल बाद घोषित हुईं। जबकि निगम में पार्षद के मनोनयन की सूची जारी हुई। अध्यक्षों की सिफारिश के आधार पर नेतृत्व ने हरी झंडी दी। उनमें नाम का दोहराव हो गया। एक कार्यकर्ता‌ दो जगहों पर पहुंच गए। यानी नेतृत्व ने निगम में जिन्हें पार्षद बनाया, वहीं शहर कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण पद भी पा गए।
हाल ही में घोषित महानगर कार्यकारिणी में हरीश प्रजापति व मिंटू सिंह को संगठन में उपाध्यक्ष बनाया गया। पर उन्हें ही निगम पार्षद मनोनीत भी कर दिया।

*एक ही क्षेत्र से अब कई पार्षद*
शहर कार्यकारिणी की घोषणा में तालमेल का ध्यान नहीं रखा गया। शहर के बीच मध्य नगर क्षेत्र में चुनिंदा पार्षद देश रत्न कत्याल के अलावा अब नए पार्षद अभिनव बंसल व कमल गुलाटी बनाए गए। इसी तरह लाइनपार में पांच बार के पार्षद राजेश गुप्ता के अलावा ज्योति बंसल नामित पार्षद बनीं। चन्द्र नगर क्षेत्र में मिंटू ठाकुर को पार्षद बनाया गया। जबकि मुरादाबाद देहात विस क्षेत्र में आने वाले शहर के ही क्षेत्र में कोई नामित पार्षद नहीं बन सका।

भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला का कहना है कि एक कार्यकर्ता का नाम दो जगहों पर शामिल होने के बाद खामी को सुधारा गया। संगठन में दोनों पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। अब उपाध्यक्ष पद पर नए लोगों की नियुक्ति होगी।

प्रेम मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किए दर्शन, विधि-विधान से की पूजा-अर्चना

मथुरा/
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मथुरा स्थित प्रेम मंदिर में पहुंचकर दर्शन किए।
महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल का मंदिर परिसर में भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने भोग घर प्रवेश द्वार से मंदिर में प्रवेश किया, जहां  अजय बाबा,  दीपक भरेजा, सी. गुरुराज राव एवं डॉ. सुपर्णा राव ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर में आयोजित आकर्षक लेज़र शो का भी अवलोकन किया।
राष्ट्रपति एवं राज्यपाल ने गर्भगृह के समक्ष श्री राधा-कृष्ण के युगल विग्रह के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आरती की। इस दौरान सभा मंडप में संकीर्तन मंडली के 51 आश्रमवासियों द्वारा भजन-कीर्तन एवं आरती का सामूहिक गायन किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
दर्शन के उपरांत  अजय बाबा,  दीपक भरेजा,  सी. गुरुराज राव एवं डॉ. सुपर्णा राव ने राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को श्री राधा-कृष्ण की मनमोहक स्मृति चिन्ह भेंट किए। उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया तथा गर्भगृह के बाहर परिक्रमा भी लगाई।
इसके पश्चात दोनों महामहिम ने मंदिर के प्रथम तल पर स्थित श्री महाराज जी के विग्रह एवं श्री सीता-राम युगल विग्रह के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और वहां की परिक्रमा भी की। अंत में मंदिर प्रबंधन द्वारा उन्हें श्री महाराज जी का साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मथुरा आगमन, कैंट हेलीपैड पर भव्य स्वागत

मथुरा,  कैंट हेलीपैड पर गुरुवार को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आगमन हुआ। उनके आगमन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई थीं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिले।
कैंट हेलीपैड पर राष्ट्रपति का स्वागत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा किया गया। इस अवसर पर गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, प्रभारी मंत्री एवं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा विभाग संदीप सिंह, राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह तथा मथुरा-वृंदावन नगर निगम के महापौर विनोद अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त लेफ्टिनेंट जनरल वी. हरिहरन, अपर पुलिस महानिदेशक आगरा अनुपम कुलश्रेष्ठ, मंडलायुक्त आगरा नगेन्द्र प्रताप, ग्रुप कैप्टन शिवम मनचंदा, जिलाधिकारी मथुरा चंद्र प्रकाश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा श्लोक कुमार सहित प्रशासनिक एवं सैन्य अधिकारियों ने भी राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया।
राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।

राष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की 

Posted on 19.03.2026 Time 08.48 PM Thursday, Ayodhya 
  • श्रीरामलला का दर्शन-पूजन किया
  • प्रभु श्रीराम ने इस अयोध्या नगरी में जन्म लिया, इसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना अत्यन्त सौभाग्य की बात : राष्ट्रपति
  • आज भारतीय नव सम्वत्सर की प्रथम तिथि पर, श्रीराम जन्मभूमि के परिपूर्ण होने के उपलक्ष्य में श्रीराम यंत्र की स्थापना की जा रही : मुख्यमंत्री
अयोध्या : 19 मार्च, 2026,  भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु  ने आज चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस एवं सनातन नव संवत्सर (विक्रम संवत्-2083) पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की तथा श्रीरामलला का दर्शन-पूजन किया।
राष्ट्रपति जी ने देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतवासियों और श्रीराम भक्तों को नव वर्ष तथा आगामी रामनवमी पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने इस अयोध्या नगरी में जन्म लिया। इसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना अत्यन्त सौभाग्य की बात है। ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’, अर्थात् प्रभु श्रीराम ने इस भूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था। इसी अयोध्या अर्थात् अवधपुरी और आसपास की लोकभाषा में सन्त तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना की थी। मानस में प्रभु श्रीराम सीता माता से कहते हैं कि ‘जद्यपि सब बैकुंठ बखाना, बेद पुरान बिदित जगु जाना, अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ’, अर्थात् सबने बैकुण्ठ का बखान किया है तथा वह वेद-पुराणों में वर्णित तथा जग प्रसिद्ध है, लेकिन बैकुण्ठ भी हमें अवधपुरी जैसा प्रिय लगता है।
राष्ट्रपति जी ने प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रधानमंत्री जी को लिखे गये अपने पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उस पत्र में यह भाव व्यक्त किया गया था कि सौभाग्य की बात है कि हम सब अपने राष्ट्र की पुनर्स्थापना के नये काल चक्र के शुभारम्भ के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस एवं सनातन नव संवत्सर पर अयोध्या आकर स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रही हूं।
राष्ट्रपति जी ने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या सम्भवतः उससे पूर्व ही हम विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे। 21वीं सदी में हमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना, नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना’, अर्थात् राम राज्य में कोई भी दुःखी, निर्धन, बुद्धिहीन और संस्कारहीन नहीं है। विगत दशक के दौरान देश के 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारा गया। राम राज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और समाजिक समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। प्रभु श्रीराम का माता शबरी से भावपूर्ण मिलन, निषादराज से स्नेह-सम्बन्ध, युद्ध में कोल-भील, वानर समुदाय का सहयोग लेना, जटायु, जामवन्त आदि को सम्मान तथा स्नेह की प्रेरणा प्रदान करना जैसे अनेक प्रसंग सर्वस्व समावेशी जीवन दर्शन अपनाने का आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
राष्ट्रपति जी ने कहा कि वर्तमान सन्दर्भ में यह सुखद है कि सामाजिक समावेश तथा आर्थिक न्याय के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जीव-जन्तुओं की सुरक्षा हेतु बड़े पैमाने पर तय किये गये लक्ष्यों को मूर्त रूप प्रदान किया जा रहा है। राम राज्य के आदर्शां पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे। प्रभु श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का आदर्श वाक्य है, ‘रामो विग्रहवान् धर्मः‘, अर्थात् प्रभु श्रीराम धर्म के प्रतिमान स्वरूप हैं। धर्म के व्यापक अर्थों के आधार पर निजी और सामूहिक जीवन को संचालित करके ही हम प्रभु श्रीराम की सच्ची आराधना कर सकेंगे।
प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से इस मन्दिर तथा परिसर की भव्यता बढ़ती ही जा रही है। मैं माता अन्नपूर्णा, माँ दुर्गा, प्रभु श्रीराम परिसर तथा श्रीरामलला का दर्शन कर धन्य हो गयी हूँ। प्रभु श्रीराम की असीम कृपा से आज इस पावन परिसर में पुण्य लाभ की प्राप्ति हुई है। सप्त मन्दिर में माता शबरी, निषादराज, माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र तथा महर्षि अगस्त्य की पवित्र मूर्तियों का दर्शन करने व आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है। सभी देवी-देवताओं की कृपा देशवासियों पर बनी रहे, हम सब आधुनिक विश्व में राम राज्य जैसी व्यवस्था स्थापित कर सकें। हम सब जनसामान्य की भाषा में सुनते रहे हैं कि ‘मुझमें राम, तुझमें राम, हम सबमें राम समाए‘। रामभक्ति के पवित्र बन्धन में जुड़कर पुण्य के भाव के साथ हम राष्ट्र का निर्माण करें।
इस दिव्य मन्दिर में द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना और पूजन करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह प्रभु श्रीराम की असीम कृपा का प्रमाण है। यह श्रीराम यंत्र कांची कामकोटि पीठम के पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती जी द्वारा प्रदत्त है। प्रभु श्रीराम और भगवान शंकर के बीच दैवीय स्नेह के आदर्शों को उनके भक्तों ने अपनी उपासना पद्धतियों में बनाये रखा है।
राष्ट्रपति जी ने कहा कि श्री रामेश्वर में शिवलिंग की स्थापना और विधिवत पूजा करने के पश्चात स्वयं प्रभु श्रीराम ने गोस्वामी तुलसीदास जी के शब्दों में कहा कि ‘सिव समान प्रिय मोहि न दूजा‘। श्रीराम यंत्र भगवान शंकर की उपासना परम्परा से जुड़े कांची कामकोटि पीठ तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के बीच प्रगाढ़ स्नेह का प्रतीक है। यह पारस्परिक स्नेह हमारी सनातन परम्परा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। यह मन्दिर परिसर कला और शिल्प की अनुपम अभिव्यक्तियों से समृद्ध है। ऐसा लगता है कि मानो स्वयं भगवान विश्वकर्मा जी ने यहाँ विद्यमान निर्माण और शिल्प से जुड़ी संस्थाओं, शिल्पकारों और श्रमिकों को कुशलता और प्रेरणा प्रदान की है। सभी श्रमिक, शिल्पकार और निर्माण संस्थाएँ सराहना की पात्र हैं।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने प्रदेशवासियों को भारतीय कालगणना के प्रथम दिवस पर प्रारम्भ हिन्दू नव संवत्सर पर शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह नववर्ष सभी के जीवन में नवचेतना, नवऊर्जा और नवसंकल्प का संचार करे। यह शुभ और पावन संयोग है कि श्रीराम मन्दिर के द्वितीय तल के गर्भगृह में श्रीराम यंत्र की स्थापना हो रही तथा हिन्दू नववर्ष का प्रथम प्रभात उदित हो रहा है।

मुख्यमंत्री जी ने ‘रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे, रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः’ श्लोक से अपने सम्बोधन की शुरूआत करते हुए कहा कि आज भारतीय नव सम्वत्सर की प्रथम तिथि पर, श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के परिपूर्ण होने के उपलक्ष्य में श्रीराम यंत्र की स्थापना की जा रही है। अब हम अयोध्या के बारे में वह बातें कह सकते हैं, जिन्हें प्रभु श्रीराम ने स्वयं कहा था कि ‘अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ, जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि, उत्तर दिसि बह सरजू पावनि’। सरयू माता इस अयोध्या धाम को अपने निर्मल जल से पवित्र करते हुए पूरे क्षेत्र को आलोकित कर रहीं हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के लिए भूमि-पूजन, श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, श्रीराम दरबार के पवित्र विग्रह की स्थापना, श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ध्वजारोहण तथा आज श्रीराम यंत्र की स्थापना का कार्य प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी को आनन्द से परिपूर्ण कर देता है।
भारत की आस्था अनेक प्रकार के संघर्षों व विप्लवों को झेलने के बाद भी 500 वर्षों तक निरन्तर बनी रही। शासन चाहे जिसका रहा हो, संघर्ष हमेशा जारी रहा। परिणामस्वरूप 500 वर्षों की प्रतीक्षा के उपरान्त श्रीरामलला अयोध्या धाम में अपने मन्दिर में विराजमान हुए हैं। श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर भव्य मन्दिर मात्र नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्र मन्दिर का प्रतीक बन चुका है। आज रामराज्य की अवधारणा साकार होती हुई दिखायी दे रही है। ‘राम राज बैठें त्रैलोका, हरषित भए गए सब सोका, बयरु न कर काहू सन कोई, राम प्रताप बिषमता खोई। बरनाश्रम निज निज धरम, निरत बेद पथ लोग, चलहिं सदा पावहिं सुखहि, नहिं भय सोक न रोग’।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान में दुनिया में अनेक जगह युद्ध चल रहे हैं। भय, अव्यवस्था व आर्थिक अराजकता है। हम भारत के अयोध्याधाम में भयमुक्त होकर राष्ट्रपति जी के सान्निध्य में श्रीराम यंत्र की स्थापना के कार्यक्रम में सहभागी बनकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। हमारे ऋषि-मुनियों की तपस्या, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता तथा लोगों की आस्था ने भारत को सदैव ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ बनाये रखा है। श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम से जुड़कर न केवल उत्तर प्रदेशवासी, बल्कि देश-दुनिया का प्रत्येक धर्मावलम्बी गौरव की अनुभूति कर रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2025 में प्रदेश में 156 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक आध्यात्मिक तथा धार्मिक स्थलों की यात्रा पर आए हैं। दुनिया के किसी भी देश की इतनी आबादी नहीं है। यह नया तथा बदलता हुआ भारत है। वर्तमान पीढ़ी सही दिशा में जा रही है। आज युवा नया वर्ष मनाने के लिए मन्दिरों में जाता है। यही उसके संस्कार हैं। यहाँ जो बात अम्मा जी ने कही है, वह नये भारत में अक्षरशः देखने को मिल रही है।

इस अवसर पर विदुषी माता अमृतानन्दमयी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्ददेव गिरि तथा सन्तगण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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