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पारिवारिक विवाद में पति की हत्या, मां-बेटे गिरफ्तार

March 25, 2026

पारिवारिक विवाद में पति की हत्या, मां-बेटे गिरफ्तार

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
25/03/2026

*पीढ़ा से पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट, घटना में प्रयुक्त सामान बरामद*

गोरखपुर। थाना रामगढ़ताल क्षेत्र में पारिवारिक विवाद ने भयावह रूप ले लिया, जहां एक महिला ने अपने पुत्र के साथ मिलकर अपने ही पति की हत्या कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मां-बेटे को गिरफ्तार कर लिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा अपराध नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक नगर के मार्गदर्शन एवं क्षेत्राधिकारी कैण्ट के पर्यवेक्षण में थाना रामगढ़ताल पुलिस ने मुकदमा संख्या 173/2026, धारा 103(1) भा.न्या.सं. से संबंधित अभियुक्ता गीता और उसके पुत्र पंकज को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी काशीराम कॉलोनी थाना रामगढ़ताल क्षेत्र के निवासी हैं।
पुलिस के अनुसार, घटना 24/25 मार्च 2026 की रात की है। पारिवारिक विवाद के दौरान अभियुक्ता ने अपने पुत्र के साथ मिलकर अपने पति रमेश बेलदार पर पीढ़ा/डंडे से हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना पर पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने घटना में प्रयुक्त पीढ़ा भी बरामद कर लिया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

खजनी तहसील सभागार में पोखरी के पट्टे के दौरान विवाद

Gorakhpur Samachar UP Web News

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
25/03/2026

*तहसील में जमकर चले लात-घूंसे, एसडीएम और तहसीलदार मौके से निकले*

खजनी गोरखपुर।।
तहसील मुख्यालय सभागार में बुधवार 25 मार्च को अपरान्ह करीब 3 बजे मछली पालन के लिए पोखरी के पट्टे को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी के बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, दोनों पक्षों के आधा दर्जन से अधिक लोग एक दूसरे से भिड़ गए और मारपीट शुरू हो गई। मामला बिगड़ता हुआ देखकर मौके पर मौजूद उप जिलाधिकारी खजनी राजेश प्रताप सिंह तथा न्यायिक तहसीलदार खजनी हरीश यादव मौके से उठ कर चले गए, इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने मारपीट कर रहे लोगों के बीच विवाद को सुलझाने का प्रयास किया।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची खजनी थाने की पुलिस टीम ने कुल 3 लोगों को लेकर खजनी थाने में पहुंची।
जानकारी के अनुसार पूर्व तय शुदा कार्यक्रम के तहत आज गाजर जगदीश ग्राम सभा के राजस्व गांव झरकटहां में स्थित आराजी संख्या 42 ग रकबा 50 डिसमिल की पोखरी को मछली पालन के लिए पट्टे पर देने के लिए खुली बोली के लिए निविदाएं आमंत्रित की गईं थीं। इस दौरान उप जिलाधिकारी खजनी राजेश प्रताप सिंह तथा न्यायिक तहसीलदार हरीश यादव के तहसीलदार सभागार कक्ष में पहुंचने पर बोली की प्रक्रिया शुरू होने के लिए अधिकारियों के समक्ष फाइल पेश होने से पहले पोखरी को पट्टे पर लेने के लिए झरकटहां गांव के निवासी परशुराम यादव, राजीव यादव, दयाराम यादव, राकेश यादव, अभिषेक यादव,राजू यादव और राणा यादव आदि के बीच तीखी नोंकझोंक और बहस के बाद मारपीट शुरू हो गई। दोनों पक्षों के लोग एक दूसरे से भिड़ गए और लात-घूंसे चलने लगे, जिसमें कुछ लोगों को हल्की फुल्की चोटें आईं तथा कपड़े फट गए।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची खजनी पुलिस ने एक पक्ष के 3 लोगों को लेकर खजनी थाने में पहुंची जबकि दूसरे पक्ष के लोग मौके से भाग निकले। विवाद शुरू होते ही एसडीएम तथा न्यायिक तहसीलदार मौके से चले गए।
बताया गया कि इससे पहले 20 जनवरी को भी इसी पोखरी के पट्टे के लिए तहसील में विवाद होने के बाद कार्यक्रम निरस्त करके, उसे 25 मार्च को पूरा कराने की तिथि निर्धारित की गई थी किंतु फिर विवाद हो गया।
गांव के लोगों ने बताया कि पोखरी में मछली पालन और उसका उपयोग ग्राम प्रधान और उनके समर्थकों द्वारा किया जाता है। ग्राम प्रधान के पट्टीदारों ने पोखरी को पट्टे पर लेने का प्रयास शुरू किया किन्तु दो बार सुनियोजित तरीके से विवाद होने के बाद पोखरी का पट्टा नहीं हो सका।
इस संबंध में एसडीएम खजनी राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि पट्टे की शांति पूर्ण प्रक्रिया बाधित होने तथा विवाद बढ़ता देखकर वहां से चले गए और पुलिस को कार्रवाई का आदेश दे दिया था।

पत्रकारों ने दी गणेश शंकर विद्यार्थी को श्रद्धांजलि

गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान स्मृतियों में जीवित रहेगा-धर्मेंद्र चैधरी
हरिद्वार, 25 मार्च। गणेश शंकर विद्यार्थी के बलिदान दिवस पर प्रेस क्लब सभागार में अध्यक्ष धर्मेंद्र चैधरी एवं प्रेस क्लब के पत्रकारों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया। सभागार में गोष्ठी को संबोधित करते हुए अध्यक्ष धर्मेंद्र चैधरी ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान स्मृतियों में जीवित रहेगा। महान स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी के जीवन दर्शन से प्रेरणा मिलती है। उन्होंने राष्ट्र की एकता अखंडता को बनाए रखने में अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई एकता सौहार्द को बनाए रखा। दंगों में फंसे निर्दाेष लोगों को बचाने में अपनी जान की बाजी लगा दी। धर्मेंद्र चैधरी ने बताया कि उनके द्वारा प्रताप नाम से साप्ताहिक अखबार का संपादन भी किया। अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को जागरूक करने में निर्णायक भूमिका निभाई। इस दौरान ललितेंद्र नाथ, बालकृष्ण शास्त्री, संजय आर्य, राहुल वर्मा, सुनीलदत्त पांडे, विजेंद्र हर्ष, शैलेंद्र ठाकुर, मनोज खन्ना, सूर्यकांत बेलवाल, सुनील पाल, सुमित सैनी, पुलकित शुक्ला, सुमेश खत्री, शाहनवाज, सुमित यश कल्याण आदि पत्रकार मौजूद रहे।

सीएम योगी की चुटकी से गरमाई सियासत, महिला प्रत्याशी को लेकर चर्चा तेज

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
25/03/2026

*गोरखपुर में फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर का भूमि पूजन*

गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) में प्रस्तावित फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक हल्की-फुल्की टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के सांसद रवि किशन को लेकर चुटकी लेते हुए इशारों में कहा कि भविष्य में इस सीट पर महिला प्रत्याशी भी दावेदारी कर सकती है।
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि मंच से कही गई यह बात हास्य के रूप में थी, लेकिन इसे आगामी लोकसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। खासकर तब, जब देश में नारी वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) को लेकर चर्चा लगातार जारी है।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस व्यवस्था से उनके ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि महिलाओं के लिए एक अतिरिक्त सीट बढ़ सकती है। उनके इस बयान को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।
गौरतलब है कि संसद द्वारा पारित नारी वंदन अधिनियम के तहत भविष्य में लोकसभा और विधानसभा सीटों पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किए जाने का प्रावधान है। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था आगामी चुनावों में लागू हो सकती है, जिससे कई सीटों के समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में गोरखपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट पर भी नए चेहरे सामने आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
स्थानीय स्तर पर भी इस बयान को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कुछ लोग इसे महज मंचीय हास्य मान रहे हैं, तो कुछ इसे संभावित राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं। वहीं आम जनता के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं—कहीं बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है, तो कहीं वर्तमान सांसद के कार्यकाल पर चर्चा हो रही है।
हालांकि अभी तक पार्टी या किसी आधिकारिक स्तर पर इस तरह के किसी बदलाव के संकेत नहीं दिए गए हैं। लेकिन मुख्यमंत्री की इस चुटकी और बयान ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी लोकसभा चुनाव में गोरखपुर सीट पर क्या तस्वीर उभरती है—क्या रवि किशन को एक बार फिर मौका मिलेगा या पार्टी किसी नए, संभवतः महिला चेहरे पर भरोसा जताएगी। समय के साथ ही इन सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे।

भारतीय संस्कृति के आदर्शों का उत्सव: रामनवमी – डाॅ०राकेश सक्सेना

Rakesh Saxena

एटा 25 मार्च उप्रससे। भारतीय संस्कृति में पर्व समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के आधार होते हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण पर्वों में रामनवमी का विशिष्ट स्थान है जो धर्म और आदर्श जीवन के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्मोत्सव रूप में मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमीं तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भारतीय जनमानस में आस्था, आदर्श और नैतिक मूल्यों का संवाहक है।प्राचीन भारतीय ग्रंथों विशेषकर वाल्मीक रामायण एवं गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस में भगवान राम के जन्म का वर्णन इस प्रकार मिलता है, उदाहरणार्थ’ ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतुनां षट समत्ययु:। ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नवमिके तिथौ। ‘ इस श्लोक के अनुसार यज्ञ के उपरांत चैत्र मास की नवमीं तिथि को राम का जन्म हुआ। गोस्वामी तुलसीदास ने राम के अवतरण को लोकमंगल की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है, यथा- भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी सुनि मन हारी, अद्भुत रूप विचारी।।
यह चौपाई केवल राम के जन्म का ही वर्णन नहीं करती अपितु यह संकेत देती है कि भगवान राम का अवतरण करुणा, धर्म और लोककल्याणार्थ हुआ है।
आधुनिक समाज में नैतिक मूल्यों के संकट की चर्चा अक्सर की जाती है। ऐसे समय में राम का चरित्र, आदर्श जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। उनको मर्यादापुरुषोत्तम कहा गया क्योंकि उन्होंने पुत्रधर्म, भ्रातृप्रेम, दाम्पत्य निष्ठा, राजधर्म आदि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आदर्श स्थापित किए। राम के चरित्र का सार यह है कि जीवन में कर्तव्य सर्वोपरि होना चाहिए। इसी संदर्भ में महात्मा गाँधी का कथन उल्लेखनीय है। रामराज्य का अर्थ किसी विशेष धार्मिक शासन से नहीं बल्कि न्याय, सत्य और नैतिकता पर आधारित व्यवस्था से है। ‘ यह विचार आधुनिक लोकतांत्रिक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। रामकथा में सामाजिक समरसता का सुन्दर चित्रण मिलता है। भगवान राम ने निषादराज,शबरी, हनुमान, सुग्रीव, वानर सेना आदि समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ समान व्यवहार किया, जो यह दर्शाता है कि समाज की शक्ति उसकी विविधता और सहयोग में निहित है। रामधारीसिंह दिनकर ने राम के चरित्र की इसी विशेषता का संकेत करते हुए लिखा है– ‘ राम का व्यक्तित्व भारतीय संस्कृति की समन्वयकारी शक्ति का प्रतीक है। ‘ आधुनिक वैश्विक संस्कृति के प्रभाव में प्राय: आदर्श और परम्पराएँ कमजोर पड़ने लगतीं हैं, ऐसी स्थिति में रामनवमी के सामूहिक आयोजनों में रामकथा समाज में एकता और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करती है तथा समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम भी करती है। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने भी राम के महत्व को रेखांकित करते हुए लिखा था– ‘ राम भारतीय संस्कृति के आदर्श मनुष्य हैं जिनमें धर्म,नीति और करुणा का अद्भुत समन्वय है। ‘
रामनवमी के संदर्भ में रामराज्य की कल्पना भी महत्वपूर्ण है। रामराज्य न्याय, समानता और लोककल्याण पर आधारित आदर्श शासन का प्रतीक है। यदि रामराज्य की मूल भावना सत्य, पारदर्शिता, लोकहित और उत्तरदायित्व को अपनाया जाए तो आधुनिक समाज के प्रशासन और राजनीति के क्षेत्र में संतुलन और विश्वास स्थापित किया जा सकता है। रामकथा से जीवन-मूल्यों की शिक्षा मिलती है, सामाजिक एकता का माध्यम बनती है, परम्पराओं और लोकसंस्कृति को जीवित रखने में सहायक बनती है तथा भक्ति और आत्मिक शांति की अनुभूति कराती है। समग्र रूप से देखा जाए तो रामनवमी मात्र धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं अपितु राम के आदर्शों को अपनाकर न्यायपूर्ण, समरस, आदर्शोन्मुख नैतिक समाज की स्थापना करने का उत्सव है।

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