ग्रामीणों से मिले प्रतिनिधिमंडल ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा
धौरहरा क्षेत्र के गांव पहुंचकर अधिकारियों से भी ली जानकारी
उ प्र समाचार सेवा
लखीमपुर-खीरी।धौरहरा क्षेत्र के सिसैया खुर्द गांव में ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुए विवाद का मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने पुलिस पर घरों में घुसकर मारपीट करने और कई लोगों को घायल करने के आरोप लगाए हैं। मामले की जानकारी सामने आने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने प्रकरण का संज्ञान लिया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
पुलिस अधीक्षक से मुलाकात के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता सीधे सिसैया खुर्द गांव पहुंचे। उनके साथ जिला महामंत्री राजेश सिंह, जिला उपाध्यक्ष विनोद लोधी, कौशल किशोर तिवारी, सुनील दीक्षित, विकास शुक्ला और मंडल अध्यक्ष भोला नाथ मिश्रा सहित प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा। प्रतिनिधिमंडल ने गांव पहुंचकर घटना से प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। ग्रामीणों ने प्रतिनिधिमंडल को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए पुलिस पर लगाए गए आरोपों से अवगत कराया।भाजपा जिलाध्यक्ष ने मौके पर धौरहरा कोतवाल और सहायक विकास अधिकारी पंचायत को भी बुलाया तथा मामले की जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से भी मामले की वास्तविक स्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।ग्रामीणों के अनुसार घटना के बाद करीब 16 लोग घायल हुए हैं। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घरों में घुसकर मारपीट की। वहीं, पुलिस की ओर से घटना को लेकर अलग पक्ष सामने आने की संभावना है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। प्रतिनिधिमंडल के गांव पहुंचने और अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जताई है। जांच पूरी होने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एटा 16 सितंबर उप्रससे। जनपद के जसरथपुर थाना क्षेत्र में आज बुधवार दोपहर करीब 11:30 बजे युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। घटना की वजह पारिवारिक कलह मानी जा रही है।
पुलिस ने बताया अभय प्रताप सिंह (20) ने घर के पास फांसी लगाकर आत्महत्या की। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ पुलिस आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटा रही है।
जसरथपुर थाना प्रभारी सुबोध कुमार उपाध्याय ने बताया कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार अभय की मां करीब 14 साल पहले सराय अगहत निवासी बृजवीर सिंह से शादी के बाद राहुल बाबा के साथ रहने लगी थीं। राहुल बाबा अभय के जैविक पिता नहीं थे। पुलिस के मुताबिक, उसके जैविक पिता बृजवीर सिंह बताए गए हैं। राहुल बाबा के किसी अन्य महिला से संबंध होने की बात को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। इसी पारिवारिक कलह के कारण अभय तनाव में था। हालांकि पुलिस अभी घटना के पीछे की पूरी वजह की जांच कर रही है और परिवार के लोगों से भी जानकारी ली जा रही है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट और पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है। पुलिस आत्महत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
रिपोर्ट – संजय कुमार तिवारी
स्थान – बलिया यूपी
डेट – 16/09/2026
एंकर – बलिया में गंगा और घाघरा नदी में आई बाढ़ से लगभग 87 गांव प्रभावित हो गए है जिसके चलते बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ गई।बाढ़ से शिक्षा विभाग के लगभग 64 विद्यालय प्रभावित है।जिसमे बैरिया तहसील क्षेत्र के मुरली छपरा ब्लॉक, बैरिया ब्लॉक,बेलहरी, दुबहड़ और बांसडीह तहसील क्षेत्र के बांसडीह ब्लॉक और रेवती ब्लॉक बाढ़ से प्रभावित हो गई है बाढ़ के चलते इन विद्यालयों को बंद करना पड़ा। विद्यालयों के बंद होने के बाद बच्चो की पढ़ाई बाधित हो गई है हालांकि बेसिक शिक्षाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में हमारे 64 विद्यालय घिरे हुए है जिसमे बैरिया,मुरली छपरा,बेलहरी, दुबहड़ ब्लॉक है वही बांसडीह तहसील के बांसडीह ब्लॉक और रेवती ब्लॉक शामिल है। हालांकि नदी अभी स्थिर है जल्द ही पानी उतर जायेगा और शीघ्र ही विद्यालय की सफाई कराकर स्वास्थ्य विभाग से समन्यवक बनाकर पठन पाठन शुरू किया जाएगा।बाढ़ में जो विद्यालय है हो सकता है कि एक दो विद्यालय जर्जर होंगे जो बाढ़ से प्रभावित होंगे। बाढ़ आई है लेकिन बच्चो का पठन पाठन बाधित नही हो रहा है बच्चों क्या ग्रुप बनाकर या दूसरे विद्यालय पर भेजकर पढ़ाई जाती है हम लोगों की कोशिश रहती है कि विद्यालय बंद होने से किसी भी बच्चो का पठन पाठन बाधित नही हों।
Posted on 16.09.2026 Wednesday, PM Narendra Modi
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस पर विशेष
सर्वेश कुमार सिंह
इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक का उत्तरार्ध और तीसरे दशक का भारतीय इतिहास नरेन्द्र मोदी के नाम है। इस इतिहास के निर्माता नरेन्द्र मोदी हैं। भारतीय राजनीति में कई नेता ऐसे हुए हैं जिनकी ख्याति किसी राज्य की सीमा में नहीं बंध सकी। देश की परिधि भी उनकी सीमा तय नहीं कर सकी। उसी कड़ी के नेता हैं नरेन्द्र मोदी। आज 17 सितम्बर उनका 76वां जन्म दिवस है।
नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में न केवल भारत का इतिहास रचा है, बल्कि उन्होंने अपने राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी के इतिहास को भी लिख दिया है। वे भारतीय जनता पार्टी के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला को मजबूती से स्थापित कर रहे हैं। ये नरेन्द्र मोदी ही हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में पूर्ववर्ती जनसंघ और अब उसके परिवर्तित नाम और स्वरूप में उपस्थित भारतीय जनता पार्टी के चिर-प्रतीक्षित एजेंडे को न केवल पूरा किया है, बल्कि उसे धरातल पर सफलता पूर्वक उतारा भी है। वहीं भारत के शासन प्रमुख होने के नाते देश की जनता के लिए कई ऐसे काम किये हैं जिन्हें करने का साहस और तरीका पहले के कई प्रधानमंत्री नहीं जुटा सके थे।
सबसे पहले बात करते हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से स्थापित जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी के सिद्धान्तों, वादों और लक्ष्यों को पूरा करने की। जनसंघ ने नारा दिया था “एक देश एक विधान एक निशान”। जनसंघ के संस्थापक डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी इसी सिद्धान्त पर अडिग रहकर कश्मीर की यात्रा पर गए थे। वहीं उनका स्वर्गवास हुआ। लेकिन, यह लक्ष्य बन गया। जनसंघ और फिर भाजपा की नीति बन गई। इसे पूरा किया नरेन्द्र मोदी ने। जब मोदी के निर्देशन में गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को संसद में विधेयक प्रस्तुत करके कश्मीर से धारा 370 हटा दी। कश्मीर का अलग विधान, अलग निशान समाप्त कर दिया गया। यह मोदी की उन उपलब्धियों में शामिल है जिसे इतिहास में प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा। यह सम्पूर्ण भारत की आकांक्षा थी।
वर्ष 1990 के दशक में श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति का आंदोलन उत्तर प्रदेश से आरंभ हुआ। यह आन्दोलन एक दशक में ही भारत के करोड़ो हिन्दुओं के स्वाभिमान से जुड़ गया। अयोध्या में श्रीराम जी की जन्मस्थली पर ही भव्य दिव्य मन्दिर के निर्माण का संकल्प भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में पूरा हुआ।। उनकी उपस्थिति मे ही 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा हुई। अयोध्या में श्रीराम मन्दिर निर्माण का वादा भी भारतीय जनता पार्टी ने किया था। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी ने 9 से 11 जून 1989 तक हिमाचाल प्रदेश के पालमपुर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में श्रीराम मन्दिर निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित किया था। प्रस्ताव तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आड़वाणी की उपस्थिति में पारित हुआ। इस तरह नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के दो संकल्प पूरे हुए हैं। पार्टी का तीसरा लक्ष्य समान नागरिक संहिता लागू करना है। इसके लिए श्री मोदी के नेतृत्व में प्रयास आरम्भ हो गए हैं। गत 14 सितम्बर को मुम्बई में गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित सभी 22 राज्यों में 2029 से पूर्व समान नागिरक संहिता (यूसीसी) लागू हो जाएगा। यानि कि नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में तीसरे कार्यकाल के पूर्ण होने से पहले ही समान नागरिक संहिता का वादा भी पूर्ण हो जाएगा। इस तरह भाजपा के तीनों सपने पूरे करने का श्रेय नरेन्द्र मोदी को है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह दायित्व संभालने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर कार्य किया। इस पद पर रहते हुए उनकी छवि विकास पुरुष और राज्य के उत्थान के लिए नवोन्मेषी राजनेता के रूप में बनी। इस छवि को और अधिक परिष्कृत किया उनके प्रधानमंत्री के रूप में किये गए कार्यों ने। श्री मोदी का तीसरा कार्यकाल पूरा होने में अभी लगभग ढाई साल बाकी हैं। लेकिन उन्होंने भारत की धीमी प्रगति को तेज दौड़ में शामिल करा दिया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है, आम आदमी की कठिनाइयों और दुश्वारियों से उसे निजात दिलाना। उन्होंने उन लक्ष्यों को निर्धारित किया जिन्हें कभी किसी पूर्ववर्ती राजनेता ने सोचा तक नहीं- जैसे हर घर शौचालय, हर घऱ बिजली, हर घर में नल से पानी। ये ऐसी योजनाएं और मूलभूत आवश्यकताएं हैं जिनके अभाव में ग्रामीण जनजीवन अभिशाप बना हुआ था। इन्हें समय सीमा में बांध कर उन्होंने पूरा किया। ग्रामीण महिलाओं को चूल्हे के धुंए से मुक्ति दिलाने के लिए उज्ज्जवला जैसी योजना की कल्पना की।
ये नरेन्द्र मोदी की है सोच और कल्पना की परिणति है कि आज पांच लाख रूपये तक कैशलैस इलाज के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना संचालित हो रही है। देश में कोई गरीब, असहाय, निर्बल व्यक्ति भूखा न रहे, इसके प्रधांनमंत्री ने “गरीब कल्याण अन्न वितरण योजना” आरम्भ की है। इसमें 80 करोड़ लोगों को निशुक्ल खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है। इस देश में अन्न दाता की पहचान हमेशा कर्जदार की रही। किसानों के लिए जो भी योजनाएं बनती थीं उनमें कर्ज ही शामिल होता था। किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार यह निर्णय किया कि किसान की आवश्यकता के लिए बगैर कर्ज, बगैर वापसी की मांग वाली सहायता प्रदान की जाए। इसी सोच से प्रारम्भ हुई “प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना 2019”। इसमें किसान को प्रति चार महीने में दो हजार की सहायता प्रदान की जा रही है। यानि वर्ष में छह हजार रूपये मिल रहे हैं। इस पैसे को वापस नहीं करना होता है। योजना में लगभग 10 करोड़ किसान परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। जनधन खाता, नोट बंदी, जीएसटी और यूपीआई की क्रांति ऐसी योजनाएं हैं जिन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति में योगदान तो किया ही है। हम विश्व के सामने भी अपना मस्तक ऊंचा कर खड़े हैं कि हम अर्थ के क्षेत्र में विश्व के अन्य देशों से अच्छा सोच सकते हैं और उसे लागू करके सफल भी कर सकते हैं।
भारत की स्वतंत्रता के समय सबसे बड़ा त्याग करने वाले समाज को न्याय दिलाने का काम भी नरेन्द्र मोदी ने ही किया है। जो हिन्दू, सिख, बौदध, जैन और ईसाई विभाजन के समय भारत आये थे, उनमें से बहुत से लोग ऐसे थे जिन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली थी। इसके अलावा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बंगलादेश में अनेक लोग नारकीय जीवन जी रहे थे। उन्हें भारत की नागिरकता देने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) भी मोदी जी ने किया। तीन तलाक को भी कानून बनाकर समाप्त किया। पडोसी देश को कड़ी जबाव देने के लिए भारत सरकार ने कठोर फैसले लिये और सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की। आपरेशन सिंदूर से सबक सिखाया। नारी शक्ति बंदन अधिनियम से देश की आधा आबादी को राजनीतिक अधिकार प्रदान करने शासन व्यवस्था में समान अवसर प्रदान करने की पहल भी नरेन्द्र मोदी के ऐतिहासिक फैसलों में शामिल है।
एक साधारण परिवार में जन्मे व्यक्ति की अद्भभुत और अकल्पनीय सफलताओं के पीछे की शक्ति कौन सी है। इसे जानने के लिए मोदी के आरंभिक जीवन को भी जानना होगा। उनका बचपन साधारण परिवार, साधारण व्यवसाय करने वाले पिता के साथ कार्य करना, संघ का प्रचारक होना और फिर संयास, आध्यात्म की उत्कृष्टता से परिचय करने के लिए हिमालय की यात्रा का संकल्प। इन्ही में छिपी है वह जिजीविषा जिसने बालक नरेद्र को लोकमान्य, लोकरक्षक नरेन्द्र मोदी बनाया है। प्रार्थना है कि ईश्वर की अपार अनुकंपा से वे ईशावास्योपनिषद् के इस दूसरे श्लोक को चरित्रार्थ करें- “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः”।
लेखक परिचयः सर्वेश कुमार सिंह
स्वतंत्र पत्रकार, लखनऊ