
हरिद्वार, 7 जनवरी 2026 (उप्र समाचार सेवा) हरिपुर कलां स्थित राष्ट्र भक्ति आश्रम की साध्वी रेणुका ने आश्रम को हड़पने का आरोप लगाया है। प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए साध्वी रेणुका ने बताया कि भूमािफया और असामाजिक तत्वों द्वारा आश्रम पर कब्जे का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। साध्वी रेणुका ने बताया कि उन्होंने 3 नवम्बर को कई लोगों को नामजद करते हुए आश्रम पर कब्जे के प्रयास की एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आरोपियों के हौसले और बढ़ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि 13 नवंबर 2025 को आपराधिक प्रवृत्ति के लोग आश्रम पहुंचे और आश्रम छोड़कर चले जाने और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस को सूचना देने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने राज्य के प्रमुख सचिव को भी पत्र लिखा, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 20 नवम्बर को कुछ हथियारबंद बदमाशों ने आश्रम में घुसकर उन पर जानलेवा हमला किया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने उन्हें छुड़ाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली। लेकिन न तो मेडिकल कराया और न ही जांच में कोई प्रगति हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें और उनके गुरु भाई को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही है। साध्वी रेणुका ने यह भी आरोप लगाया कि आश्रम से जुड़ा उत्तराधिकार का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद प्रशासन ने आश्रम को खाली करा दिया। साध्वी रेणुका ने कहा कि इन हालातों के कारण वह आज देवभूमि उत्तराखंड में बिना किसी आश्रय के रहने को मजबूर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग क है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषियों को सख्त सजा दी जाए और उनका आश्रम उन्हें वापस दिलाया जाए।
राजेंद्र श्रमिक एवं भंवर सिंह ने कहा कि साध्वी रेणुका को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन कुछ लोग आश्रम की संपत्ति को कब्जाने की नीयत से गलत हथकंडे अपना रहे हैं। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रैसवार्ता में विजयपाल, प्रवीण कुमार, मोदीमल, करुणा, सागर, बृजेश कुमार, संजीव बाबा, संजय मूलनिवासी, प्रदीप, रूपचंद एडवोकेट आदि मौजूद रहे।
Article First Published on 01 Dec 2011
मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की एकदाशी

यूं तो सभी एकादशी मानवजगत को श्रेष्ठ फल देने वाली तथा उसके कष्टों को निवारण करने वाली हैं। कि्तु इसमें भी मोक्षा एकादशी का महत्व सबसे ज्यादा है। यह मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जोकि मोक्षा एकादशी के नाम से जानी जाती है। इसे गीता जयंती भी कहते हैं। क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के दौरान कुरुक्षेत्र के मैदान में गीता का प्रवचन किया था। मोक्षा एकादशी के बारे में युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से शुक्लपक्ष की मोक्षा एकादशी का महात्म पूछा था। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा-नृपश्रेष्ठ मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी के श्रवण मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इसका नाम है मोक्षा एकादशी यह सब पापों का हरण करने वाली है। राजन् उस दिन यत्नपूर्वक तुलसी की मंजरी तथा धूप दीपादि से भघवान दामोदर का पूजन करना चाहिए। पूर्वोक्त विधि से ही दशमी और एकादशी के नियम का पालन करना चाहिए। मोक्षा एकादशी बड़े बड़े पातकों को नाश करने वाली है। उसदिन रात्रि मे मेरी प्रसंन्नता के लिए नृत्य, गीत और स्तुति के द्वारा जागरण करना चाहिए। जिसके पितर पापवश नीच योनि में पड़े हों। वे इसका पुण्य दान करने से मोक्ष को प्राप्त होते हैं। इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह तिथि गीता जयंती के नाम से भी प्रसिद्ध है। इसके बारे में गया है कि शुद्धा, विद्धा और नियम आदि का निर्णय यथापूर्व करने के अनन्तर मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी को मध्याह्न में जौ और मूँग की रोटी दाल का एक बार भोजन करके द्वादशी को प्रातः स्नानादि करके उपवास रखें।
भगवान का पूजन करें और रात्रि में जागरण करके द्वादशी को एक बार भोजन करके पारण करें। यह एकादशी मोह का क्षय करनेवाली है। इस कारण इसका नाम मोक्षदा रखा गया है। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण मार्गशीर्ष में आने वाली इस मोक्षदा एकादशी के कारण ही कहते हैं मैं महीनों में मार्गशीर्ष का महीना हूँ। इसके पीछे मूल भाव यह है कि मोक्षदा एकादशी के दिन मानवता को नई दिशा देने वाली गीता का उपदेश हुआ था।
(साभार कल्याण)
देवरिया। जिला जेल देवरिया में बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की देर रात दो बजे हालत बिगड़ी, हार्ट अटैक की आशंका के बीच गोरखपुर रेफर किया गया।
ठाकुर एक मामले में जिला जेल में बंद हैं।