Web News

www.upwebnews.com

संसद बनी बंधक- संविधान का अपमान कौन कर रहा है ?

February 9, 2026

संसद बनी बंधक- संविधान का अपमान कौन कर रहा है ?

Article UP Web News

आलेख

Posted on 09.02.2026 Monday, Time 08.13 AM by Admin, Writer Mratunjay Dixit, Lucknow 

वर्ष -2026 का बजट सत्र हल्ले-गुल्ले और अराजकता की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। यहाँ बजट के अतिरिक्त अन्य सभी विषयों को उठाए जाने का प्रयास हो रहा है। स्थितियां इतनी विकट हैं कि संसदीय इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री लोकसभा में उत्तर नहीं दे सके और राष्ट्रपति का अभिभाषण बिना किसी चर्चा के पारित हो गया। यद्यपि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में 97 मिनट लंबा और प्रभावशाली उत्तर दिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्ष द्वारा की गई सभी टिप्पणियों का संज्ञान लेते हुए अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन देश के स्वर्णिम भविष्य और विकास की दिशा को भी दर्शाता है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण के समय हंगामा करके देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान करने के बाद जब समय आने पर राहुल गांधी को बोलने का अवसर दिया गया तो उन्होंने विषय से इतर जाकर पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक कोट करते हुए चीनी घुसपैठ का पुराना मुद्दा उछालने का प्रयास किया। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियमों के अंतर्गत व्यवस्था दिए जाने के बाद भी राहुल गांधी अपनी बात पर अड़े रहे। यह एक आश्चर्यजनक व्यवहार है कि नेता प्रतिपक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने के स्थान पर पुराने मुद्दे उठाए और उनको भी आपत्तिजनक रूप से रखकर देश की सेना और सदन का अपमान करे। लोकसभा में कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन की महिला सांसदों ने जिस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी का रास्ता रोकने की योजना बनायी और लोकसभा अध्यक्ष को प्रधानमंत्री से सदन न आने का अनुरोध करना पड़ा वो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। विडम्बना ये है कि यही लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बाते करते हैं।
राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस में भाग न लेकर विपक्षी दलों ने न केवल राष्ट्रपति पद का अपमान किया है अपितु एक गरीब परिवार से निकलकर आई आदिवासी महिला का भी अपमान किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में राहुल गांधी व कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ग़द्दार कहने पर भी राहुल गांधी घेरा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इनका अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच गया है । कांग्रेस छोड़कर कितने ही लोग निकले हैं किसी और को तो ग़द्दार नहीं कहा, ये सिख हैं इसलिए कहा, ये सिखों का, गुरुओं का अपमान था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकसभा में चेयर पर कागज फेकें गए जब असम के सदस्य चेयर की कुर्सी पर विराजमान थे क्या यह असम का अपमान नहीं? जब आंध्र प्रदेश के एक दलित सदस्य चेयर की कुर्सी पर बैठे थे तब उन पर भी कागज फेंके गए क्या यह एक दलित बेटे और संविधान का अपमान नहीं है ?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आखिर कांग्रेस उनके लिए कब्र खुदेगी का नारा क्यों देती है ? हमने जम्मू -कश्मीर से धारा 370 से हटाई इसलिए या हमने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से उबारा है इसलिए? प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये कौन सी मोहब्बत की दुकान है जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने के सपने देखती है? आजकल मोहब्बत की दुकान खोलने वाले “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” के नारे लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं देश के युवाओं के लिए मजबूत जमीन तैयार कर रहा हूं तो कांग्रेस मोदी की कब्र खोदने के कार्यक्रम करवा रही है। हमने नार्थ ईस्ट में बम बंदूक और आतंक का जो साया बना रहता था वहां शांति और विकास की राह अपनाई इसलिए वह मोदी की कब्र खोद रहे हैं। पाकिस्तानी आतंकवादियो को घर में घुसकर मारते हैं, ऑपरेशन सिंदूर करते हैं और इसलिए वे मोदी की कब्र खोदना चाहते हैं। मोदी तेरी कब्र खुदेगी ये जो उनके भीतर नफरत भरी हुई है मोहब्बत की दुकान में जो आग भरी पड़ी हुई है, उसका कारण है किकांग्रेस इस बात को पचा नहीं पा रही है कि कोई और क्यों प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा है, ये तो हमारा पैतृक अधिकार था इसलिए वे हताशा में मोदी की कब्र खोदने के नारे लगा रहे हैं । प्रधानमंत्री ने आगे जोड़ा कि कांग्रेस को ये सहन नही हो रहा हे कि जो समस्याएं उसने 60 सालो में पाल- पोस कर बड़ी की थीं मोदी उनका एक- एक करके समाधान क्यों कर रहा है? कांग्रेस को ये सब पसंद नहीं आ रहा है इसलिए अब कांग्रेस के नेता मोदी तेरी कब्र खुदेगी का नारा लगा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपियन यूनियन और फिर अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते हुए उनके विषय में जानकारी देते हुए बताया कि अब पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है और समझौते कर रही है। कांग्रेस को भी यहअवसर मिला था, उन्होंने यह क्यों नही कर दिखाया?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के माध्यम से कांग्रेस,लेफ्ट व डीएमके सहित टीएमसी पर भी तीखा हमला बोला और उन्होंने बंगाल की टीएसमी सरकार को देश की सबसे निर्मम सरकार बताते हुए कहा कि यह लोग अपने अंदर नहीं झाकते अपितु हमको यहां बैठकर उपदेश देते हैं। प्रधानमंत्री ने राज्यसभा सांसद सदानंद मास्टर के भाषण का संज्ञान लेते हुए वैचारिक सहिष्णुता की चर्चा की, ज्ञातव्य है कि सदानंद मास्टर के दोनों पैर वामपंथी विचारधारा के लोगों ने निर्ममता से केवल उनकी विचारधारा अलग होने के कारण काट दिए थे।
संसद के वर्तमान सत्र में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने जो रवैया अपनाया है उसने देश के वास्तविक मुद्दों को उठाने का एक सुनहरा अवसर खो दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा को घेरने के बजे उन्होंने भाजपा व प्रधानमंत्री मोदी को ही अपने ऊपर आक्रमण करने का अवसर दे दिया है। भाजपा अब सिख व दलित सांसदों के अपमान का राजनैतिक लाभ उठाने का पूरा प्रयास करेगी। भाजपा चुनाव वाले राज्यों में विरोधी दलों के संसदीय आचरण को भी मुद्दा बनाएगी।
लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित , स्वतंत्र पत्रकार, लेखक हैं।

February 8, 2026

संघ की सौ वर्ष की यात्रा हिन्दू स्वाभिमान और समरसता की यात्राः जोगिन्दर पाल सिंह

Joginder Pal Singh Adress in Hindu Sammelan

हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश महामंत्री जोगिंदर पाल सिंह

Posted on: 08.02.2026 Sunday, Time: 11.17 PM, Moradabad

मुरादाबाद, 08 फरवरी 2026, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश महामंत्री जोगिन्दिर पाल सिंह ने कहा कि है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष की यात्रा हिन्दू स्वाभिमान और समरसता की यात्रा है। हिन्दू पुनर्जागरण की यात्रा है। संघ का सौ वर्ष का इतिहास गौरवपूर्ण है। श्री सिंह रविवार को यहां कृष्णा विद्या मन्दिर इंटर कालेज मंगुपुरा में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में  सम्बोधित कर रहे थे।

श्री सिंह ने कहा कि आज शबरी जयंती है। यह हमें समरसा का संदेश देती ही। शबरी ने अनेक वर्ष तक दृढ़ विश्वास के साथ भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा की थी। भगवान श्रीराम ने भी शबरी के बेर खाकर समसरसा का संदेश दिया। उन्होंने कहा  हिन्दू समाज और संस्कृति पर अनेक आक्रमण हुए हैं। पहला आक्रमण मुहम्मद बिन कासिम ने सन् 712 में किया था। हमारी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं को नष्ट करने का प्रयास हुआ। इसके बाद भी अनेक आक्रमण हुए। लेकिन भारत के संत महात्माओं, महापुरुषों ने उन आक्रमओं का डटकर सामना किया। उन्हें विफल करते रहे।

हिन्दू सम्मेलन के अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह का सम्मान

श्री सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना काल की परिस्थितियों और संस्थापक डा केशव बलिराम हेडगेवार के प्रेरणादायी जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ चढकर हिस्सा लिया। संघ संस्थापक डा हेडगेवार ने ही सबसे पहले पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। उनके प्रस्ताव को मानकर ही पूर्ण स्वराज्य दिवस मनाने की परंपरा आरम्भ हुई थी। स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगे प्रतिबंधों की भी उन्होंने चर्चा की। साथ ही बताया कि संघ के योगदान को देखते हुए ही 1963 में संघ को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया गया था।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर शनि सिंह ने कहा कि आज यह विडम्बना ही है कि हिन्दुओं के देश में हिन्दू सम्मेलन आयोजित करने की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने उन कारणों पर प्रकाश डाला जिनके कारण हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्य कर रहा है। श्री सिंह ने संघ के शताब्दी वर्ष में निर्धारित किये गए पंच परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला।  इन पंच परिवर्तनों के लिये समाज को तैयार होने और अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि पंच परिवर्तनों में कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व का जागरण और राष्ट्रीय कर्तव्य को आत्मसात करना है। इनके माध्यम से ही समाज अनेक आसन्न चुनौतियों का सामना करने में सफल होगा।

प्रो. सिंह ने कहा कि हमें यह नारा देना होगा और इसे अपनाना भी होगा-जातिवाद की करो विदाई, हम सब हैं भाई भाई। हमें जातिवाद को दूर करना है, जातियों में नहीं बंटना है। भेदभाव रहित समाज, एकात्म समाज की स्थापना ही संघ का उद्देश्य है। इन पंच परिवर्तनों के भाव को युवा पीढ़ी को समझना और अपनाना आवश्यक है क्योंकि ये युवा ही देश के भविष्य हैं।

हिन्दू सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि मेजर राजीव ढल ने कहा कि हम हिन्दू गर्व से कह सकते हैं कि हम हिन्दू हैं। हमारे पूर्वजों ने लालच में आकर, भय के कारण हिन्दू धर्म नहीं छोड़ा। उन पर अनेक अत्याचार हुए, अनेक तरह के प्रलोभन भी दिये गए किन्तु उन्हें स्वीकार नहीं किया। पूर्वजों ने बलिदान कर दिये किन्तु हिन्दू धर्म नहीं त्यागा। इसलिए हम कह सकते हैं कि हमें गर्व है कि हम हिन्दू हैं। भारत पर आक्रमण करने वालों ने हिन्दू संस्कृति को मिटाने का अभियान चलाया। मठ मन्दिर तोड़े गए, उनके स्थान पर मस्जिदें बनायी गईं। यदि उन्हें मस्जिदें बनानी थीं तो कहीं और भी बना सकते थे। लेकिन उन्हें हिन्दू समाज को अपमानित करना था इसलिए हिन्दू मंदिरों को तोड़ा गया, वहीं मस्जिदें बना दी गईं।

मेजर ढल ने कहा कि सिख गुरुओं के बलिदान से हिन्दू समाज की रक्षा हुई। गुरुओं की संतानों ने बलिदान किये। गुरुओं के शीश काट दिये गए। लेकिन उन्होंने हिन्दू धर्म को बचा लिया। भारत विभाजन की विभिषिका और कश्मीर में हुए नरसंहार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए यह सब किया गया। नेता देखते रहे और नरसंहार होते रहे। भारत विभाजन के समय हो अत्याचारों को झेलते हुए जब अनेक हिन्दू यहां आये तो कोई मदद को नहीं आया। सिर्फ राष्ट्रीय स्वंयंसेवक संघ ने शिविर लगाकर सहायता की थी। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि स्वतंत्रता के बाद देश में मुगलों की इतिहास पढ़ाया जाने लगा, कभी गुरुओं के बलिदान का इतिहास नहीं पढ़ाया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि 21वीं शताब्दी, हिन्दू शताब्दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में हो रहे हिन्दू सम्मेलनों की श्रंखला में सभी समस्याओं की भी समाधान है। उन्होंने बताया कि इसी क्षेत्र में 1982 से 85 के मध्य चार हिन्दू सम्मेलन हुए थे। ये सम्मेलन काशीपुर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर और दिल्ली मे हुए। इन सम्मेलनों की ही शक्ति और जागरण का परिणाम था कि मात्र 46 वर्ष में अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य दिव्य मन्दिर बन गया। क्योंकि इन सम्मलेनों से ही राम मन्दिर के निर्माण की मांग उठी थी। हिन्दू सम्मेलन की शक्ति ने उस संघर्ष में निर्णायक विजय दिला दी जोकि 496 साल तक चला था। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर कार्यवाह जितेन्द्र चौधरी ने किया।

 

 

उपज अध्यक्ष का रामपुर में स्वागत

UPAJ President Sarvesh Kumar Singh hounered by Surya Prakash Pal in Rampur

रामपुर में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल ने उपज अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह का स्वागत किया

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time 08.32 PM, Rampur

रामपुर, 08 फरवरी 2026, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) श्री सूर्य प्रकाश पाल जी से वरिष्ठ पत्रकार और उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज) के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह ने भेंट की। भेंट के दौरान श्री पाल ने अंगवस्त्र भेंट कर उपज प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत किया।

इस अवसर पर साथ में राष्ट्र सेविका समिति की पदाधिकारी श्रीमती अनीता प्रकाश और उत्तर प्रदेश समाचार सेवा के वरिष्ठ संवाददाता श्री किशन लाल शर्मा भी उपस्थित थे। उपज अध्यक्ष ने श्री सूर्य प्रकाश पाल जी को उत्तर प्रदेश समाचार सेवा का विशेषांक अभ्युदय भेंट किया।

Uttar Pradesh Samachar Sewa Souvenir Abhuday presented to Upadhyaksh UP Rajya pichda varg ayog

उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल को उत्तर प्रदेश समाचार सेवा की स्मारिका अभ्युदय भेंट करते हुए सर्वेश कुमार सिंह

भेंट वार्ता के दौरान श्री पाल से वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य पर चर्चा हुई।

मन में 2047 में देश विभाजन का डर नहीं, अखंड भारत का संकल्प मजबूत बनाओ

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का उदघोष, 2047 में विभाजन का डर पालने की बजाए, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

मुम्बई में संघ यात्रा के सौ वर्ष नए क्षितिज व्याख्यान माला के पहले सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 08.09 PM, RSS Rashtriya Swayamsevak Sangh, Sar Sanghchalak, Mumbai Samvad, #RSS100

मुंबई, 08 फरवरी। देश विरोधी शक्तियों के देश विभाजन के मंसूबों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी ने कहा कि आप 2047 में देश विभाजन का डर पालने की बजाय, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो। जो 500 साल में सुल्तान बादशाह यहां रहकर नहीं कर सके, 200 साल में अंग्रेज नहीं कर सके। वह स्वतंत्र भारत में क्यों व कैसे होगा, यह 1947 नहीं है। हम बहुत आगे बढ़ गए हैं, अब भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे। भारत जुड़ जाएगा, और यह होगा। यह संकल्प मन में मजबूत बनाओ। तो ये जो कुछ लोग दुस्वप्न देख रहे हैं, उनके मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। हम सब लोग हैं, हम होने नहीं देंगे।

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘संघ यात्रा के १०० वर्ष : नए क्षितिज’ दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में मुंबई के ९०० से अधिक प्रतिष्ठित मान्यवरों को संबोधित किया। नेहरू सेंटर सभागार, वरळी में रविवार, ०८ फरवरी को संपन्न प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ. मोहन भागवत जी ने उपस्थित सदस्यों द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। इस अवसर पर मंच पर पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. जयंतीभाई भाडेसिया, कोंकण प्रांत संघचालक अर्जुन चांदेकर, मुंबई महानगर संघचालक सुरेश भगेरिया उपस्थित थे। पूछे गए कुल १४३ प्रश्नों को १४ श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। इनमें संघ नीति, हिन्दुत्व, राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्कृति, कला, खेल व भाषा, जीवनशैली, पर्यावरण आदि विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल रहे।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार पर सरसंघचालक जी ने बांग्लादेश के सवा करोड़ हिन्दुओं से संगठित होने का आह्वान किया। ऐसा होने पर अत्याचार पर स्वतः ही रोक लग जाएगी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र इनमें से कोई नहीं, बल्कि हिन्दू ही संघ का सरसंघचालक होगा। उन्होंने कहा कि संघ का सरसंघचालक बनने के लिए किसी भी जाति का होना न तो बाधा है और न ही कोई अनिवार्य योग्यता। भविष्य में अनुसूचित जाति या जनजाति के कार्यकर्ता भी सरसंघचालक बन सकते हैं।

जिन पर पीढ़ी दर पीढ़ी अन्याय या अत्याचार हुआ है, उनके सर्वांगीण उत्थान होने तक तथा उनके मन में सुरक्षा की भावना उत्पन्न होने तक संविधान सम्मत आरक्षण जारी रहना चाहिए, यह संघ की स्पष्ट भूमिका है।

संघ के स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों तथा सभी प्रकार के प्रयासों में सहभागी होना चाहिए, यह संघ की भूमिका है। किंतु केवल कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करना कठिन है, इसके लिए संस्कारित समाज मन का निर्माण उतना ही महत्वपूर्ण है। साथ ही कोई भी व्यवस्था मूल रूप से भ्रष्ट नहीं होती, बल्कि उस व्यवस्था में कार्य करने वाले व्यक्तियों का मन भ्रष्ट होता है और उसी कारण व्यवस्था भ्रष्ट होती है।

जबरदस्ती या लालच देकर धर्मांतरण किया जाता है तो वह निंदनीय है और उसका प्रत्युत्तर घर वापसी होगा, यह स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा या स्वप्रेरणा से धर्म परिवर्तन करता है तो उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। जनसंख्या का अनुपात केवल जन्मदर में कमी से नहीं बदलता, बल्कि धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ के कारण भी बदलता है, इस ओर ध्यान दिलाते हुए अवैध घुसपैठ के संदर्भ में ‘डिटेक्ट एंड डिपोर्ट’ नीति को कठोरता से लागू करने का आह्वान किया।

हिन्दू और सिक्ख पहले से ही एक थे और आज भी उनके बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं। उनका रक्त संबंध है। पूजा पद्धति अलग मानी जा सकती है, उनकी विशिष्टता को मान्यता दी जानी चाहिए, लेकिन वे अलग नहीं हैं। हम सभी धर्म एक ही परंपरा से आए हैं। गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिक्ख गुरुओं की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के संतों की वाणी संकलित की गई है। ‘हिंद की चादर’ के रूप में पहचानी जाने वाली यह प्राचीन एकता पुनः स्थापित करनी है। समाज के नाते हम सभी एक हैं, यह ध्यान में रखना चाहिए। हिन्दू नाम से कोई अलग धर्म अस्तित्व में नहीं है। आज जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है, वही प्राचीन सनातन धर्म है। तथागत बुद्ध ने अपने उपदेशों के माध्यम से इसी सनातन धर्म में समयानुकूल सुधार किए। आधुनिक काल में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भी इस ओर इंगित किया।

ईसा मसीह द्वारा प्रतिपादित ईसाईयत और पैगंबर मोहम्मद द्वारा बताए गए इस्लाम का स्वरूप आज उसी रूप में दिखाई नहीं देता। इसका कारण यह है कि उनके बाद इन दोनों पंथों पर तत्कालीन राजनीति का प्रभाव बढ़ गया। परिणामस्वरूप इन पंथों की आध्यात्मिकता पीछे रह गई और राजनीतिक हित अधिक प्रभावी हो गए। इन पंथों के मूल आध्यात्मिक तत्वों को प्रोत्साहन दिया जाए तो विश्वभर के राजनीतिक संघर्ष कम हो सकते हैं।

भारत रत्न सम्मान प्राप्त न होने पर भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर करोड़ों भारतीयों के हृदय पर राज कर रहे हैं। किंतु यदि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो इस सम्मान की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

भाजपा के सत्ता में आने से संघ को कोई प्रत्यक्ष लाभ हुआ ऐसा नहीं है, बल्कि समाज में संघ की बढ़ती शक्ति और स्वीकार्यता का लाभ समान विचारधारा और भारतीय नीतियों का पालन करने वाले दलों को मिला है। संघ के स्वयंसेवकों के निरंतर परिश्रम तथा समाज द्वारा संघ को मिले स्नेह और विश्वास के कारण ही संघ का कार्य बढ़ा है। संघ से संबंधित संस्थाओं, संगठनों या दलों पर संघ दबाव नहीं डालता। यहां कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को पर्याप्त स्वतंत्रता होती है, जिससे वे अपने क्षेत्र में आवश्यक निर्णय और प्रयोग जिम्मेदारी से कर सकते हैं। वे जो अच्छे कार्य करते हैं, उसका श्रेय उन्हीं को जाता है, लेकिन जहां कमियां रह जाती हैं, उसके प्रश्न अभिभावक के नाते हमारे पास आते हैं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी हम लेते हैं। संघ का कार्य केवल व्यक्ति निर्माण का कार्य है। किसी विशेष क्षेत्र में कार्य करना संघ का कार्य नहीं है।

समान नागरिक संहिता पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि समाज की मानसिकता तैयार करके तथा सभी समाज घटकों को विश्वास में लेकर इस प्रकार का कानून लागू किया जाना चाहिए। उत्तराखंड तथा अन्य कुछ राज्यों में ऐसे प्रयोग हो रहे हैं, इसलिए हम उसका स्वागत करते हैं। भारत विविधता में एकता को बनाए रखने वाला देश है, यह सिद्धांत ऐसे कानून बनाते समय प्राथमिकता से ध्यान में रखना चाहिए।

संघ के कार्यकर्ताओं की औसत आयु २८ वर्ष है और इसे २५ वर्ष से नीचे लाने का प्रयास चल रहा है। देश का युवा देशभक्त और नैतिक आचरण करने वाला है। यदि उन्हें उनकी भाषा में विषय समझाए जाएं, तो वे उन्हें स्वीकार करते हैं और उसका आचरण भी करते हैं। इसलिए तार्किक पद्धति से उन्हें अपने मूल विचारों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्हें प्रयोग करने की स्वतंत्रता और अवसर देना चाहिए तथा यदि प्रयोग में कोई त्रुटि हो जाए तो उनके पीछे दृढ़ता से खड़ा रहना चाहिए। यदि वर्तमान पीढ़ी युवाओं की जिज्ञासा शांत करने की क्षमता विकसित करे, तो युवा पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी के समन्वय से भविष्य का सशक्त भारत निर्माण होगा। भारतीय दर्शन का प्रभाव अंतरात्मा तक पहुंचता है, जबकि पाश्चात्य प्रभाव बाहरी स्तर तक सीमित रहता है।

विधान सभा सत्र संचालन में दलीय नेता सहयोग करें: सतीश महाना

Yogi Adityanath

दलीय नेताओं की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्वागत किया

Posted on 08.02.2026, Time: 08.01 AM, UP Assembly session 

लखनऊ, 08 फरवरी 2026, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने 09 जनवरी 2026 से प्रारम्भ हो रहे 18वीं विधान सभा सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सभी दलीय नेताओं से सहयोग का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि संसदीय व्यवस्था में संवाद तथा सकारात्मक चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से लोकतंत्र सुदृढ़ होता है। विधानसभा चर्चा और परिचर्चा का मंच है, शोर-शराबे का नहीं। सहमति और असहमति लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं। शोर-शराबे से न तो सरकार की बात सामने आती है और न ही विपक्ष की।विधान भवन में आयोजित सर्वदलीय बैठक में सभी दलीय नेताओं ने विधान सभा अध्यक्ष को सदन संचालन में सहयोग देने का आश्वासन दिया।

बैठक में विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि यह देश की सबसे बड़ी विधान सभा है। स्वाभाविक रूप से उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यवाही पूरे देश के विधान मंडलों के लिए एक मानक एवं आदर्श प्रस्तुत करती है। श्री महाना ने कहा कि सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर देर शाम तक सदन की कार्यवाही संचालित की जाएगी, ताकि प्रत्येक सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पूर्व के इतिहास पर दृष्टि डाली जाए तो विगत चार वर्षों में इस विधानसभा में सर्वाधिक चर्चा हुई है।विधान सभा अध्यक्ष ने सभी दलों के नेताओं से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने पक्ष को सदन में शालीनता एवं संसदीय मर्यादा के अंतर्गत रखें और प्रेमपूर्ण वातावरण में बहस करें। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार पूर्व के सत्रों में सभी का सहयोग प्राप्त हुआ है, उसी प्रकार इस सत्र में भी सहयोग की आशा है।इस अवसर पर सभी दलीय नेताओं ने विधान सभा अध्यक्ष की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि आपके दिशा-निर्देशन में विधान सभा में निरंतर कुछ नया देखने को मिल रहा है। उम्मीद है कि भविष्य में भी नए प्रयोगों के साथ विधान सभा में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।बैठक में नेता सदन एवं प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सर्वदलीय बैठक में संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने सभी दलीय नेताओं को आश्वस्त किया कि सरकार पूरी गंभीरता के साथ विकास को नई गति देने एवं आगे बढ़ाने के लिए कार्य करेगी। सरकार सभी मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। संसदीय कार्य मंत्री ने माननीय मुख्यमंत्री जी की भावना के अनुरूप सभी दलीय नेताओं से सदन में शांतिपूर्ण सहयोग की अपील की।इस अवसर पर माननीय नेता प्रतिपक्ष श्री माता प्रसाद पाण्डेय, माननीय नेता अपना दल (सोनेलाल) श्री राम निवास वर्मा, माननीय नेता राष्ट्रीय लोकदल श्री राजपाल बालियान, माननीय नेता सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी श्री ओमप्रकाश राजभर, माननीय नेता निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल श्री रमेश सिंह, माननीय नेता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस श्रीमती आराधना मिश्रा ‘मोना’ तथा जनसत्ता लोकतांत्रिक दल के माननीय नेता कुंवर रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ के स्थान पर श्री विनोद सरोज ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और सदन की कार्यवाही को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने में हर प्रकार का सहयोग देने का आश्वासन दिया।इससे पूर्व माननीय विधान सभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना जी की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना के अतिरिक्त समिति के सदस्य श्री जयवीर सिंह, श्रीमती बेबी रानी मौर्य, श्री सुशील कुमार शाक्य, श्री जयप्रताप सिंह, श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, श्री पंकज सिंह, श्री रविदास मेहरोत्रा, डॉ. संग्राम यादव, श्री आशु मलिक तथा विशेष आमंत्रित सदस्य श्री रामनिवास वर्मा, श्री राजपाल सिंह बालियान, श्री रमेश, श्री ओमप्रकाश राजभर और श्रीमती आराधना मिश्रा ‘मोना’ शामिल हुए।इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान सभा के प्रमुख सचिव श्री प्रदीप कुमार दुबे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

« Newer PostsOlder Posts »