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स्वतंत्रता आन्दोलन में डा. हेडगेवार जी का योगदान

January 20, 2026

स्वतंत्रता आन्दोलन में डा. हेडगेवार जी का योगदान

प्रहार पर प्रहार जो करते है रात-दिन, आजादी में तुम्हारा, क्या योगदान है?
कितने ही भुलाए गए, कितने छिपाए गए,अनगिनत का समाया, इसमें प्राण दान है।

एक रीति-नीति से बद्ध ,सत्ता के करीबी थे जो,इतिहास ने उनका ही गाया गुणगान है।

हुंकार से हिल गईं,अंग्रेजी शासन की चूलें, उनको उग्रवादी कह,जाने क्यों बुलाया गया।
खून और पसीना जिनका, आजादी में है शामिल, ऐसे महापुरुषों को मेरा प्रणाम है।

मेरी स्वरचित ये पंक्तियां उद्घाटित करती है कि भारत की आजादी में अनेकानेक लोगों का योगदान है।कतिपय को इतिहास के पन्नों में उनके कार्य और बलिदान के अनुरूप उचित स्थान नहीं मिल पाया तो इसका कदापि ये अर्थ नहीं है कि वे वन्दनीय, स्मरणीय व स्तुत्य नहीं है। ऐसे ही महापुरुष हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक केशवराव बलिराम हेडगेवार। जिनके विषय में देश के कुछ दल और लोग कहते हैं कि देश की आजादी में संघ का कोई योगदान नहीं रहा। वास्तव में ऐसे लोग डॉ. हेडगेवार द्वारा आजादी हेतु किए गए संघर्ष को नकारकर देश में नकारात्मकता का वातावरण पैदा कर संघ के प्रति दुर्भावना जाग्रत करना चाहते हैं। आजादी के इस कालखंड के इतिहास का अवलोकन करने पर हमें ज्ञात होता हैं कि चाहेंं खिलाफत आंदोलन हो या असहयोग और नमक सत्याग्रह, सभी में डॉक्टर हेडगेवार जी ने अपने स्वयंसेवकों के साथ सक्रिय रूप से भाग लिया और जेल भी गए। “होनहार बिरवान के होत चिकने पात” कहावत के अनुसार डॉक्टर हेडगेवार जी में बचपन से ही राष्ट्रभक्ति और ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। इसे उनकी बचपन की दो घटनाएं रेखांकित करती हैं। प्रथम क्वीन विक्टोरिया की जयंती पर स्कूल में बांटी गई मिठाइयों को फेंक देना क्योंकि उनके मन में यह बात घर कर गई थी कि हम उनकी जयंती पर मिठाई क्यों खाएं? जिन्होंने हमें गुलाम बना रखा है और दूसरी घटना स्कूल में ब्रिटिश इंस्पेक्टर के आने पर उन्होंने सहपाठियों के साथ “वंदे मातरम” का उद्घोष किया जिसके कारण उनका स्कूल से निष्कासन हुआ। डॉक्टर साहब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की राष्ट्रभक्ति और हिंदू संस्कृति की विचारधारा से प्रभावित थे इसलिए उन्होंने 1910 में चिकित्सा शिक्षा के लिए कोलकाता जाने का निर्णय लिया जो उसे समय क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था और वे क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़े और क्रांतिकारी प्रशिक्षण प्राप्त किया। 1916 में नागपुर लौटने पर वे कांग्रेस से जुड़कर विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव बने और 1920 के नागपुर कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखा जो उस समय पारित नहीं हुआ लेकिन यह प्रस्ताव कांग्रेस ने 9 साल बाद वर्ष 1929 के लाहौर अधिवेशन में पारित किया जिसके पारित होने पर डॉक्टर हेडगेवार ने तब संघ की सभी शाखों में कांग्रेस का अभिनंदन करने और 26 जनवरी 1930 को तिरंगा फहराने का निर्देश दिया। 1921 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले असहयोग आंदोलन में डॉक्टर हेडगेवार जी ने सक्रिय भागीदारी निभाई और “स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” जैसे नारे लगाने और भड़काऊ भाषणों के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया तथा 19 अगस्त 1921 से 11 जुलाई 1922 तक 1 साल जेल में रहे। जेल से रिहाई के बाद 12 जुलाई 1922 को मोतीलाल नेहरू, राजगोपालाचारी जैसे अनेक नेताओं की उपस्थिति में डॉक्टर साहब का भव्य स्वागत किया गया। 1925 में आरएसएस की स्थापना के बाद भी डॉक्टर साहब ने स्वतंत्रता संग्राम से दूरी नहीं बनाई बल्कि 1930 में गांधी जी के नमक सत्याग्रह के समांतर चले “जंगल सत्याग्रह” में सरसंघचालक पद से त्यागपत्र देकर सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया और वन कानूनों का उल्लंघन करने के कारण 11 साथियों के साथ गिरफ्तार हुए और 9 महीने जेल में रहे ।यह मध्य प्रांत का सबसे सफलतम सत्याग्रह माना जाता है।महात्मा गांधी जी ने 8 अगस्त 1942 को गोवलिया टैंक मैदान ,मुंबई पर आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा दिया जिससे महाराष्ट्र के अमरावती, वर्धा चंद्रपुर में विशेष आंदोलन हुए जिसका नेतृत्व संघ के अधिकारी दादा नायक बाबूराव, अण्णाजी ने किया और गोली लगने पर संघ के स्वयंसेवक बालाजी रायपुरकर का बलिदान हुआ। डॉ. हेडगेवार जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ 1925 को विजयादशमी के दिन हिंदू समाज को संगठित करने और उसके चरित्र निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की क्योंकि उनका मानना था कि असंगठित समाज स्वतंत्रता को बनाए रखने में अक्षम है। शायद यही बात कुछ विशिष्ट विचारधारा वाले दलों के लोगों को अच्छी नहीं लगती है और वे डॉक्टर हेडगेवार जी के आजादी में योगदान को नकारते हैं जबकि डॉक्टर साहब बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे पहले क्रांतिकारी,फिर कांग्रेसी कार्यकर्ता और अंत में समाज सुधारक बने जो उनकी राष्ट्रभक्ति का द्योतक है। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी तथा स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र को मजबूत रखने हेतु आरएसएस की स्थापना उनकी दूरगामी राष्ट्रवादी सोच का परिणाम है जिसके लिए वे वन्दनीय व अभिनन्दनीय हैं और उनका समग्र योगदान इतिहास में उचित स्थान पाने का हकदार है।

Chandra Prakash Sharma, Poet, Writer, Rampur, Uttar Pradesh

Chandra Prakash Sharma

डॉ.चन्द्रप्रकाश शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार निवास -नसीराबाद (प्रकाश इण्टर कालेज),मिलक, रामपुर (उ.प्र.)-244701 मोबाइल -8273463656

उप्र दिवस प्रदेश की विकास यात्रा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का उत्सव -जयवीर सिंह

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उत्तर प्रदेश दिवस

उप्र दिवस-2026 के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पधारे प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परम्पराओं, कला, पर्यटन, नवाचार एवं विकास यात्रा को प्रस्तुत किया जायेगा

लखनऊ: 20 जनवरी, 2026, उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पधारे जाने माने कलाकारों द्वारा गायन, शास्त्रीय एवं लोक नृत्य, नाटक, भजन, सुगम संगीत, जनजातीय नृत्य, समकालीन प्रस्तुतियों का भव्य मंचन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के अवसर पर प्रस्तुत होने वाली सांस्कृतिक विधाएँ प्रदेश की समृद्ध लोक, शास्त्रीय एवं समकालीन परंपराओं का समग्र प्रतिनिधित्व करती हैं। इस प्रकार विविध सांस्कृतिक विधाओं की यह श्रृंखला उत्तर प्रदेश की जीवंत, बहुरंगी और समावेशी सांस्कृतिक पहचान को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करेगी।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आधुनिकता और परंपरा का सशक्त समन्वय देखने को मिलेगा। समकालीन संगीत की वैश्विक पहचान बन चुका इण्डियन ओसेन बैंड (Kandisa Music Productions Private Limited) अपनी ऊर्जावान बैंड प्रस्तुति के माध्यम से युवा वर्ग को विशेष रूप से आकर्षित करेगा। वहीं आध्यात्मिक और भावनात्मक संगीत की धारा को सुदृढ़ करते हुए श्री अमित प्रकाश मिश्रा एवं सुश्री प्रतिभा सिंह बघेल द्वारा भजन एवं सुगम संगीत की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी। शास्त्रीय नृत्य की परंपरा को सशक्त मंच प्रदान करते हुए भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा कथक, भरतनाट्यम एवं ओडिसी नृत्य की सुसंस्कृत एवं गरिमामयी संयुक्त प्रस्तुतियाँ होंगी, जो भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविधता, सौंदर्य और अनुशासन का जीवंत प्रदर्शन करेंगी। ये प्रमुख प्रस्तुतियाँ उत्तर प्रदेश दिवस-2026 को सांस्कृतिक दृष्टि से स्मरणीय और प्रभावशाली बनाएँगी।
श्री सिंह ने बताया कि आयोजन के दौरान एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP), हस्तशिल्प, GI टैग उत्पाद, पर्यटन स्थलों, मिशन शक्ति, औद्योगिक एवं अधोसंरचना विकास, तथा विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश विषयक प्रदर्शनियाँ लगाई जाएंगी। मुख्य समारोह में उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान, उत्कृष्ट उद्यमियों, महिला शक्ति, युवाओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों एवं विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा वर्ष 2026 में “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, चित्रकला कार्यशालाएँ, संगीत-वादन, ओपन माइक, नाटक, कठपुतली, क्विज, रंगोली, पाक कला प्रतियोगिता, पतंगबाजी एवं युवा-जनसहभागिता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधारित भव्य प्रदर्शनी तथा उत्तर प्रदेश पारंपरिक व्यंजन मेला आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के सहयोग से भी उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का आयोजन किया जायेगा। मुख्यमंत्री जी की प्रेरणा एवं कुशल मार्गदर्शन में तीन दिवसीय उत्सव के दौरान उ0प्र0 की विकास यात्रा से लेकर सांस्कृतिक धरोहरों पर आधारित विविध कार्यक्रम आयोजित किये जायेगे। यह आयोजन प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त, समृद्ध एवं सांस्कृतिक रूप से अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

एटा में चार नृशंस कत्ल करने वाला सीसीटीवी में दिखा एक करीबी शख्स

एटा 20 जनवरी उप्रससे। कोतवाली नगर क्षेत्र के गांव नगला प्रेमी में सोमवार दोपहर एक ही परिवार के चार लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। अपराधी का मकसद किसी तरह की चोरी या लूट करना नहीं था, हत्या करने के इरादे से ही वह आया था। वारदात के समय आसपास रहने वाले लोगों को भी भनक नहीं लगी।

एटा जिले में एक परिवार के चार लोगों की नृसंशता से कत्ल कर दिया गया। ईंट से चारों का चेहरा और सिर कुचला गया। मृतकों की पहचान करना भी मुश्किल हो रही थी। वारदात का खुलासा उस समय हुआ, जब स्कूल से मासूम घर पहुंचा तो उसने हर तरफ खून ही खून देखा।
एटा के सुनहरी नगर स्थित कलावती सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल कक्षा पांच में पढ़ने वाले 12 वर्षीय देवांश ने घर के भीतर ऐसा भयावह नजारा देखा कि रूह कांप गई। स्कूल से छुट्टी के बाद वह हंसी-खुशी घर लौटा। दरवाजा खोलकर जैसे ही अंदर घुसा तो उसकी चीख निकल गई।
सोमवार की सुबह सामान्य दिनों की तरह ही स्कूल गया। वहां पढ़ाई पूरी करने के बाद दोपहर 2 बजे छुट्टी हुई और सीधे अपने घर पर आया। देवांश ने बताया कि गेट खोलकर अंदर पहुंचा बाबा नीचे कमरे में लेटे थे। अम्मा, दीदी, और मम्मी को आवाज लगाई तो कोई जवाब नहीं मिला। ऊपर कमरे का पंखा चलने की आवाज आ रही थी, जो घर्र-घर्र करता है। सोचा कि इतनी ठंड में पंखा कौन चला रहा है? देखने के लिए ऊपर चढ़ा तो वहां कमरे का नजारा देखकर चीख निकल गई।

देवांश ने बताया कि अम्मा और दीदी नीचे लेटी थीं और मम्मी बेड पर लेटी थीं, खून से लथपथ थीं। पूरे कमरे में खून फैला हुआ था। सभी को ईंट से मारा गया। बाबा के बारे में पूछे जाने पर देवांश कुछ नहीं बता सका, उसे पता नहीं था कि बाबा की भी हत्या की गई है। इसके बाद वह बदहवास हालत में बाहर आया और ठीक सामने रहने वाले जसवीर सिंह के घर में गया। जसवीर सिंह ने बताया कि वह जसराना गए थे। पत्नी अनीता को देवांश ने पूरा मामला बताया।
जसवीर ने बताया कि अनीता का फोन आने पर उन्होंने देवांश के पिता कमल सिंह को तीन बार फोन मिलाया लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इतनी बड़ी वारदात के बारे में सुनकर वहां से निकल पड़े। यहां पहुंचे तो भीड़, पुलिस और दुख भरा सन्नाटा मिला।

देवांश ने बताया कि बाबा बीमार रहते थे, दादी भी बुजुर्ग थीं। हम बच्चों का आना-जाना रहता था इसलिए मेन गेट का छोटा वाला हिस्सा हमेशा खुला रहता था। इसे बाहर से हम लोग कुंडी लगाकर चले जाते थे और वापस आने पर खुद कुंडी खोलकर घर में अंदर आ जाते थे।

चार लोगों की हत्या की सूचना गंगा सिंह की पौत्री नातिन लक्ष्मी को दी गई जो सुनहरी नगर गेट के सामने पिता कमल सिंह के मेडिकल स्टोर पर बैठी थी। लक्ष्मी ने बताया कि पिता कमल सिंह करीब 12.30 बजे मेडिकल स्टोर से खाना खाने के लिए घर गए थे। इसके बाद किसी कार्य से मंडी की ओर चले गए। मेडिकल स्टोर पर उस समय वह बैठी हुई थी। फोन पर सूचना मिलने के बाद पिता यहां पहुंचे।

एटा के गांव नगला प्रेमी में सोमवार दोपहर एक ही परिवार के चार लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतकों में वृद्ध दंपती गंगा सिंह शाक्य (70) व श्यामा देवी (65), पुत्रवधू रत्ना देवी (48) और पौत्री ज्योति (22) शामिल हैं। हत्या के समय यही चारों लोग घर में मौजूद थे। हत्यारे ने घर में घुसने के बाद ईंट से सभी के सिर-चेहरे पर वार कर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस जांच में जुटी है।

बेटा के स्कूल से लौटने पर हुआ हत्याकांड का खुलासा

कोतवाली नगर क्षेत्र में शिकोहाबाद रोड स्थित गांव नगला प्रेमी में हुए इस हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब गंगा सिंह शाक्य का 12 वर्षीय नाती देवांश स्कूल से घर लौटा। उसी ने सबसे पहले मृत परिजन को देखा। घर में भूमि तल पर गंगा सिंह और पहली मंजिल पर श्यामा देवी, मां रत्ना देवी और ज्योति को खून से लथपथ देख उसकी चीख निकल गई।

 

चार लोगों की हत्या से क्षेत्र में फैली सनसनी

वह भागकर घर के बाहर आया और लोगों को जानकारी दी। गांव में चार लोगों की हत्या की खबर से सनसनी फैल गई। मामले की सूचना गंगा सिंह की पौत्री नातिन लक्ष्मी को दी गई जो सुनहरी नगर गेट के सामने पिता कमल सिंह के मेडिकल स्टोर पर बैठी थी।
सूचना पाकर अपर पुलिस अधीक्षक श्वेताभ पांडेय भी मौके पर पहुंचे। मौके पर गंगा सिंह, रत्ना देवी और ज्योति मृत हालत में मिले जबकि श्यामा देवी को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई। घटना के बाद एडीजी आगरा अनुपम कुलश्रेष्ठ, डीआईजी अलीगढ़ प्रभाकर चौधरी, एसएसपी श्याम नारायण सिंह भी मौके पर पहुंच गए।

हत्या करने में किसी करीबी का हाथ होने की जतायी जा रही आशंका

वारदात के दौरान घर के किसी भी सामान से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। अपराधी का मकसद किसी तरह की चोरी या लूट करना नहीं था, हत्या करने के इरादे से ही वह आया था। वारदात के समय आसपास रहने वाले लोगों को भी भनक नहीं लगी।
ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि घटना में किसी करीबी का हाथ हो सकता है। पुलिस जांच में भी जो तथ्य सामने आए हैं उसमें भी इस तरह के सबूत पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार वह खुलासे के काफी करीब तक पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीसीटीवी में घर में सिर्फ दवा कारोबारी ही प्रवेश करता दिख रहा है। इसके अलावा कोई और नहीं आया।

वर्जन
अनुपम कुलश्रेष्ठ एडीजी आगरा ने बताया कि चार लोगों की हत्या के मामले में गहनता से छानबीन की जा रही है। फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड ने काफी साक्ष्य जुटा लिए हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से जांच काफी सही तरीके से आगे बढ़ रही है। घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।

एटा में ट्यूबवेल पर काम करते समय युवक की हाईटेंशन लाइन से मौत

एटा 20 जनवरी उप्रससे। जिले के सकरौली थाना क्षेत्र के इसौली गांव में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई। युवक ट्यूबवेल पर लाइन ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़ा था।

परिजनों ने मृतक साजिद पुत्र इस्लाम को तत्काल एटा स्थित वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मृतक की पत्नी साहिबा बानो ने बताया कि उनके पति को गांव के ही किसी व्यक्ति ने ट्यूबवेल की लाइट ठीक करने के लिए बुलाया था। खंभे पर चढ़ते ही वह हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई।

January 19, 2026

Etah दिनदहाड़े एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या के बाद फैली सनसनी, पुलिस जांच में जुटी

 

एटा 19 जनवरी उप्रससे। कोतवाली नगर क्षेत्र के अंतर्गत गांव नगला प्रेमी में दिनदहाड़े एक ही परिवार के चार लोगों की निर्मम हत्याकांड से सनसनी फ़ैल गई।
हत्याएं इतनी बेरहमी और खौफनाक तरीके से की गई थीं लाशों के आस-पास खून के चीथड़े फैले हुए थे।

गांव नगला प्रेमी में अज्ञात हमलावरों ने घर के अंदर घुसकर पूरे परिवार पर जानलेवा हमला किया और जो मिला उसको मौत के घाट उतार दिया।
इस खौफनाक हत्याकांड में बुजुर्ग गंगा सिंह, उनकी पत्नी श्यामा देवी, पुत्रवधू रत्ना देवी और नातिन ज्योति की मौत हो गई। लाशों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे अज्ञात हत्यारों ने धारदार हथियार के अलावा ईट-पत्थर से उनपर हमला किया गया हो, घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और सनसनी का माहौल है, गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
घटना के वक्त मृतक बुजुर्ग गंगा सिंह का नाती स्कूल गया हुआ था, जब वह स्कूल से लौटकर घर पहुंचा और दरवाजा खोला, तो उसने देखा कि भीषण ठंड के बावजूद घर के अंदर पंखा चल रहा था। उसे शक हुआ और वह कमरे के अंदर गया।
देवांश ने बताया कि कमरे के अंदर का मंजर रूह कंपा देने वाला था। दादा-दादी, मां और दीदी चारों फर्श पर खून से लथपथ पड़े थे और पूरे कमरे में चारों ओर खून फैला हुआ था।
यह दृश्य देखकर मासूम देवांश चीखता हुआ घर से बाहर भागा, जिसके बाद मोहल्ले वालों को घटना की जानकारी हुई। इसके बाद पड़ोसियों ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर देखा तो बुजुर्ग श्यामा देवी की सांसें चल रही थी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उनको मेडिकल कॉलेज पहुंचाया लेकिन उन्होंने भी वहां पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया।
पुलिस द्वारा घर की घेराबंदी कर हर एंगल से जांच शुरू कर दी गई है, तमाम सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है।
हालांकि इस खौफनाक हत्याकांड को क्यों और किसने अंजाम दिया पुलिस जांच के बाद ही पता चल सकेगा?

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