Web News

www.upwebnews.com

विवाहिता की संदिग्ध मौत, दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज; पति गिरफ्तार

July 29, 2026

विवाहिता की संदिग्ध मौत, दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज; पति गिरफ्तार

हाथरस। थाना चंदपा क्षेत्र के गांव गढ़ी परती बनारसी में 27 वर्षीय विवाहिता कोमल सिसौदिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। मृतका के मायके पक्ष ने पति, जेठ और ससुर पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने तथा हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है।घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मायके पक्ष को अवगत कराया। मृतका के पिता संतोष की तहरीर पर दर्ज रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पति अभिषेक, जेठ सुनील और ससुर ओमवीर दहेज में बुलेट मोटरसाइकिल और ₹50 हजार की मांग को लेकर कोमल को प्रताड़ित करते थे। मांग पूरी न होने पर उसकी हत्या कर दी गई।मृतका के भाई का आरोप है कि अभिषेक शराब के नशे में अक्सर कोमल के साथ मारपीट करता था और परिवार के अन्य सदस्य भी उसे प्रताड़ित करते थे। बताया गया कि अभिषेक की यह दूसरी शादी थी तथा दंपति के दो छोटे बच्चे हैं।पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपों की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व पार्षद कैलाश भट्ट ने लगाए फूल फरौशी ठेकों में अनियमितताओं के आरोप


वर्ष 2010 से वर्तमान तक सभी ठेकों की जांच और संबंधित ठेकदारों से राजस्व नुकसान की भरपाई की मांग की
हरिद्वार, 29 जुलाई। पूर्व पार्षद कैलाश भट्ट ने नगर निगम के फूल फरौशी के ठेकों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए वर्ष 2010 से वर्तमान तक सभी ठेकों की जांच कर संबंधित ठेकेदारों से वसूली तथा निगम के राजस्व को हुए नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है। प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कांग्रेस के पूर्व पार्षद कैलाश भट्ट ने नगर निगम द्वारा मालवीय द्वीप, घंटाघर सहित अन्य स्थानों पर फूल फरौशी के ठेके आवंटित किए जाते हैं। आरोप लगाया कि वर्ष 2010 से अब तक के फूल फरौशी ठेकों की प्रक्रिया और उससे प्राप्त राजस्व का स्पष्ट रिकॉर्ड सूचना के अधिकार के तहत उत्तराखंड सूचना आयोग तक मामला पहुंचाए जाने के बावजूद अपेक्षित जानकारी नहीं दी गयी। कैलाश भट्ट ने वर्ष 2026 में ठेकों की अवधि समाप्त होने के बाद अपनाई गई ई-निविदा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम ने 7 मई 2026 को ई-निविदा आमंत्रित की और 28 मई को निविदाओं के संबंध में जानकारी दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद तकनीकी एवं वित्तीय बिड खोलने में देरी हुई तथा अधिकारियों को कई बार पत्र देने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। 19 जून 2026 को वित्तीय और तकनीकी बिड खोली गईं, जिनमें कुछ टेंडर दो-दो बिड के साथ पाए गए। आरोप लगाया कि करीब 22 दिनों तक बिड नहीं खोली गई, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ठेके नहीं खोले गए। आरोप है कि कुछ मामलों में ठेकेदारों द्वारा निर्धारित राशि जमा नहीं किए जाने के बावजूद उन्हें ठेका दिए जाने की स्थिति बनी। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में जहां ठेकेदारों को निर्धारित धनराशि का 25 प्रतिशत जमा करना होता था, वहीं बाद में नगर निगम द्वारा 40 प्रतिशत तथा चार माह की संपूर्ण धनराशि जमा करने का नियम बनाया गया। भट्ट ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ ठेकेदार अलग-अलग नामों से ठेके लेकर प्रक्रिया में भाग लेते रहे हैं। इसके चलते वर्ष 2010 से वर्तमान तक फूल-फरौशी के ठेकों की विस्तृत जांच आवश्यक है। उन्होंने अत्यधिक भीड़ वाले समय में ठेकेदारों द्वारा ठेके के बाहर खोखे और दुकानें लगाकर नगर निगम को राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया और मांग की कि निर्धारित स्थल के अतिरिक्त कहीं भी फूलों की बिक्री न हो और ठेकेदारों द्वारा किसी प्रकार का अतिक्रमण न किया जाए। पत्रकारवार्ता में पार्षद हिमांशु गुप्ता, ऋषभ वशिष्ठ, शिवम गिरी, तरूण व्यास, शुभम जोशी, अनिकेत गिरी, शानू गिरी मौजूद रहे।

छह दशकों की हिंसा के बाद देश वामपंथी उग्रवाद से मुक्त: नित्यानंद राय

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, सरकार ने कहा है कि लगभग छह दशकों की हिंसा के बाद देश वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो गया है, जिसे कभी आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक माना जाता था। राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह उपलब्धि वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए 2015 की राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना के दृढ़ कार्यान्वयन और केंद्र तथा राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से हासिल हुई है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि वर्तमान में कोई भी जिला वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत नहीं है।

श्री राय ने बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या अप्रैल 2018 में 126 से घटकर 90, जुलाई 2021 में 70, अप्रैल 2024 में 38, दिसंबर 2025 में 8 और मार्च 2026 में शून्य हो गई। श्री राय ने यह भी बताया कि वर्तमान में 37 जिलों को विरासत और महत्वपूर्ण जिलों के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो अब नक्सल प्रभावित नहीं हैं। इन जिलों की स्थिति को मजबूत करने के लिए सुरक्षा और विकास उपायों के संबंध में कुछ और समय तक निरंतर समर्थन की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि एक जिले को चिंताजनक जिले की श्रेणी में रखा गया है, जहां नक्सल प्रभावित हिंसक गतिविधियों को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है और उनकी संगठनात्मक संरचना को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। श्री राय ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बाद की स्थिति में सरकारी कल्याण कार्यक्रमों के व्यापक प्रसार, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने, आत्मसमर्पण करने वाले कार्यकर्ताओं के पुनर्वास को सुगम बनाने और दूरदराज के क्षेत्रों में शासन और सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

श्री राय ने कहा कि कुल मिलाकर, केंद्र देश के पूर्व नक्सल प्रभावित जिलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके त्वरित विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

POK हिंसा पर OHCHR से हस्तक्षेप की मांग

Shrinagar, July 29, 2026, पाकिस्तान के कब्‍जे वाले जम्मू-कश्मीर में अशांति लगातार बढ़ रही है। मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) से हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है। यह आह्वान पाकिस्तानी सेना की अधिकृत क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बर गोलीबारी की खबरों के बाद किया गया है। इस गोलीबारी में 40 से अधिक नागरिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। ये हत्याएं 27 जुलाई को रावलकोट से मुजफ्फरबाद की ओर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के शांतिपूर्ण मार्च के फिर से शुरू होने के बाद हुईं।

इस बीच, पाकिस्तानी अधिकारियों ने पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले जम्मू-कश्मीर में 13 निजी स्कूलों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। इन स्कूलों के प्रबंधन, कर्मचारियों और छात्रों ने विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था। ये विरोध प्रदर्शन पाकिस्‍तान के दशकों पुराने नियंत्रण को सीधी चुनौती दे रहे हैं। पाकिस्तानी सेना की बार-बार दमनात्‍मक कार्रवाई में कई नागरिक मारे गए और कई अन्‍य घायल हुए हैं। क्षेत्र में सख्त नाकाबंदी और कर्फ्यू लागू है तथा संचार व्‍यवस्‍था पूरी तरह से ठप है।

राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में और संशोधन करेगा। प्रस्तावित विधेयक वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करेगा। इन अपराधों के लिए तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि विधेयक में संशोधन केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं है। उन्होंने कहा कि यह भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गृह राज्य मंत्री ने कहा कि 1971 में राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जन गण मन के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए थे। श्री राय ने कहा कि वंदे मातरम का जानबूझकर अपमान करना मौजूदा कानून के तहत दंडनीय होगा। राष्ट्र गीत वंदे मातरम की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।

गृह राज्य मंत्री ने दावा किया कि 1935 में जब जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष बने, तो उन्होंने वंदे मातरम को केवल दो छंदों तक सीमित कर दिया था। दूसरी ओर, 1928 में जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस अध्यक्ष थे, तो उन्होंने तिमीर बरन बनर्जी से इस गीत का एक पूर्ण और गरिमापूर्ण संगीत संस्करण तैयार करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने पंडित ओंकारनाथ ठाकुर से सुबह साढ़े 6 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर पूर्ण वंदे मातरम का गायन करने का अनुरोध किया था, जो पहले स्वतंत्रता दिवस का प्रतीक था।

श्री राय ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में कहा था कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक महत्व रखने वाले वंदे मातरम को जन गण मन के समान सम्मान दिया जाएगा। श्री राय ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध तुष्टीकरण की नीति को दर्शाता है जो राष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंचाता है।

इससे पहले, चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि पिछले 123 वर्षों से वंदे मातरम गीत का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस गीत से प्रेरित होकर देश के क्रांतिकारियों ने राष्ट्र के लिए बलिदान दिए। श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया कि 1923 में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष ने वंदे मातरम का अपमान किया था।

वाईएसआरसीपी के गोल्ला बाबूराव ने सदन के सभी सदस्यों से राष्ट्र गीत का सम्मान करने का अनुरोध किया। उन्होंने इस विधेयक को पेश करने के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री बाबूराव ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है जिसने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को देश के लिए प्राणों का बलिदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस गीत से उत्पन्न भावना ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस चर्चा में बीजेडी की सुलता देव, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, एआईएडीएमके के डॉ. एम. थंबीदुरई और अन्य सदस्य उपस्थित थे।

विधेयक पारित होने के बाद राज्यसभा में विशेष उल्लेख सत्र हुआ, जिसमें सदस्यों ने अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। इसके बाद राज्यसभा को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

« Newer PostsOlder Posts »