शाहजहांपुर — ( संजीव गुप्त द्वारा )
–12 करोड़ के फर्जी टेंडर घोटाले में कार्रवाई
कनिष्ठ प्रबन्धक दीपेश गुप्ता व ठेकेदार कपिल पांडेय के घर पहुंचे अधिकारी, दीपेश गुप्ता का आवास सीज
शाहजहांपुर, 10 जुलाई 2026, फिरोजाबाद स्थित आयुध उपकरण निर्माणी (ओईएफ) में करीब 12 करोड़ रुपये के फर्जी टेंडर घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, गाजियाबाद की टीम ने बुधवार सुबह शाहजहांपुर में दो स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। टीम ने आयुध वस्त्र निर्माणी (ओसीएफ) में तैनात कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता के सरकारी आवास और सदर बाजार थाना क्षेत्र के चिनौर निवासी कपिल कुमार पांडेय के घर पर दबिश दी। हालांकि, दोनों आरोपी आवास पर नहीं मिले। काफी देर तक तलाश के बाद भी उनके नहीं मिलने पर सीबीआई ने दीपेश गुप्ता का आवास सीज कर दिया। सीबीआई ने फिरोजाबाद के हजरतपुर स्थित आयुध उपकरण निर्माणी में वर्ष 2022 से 2025 के बीच हुए करीब 12 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। मामले में तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) अमित सिंह, तत्कालीन कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता समेत 10 लोगों को नामजद किया गया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर चहेती और डमी कंपनियों को करोड़ों रुपये के फर्जी टेंडर आवंटित किए गए।
!!सरकारी कंप्यूटरों से डाले गए टेंडर!!
सीबीआई जांच में सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कारखाने के सरकारी कंप्यूटर और इंटरनेट नेटवर्क का उपयोग किया गया। फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर डमी कंपनियों को पात्र दिखाकर टेंडर दिलाए गए। इसके एवज में अधिकारियों को लाखों रुपये की रिश्वत दी गई। साथ ही दक्षिण कोरिया के सियोल की हवाई यात्रा के टिकट और परिजनों के खातों में धनराशि ट्रांसफर किए जाने के भी आरोप हैं।
!!दीपेश पर 38.44 लाख रिश्वत लेने का आरोप!!
अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में ओसीएफ शाहजहांपुर में तैनात कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता पर टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी कर 38.44 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। वहीं तत्कालीन जेएलएम मनोज कुमार पर 21.41 लाख रुपये रिश्वत लेने तथा तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह और उनकी पत्नी नीलम सिंह के लिए दक्षिण कोरिया के सियोल की हवाई यात्रा के टिकट बुक कराने का आरोप लगाया गया है।
!!डमी कंपनी बनाकर हासिल किए गए टेंडर!!
जांच एजेंसी के मुताबिक मैसर्स एमएमएसएम एंटरप्राइजेज के नाम पर कागजों में संतोष कुमार को प्रोपराइटर दिखाया गया, जबकि कंपनी का वास्तविक संचालन कारखाने के अधिकारियों के इशारे पर किया जा रहा था। जेम पोर्टल पर सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किए गए। मामले में तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह, दीपेश गुप्ता, मनोज कुमार, ठेकेदार संतोष कुमार और मुख्य सूत्रधार कपिल कुमार पांडेय सहित कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई कर रही है।
