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सनातन धर्म और वैदिक संस्कृति के समन्वय से ही विश्वगुरु बनेगा भारत : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

June 6, 2026

सनातन धर्म और वैदिक संस्कृति के समन्वय से ही विश्वगुरु बनेगा भारत : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

– अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् के विकास के लिए रामभद्राचार्य ने दिए एक लाख रुपये
– सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति का सामंजस्य विषय पर विशिष्ट व्याख्यान
लखनऊ, 06 जून । पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति भारत की अक्षुण्ण धरोहर हैं, जिनमें मानव कल्याण, नैतिक मूल्यों और विश्वबंधुत्व की भावना निहित है। नई पीढ़ी को वैदिक परंपराओं और सनातन मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यही सांस्कृतिक सामंजस्य भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर करेगा। इस अवसर पर उन्हाेंने अखिल भारतीय संस्कृत परिषद के विकास के लिए एक लाख रुपये का योगदान देने की घोषणा की। वहीं लखनऊ उत्तर से विधायक नीरज बोरा ने पुस्तकालय एवं अन्य विकास कार्यों के लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा की।
अखिल भारतीय संस्कृत परिषद लखनऊ के तत्वावधान में शनिवार को परिषद सभागार में सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति का सामंजस्य विषय पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान एवं जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के अभिनंदन समारोह में देशभर के विद्वानों, शिक्षाविदों, संस्कृत प्रेमियों और शोधार्थियों ने सहभागिता की। ज्ञानपीठ, पद्मविभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत जगद्गुरु ने कहा कि प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति का संदेश भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानव सभ्यता का अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने भारतवर्ष और भक्ति की व्याख्या करते हुए कहा कि भारत के प्रति समर्पण ही सच्ची भक्ति और भारतीयता का आधार है। जगद्गुरु के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने भी अपने विचार रखे। राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा रचित भाष्यों की विशिष्टताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
परिषद के मंत्री प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने संस्था का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभूषण त्रिपाठी ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अशोक कुमार शतपथी ने किया। वैदिक मंगलाचरण एवं शांति पाठ कुलवंत और उनके साथियों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
समारोह में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय, डॉ. रविकिशोर त्रिवेदी, डॉ. युग्गीलाल दीक्षित, डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, आईएएस डॉ. नीरज शुक्ल, डॉ. आशुतोष द्विवेदी, प्रो. हरिशंकर मिश्र, प्रो. रामसुमेर यादव, प्रो. अनिल प्रताप गिरि सहित अनेक विद्वान, शोधार्थी और संस्कृत प्रेमी उपस्थित थे।

उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ना लगाए जांए स्मार्ट मीटर-बालेश्वर सिंह

हरिद्वार, 6 जून। प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालेश्वर सिंह ने कहा कि स्मार्ट मीटर जनता पर थोपा नहीं जाना चाहिए। ऊर्जा निगम पुलिस की सहायता लेकर स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी कर रहा है। जिन उपभोक्ताओं के मीटर ठीक काम कर रहे हैं। उन्हें बदलने का कोई औचित्य नहीं है। विद्युत विभाग को उपभोक्ताओं की सहमति से ही स्मार्ट मीटर लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाया गया तो कांग्रेस विरोध करेगी। स्मार्ट मीटर के बिलों को लेकर लेकर भी मतभेद बने हुए हैं। बालेश्वर सिंह ने कहा कि अतिक्रमण के नाम पर व्यापारियों का रोजगार प्रभावित नहीं होना चाहिए व्यापारियों की मांग को भी सुनना चाहिए। व्यापारियों का उत्पीड़न किसी भी रूप में सहन नहीं किया जाएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सैनी एवं सोम त्यागी ने कहा कि शहर भर में पुराने मीटर लगे हुए हैं और सही चल रहे हैं। इसके बावजूद स्मार्ट मीटर लगाने की जोर जबरदस्ती क्यों की जा रही है। जबकि लोग लगातार स्मार्ट मीटर का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के हितों में फैसले लेने चाहिए। मनोज सैनी ने अवैध अतिक्रमण ही हटाना चाहिए। रसूखदार लोगों के अतिक्रमण पर भी प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। लोगों का रोजगार उजाड़ने से पहले बसाने की बात होनी चाहिए। अतिक्रमण के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न ना किया जाए। वरना कांग्रेस जनता के संघर्ष से पीछे नहीं हटेगी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजय सैनी ने कहा कि वर्तमान मास्टर प्लान जनता के हितों को देखते हुए नहीं बनाया गया है। लोगों के रोजगार को देखकर योजनाएं लागू होनी चाहिए। मास्टर प्लान में बड़े निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई है जो कि विकास में प्रमुख बाधा है। आवास निर्माण, होटल, गेस्ट हाउस, बड़ी गतिविधियां मास्टर प्लान से प्रभावित होंगी। संजय सैनी ने कहा कि भू उपयोग परिवर्तन नियमों के चलते व्यापार निर्माण श्रमिक कार्य प्रभावित होंगे। आवास विभाग द्वारा भू उपयोग शुल्क में 567 प्रतिशत की बढ़ोतरी का शासनादेश तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए। जनता के हितों में फैसला नहीं लिए जा रहे हैं। कैलाश प्रधान एवं सतीश दुबे ने कहा कि महंगाई से जनता परेशान है। सरकार महंगाई को नियंत्रित नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि वीआईपी मूवमेंट से लोगों के कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए। जनता के काम ना रुके इसको लेकर अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। प्रेस वार्ता के दौरान डा.मेहरबान, सुनील चौहान, अशोक धींगान, राजेंद्र, सुनील चौहान आदि मौजूद रहे।

रील बनाने का जुनून बना जानलेवा, राप्ती नदी में डूबे दो युवक; घंटों चले रेस्क्यू के बाद मिले शव

Posted on 06/06/2026
Time 18:00 P.M
Gorakhpur
Santosh Kumar Singh

​गोरखपुर : 6 जून 2026 ( उप्र समाचार सेवा) पीपीगंज थाना क्षेत्र के करतहरी घाट पर शनिवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ। राप्ती नदी में रील (Reel) बनाने के चक्कर में नहाने गए दो युवकों की डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है।

मिली जानकारी के अनुसार, जगदीशपुर गाही गांव के सात युवक शनिवार को राप्ती नदी के करतहरी घाट पर नहाने और वीडियो बनाने गए थे। सभी युवक नदी में मस्ती करते हुए मोबाइल से रील बना रहे थे। इसी दौरान, दो युवक नदी के उस हिस्से में चले गए जहाँ पानी गहरा था और बहाव भी काफी तेज था। अचानक संतुलन बिगड़ने से वे नदी में डूबने लगे। उनके साथियों ने बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन नदी की प्रबल धाराओं के आगे वे बेबस नजर आए।

घटना की सूचना पाकर पीपीगंज पुलिस और प्रशासन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों की मदद से खोजबीन शुरू की गई, जिसके बाद पहले युवक शिवम कुमार का शव बरामद हुआ। दूसरे युवक, 19 वर्षीय गोलू कुमार की तलाश के लिए पीएसी की 26वीं वाहिनी के प्रशिक्षित गोताखोरों को बुलाया गया। कई घंटों के गहन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दूसरे युवक का शव भी बरामद कर लिया गया।

दोनों युवकों के शव मिलने की खबर सुनते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और हर किसी की आंखें नम थीं। सदर तहसील प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्यों की निगरानी की। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। प्रारंभिक जांच में नदी की गहराई और तेज बहाव को हादसे का मुख्य कारण माना गया है। प्रशासन ने लोगों, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज के लिए कभी भी नदी या जलाशय के पास जोखिम न उठाएं। सुरक्षित रहें और सुरक्षा नियमों का पालन करें।

गोरखपुर में आरक्षी भर्ती परीक्षा की तैयारियां मुकम्मल, 44 केंद्रों पर 1.16 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

Posted on 06/06/2026
Time 07:20 A.M
Gorakhpur
Santosh Kumar Singh

​गोरखपुर : 6 जून 2026 ( उप्र समाचार सेवा) उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित आरक्षी भर्ती परीक्षा को लेकर गोरखपुर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था का अभेद्य घेरा तैयार कर लिया है। आगामी 8, 9 और 10 जून 2026 को आयोजित होने वाली इस तीन दिवसीय परीक्षा में कुल 1,16,784 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे।
​छह पालियों में होगी परीक्षा
​परीक्षा की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए प्रशासन ने बताया कि परीक्षा तीन दिनों तक दो-दो पालियों में संपन्न होगी। इस प्रकार कुल छह पालियों में आयोजित इस परीक्षा में प्रत्येक पाली में 19,464 अभ्यर्थी शामिल होंगे।
​प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा तंत्र
​परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है:
​नोडल अधिकारी: एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार और एसपी सिटी निमिष पाटिल संयुक्त रूप से परीक्षा की कमान संभालेंगे।
​निगरानी: एसपी पीटीएस अनिल कुमार को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है, जो सीधे तौर पर पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करेंगे।
​मजिस्ट्रेट तैनाती: जिले को 44 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। हर सेक्टर में एक सेक्टर मजिस्ट्रेट और प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर एक स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
​केंद्रों पर कड़ी चौकसी
​एनेक्सी भवन सभागार में सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी और डीआईओएस अजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में परीक्षा संबंधी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए:
​सघन तलाशी: अभ्यर्थियों को कड़ी जांच के बाद ही परीक्षा हॉल में प्रवेश मिलेगा।
​डिजिटल निगरानी: परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है।
​जनसुविधाएं: सुगम आवागमन के लिए रूट डायवर्जन और पार्किंग के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। साथ ही, केंद्रों पर परीक्षार्थियों के लिए पेयजल और मूलभूत सुविधाओं को अनिवार्य कर दिया गया है।
​प्रशासन की चेतावनी: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
​जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नकल विहीन परीक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही या अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि अभ्यर्थी बिना किसी व्यवधान के अपनी परीक्षा दे सकें।

घाघरा नदी पर हो रहे कार्यों को लेकर कटान पीड़ितों ने उठाए सवाल

बाढ़ आई तो नही बचेगा गांव। नदी से सीसी टीवी हुई गायब,अधिकारी मौन।
रिपोर्ट – संजय कुमार तिवारी
स्थान – बलिया यूपी
डेट – 06/06/2026

Ballia News UP Samachar Sewa

बलिया, भले ही यूपी सरकार बड़े बड़े दावे कर रही हों कि नदियों के किनारे बसे गांवों को बचाने के लिए सरकार कट्टीबद्ध है और करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही हों लेकिन जमीनी हकीकत तो यह है कि आपदा में भी अवसर तलासी जा रही है कि कब बाढ़ आए और कमाई का एक बड़ा जरीया बनें और पानी के पैसा पानी में चला जाए।जी हां आपने सही सुना है कि जब बाढ़ आने वाली होती है तो बाढ़ विभाग नदियों पर काम शुरू कर देती है और जब बाढ़ आती है तो कराए गए कार्यों को पानी में अपने साथ ही बहा ले जाती है जिसका उदाहरण बलिया के बांसडीह तहसील क्षेत्र के चांदपुर गांव में घाघरा नदी पर कराए गए कार्यों को देखने को मिला।जहां चांदपुर में घाघरा नदी पर बाढ़ विभाग के द्वारा ठोकरी का निर्माण कार्य कार्य जा रहा है। जहां घाघरा नदी पर निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखने को मिली।ग्रामीणों के द्वारा बाढ़ विभाग में कार्य करा रहे ठेकेदारों के द्वारा निर्माण कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया है ग्रामीणों का आरोप है कि जहां नदी में पानी बढ़ने के बाद कही कही कटान हो रहा है जो प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर नदी में डाल दिया जा रहा है जो पूरी तरह से मिट्टी गल जा रही है और बोरियां ऊपर दिखाई देने लग रही है। जो ठोकरी का कार्य चल रहा है वह भी मानक के अनुरूप कार्य नही हो रहा है अगर इस बाद बाढ़ आई तो ठोकरी रुकने वाली नही है और वह भी नदी में बह जायेगी।क्योंकि बाढ़ विभाग के द्वारा पिछले साल भी नदी पर ठोकरी का निर्माण कार्य हुआ था वह भी पिछले साल नदी में कटान में बह गई जो आपके सामने घाघरा नदी में पांच ठोकरी दिखाई देने लगा है उसी ठोकरी के चलते नदी अब गांवों की तरफ बढ़ रही है अगर इस बार बाढ़ आई तो गांव को बचाना मुश्किल हो जायेगा। हालांकि यह बाढ़ विभाग के द्वारा कहा जा रहा है कि घाघरा नदी पर सीसीटीवी लगाई गई जो बाढ़ विभाग के द्वारा जो कार्य कराया जा रहा है उसकी मानरिटिंग बकायदे लखनऊ से की जा रही है लेकिन चांदपुर में नदी पर कही सीसी टीवी दिखाई नही दे रहा है वही ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बाढ़ विभाग के कर्मचारियों के द्वारा सीसी टीवी को हटा दिया गया है और यहां पर यह लोहे की पाइप रखी गई है जिसमे सीसी टीवी लगाने की बात हो रही है लेकिन नदी पर कही भी सीसी टीवी नही दिखाई दे रहा है।

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