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सेंट एंड्रयूज कॉलेज में प्राचार्य पद को लेकर विवाद गहराया

July 19, 2026

सेंट एंड्रयूज कॉलेज में प्राचार्य पद को लेकर विवाद गहराया

Posted on 19/07/2026
Time 17:50 P.M
Santosh Kumar Singh
Gorakhpur

ताला तोड़ने और फर्जी नियुक्ति के आरोपों से मचा हड़कंप

​गोरखपुर ( उप्र समाचार सेवा ) : शहर के प्रतिष्ठित सेंट एंड्रयूज कॉलेज में प्राचार्य पद को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। वर्तमान प्राचार्य प्रो. एस.डी. राजकुमार ने कॉलेज की एक शिक्षिका पर कॉलेज कार्यालय का ताला तोड़ने, बाहरी तत्वों को बुलाने और फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर अवैध रूप से प्राचार्य पद पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है।

​प्राचार्य प्रो. एस.डी. राजकुमार के अनुसार, 17 जुलाई की रात करीब 8:00 बजे उन्हें एक अज्ञात ईमेल के माध्यम से पद से हटाए जाने और शिक्षिका (रैना मैडम) को नया प्राचार्य नियुक्त किए जाने की सूचना मिली। प्रो. राजकुमार ने बताया कि इस संदिग्ध मेल की कानूनी स्थिति जानने के लिए वे प्रयागराज रवाना हुए और अपनी अनुपस्थिति में नियमानुसार कॉलेज में अवकाश घोषित कर दिया।
​आरोप है कि प्रो. राजकुमार की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए शिक्षिका ने कुछ बाहरी लोगों के साथ कॉलेज परिसर में प्रवेश किया और कार्यालय का ताला तोड़कर उस पर अपना कब्जा जमा लिया। सूचना मिलने पर पुलिस (112) मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक ताला तोड़ा जा चुका था। प्राचार्य का आरोप है कि शिक्षिका ने पुलिस के सामने ही उन्हें धमकाया और कार्यालय के ताले को न छूने की चेतावनी दी।

​प्रो. राजकुमार ने कॉलेज के नियमों (बायलाज) का हवाला देते हुए इस नियुक्ति को पूरी तरह अवैध बताया है। उन्होंने कहा:
​प्रक्रिया का उल्लंघन: प्राचार्य की नियुक्ति के लिए स्पेशल मीटिंग (10 दिन का नोटिस) या जनरल मीटिंग (21 दिन का नोटिस) अनिवार्य है, जो नहीं बुलाई गई।
​जिस नियुक्ति पत्र का हवाला दिया जा रहा है, उस पर तीन सदस्यों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, इनमें से दो सदस्यों ने बाद में अपने हस्ताक्षर वापस लेने का आधिकारिक पत्र सौंप दिया है, जिससे उस पत्र की वैधता समाप्त हो गई है।
​न्यायालय का निर्देश: प्रो. राजकुमार ने दावा किया कि कुलपति ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जब तक उच्च न्यायालय (रिट संख्या 4125/2026) का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक प्रबंधन के संबंध में कोई नया निर्णय नहीं लिया जा सकता।

​घटना के बाद प्रो. राजकुमार ने कैंट थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की। वहीं दूसरी ओर, शिक्षिका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को प्राचार्या घोषित कर दिया है और प्रो. राजकुमार के अवकाश पर जाने को ‘भागना’ करार दिया है।
​फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर प्रो. राजकुमार ने न्यायालय में ‘रिकॉल याचिका’ (Recall Application) दायर की है, जिसमें शिक्षिका पर तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया गया है। इस विवाद के कारण कॉलेज का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है और मामला अब प्रशासन व न्यायालय के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।