Editorial 07.08.2026 Time 09.37 AM, by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News , UP News, UP Samachar Sewa
सर्वेश कुमार सिंह
गुरुवार को युवाओं से संवाद और युवा नीति विषयक सार्थक पहल हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने मुंबई में 2000 जेन जी और जेन अल्फा से संवाद किया। संवाद का आयोजन आईआईएम यूएस कैंपस की ओर से किया गया। इसमें 11 से 19 वर्ष के छात्रों को देश भर से आमंत्रित किया गया। इस पहल को करने का श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ही है, क्योंकि उनकी पहल पर ही यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।
संघ के सरसंघचालक डॉ भागवत ने खुलकर अपने विचार रखे और प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने कहा आज की युवा पीढ़ी हमारी पीढ़ी से अधिक ईमानदार और देशभक्त है। आंदोलन और प्रदर्शन संविधानिक अधिकार है। उन्होंने आरक्षण पर भी अपना मत प्रकट किया। डा मोहन भागवत ने कहा आरक्षण असमानता दूर करने के लिए लागू किया गया था। अत: जब तक समाज में आर्थिक, सामाजिक असमानता है तब तक आरक्षण जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आरक्षण से सक्षम हो गए हैं उन्हें स्वेच्छा से आरक्षण का लाभ लेना छोड़ना चाहिए।
दूसरी पहल उत्तर प्रदेश से हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा नीति बनाने और राज्य युवा आयोग के गठन की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों की बैठक बुलाकर निर्देश दिए कि युवा नीति बनाने के लिए विद्यार्थियों, युवा पेशेवरों, खिलाड़ियों, उद्यमियों से वार्ता की जाय। उन्होंने युवा आयोग बनाकर नीति निर्धारण की रूपरेखा प्रस्तुत करने की जानकारी दी। अब उम्मीद है कि शीघ्र ही उत्तर प्रदेश में युवा आयोग का गठन होगा। इसके बाद युवाओं के हितों के लिए युवा नीति बनाई जाएगी।
युवाओं से जुड़ी ये दोनों पहल सामयिक हैं। आज युवा उद्वेलित है। इसके कई कारण है। पहला कारण है सूचना का तीव्र प्रवाह। दूसरा है ऊंची उड़ान के सपने देखना। तीसरा तत्काल परिणाम की अभिलाषा। हालांकि ये सभी सार्थक और अपेक्षित हैं, किंतु इन्हें संतुलित होना चाहिए। हाल का नीट परीक्षा से जुड़ा आंदोलन और रांची का छात्र आंदोलन इन्हीं कारकों के परिणाम है। इन पर गंभीरता और ईमानदारी से चिंतन, मनन और निर्णय की आवश्यकता है। ये काम केंद्र सरकार को यथाशीघ्र आरम्भ करना चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार किन्तु, परंतु में उलझी है। वह आंदोलनकारियों के सहयोगियों और मददगारों की खोज में लगी है। जबकि तत्काल कारण के मूल में जाने की जरूरत है। यह कार्य आरएसएस और यूपी सरकार ने शुरू कर दिया है। इसके लिए डा मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि पूर्ण पहल सराहनीय है। युवाओं को सही दिशा देना, उनके भविष्य के बारे में सोचना राज्य की जिम्मेदारी है।
आज जो सूचना युवा ग्रहण कर रहे हैं उसका स्रोत डिजिटल है। ये स्रोत अनियंत्रित और अप्रमाणित सूचनाओं के प्रवाह का समुद्र है। इसपर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। सरकार, समाज, संगठनों को ऐसे प्रयास करने होंगे कि युवाओं को प्रमाणित और सत्य सूचना मिले। ताकि वे उसी पर धारणा बनाएं। इसके लिए युवाओं में समाचार पत्र, पत्रिकाएं, पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति जगाने के लिए कार्य योजना बनानी होगी।
ऊंची उड़ान के सपने देखना हमेशा अच्छा होता है। इसलिए इसे सही दिशा देने की सार्थक रणनीति बनानी होगी। सपना कैसे पूरा हो इसके लिए उन्हें दक्ष बनाना होगा। तीसरा तत्काल परिणाम की लालसा को नियंत्रित करने के लिए युवाओं को बताना पड़ेगा कि कोई भी लक्ष्य मार्ग पर चलकर ही प्राप्त किया जा सकता है। तेज दौड़ या छलांग लगाकर नहीं।
देश और समाज ने इन विषयों पर समय रहते चिंतन कर लिया जाए और युवाओं को सदी दिशा दे दी तो ये ऊर्जा राष्ट्र निर्माण करेगी। भारत का चतुर्दिक विकास होगा। यदि विलम्ब या चूक हुई तो स्थिति प्रतिकूल भी हो सकती है।
सुकून की बात यह है कि विश्व के सबसे बड़े संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये पहल कर दी है।

