Editorial Posted on 04.08.2026 Wednesday, Time 09.23 AM by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News
उत्तर प्रदेश विधान सभा में मंगलवार को विपक्ष के व्यवहार और आचरण से लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं को भारी क्षति हुई है। समाजवादी पार्टी के विधायकों ने मुख्यमंत्री के परंपरागत भाषण, जो बजट अथवा अनुपूरक बजट प्रस्तुत करने के बाद होता है, उसमें व्यवधान किया। इतना ही नहीं सपा सदस्य सचिन यादव ने मुख्यमंत्री योगी की तस्वीर सदन में लहराई जोकि संसदीय परंपरा के प्रतिकूल तो है ही, सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला व्यवहार भी है। ये घटना अत्यंत निंदनीय है। इसने विपक्ष खासकर सपा के चरित्र को उजागर किया है। उनका आचरण ये भी दर्शाता है कि सपा का लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं में विश्वास नहीं है। विपक्ष के इस आचरण पर अध्यक्ष सतीश महाना ने कार्यवाही स्थगित कर दी।
लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों की विधानसभाओं की ये स्थापित परंपरा रही है कि नेता सदन और नेता विपक्ष के भाषण बगैर किसी व्यवधान के सम्पन्न होते हैं। दोनों पक्ष उन्हें सुनते हैं और फिर उत्तर देते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में विपक्ष के गैर मर्यादित आचरण से ये परंपरा टूट रही है। उन्हें या तो संसदीय अनुशासन का ज्ञान नहीं है अथवा वे जानबूझकर अनुशासन हीनता कर रहे हैं। इस अनुशासनहीनता से समाज में विधायकों और सदन की छवि धूमिल होती है। क्योंकि आजकल सदन की कारवाही की लाइव स्ट्रीमिंग होती है।
दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के पास मुख्यमंत्री के भाषण का उत्तर ही नहीं होता है। इसलिए वे शोर शराबे, हंगामे का सहारा लेते हैं। विपक्ष बजट या अनुपूरक बजट पर चर्चा ही नहीं करना चाहता। कल भी सपा ने बजट पर कोई प्रतिक्रिया या विरोध नहीं दर्शाया। बल्कि राम मंदिर के चढ़ावा प्रकरण पर हंगामा किया।
सपा विधायकों के इस आचरण से सदन की गरिमा को ठेस पहुंच ही रही है, उसकी स्वयं की छवि भी धूमिल हो रही है।
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