
लखनऊ, 21 अगस्त। उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने विधानसभा एवं विधानसभा सचिवालय से संबंधित विषयों पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की जा रही अनर्गल, असत्य एवं निराधार सामग्री को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने सूचना निदेशक, उत्तर प्रदेश को पत्र भेजकर ऐसी सामग्री पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सचिव द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर विधानसभा एवं विधानसभा सचिवालय के संबंध में अनर्गल, असत्य एवं निराधार सामग्री पोस्ट की जा रही है। साथ ही विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा विधानसभा अध्यक्ष के संदर्भ में भी आपत्तिजनक, अवांछनीय एवं निराधार टिप्पणियां किए जाने की जानकारी संज्ञान में आई है।
पत्र में कहा गया है कि विधानसभा एक संवैधानिक संस्था है। इसलिए विधानसभा अथवा उसके अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संवैधानिक पदाधिकारियों के संबंध में निराधार एवं असत्य टिप्पणी किया जाना सर्वथा अनुचित एवं अवांछनीय है।
प्रमुख सचिव ने सूचना निदेशक से कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संबंधित संचालकों एवं अन्य संबंधितों को इस आशय के निर्देश भेजे जाएं कि यदि विधानसभा, विधानसभा सचिवालय, उसके अधिकारियों-कर्मचारियों अथवा विधानसभा अध्यक्ष के विषय में कोई आपत्तिजनक, असत्य एवं अनर्गल सामग्री पोस्ट की जाती है तो उसके संबंध में सुसंगत नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि तथ्यों के प्रमाणीकरण के बिना किसी भी पोस्ट, सामग्री अथवा टिप्पणी को अधिकृत नहीं माना जाएगा। पत्र की प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव, सूचना एवं गृह विभाग तथा पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजी गई है।
उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर गलत एवं भ्रामक सामग्री के प्रसार को लेकर हाल के दिनों में कई मामले सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक डिजिटल व्यवस्था में भी सदन, सदस्यों और विधायी कार्यों से संबंधित प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

