मैनपुरी। शहर स्थित कबीर आश्रम में रविवार को महंत अमर साहेब की अध्यक्षता में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संत कबीर साहेब की वाणी का श्रवण किया तथा भजनों के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया।
अपने प्रवचन में महंत अमर साहेब ने कहा कि शहीदों के नाम डिग्रियां नहीं होतीं, वीरांगनाओं के हाथ में चूड़ियाँ नहीं होतीं। हमें उस रजिस्टर में हाजिरी लगानी है, क्योंकि मौत के दफ्तर में छुट्टियां नहीं होतीं।
उन्होंने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। साथ ही उन्होंने सत्य, सेवा, सदाचार और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि संतों के बताए मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन सफल और सार्थक बन सकता है। महंत अमर साहेब ने संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा भी सुनाया “कबीर कमाई अपनी, निष्फल कबहूँ न जाय। बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय॥” उन्होंने इसका अर्थ बताते हुए कहा कि मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल उसे अवश्य प्राप्त होता है। यदि जीवन में बुरे कर्म, छल, कपट और अहंकार का बीज बोया जाएगा तो सुख और शांति की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अच्छे विचार, ईमानदारी, परिश्रम और सेवा भाव ही जीवन में सफलता, सम्मान और आत्मिक सुख प्रदान करते हैं। सत्संग के दौरान कबीर साहेब के भजनों एवं अमृतवाणी का गायन किया गया, जिससे पूरा आश्रम भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। इस अवसर पर आत्माराम साहेब, प्रखर दास, सियाराम दास, राजेन्द्र दास, ग्रीस दास, बेचेलाल शास्त्री, चेतन दास, कर्नल सुरेश चन्द्र यादव चंद्रपाल शाक्य, प्रकाश दास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
