नेपाल सरकार के अनुसार भयानक बाढ़ सैलाव की घटित दुर्घटना से नेपाल तिब्बत में मरने वालों में विदेशी-देशी नागरिकों की संख्या बढ़कर 633 हो गई है, जबकि 2500 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता में दर्ज हैं, सात शव नदी में बहकर यूपी में पहुंचे हैं। नेपाल और तिब्बत में इस आपदा में 320 भारतीय भी शामिल हैं।महाराष्ट्र के एक सैकड़ा तीर्थयात्रियों के नेपाल से सीतामणी पहुंचने पर बिहार सरकार ने सकुशल उनको ट्रेन से घर रवाना करा दिया है।
नेपाल के वित्त मंत्री ने बताया कि 3 करोड़ की आबादी वाले इस हिमालयी देश को बुधवार की बाढ़ से हुई तबाही के बाद फिर से सब कुछ ठीक करने के लिए लगभग 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत होगी। ग्लेशियर टूटने से चट्टान, बर्फ, कीचड़ और मलबे का एक विशाल सैलाब बुधवार को पहाड़ी नदियों के रास्ते तेजी से आगे बढ़ा। इसने अपने रास्ते में आने वाली इमारतों, पुलों और बिजलीघरों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे नेपाल में कम से कम 626 और चीन के तिब्बत में 7 लोगों की मौत हो गई।
इस बीच नेपाल के अधिकारियों ने दक्षिणी चितवन जिले में भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान मिले 229 अज्ञात और बिना दावे वाले शवों को अंतिम संस्कार करने दफनाने का फैसला किया। बाढ़ का पानी फिलहाल में उतर चुका है, लेकिन लोगों के घरों की दीवारों, गलियों सड़कों में फंसा मलबा , लोगों के घर कीचड़ से ढ़के हुए फोटो/वीडियो में साफ दिखाई पड़ रहे हैं। त्रिशूली नदी पर स्थापित एक दर्जन से अधिक 450 मेगावाट के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का संचालन बाधित हुआ है, नेपाल में टोटल बिजली उत्पादन का एक चौथाई भाग बाढ़ सैलाव से प्रभावित होने की बात कही गई है।
