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दागी होती वर्दी

July 13, 2026

दागी होती वर्दी

Editorial

Editorial 13.07.2026 by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

खाकी की जिम्मेदारी सुरक्षा, संरक्षण और जनसहयोग की है। लेकिन हाल के दिनों में खाकी को दागी करने वाले तत्व इसमें घुस गए हैं। इससे इसकी पहचान भय पैदा करने वाले समूह की बन रही है। हालांकि अनेक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करने वाले भी पुलिसकर्मी हैं। लेकिन कुछ लोग अपने कारनामों से इस बल को बदनाम कर रहे हैं। ताजा उदाहरण आगरा और झांसी के हैं, जहां वर्दी दागी हो गई। झांसी जहां पुलिस वर्दी पहने जवान लुटेरे बन गए, वहीं आगरा में रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने अनुशासनहीनता और अपराधी प्रवृति का परिचय देकर अपने बल को शर्मसार कर दिया।

गुरुवार को झांसी में 6 लोगों ने सूरत के व्यवसाई जितेंद्र पटेल के मुंशी किशन पांचाल को लूट लिया। उनसे 24 लाख 90 हजार रुपए लूटे गए। किशन पांचाल व्यवसाई की सूखे मेवे की बिक्री के पैसों की उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में वसूली करते हैं। मामले की जांच में सामने आया कि लूटपाट करने वाले जालौन पुलिस लाइन में तैनात 3 सिपाही हैं। तीनों को हिरासत में लिया गया और एसपी जालौन ने तत्काल निलंबित कर दिया। इनके तीन अन्य साथियों की तलाश जारी है।

उधर रविवार को सुबह आगरा कैंट स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने स्टेशन पर उप स्टेशन अधीक्षक को पीट दिया। उन्हें जमीन पर घसीटते हुए आरपीएफ पोस्ट में ले गए। स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर ने एक महिला यात्री की सुविधा के लिए अमृतसर एक्सप्रेस को स्टार्ट होने के बाद रुकवा दिया था। इससे नाराज होकर आरपीएफ जवानों ने महिला यात्री पर पहले चैन पुलिंग का आरोप लगाया और 1000 रुपए वसूल लिए। फिर स्टेशन उप अधीक्षक से अभद्रता की। उनके ये कहने पर कि ट्रेन उन्होंने यात्री की मदद के लिए रुकवाई थी। इससे नाराज सिपाहियों ने पहले स्टेशन पर ही नरेंद्र सिंह चाहर को पिता फिर घसीटते हुए अपनी पोस्ट में ले गए। वहां भी उनको पिता गया। इस पूरी घटना का यात्रियों ने वीडियो बना लिया और वायरल कर दिया। इसके बाद तत्काल कारवाई हुई और दो सहायक उप निरीक्षक और दो कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ जीआरपी थाने ने एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है। इन दोनों घटनाओं से पुलिस और आरपीएफ की बहुत बदनामी हुई है। लोगों में पुलिस बल के प्रति विश्वास कम हो रहा है। बल्कि भय बढ़ रहा है। आम आदमी यह सोचने पर मजबूर है कि खाकी पहने लोग उनकी सुरक्षा के लिए हैं या उत्पीड़न के लिए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को जवानों की अनुशासनतीनता की प्रवृत्ति और आपराधिक मानसिकता पर अंकुश लगाने के लिए उपाय खोजने होंगे। इन दोनों मामलों में कड़ी करवाई भी होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।