Editorial 10.08.2026
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कार्यप्रणाली को भेदकर फर्जी प्रश्न लगाना न केवल विस्मयकारी है, बल्कि चिंताजनक भी है। प्रदेश विधान मंडल का ये उच्च सदन है। यहां विधान सभा से प्रेरित होकर विधेयक और प्रस्ताव स्वीकृति के लिए आते हैं। इसलिए इसका महत्व भी अधिक है। इस सदन का गरिमापूर्ण अतीत रहा है। लेकिन हाल ही में प्रकाश में आया प्रकरण अत्यंत गंभीर है। किसी व्यक्ति ने फर्जीवाड़ा करके सदस्य मुकुल यादव के नाम से प्रश्न लगा दिया। ये प्रश्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़ा था। इसमें विभाग के अधिकारियों की शिकायत की गई थी। प्रश्न पर एमएलसी के फर्जी हस्ताक्षर थे। इस प्रश्न पर विधान परिषद सचिवालय ने विभाग से आख्या भी मांग ली। विभाग को संदेह हुआ तो अधिकारियों ने एमएलसी मुकुल यादव से संपर्क किया। उन्होंने कहा उनके द्वारा ऐसा कोई प्रश्न नहीं लगाया गया है। इस पर विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं।
आजकल सदन में सदस्यों के लेटर हेड के दुरुपयोग और फर्जी हस्ताक्षर के मामले सामने आ रहे हैं। इस तरह के प्रकरण विधान मंडल की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। इन पर रोक लगनी चाहिए।
विधान सभा और विधान परिषद की समस्त कार्यवाही और विभागीय कार्य डिजिटल किए जा रहे हैं। ऐसे में प्रणाली को सुरक्षित और त्रुटिरहित करना अनिवार्य है। सदनों में पैसे लेकर या प्रलोभनवश सवाल लगाने के प्रकरण सामने आते रहे हैं। लोकसभा में भी पैसा लेकर सवाल पूछने का मामला सामने आया था। तब भी सांसदों की बहुत बदनामी हुई थी।
लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों के विधान मंडल लोकतंत्र के स्तंभ हैं। इनकी कार्यप्रणाली में सुचिता और निष्पक्षता आवश्यक है। ये बनी रहेगी तभी लोकतंत सुरक्षित रहेगा। इसलिए सदनों के अध्यक्षों की जिम्मेदारी है कि वे जनता का विश्वास बनाए रखने के कड़े नियम और कानून बनाएं।
