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अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे ग्राहक

August 21, 2026

अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे ग्राहक

त्योहारी सीजन में मिलावट का खेल जारी, कार्रवाई के दावों पर फिर उठे सवाल

प्रशासन अपना पक्ष बताने से कतरा रहा,आखिर कब होगी प्रभावी कार्रवाई

(एपी सिंह उप्र समाचार सेवा)
लखीमपुर-खीरी। त्योहारी सीजन शुरू होते ही खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। रोजमर्रा से लेकर त्योहारों में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन जांच और कार्रवाई के दावों के बावजूद बाजार में मिलावट का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है।हाल ही में मिलावटखोरी को लेकर खबर प्रकाशित किए जाने के बाद संबंधित विभागीय अधिकारियों से लगातार सवाल पूछे गए किन्तु वह कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है इससे मिलावट वाले सामान की बिक्री लगातार जारी है जिससे खाद्य सुरक्षा अधिकारी की लापरवाही ग्राहकों को भारी पड़ रहीं है । इससे यह सवाल और गंभीर हो गया है कि यदि विभागीय कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी है तो फिर सवालों का जवाब देने से परहेज क्यों किया जा रहा है।मामले में जब खाद्य सुरक्षा आयुक्त ब्रजेन्द्र शर्मा से विभाग की कार्रवाई, लिए गए नमूनों, उनकी जांच रिपोर्ट और दोषी पाए गए कारोबारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन आरोप है कि विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब देने के बजाय दूरी बनाई जा रही है।सवाल यह भी है कि यदि मिलावट के खिलाफ लगातार अभियान चल रहे हैं तो त्योहारी सीजन में शिकायतें सामने क्यों आ रही हैं।क्या केवल नमूने लेने और कार्रवाई के दावे पर्याप्त हैं या उनकी रिपोर्ट और कार्रवाई का पूरा विवरण भी सार्वजनिक होना चाहिए।स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान दूध, मिठाई, खोया, पनीर, तेल, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उपभोक्ताओं की मांग है कि संदिग्ध प्रतिष्ठानों की नियमित जांच हो, नमूनों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और मिलावट साबित होने पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए।अब सबसे बड़ा सवाल यही है मिलावट के खिलाफ आखिर कब होगी ऐसी प्रभावी कार्रवाई, जिससे दावों के बजाय जमीन पर भी उसका असर दिखाई दे।त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत के बीच इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है, क्योंकि मामला सिर्फ विभागीय कार्रवाई का नहीं, बल्कि सीधे आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और उनके भरोसे से जुड़ा है।